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बाइडेन ने रूस के प्रति अपनी आक्रमकता को कम किया
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को बाइडेन द्वारा किए गए फ़ोन के बारे में व्हाइट हाउस ने जो बयान जारी किया है वह हालिया अमेरिकी घोषणाओं से अलग है।
एम. के. भद्रकुमार
15 Feb 2022
Translated by महेश कुमार
बाइडेन ने रूस के प्रति अपनी आक्रमकता को कम किया

शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बातचीत के बारे में व्हाइट हाउस द्वारा जारी रीडआउट इस धारणा को व्यक्त करता है कि, यदि रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वाशिंगटन रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगा। लेकिन यह अपने सार में मामूली सा संदेश है जिसे व्यक्त करने में एक या दो मिनट से अधिक समय नहीं लगा होगा। फिर भी, बातचीत "एक घंटे से कुछ अधिक" तक चली।

क्रेमलिन रीडआउट अभी जारी किया जाना बाकी है, लेकिन पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कल रात ही मीडिया को एक ब्रीफिंग दी थी। उशाकोव ने खुलासा किया कि बातचीत तत्काल अमेरिकी अनुरोध पर हुई थी जिसे रूस द्वारा यूक्रेन पर कथित रूप से आसन्न "आक्रमण" की आशंकाओं का हवाला देते हुए और लिखित रूप में अवगत कराया गया था। कॉल मूल रूप से सोमवार के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन क्रेमलिन ने इसका वक़्त आगे बढ़ा दिया था। 

जैसा कि उशाकोव ने कहा, बातचीत "रूस द्वारा यूक्रेन पर कथित रूप से 'आक्रमण' करने की संभावना की अमेरिकी अधिकारियों के कुतर्क और उन्माद के माहौल के बीच हुई है।"

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने पिछले दिन एक विशेष ब्रीफिंग में भयंकर सर्वनाश की भविष्यवाणी की थी, जिसने दुनिया की राजधानियों को हिलाकर रख दिया था, कि यूक्रेन पर एक रूसी आक्रमण "ओलंपिक के दौरान शुरू हो सकता है, जबकि तमाम अटकलों के बावजूद कि यह ओलंपिक के बाद ही हो सकता है।"

उशाकोव ने कहा कि, पुतिन ने इस तरह के उन्मादी आरोपों को अपवाद के रूप में लिया, जिसके तहत यूक्रेन में भारी मात्रा में सैन्य उपकरणों को डाला जा रहा जो केवल एक ही उद्देश्य की पूर्ति करता है, अर्थात्, इसके ज़रिए "यूक्रेनी सशस्त्र बलों द्वारा संभावित उत्तेजक कार्यवाही की  स्थितियां बनाई जा रही हैं।" पुतिन ने मिन्स्क समझौतों के साथ "तोड़फोड़" करने के मामले में कीव की "विनाशकारी नीतियों" के बारे में भी बात की और यूक्रेन के नेतृत्व पर दबाव बनाने में पश्चिम की विफलता की ओर इशारा किया।

हालाँकि, उशाकोव की ब्रीफिंग का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह था कि बाइडेन का प्रतिबंधों आदि का संदर्भ वास्तव में उनकी बातचीत का मुख्य हिस्सा नहीं था। उशाकोव को उद्धृत करते हुए  "बाइडेन ने जिन संभावित रूसी विरोधी प्रतिबंधों का उल्लेख किया, यूक्रेन के आसपास तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए उसकी उम्मीद पहले से लगाई जा रही थी। साथ ही, यह मुद्दा काफी लंबी बातचीत के केंद्र में नहीं था," जो कि कुल मिलाकर रचनात्मक और "व्यावसायिक" था।

उशाकोव के अनुसार, "दोनों राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हुए कि मास्को उन विचारों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करेगा जो बाइडेन ने व्यक्त किए हैं और यदि संभव हो, तो अमेरिका और नाटो की स्थिति पर दस्तावेजों की प्रतिक्रिया पर काम करते समय उन्हें ध्यान में रखा जाएगा।"

