NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भीमा कोरेगाँव: सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसलों का अर्थ
दोनों ही निर्णय मामले का गुणात्मक स्तर पर विश्लेषण नहीं करते, लेकिन दोनों में ही आरोपियों को समय दिया गया।
विवान एबन
04 Oct 2018
Translated by महेश कुमार
bhima koregaon

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) के आदेश को गौतम नवलखा के ट्रांजिट रिमांड के मामले में किनारे करने के बाद, 28 सितंबर की महाराष्ट्र सरकार की टिप्पणियां बचकानी लगती हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस को सही साबित किया है। उनका यह बयान रोमिला थापर, प्रभात पटनायक, देवकी जैन, सतीश देशपांडे और माया दारुवाला द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया था।

मूल याचिका में महाराष्ट्र सरकार से एक स्वतंत्र जांच, एक स्पष्टीकरण और लोकस स्टैंडी (कोर्ट तक जाने का अधिकार) के आधार पर सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वरनॉन गोंसाल्विस, अरुण फेरेरा और वरवरा राव की रिहाई की मांग की गयी। इसके बाद, सभी पांच व्यक्तियों ने, जिनकी तरफ से याचिका दायर की गयी थी, इस मामले में खुद पेश हुए और याचिका में संशोधन किया।

संशोधित याचिका में भीमा कोरेगांव हिंसा के संबंध में दायर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर न्यायालय की निगरानी के तहत स्वतंत्र जांच की मांग थी - जिसमें संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोट के खिलाफ एफआईआर की जांच भी शामिल है। याचिकाकर्ताओं ने छापे में जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संबन्ध में मांग की कि उनकी महाराष्ट्र के बाहर फोरेंसिक जांच की जाए और आरोपी व्यक्तियों की रिहाई के लिए निर्देश दिया जाए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 2:1 में बंट गया था। बहुमत के फैसले ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि यह अभियुक्त द्वारा चुना जा सकता है कि कौन सी एजेंसी उनके खिलाफ आरोपों की जांच करेगी। बहुमत ने एकबोट और भिडे के खिलाफ एफआईआर के पहलू पर टिप्पणी नहीं की क्योंकि मामला पहले से ही बॉम्बे हाईकोर्ट में जांच के दायरे में है। हालांकि, आरोपियों की रिहाई के बारे में बहुमत ने कहा कि मामला उचित न्यायालय में उठाया जाना चाहिए। इसके लिए बहुमत ने आरोपी को उचित उपाय करने के लिए चार सप्ताह की नजरबंदी का आदेश दिया था।

दूसरी तरफ न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई और पुलिस तथा गिरफ्तारी के संबंध में काफी आलोचना भरा और हमलावर था। हालांकि, उन्होंने आरोपियों को तीन सप्ताह की नजरबंदी और अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की बात कही थी। बहुमत निर्णय का उन लोगों ने स्वागत किया जो गिरफ्तार लोगों का विचारधारात्मक रूप से विरोध करते थे। जबकि भारतीय जनता पार्टी सरकार के विरोध में, न्यायमूर्ति चंद्रचुद की असंतोषजनक राय की सराहना की गई।

हालांकि बहुमत के निर्णय ने एसआईटी का गठन करने के लिए कोई निर्देश पारित नहीं किया, लेकिन उन्होंने आरोपी को उचित अदालत में उचित कानूनी उपाय करने के लिए चार सप्ताह की नजरबंदी का आदेश दिया। दूसरी तरफ, न्यायमूर्ति चंद्रचुद की असंतोषजनक राय ने आरोपी को तीन सप्ताह नजरबंदी और एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था।

यह सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले की रौशनी में ही था कि सोमवार को गौतम नवलाखा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी से मुक्त कर दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश ने सीएमएम दिया गया ट्रांजिट रिमांड के आदेश को किनारे कर दिया था। यह इस आधार पर किया गया था कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सभी दस्तावेज मराठी में थे, इसलिए यह स्पष्ट था कि सीएमएम उस सामग्री को पढ़ने में सक्षम नहीं थे। इसलिए, सीएमएम यह निर्धारित करने में भी असमर्थ थे कि ट्रांजिट रिमांड उचित है या नहीं और उनके खिलाफ यह पहली नज़र का मामला बनता भी है या नही। उच्च न्यायालय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जरूरी नजरबंदी को चार सप्ताह की अवधि के अर्थ आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब तक कि उचित उपाय प्राप्त नहीं किया जाता है, तब तक नवलाखा की हिरासत समाप्त की जाती है। महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांजिट रिमांड के लिए एक नया आवेदन करने से रोकने के लिए आदेश नहीं किया गया।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद थोड़ी खुशी है लेकिन मुश्किलभरी वास्तविकता यह है कि इससे कुछ ज्यादा नही बद्ला है। सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश ने आरोपी को समय देने से ज्यादा कुछ नहीं दिया है। हालांकि, सरकार को भी इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए समय दिया गया है।

Bhima Koregaon
Bhima Koregaon Case
gautam navlakha
Maharashtra police
Devendra Fednavis

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

भीमा कोरेगांव: HC ने वरवर राव, वर्नोन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा को जमानत देने से इनकार किया

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती

अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे HC ने की गौतम नवलखा पर सुनवाई, जेल अधिकारियों को फटकारा

सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज

2021 में सुप्रीम कोर्ट का मिला-जुला रिकॉर्ड इसकी बहुसंख्यकवादी भूमिका को जांच के दायरे में ले आता है!

अदालत ने सुधा भारद्वाज को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दी

एल्गार परिषद मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए की याचिका ख़ारिज की


बाकी खबरें

  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर: हिजाब विवाद हो या नफ़रती भाषण, सब कुछ चुनाव के लिए कब तक
    12 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान में रख कर्नाटक से हुए हिजाब विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने…
  • goa elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्टः गोवा चुनावों में जोड़-तोड़ व हिंदुत्व ख़िलाफ क्या होगा बदलाव
    11 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने गोवा में चल रहे चुनावी समर का आकलन करते हुए जानने की कोशिश की इस बार क्या चल पाएगा हिंदुत्व का नफ़रती कार्ड या जनता के बुनियादी मुद्दों पर होगा मतदान।…
  • Sunderbans
    अयस्कांत दास
    सुंदरबन में अवैध रिसॉर्ट के मालिक की पहचान नहीं कर पा रही ममता सरकार
    11 Feb 2022
    पारिस्थितिक रूप से नाजुक सुंदरबन में कथित तौर पर केंद्र प्रायोजित मनरेगा योजना के धन का इस्तेमाल एक अवैध 'इको-टूरिज्म' रिसॉर्ट के निर्माण में किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
    11 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    प्यूर्टो रिको में शिक्षकों ने की वेतन और सुविधाओं की मांग के साथ देशव्यापी हड़ताल
    11 Feb 2022
    सरकार ने वेतन में बढ़ोतरी न करने के साथ साथ पेंशन में कटौती भी कर दी है, इसके ख़िलाफ़ शिक्षकों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License