NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध
जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, बिहार में यूसीसी लागू नहीं होगा।
मोहम्मद इमरान खान
26 Apr 2022
Nitish Kumar
फोटो सौजन्य: डेक्कन हेराल्ड

पटना: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य एक के बाद एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के पक्षधर हैं। पर बिहार एक अपवाद है क्योंकि यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है और वह इस मुद्दे पर विभाजित दिखाई देती है।

ताजा समाचार है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राज्य में यूसीसी शुरू करने की भाजपा नेताओं की बढ़ती मांग को खारिज कर दिया है।

जदयू के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि बिहार में यूसीसी की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिन पहले ही यूसीसी को देश भर में लागू करने पर जोर दिया था।

जदयू के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष कुशवाहा ने कहा,"जब तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, तब तक यहां यूसीसी लागू होना संभव नहीं है। राज्य में यूसीसी को लागू करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। पार्टी अपने उसूलों से कोई समझौता नहीं करेगी। यह देश संविधान के अनुसार चलाया जा रहा है।”

कुशवाहा को नीतीश कुमार का करीबी और मंडल राजनीति का चैंपियन माना जाता है। भाजपा शासित अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी यूसीसी को लागू करने की भाजपा नेताओं की मांग पर उनके सवाल उठाए जाने को इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने के जदयू के प्रयासों के तहत व्यापक तौर पर देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा, "हम किसी भी कीमत पर यूसीसी को लागू करने का समर्थन नहीं करेंगे और इसका विरोध करने के लिए तैयार हैं।" 

कुशवाहा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के एक सवाल के जवाब में यह बात कही। मोदी ने उनसे कहा बताया जाता है कि अमित शाह की घोषणा के बाद बिहार में यूसीसी को लागू किया जाना चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले सप्ताह कथित तौर पर घोषणा की थी कि राम मंदिर, सीएए, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 के बाद अब यूसीसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा कि यूसीसी समय की मांग है और इसे राष्ट्रहित में लागू किया जाना चाहिए। भाजपा के कई नेता पिछले कुछ दिनों से बिहार में यूसीसी की मांग कर रहे हैं।

एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के मुताबिक जदयू नेता उपेन्द्र कुशवाहा के बयान को दिल्ली में सहयोगी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को एक राजनीतिक संदेश भेजने की नीतीश कुमार की रणनीति के तहत देखा जा रहा है। वह संदेश यह है कि उनकी पार्टी समाज का ध्रुवीकरण करने की भगवा पार्टी की योजना का अनुसरण नहीं करेगी।

पर्यवेक्षक ने कहा कि “हाल के वर्षों में, नीतीश कुमार ने संविधान का हवाला देते हुए यूसीसी के बारे में अपना मजबूत विरोध व्यक्त किया है और यह दोहराया कि किसी पर भी यूसीसी थोपा नहीं जाना चाहिए।"

एक अन्य राजनीतिक पर्यवेक्षक ने याद दिलाया कि नीतीश कुमार ने एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद यूसीसी का विरोध किया था। नीतीश कुमार ने 2017 में ही भारत के विधि आयोग द्वारा यूसीसी पर भेजी गई16सूत्री प्रश्नावली को खारिज कर दिया था और इस मसले पर संसद, राज्य विधानसभाओं, नागरिक समाज और अन्य मंचों पर बहस कराए जाने की बात कही थी।

पिछले साल, जदयू और नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना, पेगासस स्पाइवेयर घोटाला और जनसंख्या नियंत्रण समेत तीन मुद्दों पर भाजपा के साथ अपनी असहमति खुल कर जाहिर की थी। अब यूसीसी पर उनका नवीनतम रुख भाजपा के साथ जदयू के असहज संबंधों का एक और उदाहरण है। यह अलग बात है कि नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार चलाने की कला में महारत हासिल कर ली है।

