NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भीमा कोरेगाँव मामले में हाई कोर्ट ने पुणे कोर्ट का आदेश किया ख़ारिज, सुप्रीम कोर्ट गयी महाराष्ट्र सरकार
भीमा कोरेगाँव मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग के मामले में बुधवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुणे न्यायालय के आदेश को ख़ारिज कर दिया। पुणे न्यायालय ने पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दयार करने के लिए और समय देने का आदेश दिया था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Oct 2018
surendra gadling

भीमा कोरेगाँव मामले में आरोपी सुरेंद्र गाडलिंग के मामले में बुधवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुणे न्यायालय के आदेश को ख़ारिज कर दिया। पुणे न्यायालय ने पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दयार करने के लिए और समय देने का आदेश दिया था। सुरेन्द्र गाडलिंग ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी जिसपर बुधवार को उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश दिया। उच्च न्यायालय के जज का कहना था कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दायर करने और उसी के ज़रिये सभी आरोपियों की हिरासत की समय सीमा को बढ़ाकर और 90 दिनों की माँग गैरकानूनी है। आज महाराष्ट्र सरकार ने अब इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम न्यायालय में अपील की है, इसे अब 26 अक्टूबर को सुना जाएगा।  

इस बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश का मतलब था कि अब सुरेन्द्र गाडलिंग और दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता ज़मानत के लिए अपील कर सकते हैं। लेकिन उच्च न्यायालय ने अपने ही आदेश पर 1 नवंबर तक रोक लगा दी थी। यही वजह है आज ही महाराष्ट्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम न्यायालय में अपील कर दी है ।

दरअसल गैरकानूनी गतिविधियां प्रतिबन्ध कानून (यूएपीए) के अंतर्गत 90 दिन के अंदर चार्जशीट दायर करनी होती है। लेकिन अगर ज़्यादा समय लग रहा हो तो सरकारी वकील देरी के कारण की रिपोर्ट न्यायालय के सामने पेश कर सकता है। अगर न्यायालय को कारण वाजिब लगे तो न्यायालय समय सीमा को180 तक बढ़ा सकता है।

लेकिन आरोप है कि इस मामले में पुणे न्यायालय के सामने सरकारी वकील की रिपोर्ट पेश नहीं कि गयी थी। बल्कि असिस्टेंट कमिशनर ऑफ पुलिस और इंवेस्टिगेटिव ऑफिसर की रिपोर्ट पेश गयी थी। गडलिंग ने इसके खिलाफ अपील करते हुए कहा था कि इस रिपोर्ट को माना नहीं जा सकता क्योंकि यह प्रक्रिया के खिलाफ है। इस प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय ने भी सवाल उठाए थे। यही वजह थी कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज ने पुणे न्यायालय के आदेश को गैरकानूनी कहा था।

1 जनवरी को भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा कराने के आरोप में पुणे पुलिस ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया था। इस मामले में जून में गडलिंग, शोमा सेन, सुधीर धावले, महेश राऊत  और रोना विल्सन जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इन सभी को यूएपीए के कड़े कानून के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर आरोप था कि यह लोग माओवादियों से जुड़े हुए हैं।

इसके बाद अगस्त में  इस मामले में ही कई और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसमें सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, अरुण फ़रेरा,वर्नन गोनसालवेज, वारवारा राओ शामिल थे। इन सभी को नज़रबंद करने का आदेश दिया गया था। 1 अक्टूबर को इस मामले में गौतम नवलाख को ज़मानत मिल गयी थी। 

यह मामला शुरू से भी राजनीति से प्रेरित लग रहा था। इसकी वजह यह थी कि इस मामले में शुरू में बने आरोपी संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को बचाने के आरोप सरकार पर लगते रहे हैं। बताया जाता है कि यह दोनों ही संघ से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि महराष्ट्र सरकार ने 2017 में संभाजी भिड़े के खिलाफ दंगा भड़काने के तीन केस ख़त्म किये थे। बहुत से जानकारों का कहना है कि भीमा कोरेगाँव मामले में गुनहगारों को बचाने के लिए ही सभी सामजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। अब महाराष्ट्र सरकार की अपील को सुप्रीम न्यायालय में 26  अक्टूबर को  जायेगा।

surendra gadling
bheema koregaon
maharastra government
Bombay High Court
BJP
social activists

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Economic Survey
    वी श्रीधर
    आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: क्या महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के संकटों पर नज़र डालता है  
    01 Feb 2022
    हाल के वर्षों में यदि आर्थिक सर्वेक्षण की प्रवृत्ति को ध्यान में रखा जाए तो यह अर्थव्यवस्था की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश करता है, जबकि उन अधिकांश भारतीयों की चिंता को दरकिनार कर देता है जो अभी भी महामारी…
  • muslim
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मुसलमानों के नाम पर राजनीति फुल, टिकट और प्रतिनिधित्व- नाममात्र का
    01 Feb 2022
    देश की आज़ादी के लिए जितना योगदान हिंदुओं ने दिया उतना ही मुसलमानों ने भी, इसके बावजूद आज राजनीति में मुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या न के बराबर है।
  • farmers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान
    31 Jan 2022
    एक साल से अधिक तक 3 विवादित कृषि कानूनों की वापसी के लिए आंदोलन करने के बाद, किसान एक बार फिर सड़को पर उतरे और 'विश्वासघात दिवस' मनाया। 
  • Qurban Ali
    भाषा सिंह
    प्रयागराज सम्मेलन: ये लोग देश के ख़िलाफ़ हैं और संविधान के ख़ात्मे के लिए काम कर रहे हैं
    31 Jan 2022
    जिस तरह से ये तमाम लोग खुलेआम देश के संविधान के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और कहीं से भी कोई कार्ऱवाई इनके खिलाफ नहीं हो रही, उससे इस बात की आशंका बलवती होती है कि देश को मुसलमानों के कत्लेआम, गृह युद्ध…
  • Rakesh Tikait
    न्यूज़क्लिक टीम
    ख़ास इंटरव्यू : लोगों में बहुत गुस्सा है, नहीं फंसेंगे हिंदू-मुसलमान के नफ़रती एजेंडे में
    31 Jan 2022
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को ज़मीनी चुनौती देने वाले बेबाक किसान नेता राकेश टिकैत से लंबी बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि इन चुनावों में किसान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License