NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
बलात्कार की भयावह घटनाएँ; उनको सोशल मिडिया पर वायरल करने की बढती प्रवृति
रेप पीड़ित के वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर डालना और उसे न्याय दिलाने के लिए वायरल करने की अपील करते हैं| ऐसे करते वक्त वो भूल जाते हैं कि यह एक क़ानूनी अपराध के साथ ही पीड़िता के साथ भी अन्यायपूर्ण है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Jul 2018
rape

रेप पीड़ित के वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर डालना और उसे न्याय दिलाने के लिए वायरल करने की अपील करते हैं| ऐसे करते वक्त वो भूल जाते हैं कि यह एक क़ानूनी अपराध के साथ ही पीड़िता के साथ भी अन्यायपूर्ण है, ये उसके भविष्य के सामाजिक जीवन पर विपरीत असर डालता हैं|

कल ही बिहार में छपरा जिले के एकमा थाना क्षेत्र के एक गाँव की है जहाँ एक नाबालिग छात्रा के साथ प्रधानाध्यापक, शिक्षक और छात्रों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने में आया है। इसको लेकर नाबालिग छात्रा ने स्थानीय थाने में एक आवेदन में कहा है कि दिसंबर 2017 में उसके साथ उसकी कक्षा के एक छात्र ने दुष्कर्म किया। लोकलाज के कारण वह चुप रही, लेकिन उस छात्र ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने कक्षा के दूसरे छात्रों को भी बताया तो और छात्रों ने ब्लैकमेल कर दुष्कर्म किया। इसके बाद दो शिक्षकों और प्रिंसिपल उदय कुमार उर्फ मुकुंद सिह ने भी धमकी देकर दुष्कर्म किया। यह सिलसिला पिछले छह माह से लगातार चल रहा था।

बलात्कार के मामलों के सन्दर्भ में एक और प्रवृति देखी जा रही कि लोग रेप पीड़ित के वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर डालना और उसे न्याय दिलाने के लिए वायरल करने की अपील करते हैं | ऐसे करते वक्त वो भूल जाते है की ये एक क़ानूनी अपराध के साथ ही पीड़िता के साथ भी अन्यायपूर्ण है, ये उसके भविष्य के सामाजिक जीवन पर विपरीत असर डालता हैं |

कुछ दिनों पहले भी बिहार के गया में एक महिला और उसके नाबालिग बेटी से सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया | जब एक डॉक्टर अपनी पत्नी और अपनी बेटी के साथ बाइक से जा रहे थे तो रास्ते में 10 से 12 लोगों ने उनका रास्ता रोका | डॉक्टर के हाथ पाँव बाँध दिया और थोड़े ही दूर पर उनकी पत्नी और बेटी के साथ दुष्कर्म किया था | साथ ही उनके साथ लूटपाट भी की गई थी| इसमें भी राजद के कार्यकर्त्ताओं द्वारा पीड़िता के न्याय के लिए बुलाए गए बंद के दौरान जबरन उसका वीडियो बनाकर चलाया गया जिसके उनमें से कई पर क़ानूनी कार्यवाही भी हुई|

इसे भी पढ़े : क्या यही है बिहार का सुशासन ?

अभी मध्यप्रदेश  के मन्दौसर में नाबालिग बच्ची से बालात्कार की गटना सामने आई थी, जिसे लेकर राजनीति भी खूब हुई परन्तु सत्य यह है कि मामा के राज में मासूम भांजी का सुरक्षित रहना मुश्किल हुआ है| एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले 16 वर्षो में प्रदेश में नाबालिग बच्चियों से रेप की घटनाओं में 532% की वृद्धि हुई है|

वहीं इसी मामले में दुष्कर्म की शिकार बच्ची की देखभाल के लिए तैनात नर्स ने असंवेदनशीलता की हदें पार करते हुए मासूम की फोटो लेने के अपराध को अंजाम दे दिया| नर्स पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है| पुलिस ने आशंका जताई है कि किसी को फोटो भेजने के लिए नर्स ने फोटो ली|

इस तरह कुछ माह पहले जम्मू कश्मीर कठुआ गैंगरेप में 17 जनवरी को जंगल के इलाके में झाड़ियों से एक बच्चे का शरीर मिला जिस पर गहरी चोंटों के निशान थे| पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि हत्या से पहले उसको नशीली दवाईयाँ दी गई थीं और उसका बलात्कार किया गया था|

