NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर देवबंद पुलिस की हिरासत में, तबीयत बिगड़ने पर मेरठ में भर्ती
दलित अधिकारों के सवालों को लेकर भीम आर्मी 15 मार्च को दिल्ली में हुंकार रैली कर रही है। इसी रैली के लिए जागरूकता अभियान पर निकले भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद को देवबंद में पुलिस ने चुनाव आचार संहिता के नाम पर रोक लिया और हिरासत में ले लिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Mar 2019
भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर को पुलिस ने हिरासत में लिया।

भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद को देवबंद पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें मेरठ के अस्पताल ले जाया गया है।

दलित अधिकारों के सवालों को लेकर भीम आर्मी 15 मार्च को दिल्ली में हुंकार रैली कर रही है। इसी रैली के लिए जागरूकता अभियान पर निकले भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद को आज मंगलवार को देवबंद में पुलिस ने चुनाव आचार संहिता के नाम पर रोक लिया और हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनकी पुलिस से बहस भी हुई। और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान उनके साथ जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष एन साई बालाजी, छात्र संगठन आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे और फरहान मौजूद थे।  

आपको बता दें कि 15 मार्च की हुंकार रैली के लिए कल, सोमवार को भीम आर्मी द्वारा सहारनपुर से अभियान शुरू किया गया। कभी पैदल, कभी अन्य वाहनों से भीम आर्मी के सदस्य लोगों को रैली के प्रति जागरूक करते हुए आगे बढ़ रहे थे। आज देवबंद में रैली होनी थी और भी बुधवार को मुज़फ़फ़रनगर, फिर मेरठ होते हुए इस तरह दिल्ली पहुंचना था। यूपी और देश के अन्य हिस्सों से भी भीम आर्मी के सदस्यों के अलावा अन्य संगठनों के लोग इस रैली का हिस्सा लेने के लिए दिल्ली बुलाया गया है।

पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जान पर चंद्रशेखर ने कहा कि “वे चाहते हैं कि हम चुप बैठ जाएं, लेकिन हम गुलाम नहीं हैं, हम स्वतंत्र हैं और हम अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे, हमें जेल नहीं, कहीं भी ले जाएं। हम अपनी लड़ाई को आगे लेकर जाएंगे और 15 तारीख़ को दिल्ली की धरती पर नीला सैलाब आएगा।”

आइसा अध्यक्ष सुचेता डे ने फोन पर न्यूज़क्लिक को बताया कि इसी जागरूकता अभियान का हिस्सा बनने के लिए जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष साई बालाजी और आइसा उपाध्यक्ष फरहान के साथ वे आज देवबंद पहुंची थी, लेकिन यहां आकर देखा तो पुलिस ने बलपूर्वक चंद्रशेखर को रैली से रोक दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना था कि चुनाव की घोषणा के बाद आचार संहिता लग गई है और अब बिना अनुमति के कोई रैली-जुलूस नहीं निकाला जा सकता। जबकि भीम आर्मी का तर्क था कि वह कोई राजनीतिक दल नहीं हैं और न ही चंद्रशेखर चुनाव लड़ रहे हैं। वह एक सामाजिक संगठन हैं और इस पूरी रैली के लिए प्रशासन से पूर्व में अनुमति ली गई थी। अब चुनाव घोषित हो गए हैं तब भी डीएम ही सक्षम प्राधिकारी हैं, वह इसकी अनुमति दे सकते हैं। लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। चंद्रशेखर ने मोटरसाइकिल से भी निकलने की कोशिश की लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसी दौरान चंद्रशेखर की तबीयत बिगड़ गई।

सुचेता का कहना है कि देशभर में दलित आंदोलन पर जो पूरा हमला है, कमज़ोर वर्ग का उत्पीड़न है, मॉब लिंचिंग है, इसी सब के खिलाफ बहुजन समाज की ओर से दिल्ली में हुंकार रैली की जा रही है। इसके अलावा भारत बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए दलितों को भी अभी तक छोड़ा नहीं गया। इस सवाल को भी लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन यूपी की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार नहीं चाहती कि लोगों तक उसकी सच्चाई पहुंचे। इसलिए चंद्रशेखर को रैली से रोका गया।  