पुतिन ने बाइडेन को यह भी बताया कि मॉस्को ने संभावित कदमों पर "विभिन्न एजेंसियों के साथ परामर्श ..." लगभग पूरा कर लिया है और निकट भविष्य में इसकी एक घोषणा की जाएगी। हम जल्द ही अपने सहयोगियों और जनता को अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएंगे।" यह उन्होने रूस की सुरक्षा गारंटी के लिए की गई मांगों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा था।

उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने अमेरिका और नाटो के साथ रूस के संबंधों के इतिहास को मद्देनजर रखते हुए कहा कि 1990 के दशक में, "हम दोस्त लग रहे थे, हालांकि तब भी, अमेरिका और नाटो ने रूस के प्रति जो नीति अपनाई थी, वह रचनात्मकता से बहुत दूर थी।" हालाँकि, तब से नाटो का विस्तार जारी रहा और "गठबंधन रूस की सीमाओं के करीब आ गया।" नतीजतन, सुरक्षा की स्थिति "नाटकीय रूप से बिगड़ गई" और नाटो का विस्तार अब रूस की सुरक्षा से संबंधित है।

उशाकोव ने कहा कि बाइडेन ने याद किया कि अमेरिकी और सोवियत नेताओं ने दोनों देशों के बीच एक बड़े संघर्ष से बचने के लिए अपनी हैसियत के हिसाब से सब कुछ किया, और यद्यपि "हमारी दो महान शक्तियां अभी भी प्रतिद्वंद्वी हैं, उन्हें स्थिरता बनाए रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए और पूरी दुनिया में सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।"

बाइडेन ने जोर देकर कहा कि यूक्रेन के आसपास के मौजूदा संकट में सबसे खराब स्थिति से बचने के लिए हर संभव प्रयास करना जरूरी है। उशाकोव ने कहा कि, दोनों "राष्ट्रपति आज फोन पर की गई चर्चा के सभी मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर आगे के संपर्कों पर सहमत हुए हैं ... जैसा कि बाइडेन ने कहा कि, वे चाहते हैं कि रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अंतरराज्यीय संबंध आपसी सम्मान की नींव पर बने।"

कुल मिलाकर, उशाकोव की ब्रीफिंग ने एक सकारात्मकता की सूचना दी है। अपनी ओर से, व्हाइट हाउस ने भी नए बने हालत के मद्देनजर प्रेस को बताया कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच चर्चा "पेशेवर और वास्तविक" थी। ब्रीफिंग में स्वीकार किया गया कि "दांव इतना ऊंचा है कि रूस को ऐसी कार्रवाई से बचने का हर मौका नहीं देना चाहिए जो हमें लगता है कि विनाशकारी होगा।"

महत्वपूर्ण रूप से, इसने उस जुझारूपन को छोड़ दिया है जो सुलिवन ने पिछले दिन सर्वनाश की भविष्यवाणियों के माध्यम से पेश किया था। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बाइडेन  "समस्या को सुलझाने और समाधान खोजने का तरीका पसंद करते हैं जो हमारे हित में, हमारे भागीदारों और सहयोगियों के हित में है, और जो रूस द्वारा उठाई गई कम से कम कुछ चिंताओं को दूर कर सकता है।"

सीधे शब्दों में कहें तो व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को सुलिवन की उग्र बयानबाजी और गैर-जिम्मेदाराना आरोपों से खुद नकार दिया है। यहाँ कुछ गड़बड़ लगती है। बेशक, अमेरिका-रूस संबंधों में पहियों के भीतर पहियों का एक लंबा इतिहास है जहां अमेरिकी प्रशासन में मौजूद रूस विरोधी तत्वों ने अपने एजेंडे को पीछे कर दिया है।

