NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बुंदेलखंड सूखा: तालाबों, कुओं को पुनर्जीवित करने के लिए बांदा के ग्रामीण कर रहे कड़ी मेहनत
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाक़े के बांदा ज़िले में कुआं तालाब जियाओ अभियान के तहत भूजल स्तर को बेहतर करने और जल संरक्षण के लिए लोग निरंतर जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
सौरभ शर्मा
05 Jul 2019
बुंदेलखंड सूखा

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाक़े के सूखाग्रस्त बांदा ज़िले के निवासी उमा शंकर सिंह न सिर्फ अपने खेतों की सिंचाई के लिए बल्कि बुरे वक़्त के लिए जल को संरक्षित करने के लिए बारिश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

बांदा के नरैनी गांव के निवासी उमा शंकर और इनके पड़ोसियों ने अपने इलाक़े में तालाबों और कुओं की मरम्मत करने और खोदने का काम शुरू कर दिया है ताकि गर्मी के दिनों में भूजल का स्तर बेहतर रह सके और पानी के संकट को दूर किया जा सके।

शंकर का कहना है कि वह अपने इलाक़े में तालाबों और कुओं को खोदने के लिए हर रोज़ सुबह 4 से 4.30 बजे के बीच उठते हैं और अपने दोस्तों, पड़ोसियों और बच्चों के साथ खुदाई के काम में लग जाते हैं।

बांदा के लगभग सभी गांवों में कुदाल और अन्य कृषि उपकरणों से लोगों को सुबह और शाम के वक़्त खुदाई करते हुए देखना एक आम बात हो गई हैं क्योंकि ये लोग ज़िला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम 'कुआं तालाब जियाओ अभियान' द्वारा प्रेरित हुए हैं।

11_17.jpg
इस मुहिम का उद्देश्य खुदाई, सफ़ाई और अन्य प्रयासों से इलाक़े के कुआं, तालाब जैसे जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करना है। अब सरकार भी कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ इस मुहिम में शामिल हो गई है। लेकिन 471 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इस मुहिम के लिए दिन-रात काम करके कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Well trenching in Banda. by Saurabh Sharma.jpeg

बुंदेलखंड क्षेत्र के अंतर्गत बांदा ज़िला सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में से एक रहा है। यहाँ पिछले कई दशकों में गंभीर स्तर पर सूखे या सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है और निरंतर तापमान में वृद्धि का साक्षी रहा है।

हालांकि विशेष बुंदेलखंड पैकेज के हिस्से के रूप में इस ज़िले को कई करोड़ रुपये मिलते रहे हैं। ये पैकेज 2009 में तत्कालीन कैबिनेट द्वारा पारित किया गया था लेकिन इस सूखे क्षेत्र के लोगों को राहत देने के लिए शायद ही कुछ किया गया हो।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में बांदा ज़िले को बुंदेलखंड पैकेज से 130.20 करोड़ रुपये का पैकेज मिला है और 313 बांधों के निर्माण के लिए 21.73 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस ज़िले को राज्य कोष से 100.55 करोड़ रुपये भी मिले हैं, जिसमें से 22.42 करोड़ रुपये ज़िला प्रशासन द्वारा विभिन्न कार्यों पर ख़र्च किए गए।

जल संरक्षण को लेकर सक्रिय एक्टिविस्ट राजेंद्र सिंह, जिन्हें "भारत के जलपुरूष" के रूप में जाना जाता है, वे कहते हैं, "जल संरक्षण समय की आवश्यकता है और पुराने जल स्त्रोतों का जिर्णोद्धार करना सबसे अच्छी बात है जो प्राथमिक स्तर पर किया जा सकता है। इसे वर्षों पहले शुरू किया जाना चाहिए था लेकिन अभी भी देर नहीं हुई। ग्रामीणों के इस तरह के प्रयासों से भूजल के स्तर को बरक़रार रखने में मदद मिलेगी और बुंदेलखंड के खोए हुए गौरव को वापस लाने में भी मदद मिलेगी।”

बुंदेलखंड के रहने वाले एक्टिविस्ट आशीष सागर कहते हैं, "इस मुहिम में बड़ी संख्या में लोगों को भाग लेते देखना अच्छा लगता है लेकिन अवैध रेत खनन, उद्योगों और अन्य तंत्रों द्वारा भूजल के बेजा इस्तेमाल पर रोक लगाने की आवश्यकता है। प्रशासन को उन तालाबों को भी वापस लेने के लिए काम करना चाहिए जिन पर माफ़ियाओं द्वारा क़ब्ज़ा कर लिया गया है।"

