NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
स्वास्थ्य
विज्ञान
भारत
ब्लड ग्रुप बदलना जल्द एक वास्तविकता बन सकता है
एक नए शोध में पाया गया है कि गट कीटाणु (gut microbes) दो एंजाइमों का उत्पादन करते हैं जो सामान्य प्रकार 'ए' को अधिक सार्वभौमिक रूप में परिवर्तित कर सकता है। इससे रक्त-आधान (blood transfusions) में क्रांति आ सकती है।
संदीपन तालुकदार
15 Jun 2019
Blood Group
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो साभार: The Telegraph

विशेष प्रकार का ब्लड ग्रुप नहीं होता है जिसका रोगी को चढ़ाने की आवश्यकता होती है। किसी भी रोगी को किसी भी प्रकार का खून नहीं चढ़ाया जा सकता है। एक सफल रक्त-आधान के लिए डोनर और रोगी दोनों को समान ग्रुप का होना ज़रुरी है। लेकिन‘ओ’ ब्लड ग्रुप वाले लोग यूनिवर्सल डोनर (सार्वभौमिक दाता) होते हैं जिसका मतलब है कि इन लोगों के खून को किसी अन्य ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को दिया जा सकता है। यदि किसी भी तरह से एक ब्लड ग्रुप को यूनिवर्सल डोनर के रूप में परिवर्तित किया जाता है तो क्या यह ख़ून के संकट को हल करने की दिशा में योगदान नहीं होगा जबकि इसकी बेहद आवश्यकता है? पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों की बदौलत यह प्रक्रिया जो कभी असंभव कार्य प्रतीत होता था वह संभव हो सकता है।

10 जून को नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हालिया शोध में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया है कि मनुष्यों में गट माइक्रोब्स (कीटाणु) पर उनके शोध से पता चला है कि ये गट माइक्रोब्स दो एंजाइमों का उत्पादन करते हैं जो कॉमन टाइप ए को अधिक सार्वभौमिक रूप में परिवर्तित कर सकते हैं। यदि ये प्रक्रिया अच्छी तरह से सफल हो जाती है तो यह रक्त दान और रक्त-आधान में क्रांति ला सकती है।

मैरीलैंड के बेथेस्डा में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ्स क्लिनिकल सेंटर के एक रक्त-आधान विशेषज्ञ हार्वे क्लेन कहते हैं, "यह अपने आप में पहला है और अगर ये तथ्य दोहराए जाते हैं तो निश्चित ही काफी बेहतर होगा।" क्लेन इस अध्ययन में शामिल नहीं थे।

ब्लड ग्रुप कैसे निर्धारित होते हैं?

लाल रक्त कोशिकाओं की सतहों पर शर्करा अणुओं की उपस्थिति के अनुसार ब्लड ग्रुप निर्धारित किए जाते हैं। ब्ल़ड ग्रुप 'ए' वाले व्यक्ति में लाल रक्त कोशिका की सतह पर एक विशेष शर्करा की परत होती है जिसे एंटीजन 'ए' कहा जाता है और इसी तरह की क्रिया अन्य ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति के साथ होती है। 'ओ' ग्रुप के रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की सतहों पर न तो एंटीजन 'ए' होता है और न ही एंटीजन 'बी'। 'ए’ टाइप ब्लड में इन एंटीजन की कमी यह सुनिश्चित करती है कि इसे किसी अन्य ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को दिया जा सकता है और यह 'ओ' ब्लड ग्रुप को सार्वभौमिक बनाता है, विशेष रूप से आपातकालीन स्थिति में ये महत्वपूर्ण होता है जहां डॉक्टरों और नर्सों को ये निर्धारित करने के लिए कुछ भी समय नहीं होता है कि रोगी का ब्लड ग्रुप क्या है जिसे तत्काल रक्त देने की आवश्यकता होती है।

दुर्लभ पदार्थ के रूप में रक्त

डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार विश्व के ब्लड डोनेशन का लगभग 42% उच्च आय वाले देशों में एकत्र किया जाता है जिनकी आबादी दुनिया का केवल 16% है। इससे आपातकाल में ब्लड की कमी की तस्वीर साफ हो जाती है। उदाहरण के लिए 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष 30 लाख यूनिट ब्लड की कमी होती है। इसके अलावा भारत में अभी भी अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है खासकर दूर दराज के गांवों में। इसलिए जब कोई आपात स्थिति में हो और उसे तत्काल ब्लड की आवश्यकता हो और परिवार के सदस्यों या दोस्तों में कोई उचित डोनर न हो तो उन्हें कोई ब्लड नहीं मिल पाएगा। ऐसे में ये नवीनतम शोध बेहद महत्वपूर्ण है जिससे उनके ब्लड की कमी दूर होने की संभावना होगी।

शोध

वैज्ञानिकों ने दूसरे सबसे कॉमन ब्लड को बदलने की कोशिश की जो टाइप ए (या ब्लड ग्रुप ए) है। ये कोशिश वैज्ञानिकों ने इसके एंटीजन को हटाकर की थी। परिणामस्वरूप इस ब्लड ग्रुप को सार्वभौमिक 'ओ' ब्लड ग्रुप में परिवर्तित किया गया था। लेकिन उन्हें ज़्यादा सफलता नहीं मिली क्योंकि 'ए' एंटीजन को हटाने के लिए ज्ञात एंजाइम कम खर्च में उनके कार्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

वे पिछले 4 वर्षों से इन एंजाइमों के सुधार के लिए प्रयास कर रहे थे। इस बार उन्होंने मानव गट बैक्टीरिया पर शोध केंद्रित करने का फैसला किया। ये गट बैक्टीरिया जिनका उन्होंने अध्ययन किया वे शर्करा-प्रोटीन कॉम्बोस खाते हैं जिसे म्यूसिन कहते हैं। ये म्यूसिन गट को पंक्तिबद्ध करता है जहां ये कीटाणु रहते हैं। म्यूसिन शर्करा लाल रक्त कोशिकाओं में किसी प्रकार टाइप परिभाषित करने के समान होता है।

इस अध्ययन टीम ने मानव मल के नमूनों से कीटाणुओं के डीएनए को अलग किया और उन जीनों की पहचान की जो इन म्यूसिन को हजम करने में इन एंजाइमों को सक्षम बनाते हैं। इसके बाद उन्होंने 'ए' एंटीजन को हटाने के लिए एंजाइम की क्षमता का अध्ययन किया।

सबसे पहले उन्होंने कोई पर्याप्त परिणाम नहीं पाया। लेकिन दो परिणामी एंजाइमों का एक बार परीक्षण करने पर उन्होंने एंटीजन 'ए' को मानव रक्त से निकालने में अपनी सफलता को देखा। ये एंजाइम मूल रूप से फ्लेवोनिफ्रेक्टर प्लौटी नामक गट बैक्टीरिया से निकलते हैं। इन एंजाइमों की छोटी मात्रा को 'ए' ब्लड ग्रुप के एक इकाई में मिलाने पर नुकसान पहुंचाने वाला एंटीजन 'ए' निकल गया।

फिर भी इस खोज की पुष्टि के लिए अगले शोध का अभी भी इंतजार है। हालांकि दुनिया भर में रक्त विशेषज्ञों द्वारा इन शोधों को उल्लेखनीय माना जा रहा है।

blood group
Blood and Iron
donor
gut
microbiology
WHO
report
feature

Related Stories

दुनिया की हर तीसरी महिला है हिंसा का शिकार : डबल्यूएचओ रिपोर्ट


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License