लेकिन अब स्थिति बदल गई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में 73 सीटें जीतने के बाद राजग गठबंधन में अपनी ऊंची हैसियत रखने वाली भाजपा पिछले महीने अपनी सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को कथित तौर पर अलग करने के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जिसमें सभी तीन वीआईपी विधायक भगवा कबीले में शामिल हो गए हैं। भाजपा ने राज्य विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनने के अपने लंबे समय से प्रतीक्षित सपने को पूरा कर लिया है और सरकार का नेतृत्व करने के लिए नीतीश कुमार की जगह अपने नेता की तलाश कर रही है।

दूसरी ओर, नीतीश कुमार के पास केवल 45 विधायक हैं और यह विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बाद विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले जदयू के पास भाजपा से ज्यादा विधायक थे। भाजपा के बड़े भाई के रूप में उभरने के बाद, भगवा पार्टी के नेताओं ने अलग-अलग व्यवहार किया, और नीतीश कुमार को अधीनस्थ हो जाने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से अटकलें तब तेज हो गई हैं, जब नीतीश कुमार ने पिछले शुक्रवार को एक इफ्तार पार्टी में भाग लेने के लिए राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर जाकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था।

नीतीश कुमार साढ़े चार साल के अंतराल के बाद लालू यादव के परिवार के सदस्यों के मुस्कुराते चेहरों की संगत में नजर आए। बाद में उन्होंने यह कहते हुए इसका महत्त्व कम करने की कोशिश की कि यह एक सामाजिक कार्यक्रम था, जिसमें कोई राजनीति नहीं थी।
लेकिन शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश पटना हवाईअड्डे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करने के बाद एक बंद कमरे में उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद भाजपा नेताओं ने दावा किया कि राज्य में राजग में सब कुछ ठीक है।

अमित शाह भोजपुर जिले में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायकों में से एक वीर कुंवर सिंह की 164वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।

सतह पर उभरे इस राजनीतिक घटनाक्रम के परिणामस्वरूप सूबे में यह चर्चा चल पड़ी है कि नीतीश कुमार अपने विवेक के आधार पर कुछ अचानक राजनीतिक निर्णय ले सकते हैं, जैसा कि वे अतीत में दो या तीन बार ले चुके हैं और अपने फैसले से सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। वे एक बार फिर भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद खाली करने और उप राष्ट्रपति के रूप में दिल्ली आने के बढ़ते दबावों के बीच लोगों को आश्चर्यचकित कर सकते हैं, जैसा कि हाल के दिनों की सुर्खियों में व्यापक रूप से बताया गया है।

यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपनी एक पुरानी सहयोगी भाजपा के साथ मिलकर राजनीति करने को लेकर कितने सहज पाते हैं।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Bihar: Nitish Kumar's JD-U Opposes BJP's Call For Uniform Civil Code in the State

Bihar
Nitish Kumar
uniform civil code
RJD
jdu
BJP
Amit Shah

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार
    15 Jan 2022
    पिछले साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में साल 2020 में दलितों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यहां 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) दर्ज किए गए थे।
  • tubnisia
    काथरिन स्काएर, तारक गुईज़ानी
    ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन
    15 Jan 2022
    नए संविधान पर लोगों से डिजिटल तरीके से राजनीतिक सुझाव बुलवाए गए हैं। यह ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति काएस सईद का राजनीतिक संकट से निकलने का रास्ता हो सकता है। लेकिन सईद की मंशा की तरह, इस ऑनलाइन सुझाव…
  • Turkey
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अमेरिका और यूरोप के करीब आ रहा है तुर्की?
    15 Jan 2022
    लेकिन, हक़ीक़त यह है कि पश्चिम तुर्की को तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन क्या वे एर्दोगन को स्वीकार करेगा?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,68,833 नए मामले, 402 मरीज़ों की मौत
    15 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 3.85 फ़ीसदी यानी 14 लाख 17 हज़ार 820 हो गयी है।
  • Lebanon
    पीपुल्स डिस्पैच
    लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
    15 Jan 2022
    हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License