NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भोपाल में अब जनता की आवाज़ उठाना पड़ेगा महंगा
जन मुद्दों को उठाने के लिए विपक्ष या सामाजिक संगठन धरना या प्रदर्शन का ही सहारा लेते हैं। कई बार तत्कालिक मुद्दों पर प्रदर्शन करने होते हैं, लेकिन भोपाल में अब ऐसा करने पर पुलिस उन पर भारी जुर्माना लगा सकती है। बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन और तय संख्या से ज्यादा लोगों के शामिल होने पर लाखों रुपए के जुर्माना का प्रावधान को राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बता रहे हैं।
राजु कुमार
27 Aug 2019
agitation in bhopal

मध्यप्रदेश में जब 15 सालों तक भाजपा की सरकार थी, तब धरना-प्रदर्शन पर अंकुश लगाने के कई प्रयास किए गए। उसके खिलाफ न केवल कांग्रेस बल्कि कई सामाजिक एवं जन संगठनों ने विरोध किया था। यहां तक कि जब-तब कैम्पस के भीतर होने वाले आयोजनों के लिए भी पुलिस-प्रशासन से अनुमति लेने के आदेश जारी होते रहे हैं। यहां तक कि प्रदर्शन के लिए कई स्थानों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। प्रशासन को यदि यह आभास हो जाता था कि प्रदर्शन के कारण सरकार को असहज होना पड़ेगा, तो उसकी अनुमति तक नहीं मिलती थी।

ऐसे में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए विपक्ष की आवाज़ को दबाया नहीं जाएगा और आलोचना एवं अपनी आवाज़ रखने के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा पब्लिक स्पेस उपलब्ध कराएगी। लेकिन ठीक इसके उलट अनुभव होने लगा है और भोपाल में धरना-प्रदर्शन करना ज्यादा कठिन बना दिया गया है। इससे सामाजिक संगठनों सहित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) एवं भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के कई नेता भी नाखुश हैं। माकपा इसे जन आंदोलनों को कुचलने वाली हरकत मान रही है।

भोपाल संभाग के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा जारी आदेश के अनुसार भोपाल में अब बिना अनुमति रैली एवं धरना-प्रदर्शन करने पर या उसमें तय संख्या से ज्यादा लोगों के शामिल होने पर आयोजकों को लाखों रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा। इस आदेश को जारी करने के पीछे कारण बताया गया है कि रैली, धरना-प्रदर्शन के दरम्यान जाम लगने से आमजन, स्कूली बच्चों एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को परेशानी होती है। ऐसे में बिना अनुमति इस तरह के आयोजनों में पुलिस-प्रशासन को अपना शासकीय काम छोड़कर इसमें लगना पड़ता है, जिससे शासकीय काम बाधित होता है। ऐसी स्थिति में शासकीय अमला मूल कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर पाते, इसलिए आकस्मिक ड्यूटी पर होने वाले व्यय को रैली या धरना-प्रदर्शन करने वालों से वसूला जाएगा।

letter_0.jpg

पुलिस के इस आदेश की पृष्ठभूमि में पिछले दिनों भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह द्वारा बिना अनुमति रैली निकालने का मामला है। बीते 20 अगस्त को स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने लिए भोपाल के अलग-अलग स्थानों से रैली निकालने का नेतृत्व किया। अलग-अलग जगहों से बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचने से पहले ही तितर-बितर कर दिया। प्रशासन ने पुलिस को बताया था कि बिना अनुमति पूर्व विधायक रैली एवं प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई के लिए फोर्स भेजा। इसके दो-तीन बाद भोपाल पुलिस ने पूर्व विधायक पर 23 लाख 76 हजार 280 रुपए का जुर्माना लगा दिया। इसके लिए पुलिस ने तर्क दिया कि घेराव के दरम्यान आकस्मिक ड्यूटी पर हुए खर्च को बिना अनुमति रैली व घेराव का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाया गया है।

An agitation in Bhopal (5).jpg
पुलिस के उक्त कार्रवाई का चौतरफा विरोध हो रहा है। माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह का कहना है, ‘‘जनतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व्यक्ति के मौलिक अधिकारों में शामिल होता है। आजादी से लेकर आज तक सरकारों के जनविरोधी निर्णयों के विरोध में जनता जनतात्रिक तरीके से विरोध व्यक्त करती रही है। मगर यह पहली बार हुआ है कि किसी राजनीतिक प्रदर्शन के कारण किसी पर जुर्माना थोपा जाए। पुलिस का दावा इसलिए और हास्यास्पद हो जाता है, जब उसने इस प्रदर्शन में किसी प्रकार की क्षति का जिक्र नहीं किया है, वसूली की वजह सिर्फ प्रदर्शन के कारण पुलिस को अतिरिक्त बल जुटाना पड़ा बताया गया है, जबकि कानून व्यवस्था ही तो पुलिस का प्राथमिक कार्य है। भोपाल के पूर्व विधायक द्वारा गुमटी व्यावसायियों के प्रदर्शन में मुख्यमंत्री पर की गई हिंसक टिप्पणी निंदनीय है। कोई भी संवेदनशील व्यक्ति उसका समर्थन नहीं कर सकता है। मगर उस आंदोलन की आड़ में पुलिस द्वारा सुरेंद्रनाथ सिंह से पौने 24 लाख रुपए की वसूली की धमकी अलोकतांत्रिक है और तानाशाही पूर्ण कदम है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनुसार पूर्व की भाजपा सरकार ने जन आंदोलनों को कुचलने के लिए विरोध प्रदर्शनों के परंपरागत स्थानों को प्रतिबंधित कर दिया था। सभा स्थल के आयोजन पर हजारों रुपए का किराया निर्धारित कर जनता की अभिव्यक्ति का गला घोंटा था। इसके विरोध में ही जनता ने भाजपा को हराया था। मगर नई सरकार का भी तानाशाही कदमों पर चलना खतरनाक है और यदि यह निर्णय राजनीतिक स्तर पर लिया गया है तो और भी गंभीर है। माकपा ने सभी जनतंत्र पसंद नागरिकों को पुलिस प्रशासन के इस निर्णय का विरोध करने की अपील की है।

