NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
बजट 2019: मोदी अपने पीछे देश को भयानक कर्ज़ में छोड़ कर जा रहे हैं
केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त ऋण लगभग 74,000 रुपये प्रति व्यक्ति है जबकि बैंकों के लिहाज से व्यक्तिगत ऋण 15,486 रुपये प्रति व्यक्ति है।
सुबोध वर्मा
31 Jan 2019
Translated by महेश कुमार
 बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपना अंतिम बजट पेश करने के लिए तैयार हो रही है। इससे पहले राजकोषीय गणना के एक प्रमुख हिस्से  यानी कर्ज पर एक नज़र डाल रहे है। केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त ऋण अब 97 लाख करोड़ हो गया है जो मार्च 2014 के मुकाबले 59 प्रतिशत ज्यादा है। यानी  साल 2014  में भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के बाद अब तक का हाल यह है।  इस ऋण की भयानकता का अंदाज़ा इसे पूरी आबादी में वितरित करने की कल्पना के जरिये किया जा सकता है (नीचे चार्ट देखें)। यह 2014-15 के 54,229 रुपये प्रति व्यक्ति की तुलना में 2017-18 के लिए 73,966 रुपये प्रति व्यक्ति बैठता है।

budget_0.png


 
इस संयुक्त ऋण को - आधिकारिक तौर पर "सामान्य सरकारी ऋण" कहा जाता है – जो 2014 में 68.7 लाख करोड़ और 2011 में 47.6 लाख करोड़ रुपये था। ये आंकडे वित्त मंत्रालय द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक प्रकाशन 2017-18 में सरकारी ऋण की स्थिति पत्र के अनुसार है।97 लाख करोड़ रुपये के संयुक्त ऋण में से केंद्र सरकार का ऋण 68.8 लाख करोड़ रूपए है या लगभग 71 प्रतिशत। मार्च 2014 के बाद से पिछले साढ़े चार वर्षों में इसमें 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


सामान्य सरकारी ऋण, जैसा कि सरकार द्वारा परिभाषित किया गया है, इसमें उसी ऋण को रखा जाता है जिसे केवल सार्वजनिक ऋण मद के रूप में जाना जाता है, जैसेकि प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिलों और अन्य बॉन्ड्स और बाहरी ऋणों से बाजार ऋण जैसे आंतरिक ऋण शामिल हैं। इन दोनों के अलावा, कुछ अन्य उधारी भी हैं जो राष्ट्रीय लघु बचत कोष, भविष्य निधि इत्यादि से प्राप्त की जाती हैं, जिन्हें "अन्य देयताएं" के रूप में जाना जाता है। ये लगभग 2017-18 में 9.1 लाख करोड़ थी, इसमें मार्च 2014 के बाद से लगभग 30 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ तक।

सरकारी ऋण अंततः कराधान के माध्यम से आम लोगों से वसूल किया जाता है। इसलिए, जबकि यह ऋण नुकताचीनी निकालने जैसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में लोगों को चिंतित होने की आवश्यकता है। और, ऐसा भी नहीं है कि इस कर्ज का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए कुछ अद्भुत काम करने के लिए किया गया है – जैसे कि अच्छे दिन  का राग। जहां तक लोगों का संबंध है, इस असाधारण खर्च का इस्तेमाल उनके लिए तो नही किया गया है। इस खर्च का इस्तेमाल आयुष्मान भारत और पीएम फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से कॉरपोरेट्स को करों में छूट और अन्य लाभकारी छूट देने के लिए किया गया है, जहां निजी कॉरपोरेटों को अपने खजाने में प्रत्यक्ष लाभ मिलता है और नोटबंदी या गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स जैसी विनाशकारी नीतियों के भुगतान के माध्यम से ऐसा किया गया है।लेकिन कर्ज की गाथा अभी पूरी नहीं हुई है। केवल बैंकों से परिवारों द्वारा लिए गए व्यक्तिगत ऋणों पर एक नज़र डालें (नीचे चार्ट देखें)। निजी धन उधारदाताओं के ऋण के लिए कोई डेटा ही उपलब्ध नहीं है।

b 2.png


 
नवंबर 2018 तक व्यक्तिगत ऋणों की कुल राशि आरबीआई के अनुसार लगभग 20.7 लाख करोड़ रूपए है। जो भारत में प्रति व्यक्ति 15,486 रूपए बैठता है। उल्लेखनीय रूप से, नवंबर 2014 के बाद से व्यक्तिगत ऋण में 86 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 22 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। इसकी तुलना 2010 और 2014 के बीच केवल 17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से करें।

व्यक्तिगत ऋण श्रेणियों में, उपभोग व्यय जैसे शादियों या बीमारी आदि के लिए ऋण में 147 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि की अदायगी में 189 प्रतिशत आवास ऋण में 81 प्रतिशत और वाहन के लिए ऋण में 66 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।इसका मतलब यह है कि मध्यम वर्ग मोटे तौर पर सरकार की तरह कर्ज में डूबा रहा है। यह अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि मध्यम वर्ग लोगों का एक छोटा सा हिस्सा है। अधिकांश लोगों के पास क्रेडिट कार्ड या व्यक्तिगत वाहन या घर नहीं हैं जिनके लिए बैंक अक्सर ऋण देते हैं। लेकिन यह मध्यम वर्ग है जो अत्यधिक ऋणी है।

मोदी द्वारा तैयार किए गए उस भयानक ऋण के अलावा, कृषि में ऋण करीब 10.7 लाख करोड़ रुपये है जो 44 प्रतिशत दर के हिसाब से बढ़ा है यानि 2014 में 7 लाख करोड़ रूपए। यह विभिन्न प्रकार के ऋण माफी के बावजूद है।और फिर आपके पास खराब ऋण या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) हैं, जैसा कि उन्हें कहा जाता है, जो एक चौंका देने वाले स्तर पर है यानि मार्च 2018 तक 10.4 लाख करोड़ रुपये, जिनमें से 80 प्रतिशत कॉर्पोरेट्स का कर्ज़ है।इस सब को एक साथ रखें तो आपको मोदी की समझदारी वाली भारत की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण तस्वीर मिलेगी। मोदी सरकार का यह अंतिम वर्ष का बजट चुनावी समर से भरा हो सकता है, लेकिन सच यह है कि मोदी देश की अर्थव्यवस्था को खंडहर बना कर जा रहे हैं।


 

Union Budget 2019
indian economy
debt
achhe din
personal loan

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?

मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर

क्या भारत महामारी के बाद के रोज़गार संकट का सामना कर रहा है?

क्या एफटीए की मौजूदा होड़ दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था परिपक्व हो चली है?

महंगाई के कुचक्र में पिसती आम जनता

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सुंदरता का पता नहीं, लेकिन अच्छे दिन देखने वाले की आंखों में बसते हैं


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License