NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा शासित राज्य: सार्वजनिक परिवहन का निजीकरण
भाजपा सरकार निजीकरण के ज़रिये परिवहन निगम की बहुमूल्य संपत्ति को निजी लोगों में मुफ्त बाँट रही हैI
मुकुंद झा
17 Jul 2018
privatisation of public transport
Image Courtesy: RSRTC

देश के कई राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज़) अनुबंधित बसों (ठेके पर चलने वाली बसों) की आड़ में तेजी से निजीकरण की और बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ये सरकारों की रणनीति का हिस्सा है कि परिवहन निगमों को ठेकेदारी के माध्यम से निजी हाथों में सौंप दिया जायेI पहले की सरकारें भी ऐसा करती आई हैं लेकिन भाजपा की सरकारें, चाहे केंद्र हो या राज्य, निजीकरण की प्रक्रिया को बहुत तेज़ी से आगे बढाती हैंI सभी भाजपा शासित राज्यों, चाहे राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश हो या फिर छतीसगढ़, में पथ परिवहन निगमों की बसों के सरकारी बेड़ों में लगातार कमी आ रही है और निगम में तेज़ी से निजी बसों को ठेकों पर रखा जा रहा हैI

इसी का ताज़ा उदहारण राजस्थान में देखने को मिल रहा हैI यहाँ पिछले एक साल के दौरान निगम के बेड़ों में एक भी नई बस रोडवेज़  ने नहीं खरीदी जबकि 227 नई अनुबंधित बसें रोडवेज़  ने लगायीं। मई 2018 से लेकर अब तक ढाई माह के भीतर तीन सौ अनुबंधित बसें रोडवेज़  के साथ जुड़ींI इसके बाद पूरे राज्य में अनुबंधित बसों का आँकड़ा एक हज़ार को पार कर गया। जबकि रोडवेज़  की अपनी बसें 4,151 से घटकर 3,690 हो गयीं। एक साल में ही अनुबंधित बसों की संख्या दोगुनी हो चुकी है।

राजस्थान रोडवेज़  वर्कर्स यूनियन,सीटू के प्रदेश महासचिव किशन जी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीधे- सीधे परिवहन निगम को निजी हाथो में बेचना चाहती है I उन्होंने बताया कि,  “रोडवेज़ की बसे 8 लाख किलोमीटर चलने के बाद बेकार हो जाती हैं, उनकी जगह निगम नई बसें खरीदता थाI परन्तु अब भाजपा की वसुंधरा सरकार ने इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी हैI जिससे निगम की बसों की संख्या लगतार घट रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने लोक परिवहन के नाम पर लगभग 1,040 निजी अनुबंधित बसों को सड़क पर उतरा दिया है”I

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार लगातार परिवहन निगम (रोडवेज़) का विराष्ट्रीयकरण कर रहीI इसके लिए सरकार विधानसभा में प्रस्ताव के माध्यम से रोडवेज़ के परिसर, बसस्टैंड, और उनकी अन्य संपत्तियाँ, जो शहर के सबसे प्राइम लोकेशन पर है, उनको सरकार एक अलग प्राधिकरण बना रही जो परिवहन निगम (रोडवेज़ ) समेत सभी परिवहन चालकों से पैसा लेगीI अब तक जो परिवाहन निगम की संपत्ति हुआ करती थी उसे सरकार छीनने का प्रयास कर रही हैI

इसके बारे में बात करते हुए निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि नियमानुसार अनुबंधित बसें रोडवेज़ की कुल बसों के 20% से ज़्यादा नहीं हो सकती। अब यह आँकड़ा 28% तक पहुँच गया है। इसके साथ ही राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में अभी आठ हजार पद खाली पड़े हुए हैंI

राजस्थान रोडवेज़ वर्कर्स यूनियन, सीटू के प्रदेश महासचिव ने आगे कहा की कर्मचारियों ने अपनी 13 माँगो को लेकर 9 जुलाई 2018 को प्रदर्शन किया थाI परन्तु सरकार की तरफ से कोई भी सकारत्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली हैI इसके बाद निगम कर्मचारियों ने अपने आन्दोलन को और भी तेज़ करने का निर्णय लिया हैI

राजस्थान रोडवेज़ वर्कर्स यूनियन, सीटू की मुख्य माँगे इस प्रकार है:-

  • सभी खली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए
  • सभी को समान वेतन और भत्ता मिले 7 वे वेतन आयोग के अनुसार
  • नई 1,000 रोडवेज़ बसें खरीदी जाए
  • अनुबंधित बसों की संख्या कम की जाए और गैरकानूनी रूप से चल रही बसों पर     प्रतिबन्ध लगया जाए
  • 522 चालक जिन्होंने अपना परिक्षण पूरा कर लिया है उन्हें जल्द नियुक्त किया जाए
  • सेवानिवृत्त कर्मचरियों के भत्ते का भुगतान जल्द किया जाए

राजस्थान रोडवेज़ वर्कर्स यूनियन,सीटू के प्रदेश महासचिव ने बताया कि 19 जुलाई को निगम की हर इकाई पर मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री की शवयात्रा निकालकर कर पुतलादहन किया जायेगाI अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो 23 और 24 जुलाई को हर इकाई पर रात में धरना प्रदर्शन किये जायेंगेI इसके बाद कर्मचारी 25 और 26 जुलाई  से प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जायेंगेI

