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भारत-पाकिस्तान: प्रतिकार, प्रतिक्रिया और प्रतिशोध
प्रचलित भारतीय धारणा में अगर भारतीय हवाई हमले ने पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया तो पाकिस्तान के त्वरित कार्रवाई ने इसे बेअसर कर दिया है।
गौतम नवलखा
28 Feb 2019
kashmir
image courtesy- daily express

भारत में  कट्टर लोगों की  तादाद बढ़ रही है। भक्ति चरम पर है और बदला लेने की मीडिया की मांग तेज़ हो रही है, बम गिराए जाने से पहले की ये बात थी। ऐसा माना जा रहा था कि चुनावी फायदा हासिल करने के लिए दृढ़ प्रतिक्रिया दिखाने के लिए सीमा पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जीवन अनिश्चितताओं से भरा है और अनुमानित परिणाम आवश्यक रुप से प्रकट नहीं होता है। एक तरफ जहां भारत का 15 मिनट का हवाई अभियान जो 26 फरवरी को सुबह 3.50 बजे से सुबह 4.05 बजे तक चला वहीं दूसरी तरफ दो भारतीय फाइटर जेट्स को पाकिस्तान ने गिरा दिया और एक भारतीय पायलट (जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया, हालांकि छह हवाई अड्डे श्रीनगर, जम्मू, लेह, चंडीगढ़, अमृतसर और पठानकोट को बंद कर दिया गया है) को गिरफ्तार कर लिया और हमें एक बार फिर इस योजना पर काम करना है। यह बदतर मोड़ ले सकता है।

मिराज 2000 लड़ाकू जेट के एक बेड़े ने बालाकोट में बम गिराए जो पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनवा प्रांत में पड़ता है। यह स्थान नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 60 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अलावा भारत ने दावा किया है कि उसने मुजफ्फराबाद के साथ-साथ पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर के चकोटी में बम गिराए। भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने एक बयान में कहा कि अहले सुबह हुए हमले ने "बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया है"। उन्होंने अन्य दो स्थानों के बारे में कुछ भी नहीं कहा और दावा किया कि यह हमला "होने वाले खतरे (भारत में अन्य आत्मघाती हमले)" की चुनौती के सामने असैन्य कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन में "बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और जिहादियों के समूह जिन्हें फिदायीन हमले के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था उसे समाप्त कर दिया गया।”

विदेश सचिव के बयान में दावा किया गया, "बालाकोट में स्थित इस शिविर का नेतृत्व जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अज़हर का साला मौलाना यूसुफ अज़हर (उर्फ उस्ताद घोरी) कर रहा था।" बयान में कहा गया है कि "ये स्थान नागरिकों से दूर एक पहाड़ी की चोटी पर घने जंगलों में स्थित है।" हालांकि भारतीय कॉरपोरेट मीडिया ने 200-325 जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादियों के मारे जाने का आंकड़ा बताया हालांकि विदेश सचिव ने बड़ी सावधानी से कहा कि "हम अन्य सूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"। इस बीच बालाकोट के पुलिस चीफ सगीर हुसैन शाह ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने टीम भेजी थी और उन्होंने पाया कि "बम हमले से कोई हताहत नहीं हुआ, कोई नुकसान नहीं हुआ"।

यह सच है कि पाकिस्तान के लिए यह दावा करना मायने रखता है कि भारतीय फाइटर जेट्स द्वारा गिराए गए बम से कोई नुकसान नहीं हुआ, इसलिए इस आधिकारिक बयान पर पूरी तरह यकीन नहीं किया जा सकता। ऐसा तभी तक है जब तक भारतीय या अन्य मीडिया एजेंसियां हताहतों की संख्या और नुकसान के सबूत नहीं दे सकती हैं। हालांकि भारत और भारतीय मीडिया के लिए मौत की संख्या का विश्वसनीय सबूत पेश करना लगभग असंभव है। इसके बिना बम गिराने की पूरी कवायद बेकार हो जाती है। भारत और पाकिस्तान में भक्तों के बीच खून की लड़ाई में मृतकों की संख्या मायने रखती है न कि बमों की संख्या या बम गिराए जाने वाले स्थान।

