NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बुलंदशहर कांड : पुलिस जांच की दिशा ही सवालों के घेरे में
सवाल उठता है कि इस घटना में सारी कार्रवाई गौकशी करने वाली शिकायत पर ही क्यों हो रही है। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित की हत्या और पुलिस थाने के सामने हुई हिंसा पर क्यों नहीं हो रही है?
अजय कुमार
20 Dec 2018
बुलंदशहर
साभार -द हिन्दू

 

गौकशी और भीड़ हिंसा के मामलें में देश के मौजूदा माहौल का प्रतिनिधित्व करने वाली बुलंदशहर की घटना ने एक मोड़ ले लिया है। देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि 83 पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी राज्य के नफ़रती माहौल पर चिंता जताई है। इन प्रशासनिक अधिकारियों में भूतपूर्व विदेश सचिव श्याम शरण और सुजाता सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकर के पद पर काम कर चुके शिव शंकर मेनन और दिल्ली के पूर्व राज्यपाल रह चुके नजीब जंग जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह सभी मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन सभी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलकर ‘अपनी कट्टरता का घमंड दिखा रहे हैं।’

भूतपूर्व आईएएस अधिकारियों की इस नाराजगी के पीछे प्रशासनिक विफलता की वजह से उत्तर प्रदेश में पैदा हो रहे नफ़रती माहौल को जिम्मेदार बताया है। इन सभी अधिकारियों का कहना है कि पुलिस हिंसा फैलाने के आरोपियों की बजाय गौकशी के आरोपियों को पकड़ने में जुटी है जबकि हिंसा के नामजद आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

उनका कहना है कि सरकार और खुद मुख्यमंत्री ने इसे सांप्रदायिक एजेंडे के तहत फैलाई गई हिंसा माना था और इस बारे में काफी विस्तार से चर्चा हुई थी। बावजूद इसके अब सारा फोकस गौकशी और इसके आरोपियों की तरफ शिफ्ट हो गया है। इस वजह से घटना की ठीक तरह से जांच नहीं हो पा रही है। 

तकरीबन दो हफ्ते पहले हुई बुलंदशहर की घटना में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या हुई और संबंधित एफआईआर में 27 लोगों के नाम हैं, 50-60 लोग अज्ञात बताए गए हैं मगर गिरफ्तारी चार की हुई है। यानी 87 नाम-अनाम लोगों में से मात्र 4 गिरफ्तार हुए हैं। मुख्य आरोपी भी गिरफ्तार नहीं हुआ है। इस घटना में सुबोध कुमार सिंह के साथ-साथ एक युवक सुमित की भी मौत हुई थी। इस घटना के बाद जारी हुए वीडियो में सुमित पत्थर लेकर पुलिस को मार रहा है। बहुत सारे लड़के पत्थरों से पुलिस को दौड़ाते हुए खेतों की तरफ ले गए हैं। तभी दिखता है कि सुमित को गोली लगी है। यानी पुलिस की गोली से पहले सुमित पुलिस पर पत्थरों से हमला कर रहा था।

इस भीड़ में सिर्फ लड़के हैं। 18-20 साल के लड़के। इस घटना पर कई तरह के वीडियो मिले हैं। एक वीडियो में आवाज़ सुनाई दे रही है कि कथित रूप से मांस कहां से आया, कौन लाया, किसने काटा। पुलिस जांच कर रही है। जिनके खेत में मांस मिलने की खबर आई थी वो झगड़ा नहीं चाहते थे, लेकिन दूसरे गांव से लोग झगड़े के लिए आ गए। आने से पहले उनकी पूरी तैयारी दिखती है। ट्रैक्टर, कट्टे, हथियार, पत्थर, डंडे सब लेकर आए थे। खेत में जीप खड़ी है। वीडियो देखने से लगता है कोई पिस्टल लेकर सुबोध कुमार सिंह के करीब जाता है। गोली की आवाज़ आती है मगर कैमरा जब इस अधिकारी के पास पहुंचता है तो वह आदमी फ्रेम से हट जाता है। पीछे चला जाता है। आवाज़ आती है अरे ये तो एसओ है। इसके बाद सब भागने लगते हैं।

गौकशी के मामले में शिकायतकर्ता योगेश राज है। जबकि खेत राजकुमार प्रधान का था। पत्रकारों ने राजकुमार प्रधान की पत्नी से बात की थी, जिनके खेतों में मांस फेंका गया था। उन्होंने यही कहा कि हम मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे, लेकिन भीड़ आ गई और ज़बरदस्ती ट्राली में डालकर आगे ले गई। यह भीड़ किस इरादे से आई थी, बताने की ज़रूरत नहीं है। राजकुमार प्रधान के खेत के बगल में प्रेमजीत का भी खेत है। वहां भी मांस के टुकड़े पड़े थे। प्रेम जीत सिंह ने ट्रॉली लाने वालों में बजरंग दल का नाम लिया। एफआईआर में जिनके नाम हैं उनमें से एक योगेश राज के बारे में मीडिया में अब काफी डिटेल है। यह  बजरंग दल का ज़िला संयोजक है।पुलिस थाने के सामने भीड़ फ़ैलाने से जुड़े एफआईआर में योगेश राज के अलावा 26 और नाम हैं।

