NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
भारत की नदियों में ख़तरनाक रसायन का बढ़ता स्तर
एक अध्ययन के मुताबिक सर्फेकेंट्स या अन्य उपभोक्ता उत्पादों में नोनीफ्लेनॉल के उपयोग पर कोई नियमन लागू नहीं है और इस रसायन के संभावित प्रभावों पर कोई सार्वजनिक सूचना भी उपलब्ध नहीं है ताकि इसके साथ जो ज़ोखिम जुड़ा है उसे कम किया जा सके या उससे निपटने के उपाय किए जा सके।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2019
Translated by महेश कुमार
chemical in indian rivers

पर्यावरण पर काम करने वाले एक एनजीओ, टॉक्सिक्स लिंक द्वारा हाल ने "डर्टी ट्रेल: डिटर्जेंट टू वॉटर बॉडीज" नाम से एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन के  मुताबिक नदी के पानी में डिटर्जेंट में पाया जाने वाला जहरीले रासायनिक नोनीफेनॉल के खतरनाक स्तर पाए गए हैं। इस अध्ययन के लिए विभिन्न नदियों से पानी के नमूने लिए गए जो खासकर विभिन्न भौगोलिक स्थानों से होकर बहती हैं- उत्तर प्रदेश में गढ़ गंगा और हिंडन, आंध्रा प्रदेश में कृष्णा, गुजरात में ताप्ती, राजस्थान में बांदी, ओडिशा में महानदी और नागपुर में अंबाझरी झील और दिल्ली के स्थानीय बाजारों से डिटर्जेंट के नमूने लिए गए और उनका अध्ययन और विश्लेषण किया गया।

अध्ययन के अनुसार, नोनीफ्लेनॉल “एक जीनोबायोटिक है और एक अंतःस्रावी (endocrine) विघटनकारी रसायन है, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर नोनीफ्लेनॉल एथोक्सिलेत्स ( ethoxylates) (NPE) के उत्पादन में किया जाता है, जिसे बड़े पैमाने पर सर्फेक्टेंट और अन्य औद्योगिक काम में प्रयोग किया जाता है साथ ही हर दिन इस्तेमाल में आने वाले उपभोक्ता उत्पादों में भी उपयोग किया जाता है।

ये एनपीई "आम तौर पर प्राकृतिक पर्यावरणीय परिस्थितियों में नोनीफ्लेनॉल में टूट जाते हैं और पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश कर" फिर  "खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं जहां यह जैव संचय करते है जिससे गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है।" अध्ययन में यह भी कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन ने पहले ही इस रसायन के खतरे को स्वीकार क लिया है और उन्होने सुरक्षित प्रक्रियाओं को अपनाना शुरु कर दिया है साथ ही इसकी विभिन्न प्रक्रियाओं में उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हालांकि, उपरोक्त देशों ने डिटर्जेंट से नोनीफ्लेनोन के उपयोग को बहुत पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था, लेकिन भारत ने केवल कॉस्मेटिक उत्पादों में इसके उपयोग को प्रतिबंधित किया है। लेकिन, अध्ययन में कहा गया है, "सर्फैक्टेंट्स या अन्य उपभोक्ता उत्पादों में इसके उपयोग पर कोई विनियमन या कानून लागू  नहीं है जो इसके इस्तेमाल पर नज़र रख सके उलटे तथ्य यह है कि रासायनिक के संभावित प्रभावों पर और इसके साथ जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध भी नहीं है।"

भारत में पानी और अपशिष्ट पानी के भीतर नोनीफ्लेनोल या नोनीफ्लेनोल एथोक्सिलेट्स के स्तर के लिए कोई खास मानक स्थापित नहीं हैं; हालांकि, फेनोलिक यौगिक के मानक को पेयजल के मानकों में सूचीबद्ध किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो [IS 4707 (भाग 2: 2009)] ने सौंदर्य प्रसाधनों में नोनीफ्लेनॉल के उपयोग पर पुरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

अध्ययन के लिए पानी के नमूने दो अलग-अलग स्थलों से लिए गए थे – नदी के पहला स्थल और दुसरे स्थल से।  ये समझने के लिए कि नोनफ्लेनोल के इकठ्ठा हो जाने  पर मानवजनित प्रदूषण/अपशिष्ट का क्या प्रभाव पड़ता है ? एंथ्रोपोजेनिक एक्टिविटी (औद्योगिक डिस्चार्ज और कपड़ों की धुलाई) से पहले के बिंदु को बिंदु एक माना गया और उसके बाद हुई एंथ्रोपोजेनिक गतिविधि को बिंदु दो माना जाता है। इस अध्ययन से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि नोनफ्लेनोल की उच्च सांद्रता ( high concentration )  और एंथ्रोपोजेनिक गतिविधियों के बीच आपसी संबंध है क्योंकि नोनीफेनॉल की सांद्रता बिंदु दो पर बहुत अधिक पायी जाती है।
Table 1_1.png

