NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
भारत-पाकिस्तान: प्रतिकार, प्रतिक्रिया और प्रतिशोध
प्रचलित भारतीय धारणा में अगर भारतीय हवाई हमले ने पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया तो पाकिस्तान के त्वरित कार्रवाई ने इसे बेअसर कर दिया है।
गौतम नवलखा
28 Feb 2019
kashmir
image courtesy- daily express

भारत में  कट्टर लोगों की  तादाद बढ़ रही है। भक्ति चरम पर है और बदला लेने की मीडिया की मांग तेज़ हो रही है, बम गिराए जाने से पहले की ये बात थी। ऐसा माना जा रहा था कि चुनावी फायदा हासिल करने के लिए दृढ़ प्रतिक्रिया दिखाने के लिए सीमा पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जीवन अनिश्चितताओं से भरा है और अनुमानित परिणाम आवश्यक रुप से प्रकट नहीं होता है। एक तरफ जहां भारत का 15 मिनट का हवाई अभियान जो 26 फरवरी को सुबह 3.50 बजे से सुबह 4.05 बजे तक चला वहीं दूसरी तरफ दो भारतीय फाइटर जेट्स को पाकिस्तान ने गिरा दिया और एक भारतीय पायलट (जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया, हालांकि छह हवाई अड्डे श्रीनगर, जम्मू, लेह, चंडीगढ़, अमृतसर और पठानकोट को बंद कर दिया गया है) को गिरफ्तार कर लिया और हमें एक बार फिर इस योजना पर काम करना है। यह बदतर मोड़ ले सकता है।

मिराज 2000 लड़ाकू जेट के एक बेड़े ने बालाकोट में बम गिराए जो पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनवा प्रांत में पड़ता है। यह स्थान नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 60 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अलावा भारत ने दावा किया है कि उसने मुजफ्फराबाद के साथ-साथ पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर के चकोटी में बम गिराए। भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने एक बयान में कहा कि अहले सुबह हुए हमले ने "बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया है"। उन्होंने अन्य दो स्थानों के बारे में कुछ भी नहीं कहा और दावा किया कि यह हमला "होने वाले खतरे (भारत में अन्य आत्मघाती हमले)" की चुनौती के सामने असैन्य कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन में "बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों के समूह जिन्हें फिदायीन हमले के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था उसे समाप्त कर दिया गया।”

विदेश सचिव के बयान में दावा किया गया, "बालाकोट में स्थित इस शिविर का नेतृत्व जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अज़हर का साला मौलाना यूसुफ अज़हर (उर्फ उस्ताद घोरी) कर रहा था।" बयान में कहा गया है कि "ये स्थान नागरिकों से दूर एक पहाड़ी की चोटी पर घने जंगलों में स्थित है।" हालांकि भारतीय कॉरपोरेट मीडिया ने 200-325 जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों के मारे जाने का आंकड़ा बताया हालांकि विदेश सचिव ने बड़ी सावधानी से कहा कि "हम अन्य सूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"। इस बीच बालाकोट के पुलिस चीफ सगीर हुसैन शाह ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने टीम भेजी थी और उन्होंने पाया कि "बम हमले से कोई हताहत नहीं हुआ, कोई नुकसान नहीं हुआ"।

यह सच है कि पाकिस्तान के लिए यह दावा करना मायने रखता है कि भारतीय फाइटर जेट्स द्वारा गिराए गए बम से कोई नुकसान नहीं हुआ, इसलिए इस आधिकारिक बयान पर पूरी तरह यकीन नहीं किया जा सकता। ऐसा तभी तक है जब तक भारतीय या अन्य मीडिया एजेंसियां हताहतों की संख्या और नुकसान के सबूत नहीं दे सकती हैं। हालांकि भारत और भारतीय मीडिया के लिए मौत की संख्या का विश्वसनीय सबूत पेश करना लगभग असंभव है। इसके बिना बम गिराने की पूरी कवायद बेकार हो जाती है। भारत और पाकिस्तान में भक्तों के बीच खून की लड़ाई में मृतकों की संख्या मायने रखती है न कि बमों की संख्या या बम गिराए जाने वाले स्थान।