जेएनयूएसयू अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा कि ये पुलिस प्रशासन का सही रवैया नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें भी चंद्रशेखर के साथ रोका गया लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया लेकिन वे चंद्रशेखर को अकेला नहीं छोड़ेंगे और उन्हें देखने मेरठ अस्पताल जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता की ये लड़ाई जारी रहेगी और 15 की रैली और मजबूती से होगी और पूरे देश बहुजन एकता को देखेगा।

चंद्रशेखर के साथ सुचेता और बालाजी ने आह्वान किया है कि सरकार और पुलिस-प्रशासन के इस उत्पीड़न के खिलाफ सभी लोग ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में 15 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुंकार रैली में पहुंचे।

 

(पुलिस कार्रवाई का विरोध करते बहुजन समाज के लोग)

भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने भी ट्वीट कर इस मामले में अपनी राय रखी और चंद्रशेखर को हिरासत में लेने की निंदा की। उन्होंने कहा कि हर किसी को शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखने और मार्च निकालने का अधिकार है।

Just heard that #BhimArmy leader Chandrasekhar, JNUSU President @nsaibalaji, @AISA_tweets President @sucheta_ml have been detained by @Uppolice while marching from Saharanpur to Delhi. Release all activists. They have every right to hold a peaceful march and raise their demands. pic.twitter.com/WfPIWIkt9q

— Dipankar (@Dipankar_cpiml) March 12, 2019

bheem army
Chandrashekhar Azad
hunkar rally
DILLI CHALO
AISA
Sucheta De
JNUSU
n sai balaji

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !


बाकी खबरें

  • एम.ओबैद
    एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे
    26 Apr 2022
    चयनित शिक्षक पिछले एक महीने से नियुक्ति पत्र को लेकर प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मांग पूरी न होने पर अंत में आमरण अनशन का रास्ता चयन किया।
  • अखिलेश अखिल
    यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के पतन का अमृतकाल है
    26 Apr 2022
    इस पर आप इतराइये या फिर रुदाली कीजिए लेकिन सच यही है कि आज जब देश आज़ादी का अमृतकाल मना रहा है तो लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तम्भों समेत तमाम तरह की संविधानिक और सरकारी संस्थाओं के लचर होने की गाथा भी…
  • विजय विनीत
    बलिया पेपर लीक मामला: ज़मानत पर रिहा पत्रकारों का जगह-जगह स्वागत, लेकिन लड़ाई अभी बाक़ी है
    26 Apr 2022
    "डबल इंजन की सरकार पत्रकारों को लाठी के जोर पर हांकने की हर कोशिश में जुटी हुई है। ताजा घटनाक्रम पर गौर किया जाए तो कानपुर में पुलिस द्वारा पत्रकारों को नंगाकर उनका वीडियो जारी करना यह बताता है कि…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जन आंदोलनों के आयोजन पर प्रतिबंध अलोकतांत्रिक, आदेश वापस लें सरकार : माकपा
    26 Apr 2022
    माकपा ने सवाल किया है कि अब जन आंदोलन क्या सरकार और प्रशासन की कृपा से चलेंगे?
  • ज़ाहिद खान
    आग़ा हश्र काश्मीरी: गंगा-ज़मुनी संस्कृति पर ऐतिहासिक नाटक लिखने वाला ‘हिंदोस्तानी शेक्सपियर’
    26 Apr 2022
    नाट्य लेखन पर शेक्सपियर के प्रभाव, भारतीय रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान और अवाम में उनकी मक़बूलियत ने आग़ा हश्र काश्मीरी को हिंदोस्तानी शेक्सपियर बना दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License