NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ब्राज़ील का जनमतसंग्रह
अमीर सादर
06 Oct 2014

रविवार का जनमतसंग्रह यह तय करने के लिए था कि 2003 से लूला सरकार के बाद से क्या देश सही रास्ते पर है और अगर यह देश को गलत रास्ते पर ले जा रहा है और तो इसके लिए तुरंत मौलिक बदलाव की जरूरत है. पहला विकल्प जिसे कि डीलमा रौसेफ्फ़ में अभिव्यक्त किया गया और जिसने लूला सरकार और उसके खुद के द्वारा लाये गए आवश्यक सुधार और परिवर्तनों को गहराई से लागू करने को तरजीह दी। अन्य सभी उम्मीदवारों चाहे वे दक्षिण पंथी हों या उग्र वामपंथी – वे ब्राज़ील की नीतियों में भारी बदलाव लाने के पक्षधर हैं।

सभी उतार-चढ़ाव के बाद ऐसा लगता है कि चुनावी परिपेक्ष अपने शुरुवाती दौर में पहुँच गया है, जिसमें कि डीलमा एक पसंदीदा हैं - और जिसमे केवल अनूठापन है – दक्षिणपंथ के दो मुख्य उम्मीदवारों: एसीओ नेवेस और मरीना सिल्वा दुसरे स्थान पर हैं। मरीना के विपक्ष के प्रमुख उम्मीदवार के रूप में उभारने से टकराव की शैली में बदलाव आया है, उसके द्वारा एसीओ नेवेस जैसी ही नव-उदारवादी मंचों का समर्थन करना आदि शामिल है। इसलिए मुख्य टकराव नव-उदारवाद परियोजना और उदारवाद के बाद की स्थिति में है।

                                                                                                                        

एक महीने तक मरीना के प्रभावी प्रचार से प्रभावित होने के बाद, अगस्त 13 की संदिग्ध विमान दुर्घटना के बाद डीलमा ने अपने समर्थन का आधार वापस पा लिया और उसमे सुधार भी हुआ, और यह माना जा रहा है कि उन्हें देश के पांच क्षेत्रों में से प्रत्येक में बढ़त है। शुरुआत में अस्वीकृति के एक निम्न स्तर के बाद मरीना, क्योंकि उसने एसीओ के पीटी विरोधी वोट के बड़े हिस्से को अधिग्रहित कर लिया था जो कि दूसरी तरफ के मतों से दोगुना था, ने उसके समर्थन को बढ़ाने में मदद की और एक हद तक कम प्रभावशाली गिरावट हुई जिसकी वजह से वह एसीओ के साथ दुसरे स्थान पर रही।

क्योंकि ऐसा लग रहा था कि अभियान प्रथम चरण में डीलमा की जीत की ओर है, जब विमान दुर्घटना घटी तो दक्षिणपंथियों ने एसीओ के वोट मरीना के पक्ष में स्थानांतरित कर दिए, जो बिना किसी रोक-टोक के तेज़ गति के साथ आगे बढती दिखाई दे रही थी। मरीना ने, इस प्रवृत्ति का फायदा उठाते हुए तुरंत अपने अभियान को स्पष्ट रूप से नव-उदारवादी सिद्धांतों की घोषणा की तरफ निर्देशित कर दिया, और साथ ही अपनी कोर्डिनेशन टीम को इन्ही सिद्धांतों पर अभियान चलाने को कहा। उसने पैने शब्दों में खुलासा किया कि उसके “शिक्षक” कोई और नहीं बल्कि ईटाउ बैंक(जोकि ब्राज़ील का सबसे बड़ा निजी बैंक है) के उत्तराधिकारियों में से हैं जिन्होंने की मरीना के नाम पर एक केन्द्रीय बैंक के नाम की घोषणा की है।  

मरीना के प्रस्तावों को जल्द ही, संयुक्त राज्य अमेरिका में, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया लॉबी में समर्थन मिला जिन्होंने तुरंत ही उसे अपनी जाहिर तौर पर अजेय – उम्मीदवार घोषित कर दिया। डीलमा का उसके खिलाफ प्रतिरोध का असर भी कोई कम नहीं था। उन्होंने मरीना के नव-उदारवादी चरित्र की उम्मीदवारी की धज्जियाँ उडानी शुरू कर दी एक ऐसा चरित्र जिसका शायद ही वास्तविकता से कोई रिश्ता हो: पूरानी राजनीति के साथ सबसे बुरा गठबंधन, जिसका प्रस्ताव, निजी बैंकों के साथ सरकार के साथ गठजोड़ का है, और ब्राजील की विदेश नीति में अमेरिका के साथ गठजोड़ का प्रस्ताव है। उन्होंने दिखाया कि मरीना न केवल बेतुकी हैं बल्कि विरोधाभासी भी है और देश की सही राजनीतिक धारा को स्थापित करने में अक्षम हैं।

इसके चलते मरीना की बढ़त रुक गयी और उसके समर्थन में गिरावट आनी शुरू हो गयी, जबकि डीलमा का समर्थन बढ़ने लगा। एक समय में मरीना ने दुसरे चरण में डीलमा से 10 अंक की बढ़त ले ली थी। और वहीँ से उसकी बढ़त में गिरावट शुरू हुयी, उसकी अस्वीकृति का स्तर बढ़ गया, उसकी उम्मीदवारी ने पहलकदमी खो दी, और अंतत अपने आप को आरोपों के खंडन और उसके जवाब देने के लिए समर्पित करने पड़ा, जिसकी वजह से वह एक रक्षात्मक स्थिति में आ गयी।

