NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान-मज़दूरों का ऐलान- भगत सिंह के सपनों के भारत का संघर्ष रहेगा जारी!
शहीद दिवस पर दिल्ली की सीमाओं पर पहुंची किसान-मज़दूर पदयात्रा। “इस पदयात्रा ने उद्घोष किया कि आंदोलन अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। अब आंदोलन में एक व्यापक एकता बन गई है।"
मुकुंद झा
23 Mar 2021
kisan

शहीद दिवस के मौके पर किसान आंदोलन दिल्ली के सीमाओं पर 118वें दिन में प्रवेश कर गया है। किसानों ने सरकार के हठधर्मिता को देखते हुए अपनी रणनीति बदली और आंदोलन को दिल्ली के बॉर्डर से विकेन्द्रित करते हुए देशभर के गाँव-गाँव और शहरों में ले गए हैं। किसान अपने इस आंदोलनों का लगातार विस्तार कर रहे है। इसी क्रम में आज 23 मार्च शहीद दिवस यानी जिस दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजी हुकूमत ने फाँसी दी थी, को याद करते हुए किसानों ने इस दिन के आंदोलन को युवाओं को समर्पित किया।

यही नहीं हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों ने किसान सम्मान दिवस मानते हुए और आंदोलन का विस्तार करने के लिए चार जगहों से किसान-मज़दूर पदयात्रा निकाली और कई सौ किलोमीटर की यात्रा कर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ आज शमिल हुए।  

इस पदयात्रा का आह्वान अखिल भरतीय किसान सभा और सेन्टर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन ने किया था, जिसका बाद में संयुक्त मोर्चा ने भी समर्थन किया। ये यात्रा पंजाब में भगत सिंह के गांव खटकड़ कलां, हरियाणा के हिसार और जींद जबकि उत्तर प्रदेश के आगरा से चलकर दिल्ली की सीमाओं पर पहुंची। इन यात्राओं को भारी जनसमर्थन मिला। इन पद यात्राओं के जरिए 26 मार्च के पूर्ण भारत बंद का संदेश भी जनता तक पहुंचाया गया।

शहीद दिवस को दिल्ली के बॉर्डर्स पर युवाओं की बड़ी कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। सभी धरनास्थलों पर देशभर से युवा पहुंचे। इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जहां भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के विचारों पर प्रकाश डाला गया। यह शहीदी दिवस किसानों को समर्पित था, जिसमें किसान-मजदूर के शोषण पर भगत सिंह के विचारों को जनता के सामने रखा गया व आन्दोलन को और तीखा करने का एलान हुआ।

ऐसी ही एक किसान मज़दूर पदयात्रा 18 मार्च को हरियाणा हिसार के हांसी से शुरू होकर आज 23 मार्च को टिकरी बॉर्डर पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में नौजवान भी शामिल थे।  
पदयात्रा में शामिल एक युवा ने कहा कि ये पदयात्रा अपने आप में ऐतिहासिक थी क्योंकि हांसी की वो लाल सड़क जहाँ से ये यात्रा शुरू हुई, वो वही जगह थी जहाँ अंग्रेजों ने 1857 में स्वतंत्रता सेनानियों को सैकड़ों की संख्या में रोड रोलर से कुचलवा दिया था। आज भी इस सरकार ने अभी तक आंदोलनों में शामिल सैकड़ों किसनों का जिंदगी लील ली है और अभी उसकी प्यास बुझी नहीं है। लेकिन वो भूल रही है हमारा इतिहास कुर्बानी से भरापूरा है और हम इस बार भी किसी भी कुर्बानी से चूकेंगे नहीं और जबतक इन कानूनों की वापसी नहीं होगी हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। 


युवा किसान नेता और एआईकेएस हरियाणा के सचिव सुमित ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए पदयात्रा को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा इस भाजपा सरकार को हराने के लिए भगत सिंह के तरह हमें भी लड़ना होगा। यह संदेश लेकर यह यात्रा गाँवों में गई और लोगों को आंदोलनों के प्रति जागरूक किया। इस पदयात्रा को जो समर्थन मिला वो इसकी सफलता को दिखाता है।