2016 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ हिलेरी क्लिंटन के अभियान के दौरान कुख्यात स्टील डोजियर एक उदाहरण है। वैसे, हिलेरी क्लिंटन के विदेश नीति सलाहकार के रूप में सुलिवन ट्रम्प-रूस "मिलीभगत" की कथा को फैलाने वाले प्रमुख व्यक्ति थे। और, हिलेरी क्लिंटन ने 2016 में अपनी हार के लिए व्यक्तिगत रूप से पुतिन को दोषी ठहराया था।

क्या यह संयोग हो सकता है कि ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस ने आज संडे टाइम्स को बताया कि "हवा में म्यूनिख के युद्ध का एक झोंका" है? मुद्दा यह है, हालांकि यह पूरी तरह से मान्य है कि यूक्रेन पर किसी भी सैन्य हमले की स्थिति में यूरोप रूस की निंदा करेगा, लेकिन साथ ही यह वाशिंगटन के युद्ध उन्माद को बढ़ावा भी नहीं देता है।

दरअसल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने भी शनिवार को पुतिन से बात की थी और बाद में पेरिस से आई खबरों में कहा गया था कि उन्हें विश्वास नहीं था कि मास्को यूक्रेन के खिलाफ "एक आक्रामक तैयारी कर रहा है"। निश्चित रूप से, अपनी घरेलू राजनीति में इस तरह के तीव्र ध्रुवीकरण के बीच अमेरिकी नीतियों की निरंतरता के बारे में यूरोपीय मन में भी संदेह है।

दिलचस्प बात यह है कि पोलिटिको ने शुक्रवार को रिपोर्ट दी - उसी दिन जब व्हाइट हाउस दस्तावेज़ "इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी" जारी किया गया था - कि यूरोपीयन यूनियन और चीनी नेता बार-बार देरी के बाद 1 अप्रैल को एक आभासी शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए तैयार हैं, जो कि दोनों के बीच हाल ही में बढ़ते व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव को शांत करने के लिए उच्च-राजनीतिक प्रयास है ... यूरोपीयन यूनियन के कई संस्थानों ने हाल के महीनों में चीन के साथ प्रणालीगत प्रतिद्वंद्विता पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करने के बारे में चिंता व्यक्त की है, यूरोपीयन यूनियन-चीन में दो बातों पर ज़ोर देने की उम्मीद है - साझेदारी और आर्थिक प्रतिस्पर्धा – पर अधिक ध्यान रखना।"

स्पष्ट रूप से, अमेरिका के ट्रान्साटलांटिक नेतृत्व के बारे में बढ़ती बेचैनी इस ओर इशारा कर रही है और बड़ी गंभीरता से इसे नोट करना भी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है कि इससे जहां व्यापक तनाव पैदा होगा, विशेष रूप से महाद्वीप में एक युद्ध के भूत के खतरे से और भी बड़ी चिंता यह है कि यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं पहले से काफी संघर्ष कर रही हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्री कुलेबा ने आज खुलासा किया कि यूरोपीय देशों के विरोध के कारण स्विफ्ट अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली से रूस को हटाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।

उशाकोव के मुताबिक, पुतिन और बाइडेन के बीच "रचनात्मक और व्यावसायिक" बातचीत से तो यह धारणा बनती है कि अमरीका भी वर्तमान गतिरोध की जटिलताओं और रूस के साथ तनाव पर लगाम लगाने की तत्काल जरूरत के प्रति सचेत हैं।

इस प्रकार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बाइडेन की फोन पर हुई बातचीत के बारे में व्हाइट हाउस ने आज से पहले की अपनी सभी अमेरिकी घोषणाओं से मुह मोड लिया है, और आसन्न रूसी आक्रमण के किसी भी आरोप को नकार दिया है। ज़ेलेंस्की ने खुद हाल ही में वाशिंगटन में युद्ध के उन्माद पर निराशा व्यक्त की थी।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Biden Dials Back Belligerence Toward Russia
 

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