NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ब्रिगेड की अनुगूंज और उसे दबाने के लिये फुस्स पटाखे
3 फरवरी के कोलकता में एक ओर वास्तविकता की तरफ ध्यान दिलाती जनता थी तो दूसरी तरफ ध्यान बँटाऊ तिकड़मों के पांसे लिए बैठे शकुनि और घात लगाये बैठी राजनीति की ताड़काएं थीं । हम किनके साथ हैं यह असल सवाल से तय होगा , जो है देश और उसकी जनता की एकता की हिफाजत ; और यह काम सिर्फ वाम कर सकता है - उन्ही शक्तियों के सहयोग से हो सकता है जिनकी धुरी वाम हो ।
बादल सरोज
05 Feb 2019
#PeoplesBrigade

अत्यंत भोले होते हैं वे जो राजनीति को संयोगों और संभवों की कला मानते हैं । समझते हैं कि अचानक से कुछ घटता है और चतुर राजनीतिज्ञ वह है जो उसे अपने हिसाब से दुहता है । राजनीति के शब्दकोष में "भोला" इन्नोसेंट का नहीं मूर्ख का समानार्थी होता है । इन भोले और भले लोगों की दम पर चतुर सुजान राज करते रहते हैं और इनके भोलेपन का निखार बनाये रखने की हरचन्द कोशिश करते रहते हैं ।
 राजनीति का हर माइक्रो इवेंट एक मैक्रो प्लान का हिस्सा होता है । एक ग्रैंड नैरेटिव का एक प्रसंग भर होता है ; यहाँ कुछ भी अचानक नहीं होता, कुछ भी अनायास नहीं होता । शेक्सपीयर के शब्दों में ये सब रंगमंच की कठपुतलियां हैं - सब कुछ ऊपर वाले के हाथो में होता है । जो संवादों को स्वतःस्फूर्त मान लेते हैं, उन्हें पटकथा के साथ नहीं बांचते वे अनजाने में ही खलमण्डली का हिस्सा बन जाते हैं । तीन फरवरी के कोलकता को इस प्राक्कथन के साथ देखने से उसे समझना आसान हो जाता है ।
 ब्रिगेड परेड मैदान में हुयी वाम की साझा रैली इस मैदान में हुयी अब तक की सबसे बड़ी रैलियों में से एक और 19 जनवरी को हुयी ममता बनर्जी की बहुप्रचारित, "ये भी आजा, वो भी आजा, तू भी आजा तू भी आजा" रैली से हर हालत में दो से ढाई गुनी बड़ी रैली थी । इस रैली का देशव्यापी चमत्कारिक असर हुआ । इसने ख़ुशी और प्रेरणा का संचार सिर्फ वाम समर्थकों - शुभचिंतकों के बीच ही नहीं किया बल्कि उसके प्रभाव से सैकड़ो गुना भारतीयों को भी आल्हादित कर दिया । 
 
ऐसा होने की साफ़ और ख़ास वजहें हैं ; वाम की मौजूदगी भर ही समूचे वातावरण में आश्वस्ति भर देती है । उन्हें भी सुकून और विश्वास से सराबोर कर देती है जो वाम के साथ नहीं है, यहां तक कि काफी हद तक वाम के खिलाफ है लेकिन फासिस्ट नहीं हैं ।
 वाम का मतलब है जैसा है उसे गुणात्मक रूप से सुधारने वाला बदलाव और दुनिया को सबके लायक बनाने का दृढ भाव : इस तरह दुनिया में जो भी रचनात्मक और सकारात्मक है उसके पीछे वाम है। वाम सभ्य समाज का कॉन्शस कीपर ही नहीं है, उसका कुतुबनुमा है । एक ऐसा उत्प्रेरक है जो अपनी मात्रा से खूब बड़ी मात्रा के गुणधर्म में बदलाव की ताकत रखता है । सिर्फ वाम ही है जो इस तरह के उपकरण और व्यक्तित्व, दिशा और प्रवाह तैयार करने की सामर्थ्य देताहै ।
 पं नेहरू ने ऐसे ही नहीं लिखा कि " वाम के बिना इस भारत के बारे में सोचने में डर लगता है । जिस दिन इस देश में वामपंथ कमजोर हो गया वह दिन इस देश के लिए बहुत अशुभ और खतरनाक होगा ।" विंस्टन चर्चिल जैसे खांटी कम्युनिस्ट विरोधी का कहना कि "35 साल की उम्र तक यदि कोई कम्युनिस्ट नही है तो वह 'फिट' नहीं है ।'' ऐसे ही व्यक्त की गयी अललटप्पू राय नहीं है । यह समाज के सभ्य बने रहने और उत्तरोत्तर संस्कारित होने में वाम की अपरिहार्यता की स्वीकारोक्ति है । 
 
भारतीय समाज में जो भी अच्छा और सहेजे जाने योग्य है उसके पीछे वाम है - वैचारिक वाम, सामाजिक वाम से लेकर राजनीतिक वाम तक । कल्पना कीजिये कि आजादी के तत्काल बाद उधर कठमुल्ले और इधर मनु-गौतम स्मृतिधारी पोंगे-पण्डे सरकार में आ बैठते तो शिक्षा-औरत-समाज-लोकतंत्र-शासन प्रणाली-जीवन शैली-फ़िल्म-साहित्य-संस्कृति समेत हर मामले में कैसा होता देश ? क्या अब तक एकजुट भी बचता देश ? 
 
