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भारत
राजनीति
भोपाल में महिला अध्यापकों को मुंडन कराने पर 1.40 लाख रुपये चुकाने पड़े
माकपा नेता ने कहा कि राज्य में भाजपा किस तरह लोकतंत्र का गला घोंट रही है, यह घटना उसकी एक बानगी है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है।
आईएएनएस
15 Jan 2018
women protesters

भोपाल, 15 जनवरी (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश में आंदोलन करना भी अब आसान नहीं रह गया है। अपनी मांगों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए जिन महिलाओं सहित पुरुष अध्यापकों ने सामूहिक मुंडन कराया, उन्हें जगह का किराया एक लाख 40 हजार रुपये देना पड़ा। भुगतान की रसीदें सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। आजाद अध्यापक संघ ने शनिवार को जम्बूरी मैदान में प्रदर्शन किया था और इस दौरान महिला अध्यापकों सहित अन्य ने मुंडन कराया था। संगठन को जम्बूरी मैदान का किराया भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल) को चुकाना पड़ा। 

एक लाख 40 हजार रुपये भुगतान के बावत पूछे जाने पर भेल के जनसंपर्क अधिकारी विनोदानंद झा ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, "जम्बूरी मैदान में कोई भी कार्यक्रम करने की फीस निर्धारित है, जिसका भुगतान करना होता है। अध्यापक संघ ने भी उतनी राशि का भुगतान किया होगा।" 

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव बादल सरोज ने आंदोलनकारी अध्यापकों से शुल्क वसूली को लोकतंत्र का गला घोंटना करार दिया है। 

उन्होंने कहा, "राज्य सरकार के इशारे पर भोपाल जिला प्रशासन ने अध्यापकों को अपनी सभा करने के लिए पहले तो कोई स्थान नहीं दिया, बाद में भेल का जम्बूरी मैदान जाने के लिए कहा गया। अब पता चला है कि उनसे एक लाख 40 हजार रुपये वसूले गए।"

माकपा नेता ने कहा कि राज्य में भाजपा किस तरह लोकतंत्र का गला घोंट रही है, यह घटना उसकी एक बानगी है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। भ्रष्टाचार में लिप्त, किसानों की हत्यारी और शिक्षा व रोजगार की दुश्मन बनी भाजपा सरकार पूरे प्रदेश में सार्वजनिक सभाओं, धरनों और जुलूसों को लगभग प्रतिबंधित किए हुई है। ज्यादातर जगह बेमियादी धारा 144 थोप दी गई है। राजधानी तक में आंदोलन या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है।

बादल सरोज ने कहा, "इस तरह की तानाशाही बंद की जानी चाहिए। शिक्षकों से वसूल की गई राशि उन्हें लौटाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सोचना चाहिए कि बच्चों का भविष्य संवार रहीं महिलाओं में इतना आक्रोश क्यों है कि उन्होंने अपना मुंडन करवा लिया। प्रदेश के सभी लोकतंत्र हितैषी संगठनों और व्यक्तियों को मिलकर सरकार के इस रवैए के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।" 

--आईएएनएस

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