जैसी अन्तिम दौर में तस्वीर उभर कर सामने आ रही उससे लगता है कि पहले दौर के अंत में डीलमा काफी बेहतर स्थिति में हैं - 15% वरीयता लिये हुए – यहाँ तक की चार और पांच या नौ और दश बिन्दुओं की बढ़त हासिल करते हुए चुनाव के दुसरे चरण के चुनाव के आधार पर आगे हैं। डीलमा की बढ़त की प्रविर्ती को देखते हुए वह देश के पांचो क्षेत्रों में आगे हैं, यहाँ तक कि नौजवानों में उसकी बढ़त है, और वह उत्तर-पूर्व और उत्तर के सबसे गरीबों में अपने न्रेतत्व को कायम किये हुए है।

मरीना की तेज़ी से गिरावट के साथ, एसीओ अब दुसरे स्थान पर संघर्ष में है। इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि डीलमा पहले चरण में जीत पाएगी या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि दुसरे चरण में उसका प्रतिद्वंदी कौन होगा इन हालात में यह स्पष्ट होना जरूरी था। लेकिन जो निश्चित है वह यह है कि आखिर मतों का बड़ा हिस्सा जिसे कि मरीना और एसीओ साझा करेंगें से डीलमा सबकी पसंदीदा उम्मीदवार होंगी। इस जीत का मतलब होगा आर्थिक विकास का मॉडल उसमें धन का वितरण, जिसकी कि शुरुवात लूला ने की और डील्मा ने उसे जारी रखा और साथ ही ब्राज़ील की उस विदेश नीति को जारी रखना जोकि 16 साल की पी.टी. सरकार का सत्ता में रहना, जोकि किसी भी राजनितिक शक्ति के लिए जनतंत्र में उसके सत्ता में रहने राजनितिक रिकॉर्ड है। दक्षिणपंथ का दुःस्वप्न, जिसमे चौथी बार हार शामिल है का मतलब होगा कि 2018 में लूला की सत्ता में वापसी, हो सकता है कि शायद एक बार से ज्यादा का जनादेश जोकि पी.टी सरकार के चौथाई सदी तक की सत्ता का रास्ता साफ कर देगा।

 (जॉर्डन बिशप द्वारा ALAI  स्पेनिश से अंग्रेजी में अनुवाद और अंग्रेजी से हिंदी में महेश कुमार द्वारा अनुवाद)

अमीर सादर, ब्राज़ील के समाजशास्त्री और राजनितिक शास्त्री हैं जोकि लाबोरातिरियो डे पोलिटिक्स पुब्लिकास, एस्तादुअल विश्वविद्यालय, रियो दे जेनिरियो में शिक्षक हैं।

सौजन्य:- alainet.org

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते ।

 

 

लैटिन अमरीका
एसीओ नेव्स
ब्राज़ील
दिल्मा रौस्सेफ़
मरीना सिल्वा

Related Stories

फीफा विश्व कप, बड़े उद्योगों के सौजन्य से

क्रांतिकारी चे ग्वेरा को याद करते हुए

लैटिन अमरीका: क्यों वाम ही सत्ता पर काबिज है?


बाकी खबरें

  • lakheempur
    अनिल जैन
    विशेष: किसिम-किसिम के आतंकवाद
    24 Oct 2021
    विविधता से भरे भारत में आतंकवाद के भी विविध रूप हैं! राजकीय आतंकवाद से लेकर कॉरपोरेट आतंकवाद तक।
  • china
    अनीश अंकुर
    चीन को एंग्लो-सैक्सन नज़रिए से नहीं समझा जा सकता
    24 Oct 2021
    आख़िर अमेरिका या पश्चिमी देशों के लिए चीन पहेली क्यों बना हुआ है? चीन उन्हें समझ क्यों नहीं आता? ‘हैज चाइना वॉन' किताब लिखने वाले सिंगापुर के लेखक किशोर महबूबानी के अनुसार "चीन को जब तक एंग्लो-सैक्सन…
  • Rashmi Rocket
    रचना अग्रवाल
    रश्मि रॉकेट : महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले अपमानजनक जेंडर टेस्ट का खुलासा
    24 Oct 2021
    फ़िल्म समीक्षा: किसी धाविका से यह कहना कि वह स्त्री तो है, लेकिन उसके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा अधिक होने के कारण वह स्त्री वर्ग में नहीं आ सकती अपने आप में उसके लिए असहनीय मानसिक यातना देने…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    शाह का कश्मीर दौरा, सत्ता-निहंग संवाद और कांग्रेस-राजद रिश्ते में तनाव
    23 Oct 2021
    अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किये जाने के बाद गृहमंत्री अमित शाह पहली बार कश्मीर गये हैं. सुरक्षा परिदृश्य और विकास कार्यो का जायजा लेने के अलावा कश्मीर को लेकर उनका एजेंडा क्या है?…
  • UP Lakhimpur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    ‘अस्थि कलश यात्रा’: लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए चार किसानों की अस्थियां गंगा समेत दूसरी नदियों में की गईं प्रवाहित 
    23 Oct 2021
    12 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी से यह कलश यात्रा शुरू हुई थी, यह देश के कई राज्यों में फिलहाल जारी है। उत्तर प्रदेश में ये यात्रा पश्चिमी यूपी के कई जिलों से निकली, जिनमें मुझफ्फरनगर और मेरठ जिले शामिल थे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License