NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
नज़रिया
भारत
राजनीति
भौंरा गोलीकांड : निजी कोलियरी के दौर की दबंगई की वापसी
पूर्वी झरिया कोयला क्षेत्र में गोलीकांड उस समय हुआ है जब धनबाद समेत पूरे देश में लोकतन्त्र का महापर्व चल रहा है। इस लिहाज से इस जघन्य गोलीकांड को चुनाव का मुद्दा बनना ही चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अनिल अंशुमन
06 May 2019
भौंरा गोलीकांड
Image Courtesy: jagran.com

अंग्रेज़ी हुकूमत जाने के बाद भी जब तक कोयला खनन क्षेत्र में निजी कोयला खनन कंपनियों का बोलबाला था तो उसके दबंग मालिकों और उनके कारिंदों की ही मनमानी चलती थी। बाद में कोयला के राष्ट्रीयकरण होने के पश्चात इन स्थितियों पर लगाम लगी थी। लेकिन जब से उदारीकरण–वैश्वीकरण के नाम पर इस देश की सरकारों ने निजीकरण की खतरनाक नीतियां लागू करना शुरू किया है, दबंगई और मनमानी का पुराना दौर लौटने लगा है। ‘आउटसोर्सिंग’ विशेषकर कोयला क्षेत्र में निजीकरण का सबसे हिट फार्मूला है, जिसमें ठेका अमूमन उन्हीं निजी कंपनियों को मिलता है जिनके मालिक ऐसे दबंग और राजनीतिक रसूखवाले होते हैं जिनकी सत्ताधारी दल के मंत्री–नेताओं और बीसीसीएल इत्यादि उपक्रमों के उच्च अधिकारियों से सेटिंग–गेटिंग रहती है। इसीलिए ठेका मिलते ही फौरन शुरू हो जाता है निजी कंपनी (दबंग मालिक) की मनमानी और संगठित लूट के ‘नए राष्ट्रीय व आधुनिक औद्योगिक विकास’ का सिलसिला।

29 अप्रैल को कोयलानगरी धनबाद जिला स्थित बीसीसीएल के पूर्वी झरिया कोयला क्षेत्र (भौंरा) में हुआ ‘गोली कांड’ नए आधुनिक औद्योगिक विकास का असली जमीनी सच है। जहां कोयला खनन की आउटसोर्सिंग कंपनी देवप्रभा के खनन कार्यों से हो रहे प्रदूषण को रोकने और खनन-विस्फोटों से वहाँ फ़ैल रहे धूल–गर्द के भयावह गुबार को काबू करने के लिए पानी छिड़काव की मांग को लेकर सैकड़ों स्थानीय लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। बताया जाता है कि तभी फिल्मी स्टाइल में कंपनी के दबंग मालिक ने कई गाड़ियों में अपने बाहुबली कारिंदों के साथ पहुँचकर पुलिस की मौजूदगी में “डस्ट खाओ नहीं तो गोली” कहकर निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाते हुए हमला बोल दिया। जिससे कई लोग बुरी तरह घायल हो गए। मौके पर उपस्थित पुलिस ने हमेशा की भांति कांड करनेवाले दबंग कंपनी मालिक व कारिंदों पर कारवाई करने की बजाय प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों के ही घरों में घुस घुसकर दमन का तांडव मचा दिया। जिसकी प्रतिक्रिया में उत्तेजित लोगों ने भी वहाँ खड़ी कंपनी की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस डीएसपी के वाहन पर भी पत्थरबाजी कर दी।

bhaura kand2.PNG

बढ़ते जन विक्षोभ से स्थिति बेकाबू होता देख प्रशासन के आला अधिकारियों को हरकत में आकर निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। गोली से बुरी तरह घायल व्यक्ति का पुलिस को दिये बयान के आधार पर दबंग कंपनी मालिक को गिरफ्तार करना पड़ा। बाद में दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया । लोगों आरोप है कि पिछले दो महीनों से बीसीसीएल और प्रशासन की मिलीभगत से कंपनी द्वारा सारे नियम–कायदों को ताक पर रखकर किए जा रहे खननकार्य से काले धुएं का जानलेवा प्रदूषण फ़ैल रहा है। स्थानीय मीडिया ने तो इस गोलीकांड को निजी कोलियारियों का ज़माना याद करानेवाली घटना बताया। फिलहाल , प्रशासनिक लहजे में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है और देवप्रभा कंपनी के मालिक व एक कारिंदे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 

