NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बाइडेन ने क्वाड-3 के लिए ज़मीन तैयार की
बाइडेन एक बार फिर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बड़ा खेल, जिस पर पेंटागन और सीआइए काम कर रहे हैं, वह जारी रहे। वह खेल है ईरान, चीन और रूस को इराक से दूर रखना। 
एम. के. भद्रकुमार
31 Jul 2021
बाइडेन ने क्वाड-3 के लिए ज़मीन तैयार की
अमेरिका के दौरे पर आए ईराकी प्रधानमंत्री मुस्तफा अल कादिमी (बाएं) का 27 जुलाई 2021 को वाशिंगटन में स्वागत करते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन। 

ऐसा मालूम होता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की विदेश-नीति को संभालने वाली टीम अपनी धरातलीय सच्चाई को लेकर अनिश्चित होती जा रही है। इसके सदस्य देख सकते हैं कि उनका 78 वर्षीय प्रमुख जिस इमारत का निर्माण कर रहा है, उसकी बुनियाद भुरभुरी जमीन पर टिकाई गई है। लेकिन इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकके लिए उनमें प्रत्युत्पन्नमतित्व का पर्याप्त अभाव है। 

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति को एक चीज का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उनके बड़े से बड़े अधिकारियों की टीम में भी अंतरराष्ट्रीय राजनय की समझ रखने वालों के लिहाजन स्वयं बाइडेन से अधिक अनुभवी कोई राजनेता नहीं है, वे उन सबमें अब भी सिरमौर हैं। इनमें वे धुरंधर राजनयिक विलियम बर्न्स भी शामिल हैं, जिन्हें रिटायरमेंट से उठा कर बाइडेन ने सीआइए का प्रमुख बनाया है, अमेरिका की वह खुफिया एजेंसी जिस पर आइजनहावर और कैनेडी जैसे शानदार राष्ट्रपति भी अपना नियंत्रण नहीं रख सके थे। 

सीआइए के बॉस बनने के बाद बीते हफ्ते एनपीआर को दिए अपने पहले इंटरव्यू में बर्न्स ने बड़ी चतुराई से यह कबूल किया था कि उनकी पहली प्राथमिकता सीआइए में अपना दखल जमाना होगा : 

“मुझे अत्यधिक उम्मीद है कि एक नीति-निर्माता, एक राजनयिक के रूप में मेरे पूर्व के अनुभवों की बदौलत मैं सीआइए का एक बेहतर निदेशक साबित होऊंगा और नीति-निर्माताओं के लिए जो मसले सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, उनसे संबंधित खुफिया कार्यों में बेहतर संलग्न होने में मेरी मदद करेंगे। कम से कम मैं उसे करने के लिए जी-तोड़ प्रयास करूंगा...उन साढ़े तीन दशकों तक एक राजनयिक के रूप में मैंने अमेरिका की नीति को एक आकार देने में मदद दी है। और सीआइए में मेरा काम, हमारी टीम का काम नीति-निर्माताओं का समर्थन करना और उन्हें सूचित करना है ताकि वे बेहतर संभव विकल्प चुन सकें; यह काम खुद ही नीति-निर्माता हो जाने का नहीं है। तो इसका औऱ क्या  मतलब है? मैं सोचता हूं कि हमारा उत्तरदायित्व किसी राजनीतिक एवं नीतिगत एजेंडे के बगैर सरकार को बिना किसी लाग-लपेट के सूचनाएं प्रदान करना है। हम जो कर सकते हैं, वह यह कि अपने राष्ट्रपति और इस सरकार में शामिल मेरे सभी सहयोगियों को उनके तेज-तर्रार विकल्पों के चयन में मदद करने के लिए हम सबसे बेहतर और सबसे अच्छी तरह से जमीनी खुफिया जानकारी एकत्र कर सकते हैं। हम राष्ट्रपति को जानते हैं, उनके साथ लगभग चौथाई सदी से भी अधिक समय तक काम किया है और उनके प्रशंसक भी रहे हैं। उन्होंने मुझे इस पद का उत्तरदायित्व देते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि वे मुझसे क्या अपेक्षा रखते हैं, यहां तक कि हम उन्हें वह भी खुफिया जानकारी देते हैं, जो सुविधाजनक नहीं होती है; और इस बात को मैं एक पूर्व नीति-निर्माता के रूप में महसूस करता हूं।”

