NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
बिहार: पीड़ित ही हुई फिर प्रताड़ित! गैंगरेप पीड़िता को कोर्ट की अवमानना के आरोप में भेजा गया जेल
अररिया में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने बयान दर्ज करवाने गई एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता और उनके दो सहयोगियों पर कोर्ट की अवमानना का आरोप लगा है। जिसके बाद पीड़िता समेत इन तीनों लोगों को समस्तीपुर के दलसिंह सराय जेल भेज दिया गया है।
सोनिया यादव
15 Jul 2020
Representative image. | Courtesy: Aasawari Kulkarni/Feminism In India
Representative image. | Courtesy: Aasawari Kulkarni/Feminism In India

"गैंगरेप पीड़िता को ही गिरफ्तार कर लेना हैरान करने वाली बात है। आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए अररिया प्रशासन को नोटिस भेजकर घटना की पूरी जानकारी मांगी है। आगे की कार्रवाई प्रशासन का जवाब आने के बाद की जाएगी।”

ये बयान बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा का है, जिन्होंने बिहार के अररिया में एक पीड़ित को ही प्रताड़ित करने के मामले पर हैरानी जताई है। महिला आयोग की तरह ही इस मामले को लेकर विभिन्न समाजिक संगठन और नागरिक समाज के लोग भी स्तब्ध हैं। महिला संगठनों ने पीड़िता को जल्द रिहा करने की मांग की है तो वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं कहना है कि एक तो पीड़िता पहले ही कभी न भरने वाले घाव से गुज़र रही है और ऊपर से उसे जेल भेज दिया जाना, उसके साथ दोहरी प्रताड़ना है।

बता दें कि अररिया में एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता और उनके दो सहयोगियों पर कोर्ट की अवमानना का आरोप लगा है। जिसके बाद पीड़िता समेत इन तीनों लोगों को समस्तीपुर के दलसिंहसराय जेल भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार के अररिया जिले में 6 जुलाई की शाम एक 22 साल की लड़की के साथ कई लोगों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इसके बाद वारदात के अगले दिन यानी 7 जुलाई को पीड़िता ने इसकी रिपोर्ट अररिया महिला थाने में दर्ज कराई।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला महिला थाने में कांड संख्या 59/2020, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डी) के तहत दर्ज किया गया है। इस एफ़आईआर में ज़िक्र है कि मोटरसाइकिल सिखाने के बहाने पीड़िता को एक परिचित लड़के ने बुलाया और फिर एक सुनसान जगह ले जाया गया। जहाँ मौजूद चार अज्ञात पुरुषों ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान पीड़िता ने अपने परिचित से मदद मांगी, लेकिन वो वहाँ से भाग गया।

पीड़िता के बयान के मुताबिक, गैंगरेप के बाद रात 10.30 बजे आरोपी उसे नहर के पास लाकर छोड़ गए, जिसके बाद उसने अररिया में ही काम करने वाले जन जागरण शक्ति संगठन (जेजेएसएस) के सदस्यों की मदद ली।

इस मामले में 7 और 8 जुलाई को पीड़िता की मेडिकल जाँच हुई। जिसके बाद 10 जुलाई को उसे बयान दर्ज कराने के लिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले जाया गया। इसी दिन तकरीबन शाम 5 बजे पीड़िता और जेएसएस के दो सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया और 11 जुलाई को उन्हें जेल भेज दिया गया।

आखिर क्या हुआ था मजिस्ट्रेट कोर्ट में?

जन जागरण शक्ति संगठन की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, पीड़िता और जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता 10 जुलाई को दोपहर 1 बजे अररिया ज़िला न्यायालय पहुंचे। जहां मजिस्ट्रेट मुस्तफा शाही के सामने पीड़िता का बयान दर्ज होना था। वहाँ इन लोगों ने कॉरीडोर में इंतज़ार किया। उस वक़्त केस का एक अभियुक्त भी वहीं मौजूद था। तकरीबन 4 घंटे के इंतज़ार के बाद पीड़िता का बयान लिया गया।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, "बयान के बाद जब पीड़िता को न्यायिक दंडाधिकारी ने बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, तो वो उत्तेजित हो गईं। उन्होंने उत्तेजना में कहा कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। आप क्या पढ़ रहे है, मेरी कल्याणी दीदी को बुलाइए।"

कल्याणी और तन्मय निवेदिता जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता हैं, जो इस मामले में पीड़िता के मददगार भी हैं। कल्याणी के घर ही वारदात वाली रात से पीड़िता रह रही थी।

"बाद में, केस की जाँच अधिकारी को बुलाया गया, तब पीड़िता ने बयान पर हस्ताक्षर किए। बाहर आकर पीड़िता ने जेजेएसएस के दो सहयोगियों तन्मय निवेदिता और कल्याणी से तेज़ आवाज़ में पूछा कि 'तब आप लोग कहाँ थे, जब मुझे आपकी ज़रूरत थी।"

बाहर से आ रही तेज़ आवाजों के बीच ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने कल्याणी को अंदर बुलाया। कल्याणी ने पीड़िता का बयान पढ़कर सुनाए जाने की मांग की। जिसके बाद वहाँ हालात गंभीर हो गए।

न्यायिक दंडाधिकारी के साथ अभद्रता का आरोप

स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट में लिखा है, " न्यायालय के पेशकार राजीव रंजन सिन्हा ने दुष्कर्म पीड़िता सहित दो अन्य महिलाओं के विरुद्ध महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि पीड़िता ने बयान देकर फिर उसी पर अपनी आपत्ति जताई।"

