NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
बजट ने भी बताया कि रोज़गार मोदी सरकार की प्राथमिकता नहीं है
कुल बजटीय खर्चे व सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रोज़गार देने वाली व बढ़ाने वाली सात बड़ी योजनाओं में खर्चा 2019-20 के बजट आवंटन में पिछले वित्तीय 2018-19 (RE) से कम हुआ है।
पीयूष शर्मा
04 Feb 2019
UNEMPLOYMENT

भारत में प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ युवा देश के श्रम-बल में शामिल हो जाते हैं और इन्हें रोज़गार के अवसर मुहैया कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि वह हर साल एक करोड़ नौकरियां देंगे परन्तु अब लगभग पांच साल गुजर गये हैं और यह वादा पूरी तरह जुमला ही साबित हुआ है क्योंकि इस दौरान बेरोज़गारी लगातार बढ़ी है। रोजगार के लिए माहौल बनाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में नही रहा हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हम हाल ही में जारी हुए बजट आवंटन में देख सकते हैं। कुल बजटीय खर्चे व सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रोजगार देने वाली व बढ़ाने वाली सात बड़ी योजनाओं में खर्चा 2019-20 के बजट आवंटन में पिछले वित्तीय 2018-19 (RE) से कम हुआ है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के पुनरीक्षित बजट (RE) में इन योजनाओं व कार्यक्रमों पर कुल बजटीय खर्चे का 3.16 फ़ीसदी खर्च हो रहा था जो इस वर्ष घटकर 2.9 फ़ीसदी हो गया है। इसी प्रकार इन योजनाओं पर 2019-20 के बजट में खर्चा जीडीपी का 0.38 प्रतिशत है जो कि पिछले वित्तीय वर्ष में 0.41 प्रतिशत था।

BUDGET T1.jpg

पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के लिए खर्च का विश्लेषण बताता है कि देश में रोजगार देना मोदी सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। पिछले वर्षों में रोजगार के लिए खर्च का स्तर एक जैसा ही रहा है।

मोदी सरकार का कार्यकाल बेरोजगारी के दौर के रूप में चिह्नित किया गया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के नवीनतम सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2018 से बेरोजगारी पांच प्रतिशत से बढ़कर 28 दिसबंर को 7.3 प्रतिशत हो गई है।

BUDGET T2.jpg

योजनाओं के बजट में जो मामूली वृद्धि नजर आ रही है वो केवल संख्यात्मक वृधि है, जबकि वास्तव में कुल बजटीय आवंटन और जीडीपी के सापेक्ष रोजगार के खर्चों में लगातार कमी आई है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, उद्यम व कौशल विकास, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, रोजगार व कौशल विकास, ग्रामीण आजीविका मिशन में थोड़ी वृधि है पर इन योजनाओं का दायरा देखे तो यह धनराशि काफी कम है।

मनरेगा मोदी सरकार के आने से ही उपेक्षा का शिकार रहा है, इस वर्ष भी 2018-19 के पुनरीक्षित बजट से कम होकर 60 हजार करोड़ हो गया है मनरेगा में काम के दिनों में गिरावट आई और महीनों तक मजदूरी का भुगतान नहीं होता है। इसी प्रकार राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के बजट में भी कटौती हुई है।

बेरोजगारी को लेकर संसद से सड़क तक विपक्ष व आम जनता द्वारा लगातार सरकार को घेरा जा रहा हैं इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने अंतरिम बजट में इस समस्या से लड़ने का खाका खींचने की कोशिश की है। पर जब सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में हैं और चुनाव नजदीक तो उसको यह समस्या नजर आ रही है। जब सरकार के पास पूरा मौका था तो अपने सभी पूर्ण बजट में इस समस्या का समाधान नहीं सोचा और चुनाव सामने है तो मामूली वृद्धि कर फिर से जनता को छलने की कोशिश कर रहे हैं।

आगामी आम चुनावों में मोदी सरकार को रोजगार के झूठे वादों का हिसाब देना होगा। अर्थव्यवस्था में दीर्घकालीन रोजगार सृजन के अवसर उत्पन्न करने के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की जरूरत है। मोदी सरकार के दौरान रहे बजटीय प्रावधान इस जरूरत को पूरा नहीं करते हैं।   

UNEMPLOYMENT IN INDIA
unemployment
Employment
MNREGA
nulm
union budget
Union Budget 2019
Interim Budget
Skill India

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

हिमाचल : मनरेगा के श्रमिकों को छह महीने से नहीं मिला वेतन

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 


बाकी खबरें

  • covid
    भाषा
    ओमीक्रॉन को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य सुविधाएं, सामाजिक उपाय तत्काल बढ़ाने की ज़रूरत : डब्ल्यूएचओ
    18 Dec 2021
    डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें आगामी हफ्तों में और सूचना मिलने की संभावना है। ओमीक्रॉन को हल्का मानकर नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।’’
  • suicide
    भाषा
    प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों में लगे श्रमिक ने की आत्महत्या
    18 Dec 2021
    पुलिस ने बताया कि फूलपुर थाना क्षेत्र के पिंडरा करखियांव में प्रधानमंत्री की रैली की तैयारी में लगे 36 वर्षीय विक्रम ने शुक्रवार रात ‘‘फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।’’
  • rumy
    अयसकांत दास , परंजॉय गुहा ठाकुरता
    रमी ऑनलाइन पर रार 
    18 Dec 2021
    वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक सिंघवी ऑनलाइन कार्ड गेम की वैधता को लेकर विवाद में उलझ गये हैं, यहां तक कि भारत सरकार इंटरनेट पर खेले जा रहे इस "जुआ" पर अपनी नीति को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी से…
  • uttar pradesh
    लाल बहादुर सिंह
    उत्तर प्रदेश बदलाव के मुहाने पर : ध्रुवीकरण का ब्रह्मास्त्र भी बेअसर
    18 Dec 2021
    मोदी से अधिक शिद्दत से शायद ही किसी को एहसास हो कि UP हारने के बाद उनके लिए दिल्ली बहुत दूर हो जाएगी। इसीलिए जैसे वह गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ते थे, उसी अंदाज में de facto मुख्यमंत्री की तरह…
  • Minority Rights Day
    डॉ. राजू पाण्डेय
    अल्पसंख्यक अधिकार दिवस विशेष : मुस्लिम अधिकारों पर संकट
    18 Dec 2021
    विकास के हर पैमाने पर पिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए 2014 के बाद का समय बहुत कठिन रहा है। मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा और नफ़रत का प्रसार भाजापा के राजकाज का केंद्र बिंदू है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License