NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारतीय श्रमिकों का भविष्य असुरक्षितः ILO रिपोर्ट
भारतीय श्रमिकों का भविष्य ख़तरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2019 तक 77% श्रमिक 'असुरक्षित रोज़गार' में लगे होंगे।
प्रणेता झा
27 Jan 2018
ILO report

राजधानी दिल्ली के बावाना औद्योगिक इलाक़े में पटाख़ा बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री में आग लगने से 17 श्रमिकों की मौत हो गई। यह हादसा असुरक्षित रोज़गार के चलते हुई घटनाओं के हालिया उदाहरणों में से एक है। यह घटना 20 जनवरी को हुई।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2019 तक 77% भारतीय श्रमिक असुरक्षित रोज़गार में लगे होंगे।

श्रम विशेषज्ञ भारत में रोज़गार के इस असुरक्षित स्वरूप की तरफ बढ़ती खतरनाक वृद्धि की ओर वर्षों से चेतावनी देते रहे हैं।

आईएलओ की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि वास्तव में दुनिया भर में असुरक्षित रोज़गार की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्तर पर क़रीब 1.4 मिलियन श्रमिक 2017 में असुरक्षित रोज़गार में रहे। वहीं साल 2018 और 2019 में इनमें प्रति वर्ष अतिरिक्त 17 मिलियन बढ़ने की संभावना भी है।

'असुरक्षित रोज़गार' को कम आमदनी (न्यूनतम मज़़दूरी से कम), कठिन तथा असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों (उदाहरण स्वरूप श्रमिकों को लंबे समय तक के शिफ्ट में काम करवाया जाता है; उन्हें सूचित किए बिना किसी भी समय रखा और निकाला जा सकता है), असुरक्षित कार्य वातावरण और श्रम कानूनों के पूर्ण उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया जाता है।

उदाहरण स्वरूप बवाना फ़ैक्ट्री के श्रमिकों को बिना किसी अन्य लाभ या सामाजिक सुरक्षा के प्रतिदिन 10-घंटे की शिफ्ट का काम लिया जाता था और इसके लिए उन्हें प्रतिदिन महज़ 150-200 रुपए मज़दूरी दी जाती थी। इस तरह श्रम कानूनों के साथ-साथ सुरक्षा मानदंडों का साफ़ तौर पर उल्लंघन किया जा रहा था।

वर्ल्ड एंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलूकः ट्रेंड्स 2018 शीर्षक वाली आईएलओ रिपोर्ट में 'असुरक्षित रोज़गार’ की व्याख्या ओन एकाउंट श्रमिक- own-account workers (आम तौर पर एक व्यक्ति का उद्यम) और किसी परिवार के श्रमिकों की संख्या के रूप में किया है।

वहीं भारत के ज़्यादातर श्रम विशेषज्ञ और अर्थशास्त्रियों ने 'असुरक्षित रोज़गार' के स्वरूप में संगठित क्षेत्र के अनुबंधित श्रमिक (ठेका मज़दूर) और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को शामिल किया है।

इंस्टीट्यट फॉर स्ट़डीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर सात्युकी रॉय ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज़(एएसआई) के मार्च 2014 से जुलाई 2015 के बीच के आँकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र (संगठित और असंगठित दोनों ) में रोज़गार घट गया।

संगठित विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार में 0.32 मिलियन की वृद्धि हुई। हालांकि इस वृद्धि का 85% ठेके के आधार पर हुआ था।

एनएसएसओ असंगठित विनिर्माण क्षेत्र को तीन भागों में विभाजित करता है- ओन एकाउंट विनिर्माण उद्यम- Own Account Manufacturing Enterprises (एक व्यक्ति आधारित उद्यम), ग़ैर-निर्देशिका विनिर्माण उद्यम-Non-Directory Manufacturing Enterprises (1 से 6 लोगों के साथ काम करना) और निर्देशिका विनिर्माण उद्यम- Directory Manufacturing Enterprises (6-10 लोगों से ज़्यादा के साथ काम लेना)

रॉय ने कहा कि जहां तक असंगठित विनिर्माण क्षेत्र का संबंध है केवल 'ओन एकाउंट निर्माण उद्यम (Own Account Manufacturing Enterprises -OAMEs)’ में रोज़गार की वृद्धि दर्ज़ की गई।

2010-11 और 2015-16 के बीच की अवधि में अनिगमित ग़ैर-कृषि उद्यमों (निर्माण को छोड़कर) पर एनएसएसओ सर्वेक्षण के अनुसार ओएएमई में रोज़गार में 1.84 मिलियन की वृद्धि हुई।

इस बीच ग़ैर-पंजीकृत विनिर्माण उद्यमों के अन्य दो क्षेत्रों में रोज़गार 0.67 मिलियन तक घट गया।

आईएलओ की रिपोर्ट के अनुसार उच्च-मध्यम आय और विकसित देशों में विनिर्माण रोज़गार के शेयर में गिरावट जारी रहने की आशंका है वहीं निम्न-मध्यम आय वाले देशों (जिनमें भारत भी शामिल है) में मामूली वृद्धि होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार "यह 'समयपूर्व विऔद्योगीकरण' की चल रही प्रवृत्ति की पुष्टि करता है, विकसित देशों की तुलना में कम आय वाले देश विकास के आरंभिक चरण में औद्योगिक रोज़गार के घटते शेयर महसूस कर रहे हैं।"

रॉय ने कहा कि देश में कुल रोज़गार में गिरावट भारतीय श्रम बाज़ार में बढ़ती अनौपचारिकता में योगदान दे रही थी।

उन्होंने कहा "वार्षिक श्रम ब्यूरो के सर्वे के मुताबिक़ देश में कुल रोज़गार 2013-14 में 480.4 मिलियन से घटकर2015-16 में 467.6 मिलियन हो गया। संगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अनुबंध के आधार पर रोज़गार और असंगठित क्षेत्र में बढ़ते विखंडन बढ़ती असुरक्षा के मुख्य कारण हैं।"

आईएलओ रिपोर्ट में कहा गया है कि अतीत में असुरक्षित रोज़गार को कम करने में जो प्रगति हुई थी वह 2012 से अनिवार्यतः अवरूद्ध हो गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में असुरक्षित रोज़गार कुल श्रमिकों के आधी संख्या यानी 900 मिलियन से ज़्यादा पुरुष और महिलाओं को प्रभावित करता है।

आईएलओ के अनुसार "अनुमान से पता चलता है कि दक्षिणी एशिया में 72%, दक्षिण-पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 46%, और पूर्वी एशिया में 31% श्रमिक वर्ष 2019 तक असुरक्षित रोज़गार में होंगे जो वर्ष 2017 की तुलना में काफी कम बदलाव दिखा रहा है।

बेरोज़गारी की बात करें तो रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बेरोज़गारी दर 2017 में 5.6% से घटकर 2018 में 5.5% तक कम होने की संभावना है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि श्रम बाज़ार में प्रवेश करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या के साथ दुनिया भर में बेरोज़़गार लोगों की संख्या (192 मिलियन से ज़्यादा) 2018 में स्थिर रहने की उम्मीद है। 2019 में भी वैश्विक बेरोज़गारी दर मूल रूप से अपरिवर्तित रहेगी जबकि बेरोज़गारों की संख्या 1.3 मिलियन तक बढ़ने का अनुमान है।

ILO report
Indian workers
unemployment
annual labor bureau
भारतीय मज़दूर
भारतीय श्रमिक

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License