ठीक यही वजह है कि 3 फरवरी की ब्रिगेड मैदान की रैली ने पूरे देश में ऊर्जा का संचार किया । और ठीक यही वजह है कि सी पी (कोलकता पुलिस) और सी बी आई (मोदी वाहिनी) ने अपनी नूरा कुश्ती के लिये इस विराट समावेश के पूरा होने के एकदम बाद का समय चुना । 
 
क्या जिस भाजपा ने शारदा चिट फण्ड घोटाले के नायक मुकुल रॉय को अपने माथे का चन्दन बना रखा है वह इस महाघोटाले के प्रति इतनी गंभीर और उसकी पालतू सीबीआई इतनी स्टुपिड है कि जिस कमिश्नर के पास 12 फरवरी तक की अंतरिम जमानत है उसे 3 तारीख को ही गिरफ्तार करने और बिना "सर्च वारंट" के छापा मारने जायेगी ? उसके पहुँचने के पहले ही कोलकता पुलिस उसे धर पकड़ने के लिए तत्पर बैठी होगी ? ममता दीदी और उनके प्राणों से प्यारे मोदी भैया इस देश की जनता को मामू समझते हैं क्या ? 
 3
फरवरी को कोलकता में, उनके हिसाब से बहुतई परफेक्शन से, मंचित सीबीआई-सीपी के डब्लू डब्लू एफ का यह दृश्य एक ग्रैंड नैरेटिव का हिस्सा है । वाम को अलग थलग करने की कुटिल योजना का हिस्सा । पहले इसे एक दूसरे से होड़ लगाती सांप्रदायिकता को भड़का कर अमल में लाया गया - अब उसे एक दूसरे से लड़ते भिड़ते भेड़ियों की नकली मुठभेड़ के रूप में लागू किया जा रहा है । वे जानते हैं कि असली मुद्दों को लेकर राजनीति करने में वाम से पार पाना मुश्किल है । छद्म और विभाजनकारी उन्माद में लोगों को बांटकर ही ध्रुवीकरण किया जा सकता है ।
 वाम की रैली में भागीदारी अभूतपूर्व थी, उसकी खबर चर्चा के केंद्र में आने से रोकना जरूरी था । इसलिए जरूरी थी एक ही अखाड़े के, एक ही उस्ताद के चेलों की यह दिखावटी फूँ-फां-फुस्स !! ममता को उम्मीद है कि वे सीबीआई की गिरती साख का फायदा उठा लेंगी । मोदी समूह को विश्वास है कि सांसद विधायकों की उनकी खरीद-फरोख्त तेज करने का माहौल बन जायेगा ।
 ममता और भाजपा-मोदी के रिश्ते जगजाहिर हैं । दीदी की अटल -आडवाणी प्रशस्ति से आरएसएस की स्तुति तक ओन रिकॉर्ड है । इसके बाद भी कुछ हैं जिन्हें इस संघर्ष में ममता लोकतंत्र की यौद्धा नजर आती हैं । वह ममता जिसने सैकड़ों राजनीतिक कार्यकर्ता मरवा डाले, सिर्फ सीपीएम ही नहीं प्रायः सभी विपक्षी दलों और संगठनों के दफ्तरों को दखल कर लिया अगर लोकतांत्रिक है तो फिर बेहतर होगा कि हिटलर और मुसोलिनी को पुनर्परिभाषित कर उन्हें 20 वीं सदी के सबसे सच्चे लोकतांत्रिक यौद्धा घोषित किया जाये ।
 नवउदार अजगर और हिंदुत्वी विषधर के मेल के इस सांघातिक हमले के दौर में लूट को अपराजेय बना देने के मंसूबो के लिए वाम का जर्जर और कमजोर होना उनके पूँजी और पुराणपंथी वायरसों के लिए जीवन मरण का प्रश्न है । पढ़े लिखे वामोन्मुखी बुद्दिजीवी मारे जाने के बाद भी अँधेरे को चुनौती देते नजर आते हैं । जब देखो तब ये लाल झण्डा उठाये कभी किसानों को देश के एजेंडे पर ला धरते हैं तो कभी 16 करोड़ तो कभी 18 करोड़ तो अभी 20 करोड़ मजदूरों को हड़ताल पर उतार देते हैं । कारपोरेट और हिंदुत्वी देशतोड़कों की मुश्किल समझ आती है । ममता बनर्जी उनके लिए ही रास्ता आसान कर रही हैं ।
 मगर मजेदार बात यह है कि इस तरह की भ्रान्ति कथित वाम के एक हिस्से - सिड़बिल्ले वाम - में भी है । जिसे अखबार में छपे और टीवी में दिखे के अलावा, उससे आगे कही कुछ नहीं दिखता । उसे लोकतंत्र की पूतना में स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी नजर आती है । उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकता । 
 
