NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘सात निश्चय योजना’ - सेवा या घोटाला?
सरकार के सबसे निचले स्तरों पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से लोगों में सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर भयंकर निराशा है।
सौरव कुमार
29 Aug 2020
Translated by महेश कुमार
 नीतीश कुमार

बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, लोगों की चिंता और गुस्सा सार्वजनिक स्तर पर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण बिहार के अधिकांश हिस्सों में लोगों में गुस्सा उन झूठ के पुलिंदों से है जिन्हे सात निश्चय योजना’ नाम दिया गया है, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया गया था। इन सात निश्चय में घरों में नल का पानी, शौचालय का निर्माण, बिजली कनेक्शन, पक्की गलियां और नालियां, युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्तिकरण बनाना और सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का वादा शामिल हैं।

नल जल योजना, जिसे “हर घर नल का जल” कहा जा रहा है, जनता तक पहुँचने के अपने लक्ष्य में बुरी तरह से चूक गई है। इसका उद्देश्य सभी ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। राज्य सरकार ने पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के माध्यम से इस योजना को लागू करने के लिए अनुमानित रूप से 17,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

पीएचईडी परियोजना को निष्पादित करने वाली नोडल एजेंसी है। इसे 10 मीटर x 10 मीटर के भूखंड पर पानी के उपचार की इकाई लगाने का काम सौंपा गया था वह भी निजी तौर पर दान की गई भूमि पर। वित्तीय वर्ष 2017-18 में काम शुरू करने के लिए धन आवंटित किया गया था। प्रत्येक वार्ड में ढांचे बनाए गए, पानी के पाइप को भूमिगत डाला गया और गांवों में हर घर में नए नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति होनी थी।

टूटे वादे और भ्रष्टाचार
 1_22.png
नल-जल की अधूरा ढांचा ई.चम्पारण में निधि व्यय के साथ। फोटो: सौरव कुमार

पूर्वी चंपारण जिले के रामगढ़वा ब्लॉक के भालुआहिया गांव के लगभग 400 निवासियों ने नल-जल योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ जून में ब्लॉक कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पंचायत समिति सदस्य सुशील प्रसाद कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 2017-18 में परियोजना पर धन खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीणों को पानी की बूंद नहीं मिल रही है। न्यूजक्लिक से बात करते हुए, उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार सिर्फ ढांचे को खड़ा करने के लिए 14 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई थी, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खंड विकास अधिकारी के पास शिकायत दर्ज की थी, लेकिन अभी मामले पर कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

कथित कुप्रबंधन की पोल खोलने वाले स्नातक छात्र राजा कुमार ने बताया कि वार्ड 13 और 14 के लिए कुल 14 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि काम पूरा नहीं हुआ फिर भी पूरा पैसा निकाल लिया गया। नतीजतन, ग्रामीणों ने पंचायत अधिकारियों के गलत कामों के खिलाफ विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने का फैसला किया।

न्यूज़क्लिक ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से परियोजना के विवरण की जानकारी लेकर लगे आरोपों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया। पोर्टल में चल रहे विकास कार्यों और परियोजनाओं के लिए आवंटित धन का विवरण सूचीबद्ध मौजूद है।

इसी प्रकार वार्ड नं॰ 4 जो बांका जिले के रतनपुर गांव में है, परियोजना के लिए एक ढांचा बनाया गया है, लेकिन इसके पूरा होने के तीन महीने बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। गाँव के निवासी अवधेश मंडल ने इस योजना को ''धब्बा'' कहा है।मधेपुरा जिले के मधेपुरा ब्लॉक की नौ पंचायतों में 117 वार्डों को पानी की बूंद तक नहीं मिल रही है क्योंकि स्थानीय अधिकारी कथित रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

मधुबनी जिले के ब्लॉक में कई पंचायतों में नल-जल का लाभ नहीं मिलने की समान शिकायतें मिलीं हैं। यहां कुप्रबंधन की हद तब सामने आई जब झंझारपुर ब्लॉक में एक ढाँचा उस वक़्त ढह गया जब ओवरहेड टैंक पानी से भर गया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस योजना को सरकारी धन की ठगी करने के लिए बनाया गया है।

एक ओवरहेड टैंक में जिसकी क्षमता 10,000 लीटर की है वह आधा भरने पर कुछ ही मिनटों में ढह गया, उक्त बातें रामनरेश झा ने बताई। लडानिया ब्लॉक के पथरही पंचायत में, पंचायत अधिकारियों ने कथित रूप से 12 लाख रुपये की राशि निकाल ली और उसके एवज़ में सिर्फ बोरिंग और पाइप लाइन बिछाने का काम किया है। कथित तौर पर बीपीआरओ रिपोर्ट के माध्यम से यह भ्रष्टाचार सामने आया है।

