NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भीम आर्मी के चंद्रशेखर के पक्ष में आगे आई सिविल सोसाइटी, तुरंत रिहाई की मांग
नई स्थित प्रेस क्लब में सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता, छात्र और वकीलों ने एक स्वर में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद समेत सभी भीम सैनिकों की तत्काल रिहाई और तुगलकाबाद स्थित गुरु रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Sep 2019
Press club of india

नई दिल्ली: 'पिछले पांच साल में दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं और खासकर जहां पर भाजपा का शासन है उन राज्यों में निर्ममता पूर्वक उनकी पिटाई की गयी।' भीम आर्मी द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने यह बात कही। उन्होंने कहा, 'पहले दलित पार्टी बसपा अत्याचार के खिलाफ लड़ती थी। सरकार ने उनके नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज कर उन्हें किसी तरह चुप कर दिया।'

दरअसल सोमवार 16 सितंबर को सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता, छात्र और वकील नई दिल्ली के प्रेस क्लब में एकत्र हुए और सभी ने एक स्वर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दलित विरोधी और अल्पसंख्यक-विरोधी कार्यों की निंदा की।

साथ ही भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद समेत सभी भीम सैनिकों की तत्काल रिहाई और तुगलकाबाद स्थित गुरु रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की।

प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद दलितों की आवाज हैं इसलिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने भीम आर्मी को कुचलने के लिए साजिश रची। आजाद को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया और उन्हें रैलियों में जाने की अनुमति नहीं दी गयी। जबकी कई बड़े-बड़े अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'दलित विरोधी भाजपा सरकार का एजेंडा दलित उत्पीड़न की संरचनाओं को फिर से संगठित करना है, जो कि बीते युग में मनुस्मृति के उपासकों द्वारा प्रचलित था।'

उन्होंने कहा, 'वे (दलित) अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे। अगर आप किसी के खिलाफ इतना अत्याचार करेंगे तो उधर से भी जवाब मिलेगा और यह देश के लिए खतरनाक होगा।'

इस सम्मेलन में उपस्थित सभी भीम आर्मी के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने के खिलाफ विरोध करने के लिए आजाद के परिवार के सदस्यों पर मामला दर्ज किया गया।

बता दें कि 21 अगस्त को राजधानी दिल्ली में दलित कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसा भड़कने के बाद हिरासत में लिए गए आजाद समेत 96 दलित कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई थी जिसमें अब तक सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

इसके अलावा 10 सितंबर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भीम आर्मी के राष्ट्रीय महासचिव कमल सिंह वालिया सहित दलित समुदाय के 750 से अधिक लोगों के खिलाफ 'गैरकानूनी' मामले दर्ज किए गए थे।

मौके पर उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद पारचा, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष आइशा घोष सहित अन्य ने एक स्वर में भाजपा सरकार द्वारा भीम आर्मी के नेताओं को निशाना बनाने की साजिश की आलोचना की।

बता दें कि अब तक भीम आर्मी के चार शीर्ष नेताओं में से तीन - इसके प्रमुख, राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष - को गिरफ्तार कर लिया गया है।

परचा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'मौजूदा सरकार बार-बार इतिहास की बात इसलिए करती है क्योंकि वो देश को मनुवादी इतिहास की ओर ले जाना चाहती है, बीजेपी भारतीय संविधान की जगह मनुस्मृति के शासन काल को दोबारा लाने की कोशिश कर रही है।'

उन्होंने आगे कहा, 'यूपी पुलिस को एससी/एसटी एक्ट के तहत आंबेडकर की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था, लेकिन पुलिस ने कमजोर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया लेकिन जो लोग प्रतिमा तोड़ने का विरोध कर रहे थे उनके खिलाफ संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर किया है।'

सहारनपुर की घटना ने एफआईआर दर्ज करने में यूपी पुलिस के पक्षपात को उजागर किया।
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस ने करणी सेना के सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया जिन्होंने चंद्रशेखर आजाद और उनके परिवार को खुलेआम मौत की धमकी दी थी। लेकिन पुलिस ने चंद्रशेखर के भाइयों पर हिंसा का आरोप लगाकर उन पर मामला दर्ज कर लिया। जो साफ दर्शाता है कि सरकार द्वारा चंद्रशेखर और उनके परिवार को किस तरह निशाना बनाया जा रहा है।

अनुसूचित जाति समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित करने में सत्तारूढ़ सरकार कैसे सफल रही, इस बारे में बात करते हुए आइसा की अध्यक्ष सुचेता डे ने बताया कि यह सब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने की आड़ में किया गया था। उन्होंने कहा, 'इस बार यह रविदास मंदिर का विध्वंस है और इससे पहले यह विश्वविद्यालयों में 13-सूत्रीय रोस्टर का निर्माण था, जिसके माध्यम से भाजपा सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारों पर हमला किया है।'

बता दें कि लाइव लॉ की खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रविदास मंदिर पुनर्निर्माण के संदर्भ में दायर याचिका को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास विचार के लिए भेजने का फैसला किया है।

रिट याचिका में मंदिर के पुनर्निर्माण की अनुमति मांगी गई है, जिसमें कहा गया है कि 'मंदिर गुरु रविदास के अनुयायियों के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का स्थल था।'

न्यूजक्लिक से बात करते हुए, अधिवक्ता परचा ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया।

bheem army
civil society
Guru Ravidas temple
Dalit assertion
karni Sena
Supreme Court
BJP
AAP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • spain
    डीडब्ल्यू
    स्पेन : 'कंप्यूटर एरर' की वजह से पास हुआ श्रम सुधार बिल
    08 Feb 2022
    स्पेन की संसद ने सरकार के श्रम सुधार बिल को सिर्फ़ 1 वोट के फ़ासले से पारित कर दिया- विपक्ष ने कहा कि यह एक वोट उनके सदस्य ने ग़लती से दे दिया था।
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!
    08 Feb 2022
    भारतीय रिजर्व बैंक की स्टेट फाइनेंस एंड स्टडी ऑफ़ बजट 2020-21 रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सरकार के द्वारा जन स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च किया गया है।
  • uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    चमोली जिले का थराली विधानसभा: आखिर क्या चाहती है जनता?
    07 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव से पहले न्यूज़क्लिक की टीम ने चमोली जिले के थराली विधानसभा का दौरा किया और लोगों से बातचीत करके समझने का प्रयास किया की क्या है उनके मुद्दे ? देखिए हमारी ग्राउंड रिपोर्ट
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    धर्म का कार्ड नाजी दौर में ढकेलेगा देश को, बस आंदोलन देते हैं राहत : इरफ़ान हबीब
    07 Feb 2022
    Exclusive इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने देश के Living Legend, विश्व विख्यात इतिहासकार इरफ़ान हबीब से उनके घर अलीगढ़ में बातचीत की और जानना चाहा कि चुनावी समर में वह कैसे देख रहे हैं…
  • Punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाबः बदहाल विश्वविद्यालयों पर क्यों नहीं बात करती राजनैतिक पार्टियाँ !
    07 Feb 2022
    पंजाब में सभी राजनैतिक पार्टियाँ राज्य पर 3 लाख करोड़ के कर्ज़े की दुहाई दे रही है. इस वित्तीय संकट का एक असर इसके विश्वविद्यालयों पर भी पड़ रहा है. अच्छे रीसर्च के बावजूद विश्वविद्यालय पैसे की भारी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License