बर्न्स एक प्रबुद्ध मस्तिष्क के व्यक्ति हैं। राजनयिक क्षेत्र में बाइडेन की पूरी टीम, जिसमें विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, रक्षा मंत्री लोएड आस्टिन तृतीय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन और राष्ट्रीय खुफिया विभाग के निदेशक अवरिल हैन्स शामिल हैं, बर्न्स उन सब के अनुभवों के 90 फीसदी से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

हालांकि बर्न्स की वह टिप्पणी अप्रत्याशित रूप से भ्रमित करने वाली है। उनकी नाउम्मीदी को समझने के लिए, टीम वेनर की एक प्रसिद्ध किताब “लेगसी ऑफ एसेज: दि हिस्ट्री ऑफ दि सीआइए” को पढ़ा जाना चाहिए। टीम ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी विषय पर दो दशकों तक न्यूयार्क टाइम्स में अपना कॉलम लिखा था और उन्हें पुल्तिजर पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

वेनर ने यह खुलासा किया था कि क्यों प्रायः सभी सीआइए निदेशक अपने पदभार ग्रहण करते समय की एजेंसी की स्थिति की तुलना में एक खराब विरासत छोड़ जाते हैं और उनकी गुप्त कार्रवाइयां अमेरिकी विदेश नीतियों में अक्सर एक बड़ी विफलता की ओर ले जाती हैं। 

वास्तव में बाइडेन एक बेहद अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने अमेरिकी राजनीति के एक दूसरे की काट निकालने वाले दौड़ के मैदान सीनेट में अपने 36 साल लगाए हैं। इसके बाद, वे अगले आठ साल बराक ओबामा के कार्यकाल में एक अपरिहार्य उप-राष्ट्रपति के रूप में योगदान दिया है। उन्होंने हिल में एक सर्वानुमति बनाने में अपनी सराहनीय भूमिका निभाई है और विदेशों में तुर्की एवं रूस समेत अमेरिका के अक्खड़ सहयोगियों एवं भागीदारों के मसले को निबटाया है। 

बाइडेन अपने अधिकार क्षेत्र को बखूबी संभाल लेते थे, जहां बराक ओबामा तुनकमिजाजी के चलते युक्ति से काम नहीं निकाल पाते थे या समर्थन के बोध में कमी रह जाती थी-जैसे कि यूक्रेन, इराक, अफगानिस्तान इत्यादि के मामले में। अगर ओबामा जर्मनी की अपनी समकक्ष एंजिला मर्केल के साथ बिल्कुल सहज रहते थे तो बाइडेन भी तुर्की के एर्दोगन और इराक के नुरी अल मलिकी और सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन नयेफ के साथ बड़े चाव से गुफ्तगू कर सकते थे। 

वैसे, बाइडेन का सऊदी अरब, जिसे उन्होंने एक “छंटा हुआ देश” कह दिया था, के बारे में एक अलग गेम प्लान है। प्रोफेसर मदावी अल रशीद, जो लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स के मध्यपूर्व इंस्टिट्यूट में विजिटिंग प्रोफेसर हैं, ने इस विषय पर हाल ही में एक लेख लिखा है:  

“बाइडेन का मौजूदा प्रिंस की दुस्साहसिक विदेश नीतियों को नियंत्रित करने के लिए अब तक का रिकार्ड बढ़िया रहा है। प्रिंस को कतर के साथ अपने संबंध को ठीक करने, यमन के हौथिज के साथ एक शांति-प्रस्ताव की पेशकश करने पर जोर देना, बजरिए इराक ईरान के साथ छेड़छाड़ करने और खुद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यिप एर्दोगन का प्रिय होना बाइडेन के लिए आसान है। लेकिन बात जब राजनीतिक सुधार की आती है, तब अमेरिका चुप्पी साध लेता है। वह इसके लिए न तो इच्छुक दिखता है और न ही इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के गुणों को ही देखता है, जो अंततः देश को लोकतंत्र के पथ पर ही अग्रसर करने वाला है। इस समय, अमेरिका का राष्ट्रीय हित सऊदी अरब के मौजूदा प्रिंस के साथ जुड़ा है, फिर जहाज को चट्टानों से क्यों टकराने देना है।” 