रिपोर्ट में लिखा है कि, "न्यायालय में बयान की कॉपी भी छीनने का प्रयास किया गया। न्यायालय में इस तरह की अभद्रता से आक्रोशित न्यायिक दंडाधिकारी ने तीनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।"

पीड़ित को प्रताड़ित करने का आरोप

जन जागरण शक्ति संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बार-बार एक ही घटना और उससे जुड़े स्थलों के निरीक्षण के बाद पीड़िता मानसिक रूप से बेहद परेशान सी हो गयी थी। उधर उसपर आरोपी पक्ष की ओर से लगातार शादी करने का दबाव भी बनाया जा रहा था।

संगठन के आशीष रंजन का कहना है, “दुष्कर्म पीड़िता अपनी मददगार की मौजूदगी में धारा 164 के तहत लिखित बयान पढ़वाना चाहती थी लेकिन, यह बात मजिस्ट्रेट साहब को नागवार लगी और पीड़िता समेत दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई कर दी। उनपर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के साथ आईपीसी की धारा 188 भी लगायी गयी है, जिसके तहत उनपर महामारी रोग अधिनियम के अंतर्गत भी कार्रवाई की जा सकती है।”

आशीष रंजन ने कोर्ट की इस कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए कहा कि एक गैंगरेप पीड़ित न्यायालय में न्याय के लिए गई है, उस पर कोर्ट खफा हो जाता है और जो सामाजिक कार्यकर्ता उनकी मदद कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो जाती है।

कानून क्या कहता है?

इस संबंध में वकील आर्शी जैन कहती हैं कि निचली अदालतों में कोर्ट की अवमानना का मामला नहीं चलाया जा सकता है। अगर लोअर कोर्ट में ऐसी कोई बात सामने आती है तो उसे उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाना जरूरी होता है। अदालत की अवमानना के इस मामले में जिस तरह से जेल भेज दिया गया है वह प्रक्रिया कंटेंप्ट ऑफ़ कोर्ट के प्रावधान के उलट है।

आर्शी आगे बताती हैं, “निर्भया मामले के बाद साल 2013 में रेप संबंधित कानून क्रिमिनल लॉ एमेन्डमेंट एक्ट को महिला केंद्रित बनाया गया। इसका मतलब है कि अब कानून में पुरानी सेक्शुएलिटी हिस्ट्री डिस्कस नहीं करने की बात को मान्यता दी गई। विक्टिम की प्राइवेसी को महत्वपूर्ण माना गया। साथ ही ये भी प्रावधान किया गया कि अगर 164 का बयान (जो निजी होता है और उस दौरान वहाँ कोई और मौजूद नहीं रह सकता) दर्ज़ कराते वक़्त अगर पीड़िता सहज नहीं है और किसी 'पर्सन ऑफ कॉन्फिडेंस' (विश्वस्त व्यक्ति) को साथ में ले जाना चाहती है, तो इसकी अनुमति दी गई। इसमें बयान की कॉपी भी मिलने का प्रावधान किया गया।”

महिलावादी संगठनों ने रिहाई की उठाई मांग

इस घटना के सामने आने के बाद बिहार के महिलावादी संगठनों ने पीड़िता और जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं के समर्थन में आवाज़ उठाई है। साथ ही तीनों की जल्द रिहाई की मांग भी की है।

अखिल भारतीय जनवादी महिला संगठन (एडवा) की राज्य अध्यक्ष रामपरी के एक बयान के अनुसार, " ये एक अमानवीय फ़ैसला है। वो मानसिक तनाव की स्थिति से गुज़र रही थी। उसको कई बार घटना को बताना पड़ा, उसकी पहचान उजागर की गई। एक अभियुक्त और उसके परिवार के लोगों ने शादी का प्रस्ताव देकर मामले को रफ़ा- दफ़ा करने की कोशिश की, जिसको रेप सर्वाइवर ने ठुकरा दिया। वो 22 साल की है, वयस्क है और अपना केस मज़बूती से लड़ना चाहती है, लेकिन उससे, उसके 'लीगल गार्जियन' के बारे में पूछा जा रहा है। कांउसलिंग की भी कोई सुविधा नहीं है। हम न्यायपालिका में विश्वास रखते हुए, न्याय की मांग और उम्मीद करते है।"

गौरतलब है कि बिहार में नीतीश सरकार भले ही सुशासन का दावा कर रही हो लेकिन आए दिन महिलाओं के खिलाफ हो रही अपराध की वारदातें राज्य में कानून व्यवस्था की पोल खोल देती हैं। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस साल अप्रैल महीने तक दुष्कर्म की 404 घटनाएं घट चुकी हैं। यानी हर महीने 101 बलात्कार हो रहे हैं। इसके साथ ही इस दौरान 874 हत्याएँ हुई हैं।

2019 के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में पिछले साल हत्या के कुल 3138 मामले दर्ज किए गए थे तो वहीं बलात्कार के 1450 मामले दर्ज हुए थे। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी रिपोर्ट में साल 2018 में देश भर के 19 मेट्रोपॉलिटन शहरों में होने वाली हत्याओं में पटना को पहले स्थान पर बताया है, तो वहीं अपराध के मामले में बिहार पांचवे स्थान पर रहा। महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि दहेज के कारण होने वाली हत्या में भी पटना पहले स्थान पर था। जबकि उत्तर प्रदेश का कानपुर दूसरे स्थान पर था। 

इसे भी पढ़ें: बिहार में हर महीने 100 से अधिक बलात्कार, क्या यही है सुशासन?

Araria
Bihar
Gangrape
Jan Jagran Shakti Sangathan
Nitish Kumar
Bihar Law & Order
crimes against women

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License