इसके अलावा, एलओसी के पार भारतीय लड़ाकू विमान कितना अंदर तक गई? द हिंदू के अनुसार, "60-100 किलोमीटर की विवादित सीमा से फाइटर जेट पर्याप्त दूरी से गोलाबारी कर पाई।" क्या हुआ है? इसके अलावा, यह पाकिस्तानी वायु रक्षा से प्रतिरोध का सामना किए बिना काफी अंदर तक हो सकता था? क्या भारतीय जेट विमानों के लिए अंदर तक प्रवेश करना संभव है, पंद्रह मिनट तक अंदर रहना संभव है, और बिना नुकसान के सुरक्षित लौटना, जब कि यह नियंत्रण रेखा के करीब नहीं था, जिससे नुकसान की संभावना कम हो जाती? या वास्तव में, पाकिस्तानी वायु रक्षा अंजान थी, और प्रतिरोध करने के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई। अतीत में पाकिस्तान ने चुपचाप अमेरिकी दखल और बमबारी को झेला है। पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से दावा किया है कि "घुसपैठ (भारतीय वायु सेना द्वारा) ... मुज़फ्फराबाद में आज़ाद जम्मू कश्मीर के भीतर 3-4 मील भीतर तक था"। यह बहुत अंदर तक और हवाई हमले नहीं है। यह सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा किए गए "सर्जिकल स्ट्राइक" जो 500-2000 मीटर तक भीतर था उससे तुलना नहीं हो सकता है। दूसरे शब्दों में अभी भी इस सच्चाई पर धुंध छाया हुआ है जिसे सामने आना बाकी है।

वर्ष 2016 में "सर्जिकल स्ट्राइक" और अब हवाई हमले में एक बात समान है। भारतीय सेना के डीजीएमओ ने तब अपने समकक्ष को सूचित किया था कि यह "आतंकवादी शिविरों और लॉन्च पैड" के ख़िलाफ़ एकतरफा कार्रवाई थी और यह कार्रवाई पाकिस्तान सेना पर नहीं की गई थी। इस बार भारतीय विदेश सचिव ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट तौर पर कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के शिविर को निशाना बनाया गया था न कि पाकिस्तान की सेना को। हालांकि, पहले के विपरीत इस बार इसे भारत में अन्य आत्मघाती हमलों के खतरे की चुनौती के समक्ष असैन्य सुरक्षात्मक हमले के रूप में बताया गया।

इस बीच, अगर भारतीय वायु सेना ने सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बनाया जैसा कि उन्होंने 2016 में "आतंकवादी लॉन्च पैड" को निशाना बनाया था तो यह एक प्रभाव छोड़ता है कि हवाई हमले बिल्कुल सीमित है। यह सच है कि हवाई घुसपैठ और बम गिराना एक बड़ा सैन्य कदम है। पाकिस्तान द्वारा प्रतिशोध और उसका दावा -कि पाकिस्तानी फाइटर जेट ने बुधवार तड़के भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया और फिर वापसी के समय दो भारतीय फाइटर जेट्स को मार गिराया और एक पायलट को पकड़ लिया- यह उसकी खुद की "दृढ़ प्रतिक्रिया" को दिखाता है। इसने भारत सरकार को असमंजस में डाल दिया है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तान अमेरिका की अहम भूमिका निभा रहा है। इसके बिना अमेरिका साइगॉन पराजय की पुनरावृत्ति आशंका करता है। मोदी सरकार के प्रति अमेरिका ने सख्ती बरती है और जानता है कि सैन्य टकराव के बढ़ने से अमेरिका के गेम प्लान को खतरा हो सकता है। तो अब भारत क्या करेगा?