बाइडेन वह आपके लिए है! उनकी विदेश-नीति से जुड़ी टीम जंगल में बच्चों की तरह हैं। ब्लिंकन यह अंदाजा भी नहीं लगा सके कि उनके बॉस रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन को “हत्यारा” कह देंगे  और उसके तीन हफ्ते बाद ही उनके साथ बैठक के प्रस्ताव के लिए चक्कर काटेंगे। इसलिए ब्लिंकन अब अपने पांव को तेजी से सुरक्षित जमीन पर टिकाने लगे हैं-कभी-कभार वह चीन को बुरा-भला कह देते हैं, या, जब उन्हें करने के लिए कुछ नहीं होता है तो वे अमेरिका की उत्तर अटलांटिक ग्रंथिबंधन की प्रतिज्ञा करने लगते हैं। वे भारत और कुवैत को हैंडल करना पसंद करते हैं जिनके प्रति बाइडेन की कोई बहुत दिलचस्पी नहीं है। 

अफगानिस्तान को ही ले लीजिए। ब्लिंकन ने सोचा कि दोहा प्रक्रिया एक वास्तविक चीज थी। किंतु वास्तव में वह बाइडेन का तय रास्ता नहीं था। यह बात केवल ऑस्टिन एवं बर्न्स जानते थे! दरअसल, बाइडेन ने इसके ठीक विपरीत एक प्लान बी बनाया था, जो अब सामने आ रहा है। इसका मकसद उन्नत तकनीक वाले उस युद्ध को एल्गोरिथम वॉर में बदलना था। जो आवश्यक रूप से तालिबान को एक ‘दुश्मन’ के रूप में निरूपित करता है और इसके बाद, आसमानी सुरक्षा से मिसाइलों की बौछार करता है, नए हथियार प्रणाली का परीक्षण करता है। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर निराशा जताना, रूस को फिक्रमंद बनाए रखना और ईरान में सतर्कता की उच्च स्थिति बनाए रखना, सभी उस प्लान बी का हिस्सा है।

बेशक, बाइडेन ने पहले यह सुनिश्चित किया कि किसी का भी शव ‘स्वदेश’ लौट कर उन्हें शर्मिंदा न करे। इसके लिए उन्होंने तथाकथित ‘डीप स्टेट’ के जरिए प्लान बी बनाया और घानी के बहिर्गमन की चिंता की, जिसकी संभावना हमेशा बनी हुई है। इसलिए, एक चतुष्ट्य राजनयिक मंच (क्वाड) को अपनी जगह तैयार रखा गया है। लेकिन बाइडेन का पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अभी तक गुफ्तगू नहीं हुई है, जो इस परिदृश्य में अमेरिका का क्वाड में एक सर्वथा नवीन भागीदार है।

अफगानिस्तान का नाटक इराक में दुहराया जा रहा है। बाइडेन पुराने शिकारी हैं। सोमवार को बाइडेन ने घोषणा की थी कि अमेरिका का इराक में संघर्ष अभियान 31 दिसम्बर के पहले खत्म नहीं होगा। बाइडेन एक अन्य “सदा के लिए युद्ध” को खत्म कर रहे हैं!  

यह घोषणा अमेरिकी दौरे पर आए इराकी प्रधानमंत्री मुस्तफा अल कादिमी के साथ व्हाइट हाउस में बातचीत के बाद की गई। बिना किसी अनुभव के लाभ के लिए, कादिमी का वास्तविक अभियान, जब अमेरिका ने बगदाद में अपने पांव रोपे थे, ईरान के साये को दूर करना और तेहरान के नेतृत्व वाले ‘शिया-क्रिसेंट’-(स्वर्गीय होस्नी मुबारक विस्फोटक अभिव्यक्ति से उधार लेते हुए ) से इराक को फिर से उबार लेने का था।