इस घटना के बाद से हुआ यह है कि योगेश राज द्वारा दायर शिकायत के तहत गिरफ्तार किये गये चार मुस्लिम लोगों को पुलिस ने पहली नजर में निर्दोष पाया है और उन्हें बरी कर दिया है। योगेश राज द्वारा दायर शिकायत में सात मुस्लिम लोग शामिल थे। योगेश राज का कहना था कि इसने इन लोगों को गाय काटते हुए देखा है। बाद में पता चला कि इन सात लोगों में से दो नाबालिग थे और चार को अभी पुलिस द्वारा ही निर्दोष बता दिया गया है। अभी हालिया स्थिति यह है कि गौकशी के मामलें में एसआईटी की टीम ने तीन ऐसे मुस्लिम लोग की गिरफ्तारी की है, जिनका नाम योगेश राज द्वारा दायर शिकायत में नहीं था। इसका साफ़ मतलब यह है कि पुलिस भी ऐसी स्थिति में पहुँच चुकी है,जहाँ वह यह भरोसा कर पाए कि योगेश राज की शिकायत फर्जी है, लेकिन योगेश राज अभी फरार है और पुलिस उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बुलंदशहर के पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कहा मंगलवार को गिरफ्तार किये गये तीन लोग रईस, काला और नदीम हैं। सभी की उम्र तकरीबन 30 साल है और पुलिस ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसकी गिरफ्तारी की है। चौधरी ने वैज्ञानिक तथ्यों को बताते हुए कहा कि इनसे एक ऐसी गाड़ी जब्त की गयी है, जिसका इस्तेमाल यह गौमांस के व्यापार के लिए करते  थे और साथ में ऐसे चाकुओं की बरामदगी की है, जिसका इस्तेमाल गाय काटने में किया जाता है। काला को दो साल पहले गौकशी के मामलें में गिरफ्तार किया गया था और इस समय इसे बेल पर रिहाई मिली हुई थी। यानी वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर ऐसे सबूत जिससे आरोपी होने के सिवाय भी कई तरह के अंदेशे निकल सकते हैं, जैसे कि गिरफ्तार किये गये लोगों के सगे सम्बन्धी इन सबूतों का पूरी तरह से खंडन करते हैं।

अब सवाल उठता है कि इस घटना में सारी कार्रवाई गौकशी करने वाली शिकायत पर ही क्यों हो रही है। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित की हत्या और पुलिस थाने के सामने हुई हिंसा पर क्यों नहीं हो रही है। इन सवालों का जवाब क्यों नहीं ढूंढा जा रहा है?

-योगेश राज की शिकायत में दर्ज जब चार लोग बेगुनाह साबित हो गये हैं और धीरे धीरे यह साफ़ हो रहा है कि बजरंग दल के जिलाध्यक्ष योगेश राज की शिकायत झूठी है तो अभी तक योगेश राज की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? जबकि भीड़ उकसाने से जुड़ी पुलिस के खुद की प्राथमिकी में योगेश राज का नाम शामिल है।

 -जब यह बात साबित हो चुकी है कि सुमित और इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या सामान आकार के बोर वाले पिस्तौल से हुई थी। जारी हुए वीडियो में पिस्तौल का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति जीतू फौजी की गिरफ्तारी हो चुकी है तो बिना पुलिस पूछ-ताछ के सीधे उन्हें न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा गया?

 -पुलिस के सामने मौजूद भीड़ के पास पत्थर, कट्टे, गोलियां, हथियार कहां से आए? क्या ये सब अचानक मौके से जुटा लिया गया या किसी तैयारी का हिस्सा था।

 - इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह पहले अखलाक से जुड़े मामले में भी छानबीन कर रहे थे। क्या सुबोध कुमार सिंह की छवि खास तरीके से गढ़ी गई थी जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया। जिले भर के भाजपा नेताओं का एक पत्र मिला था जो उन्होंने इसी एक सितंबर को अपने सासंद भोला सिंह को लिखा था। पत्र के एक हिस्से में लिखा है- आपको अवगत कराना चाहते हैं कि प्रभारी निरीक्षक स्याना सुबोध कुमार सिंह का व्यवहार आम जनता के प्रति अभद्र है। क्षेत्र में चोरी, पशुचोरी, अवैध वाहन बढ़ते जा रहे हैं, क्षेत्र में वाहन चेकिंग के नाम पर नगर वासियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है एवं अवैध वसूली की जा रही है। हिन्दुओं के धार्मिक कार्यों के आयोजन में अड़चन पैदा कर हिन्दू समाज में आक्रोश पनप रहा है। ऐसे पुलिस अधिकारी का तत्काल स्थानांतरण कराकर इनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही कराने की कृपा करें।तो क्या यह सारी घटना इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या करवाने से तो नहीं जुड़ी है?

 - दिल्ली के करीब के इलाके में गौकशी रोकने से जुड़ी घटनाएँ इतना भयावह रूप कैसे ले लेती है कि कभी भीड़ मिलकर एक इन्सान को मार देती है और कभी भीड़ पूरे पुलिस स्टेशन पर धावा बोल देती है। इसमें स्थानीय नेताओं सहित स्थानीय नागरिकों की कितनी सहमति होती है।

-क्या यह मामला केवल गौकशी और भीड़ हिंसा से जुड़े दोषियों को सजा देने भर से खत्म हो जाएगा या इसके लिए कुछ और भी करना पड़ेगा।

 इसलिए पूर्व प्रशासनिक अधिकारी ने अपने पत्र में भी लिखा है कि बुलंदशहर घटना से जुड़े कई विडियो उपलब्ध हैं. सारे विडियो से यह साफ़ तौर पर जाहिर होता है कि पुलिस थाने के सामने हिंसा फ़ैलाने में कौन से लोग जिम्मेदार थे. इन सारे लोगों को गिरफ्तार करने की बजाए उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह से गौकशी से जुड़े मामलें की छानबीन कर रही है और केवल मुस्लिम होने के आधार पर लोगों को गिरफ्तार कर रही है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

cow slaughter
Subodh Kumar Singh
Yogi Adityanath
Uttar pradesh
bulandshahr violence
bulandshahar
IAS officers

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License