NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
‘चौकीदार’ की नाक के नीचे ‘लुट’ गए बैंक, फर्जीवाड़े से 41,168 करोड़ का नुकसान
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार के तमाम दावों को आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट धूमिल करती है।
नवीन कुमार वर्मा
31 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: ndtv

“सुशासन” और “विकास” का दावा कर देश की सत्ता में आने वाली मोदी सरकार के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जारी वार्षिक रिपोर्ट 2017-18 मुश्किल बढ़ा सकती हैं। स्वयं को देश का “चौकीदार” कहने वाले प्रधानमंत्री की नाक के नीचे बैंकों के साथ होने वाले फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार बैंकों को फर्जीवाड़े के चलते वर्ष 2017-18  में 41,168 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में यह नुकसान 72 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2017-18 में बैंकों के साथ फर्जीवाड़े की कुल 5,917 घटनाएं हुईं जबकि इससे पहले 2016-17 में कुल 5,096 फर्जीवाड़े हुए थे, जिसमें 23,934 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। 

आरबीआई ने कहा, “राशि के मामले में, बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी 2017-18 में तेजी से बढ़ी, जो मुख्य रूप से जूलरी क्षेत्र में हुई है।”

मोदी सरकार के पिछले चार सालों में बैंकों के साथ फर्जीवाड़े में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यह घटनाएँ कांग्रेस की पिछली सरकार की तुलना में चार गुना बढ़ गई है। वर्ष 2013-14 में फर्जीवाड़े के चलते कुल 10,170 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जो वर्तमान में बढ़कर 41,168 करोड़ रुपये हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार फर्जीवाड़े द्वारा हुए कुल नुकसान का 80 फीसदी हिस्सा, बड़े फर्जीवाड़े का है यानी 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक की रकम की धोखाधड़ी। गौर करने वाली बात है कि एक लाख रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी के 93 प्रतिशत मामले सरकारी बैंकों के साथ हुए जबकि यह संख्या निजी बैंकों के साथ छह प्रतिशत रही। धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों ने बैड लोन को काफी बढ़ा दिया है। मार्च 2018 में बैड लोन 10,39,700 करोड़ रुपये था। 2017-18 में 13,000 करोड़ रुपये का पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाला सामने आया था, जिसमें कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी शामिल थे।

आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को माना है कि  बैंकों के साथ होने वाले फर्जीवाड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के एक गंभीर समस्या है। रिजर्व बैंक ने कहा कि “धोखाधड़ी प्रबंधन में सबसे गंभीर चिंता का विषय बन गई है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा बैंकों के क्रेडिट पोर्टफोलियो में स्थित है”। आरबीआई के अनुसार अधिकतर फर्जीवाड़ा करेंट अकाउंट के जरिये किया गया। 

आरबीआई के अनुसार, धोखाधड़ी के तौर-तरीकों में उधारदाताओं से बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र के चालू खाते खोलना,  धोखाधड़ी वाली सेवाएं, विभिन्न माध्यमों से उधारकर्ताओं द्वारा धनराशि का विचलन, शेल कंपनियों के माध्यम से और बैंकों द्वारा शुरुआती संकेतों की पहचान करने में विफलता शामिल है।
फरवरी 2018 में, आरबीआई ने भारतीय बैंक संघ (IBA) को उचित डेटा सुरक्षा और नियंत्रण उपायों के साथ IT- सक्षम,उपयोगकर्ता के अनुकूल, वेब-आधारित TPE रिपोर्टिंग और बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए कार्रवाई शुरू करने की सलाह दी।

देश में विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करने वाली मोदी सरकार को आरबीआई की यह वार्षिक रिपोर्ट आईना दिखाने के साथ-साथ सरकार पर कई बड़े सवाल भी उठाती है। सवाल उठता है कि कैसे मोदीराज में बैंक घोटालों और फर्जीवाड़े की संख्या में बढ़ोतरी हुई? क्यों मोदी सरकार द्वारा घोटालेबाजों के प्रति कार्रवाही नहीं की गई? घोटालेबाजों और भाजपा सरकार के बीच क्या संबंध हैं? देश की जनता की मेहनत की कमाई को घोटालेबाजों के लालच की बलि चढ़ाना कहां तक उचित है?  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2018 में बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए दावा किया था कि मोदीराज में बैंकों की हालत में सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि, “बैंकों की ख़राब स्थिति के लिए यूपीए सरकार ज़िम्मेदार है, जिन्होंने बैंकों को लूटने का काम किया। भाजपा सरकार के आने के बाद बैंकों की स्थिति में सुधार हुआ है।’’ मगर आरबीआई की वर्तमान वार्षिक रिपोर्ट बैंकों की कुछ और ही कहानी बयां करती है। रिपोर्ट साफ़ दर्शाती है कि मोदीराज में बैंकों के साथ होने वाले घोटालों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई है। किसान कर्ज़माफ़ी पर टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी का रोना रोने वाले लोगों को आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट पर एक बार नज़र जरुर डालनी चाहिए और खुद से सवाल पूछना चाहिए कि बैंकों का पैसा क्या जनता का पैसा नहीं हैं जिसकी लूट “चौकीदार” की नाक के नीचे हो रही है।

RBI
Bank
scam
Fraud from banks
RBI REPORT
modi sarkar
Modi government
Public Sector Bank
Private Banks

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • Uttarakhand elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखण्ड चुनाव: दस साल पहले प्रस्तावित सैनिक स्कूल का इंतज़ार जारी
    12 Feb 2022
    शुक्रवार 11 फरवरी को प्रधानमंत्री ने उत्तरखंड के अल्मोड़ा जिले में एक चुनावी रैली की जिसमे उन्होंने राज्य में नए सैनिक स्कूल बनाने पर जोर दिया। मोदी ने कहा" हमारे देश में बहुत कम संख्या में सैनिक…
  • pension
    मनजीत सिंह पटेल
    एनपीएस की जगह, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग क्यों कर रहे हैं सरकारी कर्मचारी? 
    12 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों में भी, एनपीएस की चिंता प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक है, समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी…
  • Punjab
    भाषा
    पंजाब चुनाव में 25 फीसदी उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला : रिपोर्ट
    12 Feb 2022
    एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) से संबद्ध पंजाब इलेक्शन वाच (पीईडब्ल्यू) ने 20 फरवरी को होने वाले चुनाव में कुल 1,304 उम्मीदवारों में से 1,276 उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण…
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: न होता यूं तो क्या होता!
    12 Feb 2022
    अपने राज में जो हुआ है, उस पर सवालों के जवाब के देने के लिए, मोदी जी ने जब से यह सवाल उठाने का रास्ता अपनाया है कि विरोधी नहीं होते तो क्या-क्या होता, नहीं होता, तब से विश्व गुरु कुर्सी ने खुद दौड़कर…
  • Protest
    ऋषि राज आनंद
    बार-बार धरने-प्रदर्शन के बावजूद उपेक्षा का शिकार SSC GD के उम्मीदवार
    12 Feb 2022
    एसएससी जीडी के तहत 60,000 की संख्या में रिक्तियों की घोषणा के बावजूद 30% पद ख़ाली हैं। लेकिन सरकार उन्हें भरने के लिए कदम उठाती नज़र नहीं आ रही।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License