NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा का दूसरा तरीका: बिना चुनाव जीते सत्ता कब्जाने का
पिछले चार वर्षों में बीजेपी ने सत्ता हासिल करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया है।
सुबोध वर्मा
23 May 2018
Translated by महेश कुमार
BJP

बीजेपी एक सत्ता की भूख के संगठन के सभी संकेत प्रदर्शित कर रही है जो अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकती है। 2014 के नतीजों के चलते मोदी ने पार्टी को लोकसभा में नाटकीय जीत दिलाने के बाद और फिर कई विधानसभा चुनाव जीतकर, इसके नेतृत्व और अनुयायियों - साथ ही इसके सलाहकार, आरएसएस - ने अपने भीतर भ्रम पाल लिया वे पवित्र और अजेय हैं। मोदी की बड़े पैमाने पर अपील के लिए और शाह की चुनाव प्रबंधन के लिए प्रशंसा की जाने लगी। कुछ भी उन्हें रोक नहीं सकता था, यह फैलाया गया कि उन्हें कोई नहीं रोक पायेगा।

फिर भी, वे लगातार अपनी ज़मीन खो रहे हैं। 2014 के बाद से, 27 विधानसभा चुनाव देश में हुए हैं। इनमें से, बीजेपी ने सात राज्यों में हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, त्रिपुरा, यूपी, असम, गुजरात में पूर्ण बहुमत हासिल किया। और अपने पूर्व चुनाव सहयोगियों के साथ, इसने चार राज्य में जीत हासिल की उनमें: एपी, झारखंड, मणिपुर, नागालैंड शामिल यहीं। यह कुल 11 राज्य है।

तो हम यह कैसे सुनते हैं कि भाजपा अब 21 राज्यों में शासन करती है और इसमें 15 मुख्य मंत्री उसके हैं। इसका जवाब इस तथ्य में निहित है कि उनकी योजना ए के अनुसार सामान्य रूप से चुनाव जीतने के लिए (और अभी भी है) (मोदी, पैसा, बाहुबल, सांप्रदायिक और जातिगत राजनीति, जुमले भरे वादे आदि का इस्तेमाल करते हैं) लेकिन उनकी एक योजना बी भी है।

यह योजना बी क्या है? कर्नाटक में हालिया घटनाएं दिखाती हैं, या फिर बिहार भी एक उद्धरण है वहां पिछले दरवाजे से कैसे सत्ता हासिल की गयी है, इससे पहले, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मेघालय इस के उदाहरण हैं। जैसे ही समय बीतता है, और मोदी सरकार की विफलताओं में का [पुलिंग बड़ा होता है , हम इस योजना बी की अचानक सक्रियता को बढ़ते देखते हैं।

अरुणाचल प्रदेश में, 2014 में विधानसभा चुनावों ने जो परिणाम दिया उसमें : बीजेपी 11; कांग्रेस 42; अरुणाचल की पीपुल्स पार्टी 5; निर्दलीय 2 थे. लेकिन इन दो अशांत वर्षों के दौरान, संख्याएं बदल गईं: बीजेपी की 48; कांग्रेस 1; पीपीए 9; निर्दलीय 2 हो गयी! इसे कहा जाता है थोक में की गयी तोड़-फोड़, फिर राष्ट्रपति शासन का जादू चला, पूर्व मुख्यमंत्री की मौत होती है, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप होता है, बाद में एक अनिच्छुक गवर्नर और आदेश न मानने वाले को वापस बुला लिया जाता है और मुख्यमंत्रियों को और यहाँ इस तरह  भाजपा के पास सरकार आ जाती है!

अक्टूबर-नवंबर 2015 में आयोजित 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा चुनावों में बीजेपी को सिर्फ 53 सीटें मिलीं और 2 उनके सहयोगियों के पास गईं। यह आरजेडी-जेडी (यू)-कांग्रेस गठबंधन द्वारा विशाल जीत हासिल की गयी, जिसे चुनाव से पहले हुए गठबंधन की वजह से 178 सीटों हासिल हुयी। फिर भी, बीजेपी ने इस गठबंधन को तोड़ दिया, जेडी (यू) और उसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लुभाया, और जुलाई 2017 में गठबंधन सरकार बनाई। अमित शाह कर्नाटक में कांग्रेस और जेडी (एस) के बीच "अपवित्र गठबंधन" के बारे में शिकायत कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी के गठबंधन और सरकार के बारे में क्या। बिहार में चोर दरवाजे से सरकार के गठन का क्या?