इसी प्रजाति का जुड़वां एक छुटका कथित वाम और भी हैं 
-
बागड़बिल्ला वाम - जो बंगाल में इतना खून बह जाने के बाद भी किताब के किसी अच्छे और राजनीतिक मूल्यांकन के किसी सच्चे पैराग्राफ से अब तक चिपके बैठे हैं । जिनमे कार्यनीति और रणनीति में अंतर करने का शऊर नहीं है । वे अभी तक सिंगूर और नंदीग्राम की खुमारी, बंगाल की "बर्बादी" में बुद्ददेब भट्टाचार्य की कथित जिम्मेदारी और औद्योगिक नीति की बीमारी के स्वयं ओढ़े कम्बल में गाफिल पड़े हैं । इन भोलों-भलों के साथ संवेदना ही व्यक्त की जा सकती है। वे नहीं जान सकते कि ब्रिगेड मैदान में 15 लाख लोगों का पहुंचना अपने कितने साथियों की मृत देहों के बोझ के साथ गुजरना हुआ होगा । कितना कष्टपूर्ण और श्रम साध्य रहा होगा । 
3
फरवरी के कोलकता में एक ओर वास्तविकता की तरफ ध्यान दिलाती जनता थी तो दूसरी तरफ ध्यान बँटाऊ तिकड़मों के पांसे लिए बैठे शकुनि और घात लगाये बैठी राजनीति की ताड़काएं थीं । हम किनके साथ हैं यह असल सवाल से तय होगा , जो है देश और उसकी जनता की एकता की हिफाजत ; और यह काम सिर्फ वाम कर सकता है - उन्ही शक्तियों के सहयोग से हो सकता है जिनकी धुरी वाम हो ।
और वाम - 
पर्सी बी शैली की पंक्तियों में बोलता है वाम ;
"
हम वो हैं जो मौत से डरते नहीं 
हम वो हैं जो मर के भी मरते नहीं। "

(ये लेख बादल सरोज के फेसबुक वॉल से लिया गया है। ये उनके निजी विचार हैं।)

Brigade Rally
People’s Brigade
Left Front
CPIM
Kolkata Rally

Related Stories

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च


बाकी खबरें

  • tikoniya
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी भारी राजनीतिक कीमत चुका कर ही अब अजय मिश्रा टेनी को मंत्री बनाये रख सकते हैं
    12 Oct 2021
    आज अंतिम अरदास के मौके पर पूरा देश लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दे रहा है तथा घटनास्थल तिकोनिया में पूरे देश से आये किसानों का विराट संगम हो रहा है।
  • New Service Rules in Jammu and Kashmir
    डॉ राधा कुमार
    ज़ुल्म के दरवाज़े खोलते जम्मू-कश्मीर के नये सेवा नियम
    12 Oct 2021
    बर्ख़ास्त किये गये ज़्यादातर लोगों के ख़िलाफ़ जो आरोप क़ायम किये गये हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन चूंकि आम लोगों के सामने इसे लेकर कोई सबूत नहीं रखा गया है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि इन आरोपों में दम है…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एक व्हिसलब्लोअर की जुबानी: फेसबुक का एल्गोरिद्म कैसे नफ़रती और ज़हरीली सामग्री को बढ़ावा देता है
    12 Oct 2021
    बेशक, यह सवाल पूछा जा सकता है कि जब फेसबुक के सिलसिले में ये सभी सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। इस सब में बड़ी खबर यह है कि अब हमारे पास इसके सबूत हैं कि फेसबुक को इसकी पूरी…
  • Fb
    सोनाली कोल्हटकर
    समझिए कैसे फ़ेसबुक का मुनाफ़ा झूठ और नफ़रत पर आधारित है
    12 Oct 2021
    फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ़्रांसेस हौगेन द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अच्छी तरह जानता है कि उसके प्लेटफॉर्म का समाज पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव…
  • attack on dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान
    12 Oct 2021
    दलित समाज के लोगों पर हमलों की घटना लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां राजस्थान के हुनुमानगढ़ जिले में दलित युवक जगदीश की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं तमिलनाडु के तंजावुर में दलित युवक प्रभाकरण की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License