इसके अलावा, एलओसी के पार भारतीय लड़ाकू विमान कितना अंदर तक गई? द हिंदू के अनुसार, "60-100 किलोमीटर की विवादित सीमा से फाइटर जेट पर्याप्त दूरी से गोलाबारी कर पाई।" क्या हुआ है? इसके अलावा, यह पाकिस्तानी वायु रक्षा से प्रतिरोध का सामना किए बिना काफी अंदर तक हो सकता था? क्या भारतीय जेट विमानों के लिए अंदर तक प्रवेश करना संभव है, पंद्रह मिनट तक अंदर रहना संभव है, और बिना नुकसान के सुरक्षित लौटना, जब कि यह नियंत्रण रेखा के करीब नहीं था, जिससे नुकसान की संभावना कम हो जाती? या वास्तव में, पाकिस्तानी वायु रक्षा अंजान थी, और प्रतिरोध करने के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई। अतीत में पाकिस्तान ने चुपचाप अमेरिकी दखल और बमबारी को झेला है। पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से दावा किया है कि "घुसपैठ (भारतीय वायु सेना द्वारा) ... मुज़फ्फराबाद में आज़ाद जम्मू कश्मीर के भीतर 3-4 मील भीतर तक था"। यह बहुत अंदर तक और हवाई हमले नहीं है। यह सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा किए गए "सर्जिकल स्ट्राइक" जो 500-2000 मीटर तक भीतर था उससे तुलना नहीं हो सकता है। दूसरे शब्दों में अभी भी इस सच्चाई पर धुंध छाया हुआ है जिसे सामने आना बाकी है।

वर्ष 2016 में "सर्जिकल स्ट्राइक" और अब हवाई हमले में एक बात समान है। भारतीय सेना के डीजीएमओ ने तब अपने समकक्ष को सूचित किया था कि यह "आतंकवादी शिविरों और लॉन्च पैड" के ख़िलाफ़ एकतरफा कार्रवाई थी और यह कार्रवाई पाकिस्तान सेना पर नहीं की गई थी। इस बार भारतीय विदेश सचिव ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट तौर पर कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के शिविर को निशाना बनाया गया था न कि पाकिस्तान की सेना को। हालांकि, पहले के विपरीत इस बार इसे भारत में अन्य आत्मघाती हमलों के खतरे की चुनौती के समक्ष असैन्य सुरक्षात्मक हमले के रूप में बताया गया।

इस बीच, अगर भारतीय वायु सेना ने सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को निशाना बनाया जैसा कि उन्होंने 2016 में "आतंकवादी लॉन्च पैड" को निशाना बनाया था तो यह एक प्रभाव छोड़ता है कि हवाई हमले बिल्कुल सीमित है। यह सच है कि हवाई घुसपैठ और बम गिराना एक बड़ा सैन्य कदम है। पाकिस्तान द्वारा प्रतिशोध और उसका दावा -कि पाकिस्तानी फाइटर जेट ने बुधवार तड़के भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया और फिर वापसी के समय दो भारतीय फाइटर जेट्स को मार गिराया और एक पायलट को पकड़ लिया- यह उसकी खुद की "दृढ़ प्रतिक्रिया" को दिखाता है। इसने भारत सरकार को असमंजस में डाल दिया है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तान अमेरिका की अहम भूमिका निभा रहा है। इसके बिना अमेरिका साइगॉन पराजय की पुनरावृत्ति आशंका करता है। मोदी सरकार के प्रति अमेरिका ने सख्ती बरती है और जानता है कि सैन्य टकराव के बढ़ने से अमेरिका के गेम प्लान को खतरा हो सकता है। तो अब भारत क्या करेगा?

इस अर्थ में बीजेपी के लिए भुनाने के लिए पहले 24 घंटों में जो दिखाई दिया वह ये कि उसने चुनावी राजनीति के अहम रग को चोट किया है, जबकि विपक्ष को देश के असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। अगर भारतीय हवाई हमले में पाकिस्तान को नुकसान उठाना पड़ा है तो प्रचलित भारतीय धारणा में पाकिस्तान की त्वरित प्रतिक्रिया ने इसे बेअसर कर दिया।

इसलिए हम एक जोखिम भरे क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। भक्तों की कमज़ोरी और उनकी हिंसात्मकता मृतकों की संख्या से है जो बालकोट के मामले में हुआ उससे पार पाना मुश्किल है। और अब पाकिस्तान द्वारा 24 घंटे के भीतर जवाबी कार्रवाई ने योजना को ध्वस्त कर दिया है। हवाई हमले के प्रति उत्साह बहुत देर तक बरकरार नहीं रह सका। इसके बजाय बदला लेने की तीव्र मांग से हुए उलझन उनकी उपस्थिति को पेश कर सकता है। आगे बताने की जरूरत नहीं है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर में आतंकवाद की समस्या है जो भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे मामले में सभी का ध्यान खींचता है और वहां के घटनाक्रम कई लोगों को जीत के आकलन और महत्वाकांक्षाओं से परेशान कर सकता है।


 

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