NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा के लिए गले की फांस बनती प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी
भोपाल लोकसभा सीट की भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर के बयानों के बाद भाजपा को डर है कि कट्टर हिन्दुत्व का उसका दांव उल्टा न पड़ जाए।
राजु कुमार
25 Apr 2019
pragya thakur
Image Courtesy : Lokmatnews.in

भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में पहचान बना चुकी भोपाल लोकसभा सीट पर जीत हासिल करना इस बार भाजपा के लिए मुश्किल है। न केवल भोपाल बल्कि कई अन्य सीटों पर भी ध्रुवीकरण के प्रयासों में भाजपा असफल नजर आ रही है। कई दिग्गज नेताओं के नाम पर मंथन के बाद आखिरकार भाजपा ने भोपाल सीट के बहाने देशव्यापी ध्रुवीकरण की मंशा से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया, लेकिन उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रज्ञा ठाकुर के बयानों ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया। भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं ने गोल-मटोल तरीके से प्रज्ञा ठाकुर के बयानों को उनके निजी बयान बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। वे उनके बयानों का असर भी देखना चाहते थे और विपक्षी धार को कमजोर भी करना चाहते थे। लेकिन प्रज्ञा के बयानों का असर भाजपा के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं दिख रहा है। भाजपा नेताओं का एक समूह भी प्रज्ञा की उम्मीदवारी से नाखुश है। उन्हें डर है कि यदि भाजपा की हार हुई, तो प्रज्ञा के कारण उनका वोट बैंक भी कमजोर हो जाएगा।

प्रज्ञा की उम्मीदवारी के बाद हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा को डर था कि प्रज्ञा की उम्मीदवारी निरस्त न हो जाए। इसलिए भाजपा ने मौजूदा सांसद आलोक संजर से भी डमी उम्मीदवार के रूप में नामांकन करवाया, ताकि प्रज्ञा का नामांकन निरस्त होने की स्थिति में भाजपा का कोई उम्मीदवार मैदान में जरूर रहे। प्रज्ञा के बयान भाजपा के कट्टर समर्थकों के अलावा अन्य मतदाताओं के गले नहीं उतर रहे हैं। बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर प्रज्ञा द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद चुनाव आयोग ने उनसे जवाब मांगा था। प्रज्ञा ठाकुर द्वारा दिए गए जवाब से चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं हुआ और उसने एफआइआर दर्ज कराने का निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी को दिया। साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो गई। इसके पहले मुंबई के तत्कालीन एटीएस चीफ शहीद हेमंत करकरे को लेकर साध्वी प्रज्ञा ने जो बयान दिया था, उससे भी भाजपा नेताओं का एक समूह नाराज दिखाई दिया। बयानों में संयम बरतने को लेकर भी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने साध्वी प्रज्ञा को हिदायत दी, लेकिन शुरुआत से ही आत्मरक्षात्मक रूख अपनाने के बाद भाजपा का दिग्विजय सिंह पर हावी हो पाना मुश्किल लग रहा है।

भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब पर विश्वास करने वाले बुद्धिजीवियों का एक धड़ा चिंतित है कि सांप्रदायिक बयानों के बीच भोपाल की फिजां बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। इसे लेकर मध्यप्रदेश सांस्कृतिक मोर्चा द्वारा प्रदर्शन भी किया गया। सांस्कृतिक मोर्चा से जुड़े वरिष्ठ चित्रकार मनोज कुलकर्णी का कहना है, ‘‘भोपाल में भाजपा ने जिस उम्मीदवार को उतारा है, उसके बयानों को लेकर संस्कृतिकर्मी एवं बुद्धिजीवी वर्ग चिंतित है। इस तरह के भड़काऊ बयान से भोपाल की भाईचारे की परंपरा पर चोट पहुंचाने की साजिश की जा रही है। इस तरह की नफ़रत की राजनीति के खिलाफ लेखक, कलाकार और समाजसेवी प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि इन पर अंकुश लगाया जा सके।’’ वरिष्ठ समाजसेवी राजेन्द्र कोठारी का कहना है, ‘‘भोपाल में भाजपा ने जिस उम्मीदवार को उतारा है, वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शह पर किया गया है। क्या हम भोपाल से सांप्रदायिकता का संदेश देना चाहते हैं। जनता को इस सवाल से रूबरू होना चाहिए और हमें नफ़रत की राजनीति के खिलाफ संदेश देने की जरूरत है। हमें बताना होगा कि हमें धर्मयुद्ध नहीं चाहिए।’’