ज़िला प्रशासन के अनुमान के अनुसार बांदा कम से कम 3.9 किलोलीटर पानी बचाने में सक्षम होगा, जबकि ज़मीन में 11,001 लीटर पानी रिसने की भी उम्मीद है जो पृथ्वी के क्रस्ट के नीचे जलीय चट्टानी परत में पानी का स्तर बरक़रार रखने में मदद करेगा और मिट्टी की नमी बनाए रखने में भी मदद करेगा।

बांदा में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, एक समय में चट्टानी उपजाऊ मैदान कुओं और तालाबों के मामले में काफ़ी समृद्ध था और यहाँ 7,508 कुएं हैं जिनमें से 3,223 अभी भी मौजूद हैं जबकि बाक़ी या तो सूख चुके हैं या कचरा डालने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। 2,292 तालाब भी थे लेकिन अब केवल 1,193ही बचे हैं क्योंकि इनमें से ज़्यादातर तालाब पर माफ़ियाओं ने क़ब्ज़ा कर लिया है।

Well trenching in Banda. by Saurabh Sharma_0.jpeg

बांदा के भूजल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में बांदा में औसत वर्षा 1,236 मिमी थी जबकि भूजल स्तर औसतन 7.45 से 8.85 मिमी तक नीचे चला गया।

इस मुहिम के अगुआ बांदा के ज़िला मजिस्ट्रेट हीरा लाल का कहना है कि जल स्त्रोतों के पुनरुद्धार के लिए सभी 471 ग्राम पंचायत तक पहुंचने का लक्ष्य 15 जुलाई निर्धारित किया गया है और इस लक्ष्य को काफ़ी हद तक हासिल कर लिया जाएगा।

ज़िला मजिस्ट्रेट ने कहा, ''मैंने केवल यही किया है कि आने वाली पीढ़ियों में काम करने का जोश पैदा कर दिया जाए। सूखे की स्थिति आने वाले दिनों में बढ़ सकती है या नहीं बढ़ सकती है और हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए संसाधनों के साथ तैयार रहना चाहिए। जो काम ग्रामीण कर रहे हैं उससे उन्हें भविष्य में मदद मिलेगी। उनकी ज़्यादा मदद करने के लिए मैंने हर एक गांव में कम से कम एक तालाब खोदने का आदेश दिया है और इसके लिए नरेगा से राशि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों और प्रशासन दोनों के लिए बेहतर परिणाम होंगे।"

drought
water scarcity
Kuan Talab Jiyao Abhiyan
Groundwater Recharging
Water conservation
Banda district
Bundelkhand
Uttar pradesh

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी बवाल


बाकी खबरें

  • सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 
    28 Apr 2022
    उत्तराखंड राज्य में विद्यालयों की स्थिति के आंकड़े दिखाते हैं कि सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिसके चलते विद्यार्थियों का नामांकन कम हो रहा है, और अंत में कम नामांकन के चलते स्कूल बंद…
  • प्रेम कुमार
    ‘जनता की भलाई’ के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत क्यों नहीं लाते मोदीजी!
    28 Apr 2022
    अगर पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में लाए जाते हैं तो कीमत में 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक की कमी हो जाएगी। जनता केंद्र और राज्यों के दोहरे कराधान से भी बच जाएगी। जनता की भलाई के लिए बीजेपी की सरकार…
  • वी. श्रीधर
    एलआईसी की आईपीओ: बड़े पैमाने का घोटाला
    28 Apr 2022
    एलआईसी को लिस्टेड करने की इस बेबुनियाद हड़बड़ी में दिग्गज "निवेशकों" के पैसे बनाने की सनक को बढ़ावा देते हुए लोगों के हितों की भयानक अनदेखी नज़र आती है। आईपीओ की क़ीमत से यह संकेत मिलता है कि यह शायद…
  • सुभाष गाताडे
    दलित जननेता जिग्नेश को क्यों प्रताड़ित कर रही है भाजपा? 
    28 Apr 2022
    ‘क्या अपने राजनीतिक आकाओं के फायदे के लिए एक जननेता को प्रताड़ित और आतंकित किया जा रहा है’?
  • अनीस ज़रगर
    कश्मीर में एक आर्मी-संचालित स्कूल की ओर से कर्मचारियों को हिजाब न पहनने के निर्देश
    28 Apr 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती ने भाजपा पर महिलाओं की आजादी पर अंकुश लगाने का आरोप लगाया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License