यह सुनिश्चित है कि इराक की सदा के लिए युद्ध की समाप्ति महज एक छलावा है। बाइडेन ने यह कहते हुए इसे एक आवरण दे दिया है कि “आतंकवाद” के खिलाफ इराक सरकार के युद्ध में अमेरिका का सहयोग नये चरण में जारी रहेगा, जिसके बारे में अभी विचार-विर्मश चल रहा है। 

अल-कादिमी भी बिल्कुल अफगानिस्तान के घानी जैसी दुर्दशा को प्राप्त हैं- वह भी अमेरिका की रचना हैं; उनका भी उन्हीं के जैसे राजनीतिक आधार नहीं है, वह भी बगदाद में मजबूत सत्ता के तय संक्रमण की घोषणा से दबाव में हैं; और वह भी शिया उग्रवादी एवं तेहरान के दबाव में हैं। अल-कादिमी भी घानी की तरह ही, अमेरिकी मदद के लिए बेताब हैं। 

बाइडेन अपने काला जादू को दोहरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराने का फैसला पेंटागन एवं सीआइए को परेशान कर रहा है। बाइडेन अपनी फौज की वापसी के फैसले के जरिए सुलेमानी के भूत से छुटकारा पाने की उम्मीद लगाए हैं (इससे देश में उनकी गिरती राजनीतिक स्वीकार्यता थोड़ी संभाल सकती है)। 

लेकिन लब्बोलुआब यह है कि, बाइडेन एक बार फिर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बड़ा खेल, जिस पर पेंटागन और सीआइए काम कर रहे हैं, वह जारी रहेगा, जिसमें ईरान,चीन और रूस को इराक में दूर रखना है। बाइडेन द्वारा अमेरिका, जोर्डन, इराक और सऊदी अरब को मिलाकर एक अन्य क्वाड की घोषणा के पहले की यह बात है। 20 जुलाई को अल-कादिमी की मेजबानी के ठीक पहले, बाइडेन ने व्हाइट हाउस में जोर्डन के किंग अब्दुल्लाह II का स्वागत किया था, जिनके साथ उनका “काफी लंबे समय से उठना बैठना” रहा है। 

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

Biden Prepares the Ground for QUAD-3

Biden
USA
CIA
Pentagon
QUAD-3

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

यूक्रेन युद्ध में पूंजीवाद की भूमिका


बाकी खबरें

  • bank strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बैंक हड़ताल: केंद्र द्वारा बैंकों के निजीकरण के ख़िलाफ़ यूनियनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी
    16 Dec 2021
    कांग्रेस, एआईटीसी, डीएमके, सीपीआई, सीपीएम और वाईएसआरसी, टीआरसी, शिवसेना, आप के नेताओं सहित कई राजनीतिक दलों और संसद सदस्यों ने भी दो दिवसीय बैंक हड़ताल को अपना समर्थन दिया है।
  • UP
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी: महामारी में टूटे निस्वार्थ शिक्षक और उनके गांव के सपने
    16 Dec 2021
    एक ऐसे राज्य में जहां राजनेता चुनाव जीतने के लिए अपनी जाति का या फिर सांप्रदायिक कार्ड खेलते हैं, प्यारेलाल ने अपने गांव के बच्चों को पढ़ाकर एकजुट कर दिया था. पर महामारी ने उन्हें बेरोजगार कर दिया और…
  • SP PSP
    रवि शंकर दुबे
    दूर हुए चाचा-भतीजे के गिले-शिकवे, 'साथ चुनाव लड़ेगी सपा-प्रसपा'
    16 Dec 2021
    अखिलेश यादव ने मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा, "प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को लगातार मजबूत कर रही है।"
  • Modi
    अजय कुमार
    हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व का फ़र्क़
    16 Dec 2021
    अगर कॉरपोरेट्स का साथ ना मिले तो हिंदुत्व की बगिया हिंदू धर्म के मर्म से उजड़ जाएगी।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफ़े की मांग तेज़, शाहीन बाग़ आंदोलन के 2 साल और अन्य ख़बरें
    16 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफ़े की मांग तेज़, शाहीन बाग़ आंदोलन के 2 साल और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License