भाजपा शासित मध्यप्रदेश का हाल तो और भी बुरा है, वहाँ तो राज्य परिवाहन निगम को बहुत पहले ही खत्म कर दिया थाI सीटू के मध्यप्रदेश के महसचिव बादल सरोज ने बताया कि, “मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवाहन को पूरी तरह से निजी हाथो में शिवराज सिंह की पहली सरकार के परिवाहन मंत्री बाबुल गौडे ने 13 वर्ष पहले ही दे दिया था और मध्यप्रदेश परिवाहन निगम को खत्म करने का ऐलान कर दिया गया था”I

उन्होंने कहा कि सरकार के जो भी डिपो, वर्कशॉप की ज़मीनें और परिसंपत्तियाँ भाजपा के लोगों या उनसे संबंधित लोगों को कोडियों के दम पर दे दी गयींI इस तरह पूरे राज्य में परिवहन व्यवस्था को निजी हाथो में दे दिया गयाI अभी पूरे प्रदेश में 80% बसों के मालिक भाजपा के लोग ही हैंI

हरियाणा में भी भाजपा सरकार ने परिवाहन निगम के निजीकरण की कोशिश की थी परन्तु वहाँ की यूनियन के विरोध के कारण कुछ हद तक इस पर लगाम लगी हैI  हरियाणा की प्राइवेट बसों में रोडवेज़ परिचालक लगाए जाने की नीति लाने का प्रस्ताव खट्टर सरकार ने किया था, जिसका रोडवेज़ संगठन ने पुरज़ोर विरोध किया और सरकार को चेतावनी देते हैं कि अगर सरकार रोडवेज़ का निजीकरण करने की कोशिश करेगी तो वे चक्का जाम कर देंगे। सरकार की नई परिवहन नीति एवं लम्बित मांगों को लेकर प्रदेशभर में रोडवेज़ कर्मचारी डिपो स्तर पर 12 व 13 अप्रैल 2017 को 24घंटे का धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया थाI

जिसके बाद वहाँ प्राइवेट बसों में रोडवेज़ परिचालकों को लाइसेंस देने पर रोक लगी थी परन्तु उसे फिर कुछ समय बाद ठेके के नाम पर शुरू कर दिया गयाI वहाँ भी लगतार निजी बसों की संख्या में बढ़ रही हैI

रोडवेज़ संगठनों का कहना है कि वर्तमान सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अपने कुछ पूंजीपति मित्रों के हाथों बेचना चाहती है जो देश की जनता के हित में नहींI खासतौर पर मज़दूर और श्रमिकों के जीवनयापन पर इससे बहुत बुरा असर पड़ेगाI इसलिए इन नीतियों का प्रतिरोध करना आवश्यक हैI

सार्वजनिक परिवहन
सार्वजनिक क्षेत्र
ठेका प्रथा
बस
राजस्थान
राजस्थान सरकार
हरियाणा
हरियाणा सरकार
निजीकरण

Related Stories

“पीड़ित को दोष देने की सोच की वजह से हरियाणा रेप का गढ़ बना”

डीटीसी की हड़ताल सफल, सरकार ने वेतन कटौती का सर्कुलर वापस लिया

हरियाणा में ‘रोडवेज़ बचाने’ की लड़ाई तेज़, अन्य विभाग और जनसंगठन भी साथ आए

राजस्थान : जन आंदोलनों के साथ उभरता वामपंथी विकल्प

आठ साल से जारी है किसानों का बांगड़-बिरला सीमेंट प्लांट के खिलाफ संघर्ष

दिल्ली: 20 जुलाई को 20 लाख मज़दूर हड़ताल पर जायेंगे

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

राजस्थान: लहसुन की ऊपज पर लागत से कम दाम मिलने पर 5 किसानों ने की आत्महत्या

गुडगाँव नमाज़ का मुद्दा:साम्प्रदायिक तो है साथ ही बिल्डर द्वारा भूमि के इस्तेमाल का भी मुद्दा भी है

जिगनेश मेवानी को राजस्थान के नागौर जाने के रोका गया, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया विरोध


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर
    30 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर में सरकारी केंद्रों पर गेहूं ख़रीद शुरू हुए दस दिन होने को हैं लेकिन अब तक सिर्फ़ चार किसानों से ही उपज की ख़रीद हुई है। ऐसे में बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठा रहे है।
  • श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 
    30 Apr 2022
    प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 22 अप्रैल 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि ग्रामसभाओं की बैठक गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अलावा, विश्व जल दिवस और स्थानीय शासन…
  • समीना खान
    लखनऊ: महंगाई और बेरोज़गारी से ईद का रंग फीका, बाज़ार में भीड़ लेकिन ख़रीदारी कम
    30 Apr 2022
    बेरोज़गारी से लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर हुई है। ऐसे में ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ईद के मौक़े से कम से कम वे अपने बच्चों को कम कीमत का ही सही नया कपड़ा दिला सकें और खाने पीने की चीज़ ख़रीद…
  • अजय कुमार
    पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
    30 Apr 2022
    पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
  • रौनक छाबड़ा
    LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
    30 Apr 2022
    कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License