कठुआ गैंगरेप के मामले में पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने वाले तमाम मीडिया हाउस पर दिल्ली की हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला लिया है कि मीडिया हाउस पर लगाए गए जुर्माने से जो भी पैसा इकट्ठा होगा उसे जम्मू-कश्मीर में पीड़ित के परिजनों को मुआवज़े के तौर पर दिया गया था।
 
मीडिया हाउसों पर इस जुर्माने के साथ ही हाईकोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि भविष्य में किसने  भी रेप पीड़िता का नाम सार्वजनिक किया उसे 6 महीने जेल की सज़ा दी जाएगी।

इससे पहले 13 अप्रैल 2018 को हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवायी करते हुए रेप पीड़िता का नाम सार्वजनिक करने पर अलग-अलग मीडिया हाउसों को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने रेप पीड़िता की पहचान से जुड़े किसी भी तथ्य को भी सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी थी।
 
इसे भी पढ़े : जम्मू-कश्मीर में यौन हिंसा के मुजरिम को क़ानून अब भी संरक्षण देता है, क्या कठुआ मामला इसे बदल पाएगा?

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट, 2012 बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है| इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई हैI इस कानून में 46 अलग-अलग धाराएँ हैं| जेजे एक्ट, पॉक्सो एक्ट (धारा 23) के मुताबिक पीड़ित का नाम, पता, तस्वीर, स्कूल या परिवार की पहचान उजागर करने की मंशा रखते हुए कोई टिप्पणी या रिपोर्ट नहीं की जा सकती है| इस धारा में 6 माह से एक साल तक की सज़ा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है|

इसे भी पढ़े : राजनीतिक हथियार के रूप में बलात्कार का इस्तेमाल करने की सावरकर ने दी थी मंजूरी

भारत में कई कानून बनने के बाद भी बलात्‍कार की वारदातें बदस्‍तूर जारी हैं। आखिर हमारे समाज में यौन हिंसा जैसे घिनौने अपराध होते ही क्यों है? जैसे-जैसे हमारा समाज अधिक शीक्षित और प्रगतिशील होता जा रहा है, वैसे-वैसे ही समाज में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। खासतौर पर हाल के दिनों में नाबालिग बच्चियों के यौनशोषण के मामले लगतार बढ़ते ही जा रहे  हैं| रोज़ाना अलग-अलग  राज्यों से बलात्कार की घटना की खबरें आती हैं | यह एक सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय होना चाहिए परन्तु क्या हम चिंतित है? ये सबसे बड़ा प्रश्न है | 
 

rape
minor girl raped
Social Media
Bihar
chapra

बाकी खबरें

  • मुकुल सरल
    विचार: क्या हम 2 पार्टी सिस्टम के पैरोकार होते जा रहे हैं?
    14 Mar 2022
    कला हो या संस्कृति या फिर राजनीति, मैं तो इसी बात का कायल हूं कि “सौ फूलों को खिलने दो—सौ विचारों में होड़ होने दो”, हां बस इसमें इतना और जोड़ना चाहूंगा कि...
  • परमजीत सिंह जज
    पंजाब में आप की जीत के बाद क्या होगा आगे का रास्ता?
    14 Mar 2022
    जब जीत का उत्साह कम हो जाएगा, तब सत्ता में पहुंचे नेताओं के सामने पंजाब में दिवालिया अर्थव्यवस्था, राजनीतिक पतन और लोगों की कम होती आय की क्रूर समस्याएं सामने खड़ी होंगी।
  • एम.ओबैद
    बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 
    14 Mar 2022
    "बिहार में 70 वर्षों से दबे-कुचले भूमिहीन परिवार ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हमारा भी एक दिन आएगा कि जिस चटाई पर हम सोएंगे उसके नीचे की ज़मीन हमारी होगी।।" 
  • शशि शेखर
    यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 
    14 Mar 2022
    यूपी चुनाव परिणाम ऐसे नेताओं के लिए दीर्घकालिक नुकसान का सबब बन सकता है, जिनका आधार वोट ही “माई(MY)” रहा है।
  • maths
    समीना खान
    इसलिए मैथ्स से बेदख़ल होती जा रही हैं लड़कियाँ
    14 Mar 2022
    आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा किये गए शोध में बताया गया है कि गणित पढ़ने में लैंगिक असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। क्या हैं इसकी वजहें?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License