2014 में झारखंड के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने 81 सदस्यीय विधानसभा में 35 सीटों और एजेएसयू ने 5 सीटें जीती थीं। वे बहुमत से दूर थे। इसलिए, फिर उन्होंने कुछ स्वतंत्र सदस्यों पर विजय प्राप्त की और बहुमत हासिल करने के लिए झारखंड विकास मोर्चा के 8 विधायकों में से 6 को अपने गठबंधन में ले लिया।

फिर, मार्च 2017 में, बीजेपी ने गोवा विधानसभा में 40 सीटों में से केवल 13 सीटें जीतीं। छोटे स्थानीय दलों के साथ परिणामों की घोषणा के बाद उन्होंने एक गठबंधन किया और सरकार बनाई। यहां तक कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में, कांग्रेस 17 सीटों के साथ विपक्ष में बैठी है।

मणिपुर में, बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में 60 में से 21 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 28 सीटें मिली थी। लेकिन बीजेपी ने दो स्थानीय दलों एनपीपी और एनपीएफ और अकेले विधायक को अपने साथ मिलाकर सरकार बनाने का दावा थोक दिया। पूर्व भाजपा सांसद, राज्यपाल नज्मा हेपतुल्ला ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया।

मेघालय में, भाजपा ने 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए मार्च 2018 के चुनावों में सिर्फ दो सीटें जीतीं। लेकिन इसने सरकार का हिस्सा बनने के लिए एनपीपी के साथ एक पोस्ट पोल गठबंधन किया। फिर एक उपयोगी गवर्नर, बिहार के पूर्व भाजपा एमएलसी गंगा प्रसाद ने मदद की।

और, अंत में कर्नाटक के हालिया चुनाव में, 224 सदस्यीय विधानसभा में केवल 104 विधायकों (2 सीटों के चुनाव नहीं हुए) के बावजूद, गुजरात के पूर्व विधायक वाजूभाई वाला ने राज्य के राज्यपाल के रूप में अपनी नई भूमिका में भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, और बड़े गठबंधन  कांग्रेस-जेडी (एस) को नजरअंदाज कर दिया। अगर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया होता और अगले दिन बहुमत साबित करने के लिए नहीं कहा होता, तो बीजेपी कर्नाटक को भी अपनी सफलता की सीढ़ी के रूप में गिनवा रही होती। येदियुरप्पा ने हार का सामना करने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया और एक नई कांग्रेस-जेडी (एस) सरकार का गठन होने का रास्ता प्रसस्त हुआ। जिसे 55 घंटे लंबे बीजेपी शासन के बाद स्थापित किया गया।

7 राज्यों में घटी ये घटनाएं क्या बताती हैं कि बीजेपी सरकार बनाने के लिए कुछ भी कर सकती है। यह विधायकों, यहां तक कि पार्टियों को विलय करने या उन्हें दल बदलने के लिए तैयार करती है, यह अपने गवर्नरों का उपयोग करती है, यह गठजोड़ तोड़ती है और नए गठजोड़ बनाती है, सत्ता के लिए यह अपने सहयोगियों को त्याग देगा या उनके साथ मिल जाएगा। एक शांत लहर सुप्रीम कोर्ट या अन्य अदालतों के हस्तक्षेप और राजनीतिक दलों की तरफ से चल रही है, किसी भी तरह से भाजपा की लोकतंत्र को तबाह करने वाली  टीम से लोकतांत्रिक मानदंडों और कानूनों को बचाने की कोशिश कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण 2019 का लोकसभा चुनाव बस एक वर्ष से भी कम की दुरी पर है और तीन महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव (राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) भी आने वाले हैं, यह देखना होगा की शाह-मोदी टीम और आरएसएस का झुण्ड इन चुनावों का प्रबंधन कैसे करता है।

BJP
Congress
Plan B
Karnataka Assembly Elections 2018
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  •  अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    09 Jan 2022
    प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में इतिहास को कई बार अपनी सुविधा से बदलते पाए गए हैं। 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय इस विषय पर इतिहासकार हरबंस मुखिया से…
  • Kejriwal
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक
    09 Jan 2022
    देश में हर रोज़ हो रहीं घटनाओं के बीच बहुत सी ख़बरें आगे-पीछे हो जाती हैं। ख़बरों के इस राउंड-अप में पुरानी ताजी ख़बरों को एक साथ बताया गया है। जिसमें आर्थिक-राजनीतिक सब तरह की ख़बरें हैं।
  • lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए
    09 Jan 2022
    मुख्यमंत्री ने पुलिस को जांच के आदेश देते हुए अपने ट्वीट में कहा है, कि अमन चैन से रहने वाले झारखंडवासियों के इस राज्य में वैमनस्य कि कोई जगह नहीं है।
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं
    09 Jan 2022
    सुब्ह-ए-बनारस में सूरज की लालिमा के साथ अपनी सांसों को आवाज़ बनाकर शहनाई के जरिए रंग भरने वाले बिस्मिल्लाह खां को गंगा का किनारा आज भी ढूंढता है। बनारस में जो नदी आठों पहर अमनपसंद लोगों का पांव पखारती…
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: खाली कुर्सियों का डर न कहो इसको!
    09 Jan 2022
    अब यह तो विपक्ष वालों की सरासर बेईमानी है कि पीएम जी के संदेश में से थैंक्यू को छोडक़र, ‘जिंदा लौट आया’ को ही पकडक़र बैठ गए हैं।… और प्लीज, पीएम जी की नहीं हुई सभा में खाली कुर्सियों के ताने मारना बंद…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License