गौरतलब है कि ‘भौंरा गोलीकांड’ उस समय हुआ है जब धनबाद समेत पूरे देश में लोकतन्त्र का महापर्व चल रहा है। कहने को तो इसमें जनता की आकांक्षा को ही सर्वोपरि महत्व देने की बात कही जाती है। इस लिहाज से इस जघन्य गोली कांड को चुनाव का मुद्दा बनना ही चाहिए था, जो नहीं हुआ। क्योंकि एक तो, ऐसा पहली बार हुआ है जब “एक बार फिर .... सरकार !” बनाने को राष्ट्रहित का पर्याय बना देने के शोर में इस गोलीकांड और इसके वास्तविक कारणों समेत आम लोगों के सभी बुनियादी सवालों को बड़े ही सुनियोजित ढंग से हटा दिया जा रहा है। लोगों की खुली आँखों के सामने उनकी ही ज़िंदगी के ज़रूरी सवालों को धता बताकर ‘माननीय चौकीदार जी’ व उनकी चौकड़ी नेताओं के उल्टे सीधे बोलवचन को मतदाताओं के दिल दिमाग में ठूँसने की हरचंद कवायद ज़ोरों पर है। यहाँ तक कि चुनाव आयोग तक को इनकी हर करतूत वैध बताने की ड्यूटी में लगा दिया गया है। दूसरे, विशेषकर इस कोयलांचल में विपक्ष के भी स्थापित राजनीतिक दलों व उनके प्रत्याशी नेताओं का ‘भौंरा गोलीकांड’ जैसे मुद्दों में विशेष दिलचस्पी नहीं होने के पीछे ‘कुछ ऐसा है जिसकी पर्देदारी है!’ क्योंकि इस कांड के मुख्य कारक तत्व है उन नीतियों में बदलाव का कि जिससे कोयला क्षेत्र की निजी कंपनियों की मनमानी नहीं चल सके। जिसे चुनाव में खड़ा शायद ही कोई राजनीतिक दल-नेता या प्रत्याशी करना चाहेगा। क्योंकि कोयले की काली कमाई में सभी शामिल हैं और इसके हमाम में सभी एक जैसे हैं।

ऐसे में अंतिम तौर पर बात जाकर ठहरती है उनलोगों पर जो इस क्षेत्र के मतदाता हैं और जिनके सामने ये मौका आया है कि वे अपने वोट से ऐसे दल व नेता का चुनाव करें जो “भौंरा गोलीकांड” कराने वाली निजीकरण और कंपनीपरस्ती की नीतियों में बदलाव ला सके। साथ ही कोयला उद्योग जैसे देश के सार्वजनिक उपक्रमों को निजी कंपनियों के हवाले करने की सत्ता-साज़िशों को बेनकाब कर उसे रोक सके। सनद रहे कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जानेवाले इस देश के स्थापित सार्वजनिक संस्थानों व उपक्रमों के विखंडन व नष्ट किए जाने के सुनियोजित कारनामे सबसे अधिक वर्तमान सत्ता–शासन में ही हुए हैं। जिसे लेकर लोकतंत्र के महापर्व के पूर्व ही देश के कई जाने माने जन राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों, लेखक-बुद्धिजीवियों व फ़िल्मी हस्तियों से लेकर सेना और प्रशासन के कई पूर्व उच्च अधिकारियों ने लिखित तौर पर इस बात की पूरी आशंका जताई है कि ‘फिर एकबार .... सरकार’ की सफलता, देश व समाज के लोकतान्त्रिक विकास के मामले में ऐसी विनाशकारी होगी कि उसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी!  

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

Jharkhand
jhariya coal mine
Jharkhand government
Raghubar Das
Coal mining
pollution
bhaura golikand
dhanbad

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

झारखंड: केंद्रीय उद्योग मंत्री ने एचईसी को बचाने की जवाबदेही से किया इंकार, मज़दूरों ने किया आरपार लड़ाई का ऐलान

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License