NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा बनाम वाम मोर्चा #3: आदिवासी स्वस्थ्य और चिकित्सा
विभिन्न राज्यों में भाजपा शासन के रिकॉर्ड का त्रिपुरा में वाम मोर्चे के शासन के रिकॉर्ड के बरअक्स रखकर देखने की ज़रूरत है।
सुबोध वर्मा
10 Feb 2018
Translated by महेश कुमार
Tribal Healthcare

भाजपा दावा कर रही है कि वह आदिवासी समुदायों के लिए मसीहा है और इसलिए त्रिपुरा में लोगों को वाम मोर्चे को हराना चाहिए और आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन को सत्ता में वोट देना चाहिए। अन्य बातों के अलावा, भाजपा के बड़े नेताओं ने कहा है कि त्रिपुरा में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सफल नहीं है।

यह और कुछ नहीं बल्कि एक झूठ है। देश में त्रिपुरा को जो बात अन्य सभी राज्यों से उसे अलग करती है वह है, पिछले दशक में राज्य द्वारा चलने वाली स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का अपार विस्तार। इस तथ्य के अलावा कि 2005-06 और 2015-16 के बीच (आधिकारिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार), गाँव स्तर के स्वास्थ्य उप-केंद्रों और क्लस्टर स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या दोगुना हो गयी है और ऐसा त्रिपुरा ही एकमात्र राज्य है जहाँ स्वास्थ्य कर्मियों की अशिष्ट समस्या को सफलतापूर्वक हल किया गया।

ज़्यादातर राज्यों में, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में विशेष रूप से आदिवासी गाँवों में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी है। इसलिए, भौतिक बुनियादी ढाँचे की स्थापना के बावजूद, ये प्रमुख कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं और पूरी व्यवस्था गड़बड़ा जाती हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी ग्रामीण स्वास्थ्य आंकड़े 2017 के अनुसार, त्रिपुरा इस बात का अपवाद है यद्यपि आदिवासी इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में 47 डॉक्टरों की आवश्यकता है (जैसा कि भारतीय अस्पताल मानकों में निर्दिष्ट है), त्रिपुरा में पीएचसी और सीएचसी में 97 डॉक्टर थे। दूसरी ओर, चार अन्य बीजेपी शासित राज्यों में पर्याप्त जनजातीय आबादी के साथ, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की कमी थी, जबकि झारखंड में थोड़ा अधिक थे। ध्यान दें कि जहाँ सबसे ज़्यादा डॉक्टरों की कमी है उन तीन राज्यों में भाजपा लम्बे अर्से शासन में हैं।

tribal

नर्सिंग स्टाफ की भी ऐसी ही तस्वीर मौजूद है। त्रिपुरा में आदिवासी क्षेत्रों में 103 नर्सों की आवश्यकता थी, लेकिन वर्तमान में 341 नसें काम कर रही है। बीजेपी के चार राज्यों में से, 2017 में गुजरात में 11% से थोड़ा अधिक है, हालांकि 20 साल तक बीजेपी शासन के बावजूद यह 2016 तक काफी कम था। अन्य तीन राज्यों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में काफी कमी देखने को मिलती है।

tribal

यही प्रवृत्ति प्रयोगशाला तकनीशियनों और फार्मसिस्ट जैसे अन्य प्रमुख कर्मचारियों के लिए भी जारी है। त्रिपुरा के अस्पतालों में और दवाखाने में जेनेरिक दवाएँ बाँटने की एक व्यापक प्रणाली है और इसके लिए फार्मसिस्ट का होना आवश्यक है। आवश्यकता 55 की थी, लेकिन 75 फार्मसिस्ट राज्य के आदिवासी पीएचसी और सीएचसी में काम कर रहे थे। 55 प्रयोगशाला तकनीशियनों की आवश्यकता थी जिनमें से 52 काम पर हैं। सभी चार भाजपा शासित राज्यों में दोनों प्रकार के कर्मियों की संख्या आवश्यकता से बहुत कम थी। झारखंड में फार्मसिस्टों के लिए 69 प्रतिशत और प्रयोगशाला के लिए तकनीशियनों की 52 प्रतिशत की कमी थी।

tribal

यह सब क्या दिखाता है? कि जमीन पर त्रिपुरा की वाम मोर्चा सरकार ने बीजेपी की गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकारों की तुलना में आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की है। आश्चर्य की बात नहीं है कि त्रिपुरा के स्वास्थ्य सूचक इन राज्यों से कहीं ज्यादा बेहतर हैं।

Tribal
BJP
BJP-IPFT
Tripura
Tribal Healthcare

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • 21-year-old Muslim youth hanged himself from one and a half feet high tap
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डेढ़ फ़ीट ऊंचे नल से फांसी लगाई 21 साल के मुस्लिम युवक ने : उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा
    11 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिस हिरासत में 21 साल के अल्ताफ़ की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अल्ताफ़ ने शौचालय के नल से लटक कर फांसी लगा ली। मृतक के पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की हत्या हुई है…
  • UAPA
    अजय कुमार
    UAPA: भारत में कानून के राज को तोड़ने का सबसे धारदार हथियार
    11 Nov 2021
    अगर सरकार चाहें तो UAPA कानून के ज़रिये महज़ आरोप लगाकर लोगों को सालों साल जेल में रख सकती है, जानिए कैसे? 
  • ASHA Workers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
    11 Nov 2021
    पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा…
  • कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    न्यूज़क्लिक टीम
    कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    10 Nov 2021
    फिल्म निर्देशक टी जे ज्ञानवेल और सूर्या-ज्योतिका द्वारा निर्मित तमिल फिल्म 'जय भीम' की प्रोफेशनल और आर्थिक कामयाबी पर किसी को संदेह नहीं। यह फिल्म लोकप्रियता के रिकार्ड बना रही है. तमिल से लेकर…
  • पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    10 Nov 2021
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ फाइजर की एंटीवायरल दवा पेक्सलोविड के बारे में चर्चा करेंगे, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे यह Covid-19 ख़िलाफ़ एक सार्थक विकल्प हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License