इस अर्थ में बीजेपी के लिए भुनाने के लिए पहले 24 घंटों में जो दिखाई दिया वह ये कि उसने चुनावी राजनीति के अहम रग को चोट किया है, जबकि विपक्ष को देश के असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। अगर भारतीय हवाई हमले में पाकिस्तान को नुकसान उठाना पड़ा है तो प्रचलित भारतीय धारणा में पाकिस्तान की त्वरित प्रतिक्रिया ने इसे बेअसर कर दिया।

इसलिए हम एक जोखिम भरे क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। भक्तों की कमज़ोरी और उनकी हिंसात्मकता मृतकों की संख्या से है जो बालकोट के मामले में हुआ उससे पार पाना मुश्किल है। और अब पाकिस्तान द्वारा 24 घंटे के भीतर जवाबी कार्रवाई ने योजना को ध्वस्त कर दिया है। हवाई हमले के प्रति उत्साह बहुत देर तक बरकरार नहीं रह सका। इसके बजाय बदला लेने की तीव्र मांग से हुए उलझन उनकी उपस्थिति को पेश कर सकता है। आगे बताने की जरूरत नहीं है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर में आतंकवाद की समस्या है जो भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे मामले में सभी का ध्यान खींचता है और वहां के घटनाक्रम कई लोगों को जीत के आकलन और महत्वाकांक्षाओं से परेशान कर सकता है।


 

Kashmir crises
pulwama attack
indian diplomacy
pakisatn retailitaion
Indian air force

Related Stories

कश्मीर में ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ता सुरक्षा और मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं

वायु सेना हेलीकॉप्टर दुर्घटना: घायल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का निधन

नगालैंड व कश्मीर : बंदूक को खुली छूट

कश्मीर में दहेज़ का संकट

कुछ सरकारी नीतियों ने कश्मीर में पंडित-मुस्लिम संबंधों को तोड़ दिया है : संजय टिक्कू

दर-दर भटकते बनारस के शहीद के माता-पिता, योगी-मोदी सरकार ने नहीं पूरे किए वादे

किसान आंदोलन: एक शाम शहीदों के नाम

क्या अर्नब गोस्वामी को बालाकोट एयर स्ट्राइक की जानकारी पहले से थी?

पठानकोट-पुलवामा में NIA की चार्जशीट: अब पाकिस्तान का हाथ, तब जिहादी ताकत!

‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ सेना में महिलाओं के संघर्ष की कहानी!


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    हरियाणा: आए दिन सामने आ रहे पेपर लीक घोटाले सरकार पर सवाल क्यों खड़े करते हैं?
    11 Aug 2021
    अगर परीक्षाओं की गोपनीयता पर करोड़ोें होने के बावजूद पेपर लीक हो जाता है तो ऐसे में सरकार पर सवाल उठता लाजमी है। विपक्ष का आरोप है कि अब तक हरियाणा में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े 28 पेपर लीक हो…
  • मध्य प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ बढ़ता आशा कर्मियों का रोष
    न्यूज़क्लिक टीम
    मध्य प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ बढ़ता आशा कर्मियों का रोष
    11 Aug 2021
    मध्य प्रदेश में आशा कर्मियों ने अपनी मांगो को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पेश है भोपाल से न्यूज़क्लिक की ग्राउंड रिपोर्ट।
  • climate
    अजय कुमार
    अगर अब भी नहीं जगे तो अगले 20 साल बाद जलवायु परिवर्तन से तबाही की संभावना : रिपोर्ट
    11 Aug 2021
    इस रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी की वजह से खूब अधिक बारिश होगी। सूखे की संभावना भी बढ़ेगी। हीटवेव का दंश भी झेलना पड़ेगा। हिमखंड पिघलेंगे। चक्रवाती तूफानों में बढ़ोतरी होगी। समुद्र…
  • सवालों से डरती क्यों है भाजपा सरकार ?
    न्यूज़क्लिक टीम
    सवालों से डरती क्यों है भाजपा सरकार ?
    11 Aug 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में अभिसार शर्मा साथ ही सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की भी चर्चा कर रहे हैं जिसमे उसने कहा है के अब राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों के आपराधिक मामले वापस नहीं ले सकते
  • rajya sabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    ओबीसी से जुड़े विधेयक का सभी दलों ने किया समर्थन, 50 फ़ीसद आरक्षण की सीमा हटाने की भी मांग  
    11 Aug 2021
    ओबीसी से जुड़ा संविधान (127वां संशोधन) विधेयक शून्य के मुकाबले 187 मतों से राज्यसभा में पारित, साथ ही संसद से मिली मंज़ूरी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License