An agitation in Bhopal (2).jpg
पुलिस के इस निर्णय का भाजपा एवं माकपा के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी विरोध किया है। प्रदेश के विधि मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि धरना-प्रदर्शन पर जुर्माना की कार्रवाई करना ठीक नहीं है। इस पर विचार किया जाना चाहिए। राजनीति में धरना-प्रदर्शन करना सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस के विधायक कुणाल चौधरी का कहना है कि धरना-प्रदर्शन नहीं होंगे, तो लोग अपनी बात कैसे रखेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच के संयोजक लज्जा शंकर हरदेनिया कहते हैं, ‘‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं संगठित होने का अधिकार हमें संविधान देता है। पुलिस का यह आदेश बहुत ही गलत है। अगर अपनी मांगों के लिए लोगों को अनुमति लेकर प्रदर्शन करना पड़े, तो सरकार की जिसमें आलोचना हो या फिर अपने विरोधी को वह अनुमति क्यों देगी? धरना-प्रदर्शन एवं रैली की सूचना देने की अनिवायर्ता तक बात समझ में आती है, लेकिन अनुमति को अनिवार्य करने के आदेश का पूरी तरह विरोध करना चाहिए।

प्रदर्शन के लिए स्थानों को चिह्नित करने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वह सत्ता या प्रशासन के प्रमुख केन्द्रों से दूर हो, ऐसा होने पर प्रदर्शन का कोई औचित्य नहीं होगा। कई बार तात्कालिक मुद्दों पर भी प्रदर्शन या धरने का आयोजन होता है, इसलिए सूचना देना भी संभव नहीं होता। प्रशासन एवं राजसत्ता का ध्यान आकर्षित करने के लिए लोकतंत्र में अहिंसक विरोध-प्रदर्शन एवं रैली का बड़ा महत्व है, इस पर अंकुश लगाने का विरोध हमने पिछली सरकार में भी किया था और यदि पुलिस के वर्तमान आदेश को निरस्त करने एवं जुर्माने के प्रावधान को हटाने का निर्णय सरकार नहीं लेती है, तो इसके खिलाफ भी प्रदर्शन किया जाएगा।’’

Bhopal
social organisation
bhopal police
BJP government
Congress
CPM
CPI-M Secretary of State Jaswinder Singh
Shankar Hardeniya

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    देश भर में निकाली गई हनुमान जयंती की शोभायात्रा, रामनवमी जुलूस में झुलसे घरों की किसी को नहीं याद?
    16 Apr 2022
    एक धार्मिक जुलूस से पैदा हुई दहशत और घायल लोगों की चीख़-पुकार अभी फ़िज़ा में मौजूद है कि राजधानी दिल्ली सहित देश भर में एक और त्योहार के जुलूस निकाले गए। और वह भी बाक़ायदा सरकारी आयोजन की तरह। सवाल…
  • पलानीवेल राजन सी
    अपनी ज़मीन बचाने के लिए संघर्ष करते ईरुला वनवासी, कहा- मरते दम तक लड़ेंगे
    16 Apr 2022
    पिल्लूर में स्थानीय समुदायों की लगभग 24 बस्तियां हैं, जो सामुदायिक वन अधिकारों की मांग कर रही हैं, जैसा कि एफआरए के तहत उन्हें आश्वस्त किया गया था।
  • रूबी सरकार
    बुलडोज़र की राजनीति पर चलता लोकतंत्र, क्या कानून और अदालतों का राज समाप्त हो गया है?
    16 Apr 2022
    जिस तरह एक ख़ास धर्म के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए भाजपा की राज्य सरकारें बुलडोज़र को आगे कर रही हैं उससे लोकतंत्र हर रोज़ मरणासन्न स्थिति की ओर जा रहा है। 
  • सत्यम श्रीवास्तव
    कन्क्लूसिव लैंड टाईटलिंग की भारत सरकार की बड़ी छलांग
    16 Apr 2022
    देश में मौजूद ज़मीन के हर एक पीस/प्लॉट का एक आधार नंबर दिया जाना जिसे इस बजट भाषण में यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) कहा गया है। इसके लिए बाज़ाब्ता ज़मीन के हर टुकड़े के अक्षांश और देशांत…
  • विजय विनीत
    पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन
    16 Apr 2022
    पेपर लीक मामले में पत्रकारों की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज बलिया में ऐतिहासिक बंदी है। बलिया शहर के अलावा बैरिया, बांसडीह, बेलथरा रोड, रसड़ा और सिकंदरपुर समेत ज़िले के सभी छोटे-बड़े बाज़ार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License