विभिन्न नदियों में बिंदु 1 और बिंदु 2 में नोनीफ्लेनोल की सांद्रता
table 2 new.PNG
अन्य सतही पानी के नमूनों में नोनीफ्लेनॉल की सांद्रता

डिटर्जेंट के मामले में, सभी 12 नमूनों का विश्लेषण करने पर उनमें 0.82 और 11.92 वजन प्रतिशत के बीच नोनीफेनॉल एकाग्रता पायी गयी है।
 table 3 new.PNG
डिटर्जेंट नमूनों में नोनीफ्लेनॉल की सांद्रता
 table 3 continue.PNG
डिटर्जेंट नमूनों में नोनीफ्लेनॉल की सांद्रता

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नोनीफ्लेनोल की उच्चतम मात्रा राजस्थान की बांदी नदी में पाई गई थी जो कपड़ा और अन्य उद्योगों का एक केंद्र है। गंगा सहित अन्य नदियों के नमूनों में इसकी मात्रा भी काफी अधिक है।

इसके अलावा, डिटर्जेंट के नमूनों में इसकी मात्रा अंतरराष्ट्रीय निगमों के उत्पादों में बहुत अधिक पाई जाती है, जबकि उन्होंने अपने उत्पादों को अन्य देशों में नोनीफ्लेनॉल से मुक्त घोषित किया हुआ है, तब ये हाल है।

मानव स्वास्थ्य पर नोनीफ्लेनॉल के प्रभाव

विभिन्न प्रयोगसिद्ध अध्ययनों में नोनीफ्लेनॉल के मानव स्वास्थ्य प्रभावों को दर्शाया गया है, जो एक निरंतर, विषैला और बायोएक्यूम्युलेटिव रसायन है जो एक हार्मोन के विघटन करने वाले पदार्थ के रूप में काम करता है और मानव स्वास्थ्य पर कई बुरे प्रभावों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

यदि नोनीफ्लेनॉल  मानव शरीर में प्रवेश करता है, तो यह तेजी से और बड़े पैमाने पर जठरांत्र यानि आंत्र नली संबंधी मार्ग में अवशोषित हो जाता है जिसे यहां से पूरे शरीर में व्यापक रूप से वितरित किया जाता है। मनुष्य पानी, मिट्टी, खाद्य फसलों, पेंट, सौंदर्य प्रसाधन, आदि के जरिए एनपी  के संपर्क में आ रहे हैं। साथ में मछली के सेवन से भी मनुष्यों में इस रसायन का प्रवेश होता है।  

Nonylphenol levels in River Water
Nonylphenol
Nonylphenol level in Detergent
Toxins in River Water
Rivers in India
Toxic Water in Indian Rivers

Related Stories


बाकी खबरें

  • Indian Economy
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूंजी प्रवाह के संकेंद्रण (Concentration) ने असमानता को बढ़ाया है
    31 Jan 2022
    पिछले एक दशक में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा उधार देने का तरीका बदल गया है, क्योंकि बड़े व्यापारिक घराने भारत से बाहर पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। रोहित चंद्रा, जो आईआईटी दिल्ली में…
  • unemployment
    सोनिया यादव
    देश में बढ़ती बेरोज़गारी सरकार की नीयत और नीति का नतीज़ा
    31 Jan 2022
    बेरोज़गारी के चलते देश में सबसे निचले तबके में रहने वाले लोगों की हालत दुनिया के अधिकतर देशों के मुक़ाबले और भी ख़राब हो गई। अमीर भले ही और अमीर हो गए, लेकिन गरीब और गरीब ही होते चले जा रहे हैं।
  •  Bina Palikal
    राज वाल्मीकि
    हर साल दलित और आदिवासियों की बुनियादी सुविधाओं के बजट में कटौती हो रही है :  बीना पालिकल
    31 Jan 2022
    काफी सालों से देखते आ रहे हैं कि हर साल सोशल सेक्टर बजट- जो शिक्षा का बजट है, जो स्वास्थ्य का बजट है या जो बजट लोगों के उद्योग के लिए है, इस बजट की कटौती हर साल हम लोग देखते आ रहे हैं। आशा है कि इस…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    एक चुटकी गाँधी गिरी की कीमत तुम क्या जानो ?
    31 Jan 2022
    न्यूज़ चक्र में आज अभिसार शर्मा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बता रहे हैं कि कैसे गाँधी देश को प्रेरित करते रहेंगे।
  • nirmala sitharaman
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    2022-23 में वृद्धि दर 8-8.5 प्रतिशत रहेगी : आर्थिक समीक्षा
    31 Jan 2022
    समीक्षा के मुताबिक, 2022-23 का वृद्धि अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि आगे कोई महामारी संबंधी आर्थिक व्यवधान नहीं आएगा, मानसून सामान्य रहेगा, कच्चे तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License