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीएम) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह का कहना है, ‘‘17 वीं लोकसभा के चुनाव पूरे देश के लिए ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस बार दांव पर लोकतंत्र, देश का संविधान, संघीय ढांचा, संवैधानिक संस्थाएं और न्यायपालिका तक लगी हुई हैं। इन परिस्थितियों में भोपाल लोकसभा से भाजपा का प्रत्याशी एक स्पष्ट संकेत है कि भाजपा और संघ परिवार देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशी भाजपा की राजनीतिक हार है। जो पार्टी 15 साल तक र्निबाध रूप से प्रदेश में सत्ता में रही। पिछले पांच साल से केन्द्र में राज कर रही है। उस पार्टी के पास चुनाव लडऩे के लिए कोई राजनीतिक चेहरा नहीं है। इसलिए भाजपा ने एक ऐसा कट्टर साम्प्रदायिक चेहरा प्रस्तुत किया है, जिसके अभिनव भारत के साथ रिश्ते हैं। जो मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस सहित कई बम विस्फोटों के आपराधिक केसों में अभियुक्त है। संघ के स्वंयसेवक सुनील जोशी के हत्या के साथ भी इसका नाम जुड़ा हुआ है।’’

सीपीएम सचिव ने बताया, ‘‘आज भाजपा जिन्हें हिन्दुत्व का प्रतीक बना रही है। कभी संघ ही उन्हें खतरनाक अपराधी मानता था। साध्वी प्रज्ञा का संबंध जिस आतंकवादी संगठन अभिनव भारत से रहा है। उनके बारे में 9 फरवरी 2011 को आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी ने उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था कि कर्नल पुरोहित और दयानंद पांडेय मोहन भागवत पर केमिकल हमला कर उनकी हत्या करना चाहते हैं। इनका संगठन संघ नेता इंद्रेश कुमार की हत्या की भी योजना बना रहा है। भाजपा को बताना चाहिए कि जब वे लोग संघ नेताओं की हत्या की साजिश करते हैं और आतंकवादी गतिविधियों में नाम आता है, तो राष्ट्रवादी कैसे हो जाते हैं?’’ वे कहते हैं, ‘‘हमारी पार्टी भाजपा के सबसे कट्टर, साम्प्रदायिक और देशविरोधी आतंकवादी चेहरे को हराने की अपील करती है। पार्टी इसे लेकर जन अभियान भी संचालित करेगी और 2 मई को पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी भोपाल में बुद्विजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की बैठक को भी संबोधित करेंगे।  हम वामपंथी दलों के साथ मिलकर, भाजपा को हराने का अभियान भी चलाएंगे।’’

वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया कहते हैं, ‘‘भाजपा की जीत-हार से हटकर भी भोपाल के मतदाताओं को नफ़रत की राजनीति को नकाराना चाहिए। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी केन्द्रीय नेतृत्व के इस फैसले से नाखुश है। यही वजह है कि डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा के नेता लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उनकी एकजुटता दिख नहीं रही है। भाजपा ने भले ही एक बड़ा दांव चला हो, लेकिन यह दांव उसके लिए गले की फांस की तरह दिख रहा है।’’

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
BJP
Madhya Pradesh
Bhopal
sadhvi pragya thakur
pragya thakur
Hindutva Agenda
hindutva terorr
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के मामलों में क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई
    04 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,205 नए मामले सामने आए हैं। जबकि कल 3 मई को कुल 2,568 मामले सामने आए थे।
  • mp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर
    04 May 2022
    माकपा और कांग्रेस ने इस घटना पर शोक और रोष जाहिर किया है। माकपा ने कहा है कि बजरंग दल के इस आतंक और हत्यारी मुहिम के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट होकर विरोध कर रहा है, मगर इसके बाद भी पुलिस मुख्य…
  • hasdev arnay
    सत्यम श्रीवास्तव
    कोर्पोरेट्स द्वारा अपहृत लोकतन्त्र में उम्मीद की किरण बनीं हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं
    04 May 2022
    हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं, लोहिया के शब्दों में ‘निराशा के अंतिम कर्तव्य’ निभा रही हैं। इन्हें ज़रूरत है देशव्यापी समर्थन की और उन तमाम नागरिकों के साथ की जिनका भरोसा अभी भी संविधान और उसमें लिखी…
  • CPI(M) expresses concern over Jodhpur incident, demands strict action from Gehlot government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग
    04 May 2022
    माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की…
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल
    04 May 2022
    भारत का विवेक उतना ही स्पष्ट है जितना कि रूस की निंदा करने के प्रति जर्मनी का उत्साह।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License