झंझारपुर के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक गुलाब यादव ने न्यूज़क्लिक को बताया कि सीएम का पालतू प्रोजेक्ट उन्ही की आँखों के सामने दम तोड़ रहा है और प्रदेश में लगी जीर्ण-शीर्ण नल-जल संरचना इसका प्रमाण है।
2_17.png

जीर्ण-शीर्ण पानी की टंकी, मधुबनी। फोटो: सौरव कुमार

मुज़फ़्फ़रपुर में नल-जल योजना का काम काफी धीमी गति से चल रहा है क्योंकि पानी का ढांचा अभी तक बना ही नहीं है और ग्रामीण परिवारों को पानी की कोई लाइन भी नहीं दी गई है। जिले के साहेबगंज और मोतीपुर ब्लॉक के निवासियों ने इस योजना के पूरा न होने पर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस की ट्रेड यूनियन इंटक के जिला अध्यक्ष कुमार आशुतोष ने न्यूज़क्लिक को बताया कि ‘सात निश्चय योजना’ एक “लोकलुभावन योजना” है जो केवल कागजों पर मौजूद है। ग्रामीण सड़कों के समतलीकरण से लेकर नल जल परियोजना, चार साल बितने के बाद भी अधर में लटकी है।

3_14.png
मुजफ्फरपुर में नल जल डंकका।फोटो सौजन्य: सौरव कुमार

सारण जिले के अमनौर ब्लॉक में, ग्रामीण सड़क निर्माण और नल जल योजना के अधूरे कार्य ने उन सरकारी अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया जो मुख्यमंत्री की परियोजना की स्थिति का जायज़ा लेने प्रदेश की यात्रा पर थे।जिला अधिकारियों ने दावा किया है कि यह योजना राज्य भर में 800 वार्डों में एक सफल योजना रही है, लेकिन ज़मीन पर वास्तविकता अलग है। पीएचईडी के इंजीनियर विपुल कुमार के अनुसार, नाल-जल का काम छिटपुट तरीके से किए गए हैं और सभी अधूरे काम अगले महीने तक पूरे कर लिए जाएंगे। हालाँकि, उनके दावे को सुखपुर गाँव के गणपत झा ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चार साल का समय पर्याप्त होता है लेकिन लोगों को विकास के नाम पर धोखा दिया गया है।

पानी की टंकियों को लगाने के बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं होना, पानी की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल में लाए गए खराब गुणवत्ता वाले पाइपों की पोल खोल देता है और यह परियोजना एक टूटा हुआ वादा लगती है। परियोजना को लागू करने के लिए आवंटित धनराशि पंचायत अधिकारियों द्वारा निकाल ली गई जिसमें मुखिया, पंचायत समिति और वार्ड सदस्य शामिल हैं, जिसके निष्पादन के लिए कड़ाई से कागजी कार्रवाई तक नहीं हुई है। राज्य के विभिन्न जिलों से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामले प्रकाश में आए हैं।

पिछले साल दरभंगा जिले के सिंघवारा ब्लॉक के अंतर्गत हरिहरपुर पंचायत में, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने कथित रूप से 12.69 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के लिए पंचायत अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस धन का उपयोग ग्रामीण सड़कों को कंक्रीट की सड़क में बदलने और योजना के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने के लिए किया जाना था।

एक सप्ताह पहले दरभंगा के जिलाधिकारी (डीएम), डॉ॰ त्यागराजन एस.एम. ने योजना के तहत पड़े लंबित कार्यों पर चिंता व्यक्त की है। दरभंगा सदर, केवती, बहेरी और जले ब्लॉकों के तहत कई वार्डों में काम की ढीली गति से डीएम नाराज़ है। उन्होंने ढीले काम के लिए संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी है। दरभंगा के बहेरी ब्लॉक में पहले भी विवाद देखा गया है जो विवाद 2018 में सीएम की यात्रा के दौरान सुर्खियों में आया था। योजना के क्रियान्वयन को लेकर युवाओं के एक वर्ग ने हंगामा किया था।

कई जिलों से फीडबैक मिली है कि सरकार के सबसे निचले स्तर चल रहे भ्रष्टाचार की वजह से ‘जल-नल योजना’ विफल हो रही है और सभी को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में नाकाम रही  है।

लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें:

Bihar: CM Nitish Kumar’s ‘Saat Nischay Yojana’ – Service or Scam?

Bihar
Nitish Kumar
Bihar Assembly Elections
Nal Jal Yojana
Saat Nischay Scheme
Bihar Development
Corruption

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

उत्तराखंड के ग्राम विकास पर भ्रष्टाचार, सरकारी उदासीनता के बादल

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License