38 वर्षीय कमलेश लाहली जो एक मज़दूर नेता है, जो सीटू से जुड़ी हैं। उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि यह आंदोलन अब किसानों के मुद्दे से आगे बढ़कर मज़दूर और नौजवानों का हो चला है। वो खुद एक निर्माण मज़दूर थीं लेकिन अभी वो पूर्ण तरीके से मज़दूर आंदोलन से जुड़ी हैं और हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीपीएम के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था हालांकि उनको चुनावी सफलता नहीं मिली, लेकिन आज जब हमने उनसे बात की तो वो इससे बिल्कुल निराश नहीं थीं। उन्होंने कहा कि उस समय जो मुद्दे उठाए थे उनको लेकर वे सड़कों पर संघर्ष कर रही हैं और करती रहेंगी।  

कमलेश ने बताया कि पहले वो भी काम करती थीं। अब सिर्फ उनके पति एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं। उनपर (कमलेश के पति) भी बाकी मज़दूरों की तरह सरकार के मज़दूर विरोधी श्रम कोड का असर पड़ रहा है। अब उन्हें भी आठ की जगह 12 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ती है।  

कमलेश ने साफ कहा कि यह आंदोलन अब तभी खत्म होगा जब सरकार मज़दूर और किसान विरोधी कानूनों को वापस लेगी।  
इस यात्रा में बड़ी संख्या में नौजवान शामिल थे। नौजवान किसानों के साथ ही बेरोजगारी के सवाल को लेकर भी अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे थे।

भारत की जनवादी नौजवान सभा हरियणा के नेता शाहनवाज़ ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि इस आंदोलन में नौजवानों की भूमिका है और ये आंदोलन हर कमा के खाने वाली जनता का है। शहीदी दिवस पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद कर करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भी ऐसे भारत का सपना नहीं देखा था। आज भारत में भवन निर्माण करने वाले मज़दूर के सिर पर छत नहीं और अनाज उगाने वाले भूखे हैं।

आगे उन्होंने कहा कि ये सरकार एक तरफ़ किसानों और खेती को बर्बाद करने वाले कानूनों को ले आई है जबकि दूसरी तरफ़ नौजवानों को नौकरी देने वाले सरकारी विभागों को बेच रही है।

शाहनवाज ने केंद्र द्वारा हाल ही में पेश किए गए बजट को ओलेक्स की सेल कहा और कहा ये सरकार ने साफ किया कि पूँजीपति देश में कुछ भी खरीद सकता है। इनका अगला निशाना छात्र और नौजवान हैं। इसलिए नौजवान इस आंदोलन का हिस्सा हैं और आने वाले दिनों में अपना आंदोलन और तेज़ करेंगे।

महिला आंदोलन की जानी-मानी नेता जगमति संगवान ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि इस आंदोलन में आज यह यात्रा अंग्रेजों के कंपनी राज के खिलाफ हुए आंदोलन में शामिल शहीदों की ऊर्जा को लेकर शामिल हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार सोच रही है कि आंदोलन कमज़ोर हो रहा है लेकिन इस यात्रा के दौरान हम गांवों में गए और लोगों के घरो में रुके और जिस तरह से उन्होंने हमारा स्वागत किया वो शानदार था। हमें भी अंदाज़ नहीं था कि लोगों में इतना गुस्सा है। यह सरकार के लिए चेतावनी है कि वो समय रहते इन काले कानूनों को वापस ले ले।

अखिल भारतीय खेत मज़दूर यूनियन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ. विक्रम ने न्यूज़क्लिक बात करते हुए कहा कि “इस पदयात्रा ने उद्घोष किया कि आंदोलन अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। अब आंदोलन में एक व्यापक एकता बन गई है। शायद सरकार को लगता होगा कि देश कि जनता पांच राज्यों के चुनाव में मशगूल हो गई और किसानों का मुद्दा पीछे चला गया होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि मुद्दा है, ऐसे ही है लोग आंदोलित हैं और सरकार तैयार रहे अगले दौर का आंदोलन और मज़बूत और उग्र होगा।” 

 

Tikri Border
Samyukt Kisan Morcha
All India Kisan Sabha
Centre of Indian Trade Unions
Padyatra
Haryana
Farm Laws
farmers protest

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

हरियाणा : आंगनवाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल 3 महीने से जारी, संगठनों ने सरकार से की बातचीत शुरू करने की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License