NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
चीन में प्रधानमंत्री मोदी क्या तलाश रहे हैं?
दोनों ही देश बाज़ार की ख़ोज में हैं, लेकिन मोदी काल में भारत-चीन के बीच का व्यापार में 40% से ज़्यादा कमी आई हैI
सुबोध वर्मा
27 Apr 2018
modi in china

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के साथ दो-दिवसीय समिट के लिए चीन गये हुए हैंI 2014 में सत्ता में आने के बाद से यह मोदी की चौथी चीन यात्रा हैI इस बार वे मशहूर याँगत्से नदी के किनारे स्थित हूपे प्रोविंस के ऊहान में मिलेंगेI यह वही मशहूर नदी है जिसे 1966 में चेयरमैन माओ त्सेतुंग ने 73 साल की उम्र में दुनिया के मनोरंजन के लिए तैर कर पार किया थाI

मोदी के इस दौरा के बारे में कहा जा रहा है कि इसके दौरान उनकी शी के साथ कोई ‘अनौपचारिक’ मुलाकात हैI लेकिन इससे पहले ही भारत के राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजित दोवाल और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दौरा हो चुका है जिन्हें प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारी के रूप में देखा जा सकता हैI भारतीय आधिकारिक हलकों में इस बात को लेकर काफी गहमागहमी है कि यह मुलाकात नई दिल्ली और बीजिंग के बीचोंबीच हो रही है क्योंकि वे इसे चीन द्वारा भारत को समायोजित करने की आवश्यकता को अंकित करता हैI यह बचकाना ख्याल मोदी को पसंद करने वाले लोगों के आलावा शायद ही किसी को आ रहा होI शायद यह सिर्फ मोदी को शी का एक तोहफ़ा भर हो, क्योंकि जब वे सितम्बर 2014 में अपनी एकलौती भारत यात्रा पर आये थे तो मोदी ने उन्हें अहमदाबाद के पास स्थित महात्मा गाँधी के साबरमती आश्रम का एक विस्तृत भ्रमण करवाया थाI इसी के बदले में शी मोदी को चेयरमैन माओ के घर (जो अब एक म्यूजियम है) दिखाने ले जायेंI    

लेकिन आख़िरकार मोदी चीन में ख़ोज क्या रहे हैं? भारत में उनके समर्थक तो साफ़ तौर से विदेशियों से नफ़रत करने वाले और sinophobic तक हैं तो फिर बार-बार के इन दौरों का क्या मतलब? वैश्विक सम्बन्ध, रणनीतिक मुद्दे और यहाँ तक सीमा विवाद भी अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय उपभोग के लिए ठीक हैI लेकिन दोनों ही देश, खासकर भारत, द्विपक्षीय व्यापार को बेहतर करने की फ़िराक में हैंI इस कवायत में, मोदी और भी बेताब दिख रहे हैं क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही बुरे दौर से गुज़र रही हैI कच्चे माल के आलावा, तैयार माल और सेवाओं के लिए एक निर्यात बाज़ार मिल जाना शायद जन्नत के बराबर होगाI

लेकिन पहले आयें भारत-चीन के व्यापर पर कुछ नज़र डालेंI पिछले चार साल से या जब से मोदी सरकार में आये हैं, तब से चीन को भारतीय निर्यात लगभग रूक सा गया है, इसमें सिर्फ 4.5% की ही बढ़त हुई हैI जबकि इससे उलट इसी दौरान भारत में चीनी आयात लगभग 27% बढ़ गया हैI

modi in china 1दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा (आयात और निर्यात का अंतर) काफी बढ़ गया हैI यह मौजूदा वित्तीय वर्ष में 3.49 लाख करोड़ रूपये है, जो साल 2014-15 में 2.4 लाख करोड़ थाI इसका मतलब क्या है? आसान शब्दों में, चीने सामान को भारतीय बाज़ारों में आसानी से जगह मिल रही है जबकि भारतीय सामान चीनी बाज़ार में अपनी जगह बनाने के लिए मुशक्कत कर रहा हैI

modi in china 2

इसके कई कारण हैं, सबसे प्रमुख कारण तो यही है कि चीने सामान काफी सस्ता होता है, उनके सामान की कई किस्में हैं और चीनी निर्माताओं को अपना व्यापर दुनियाभर में फ़ैलाने के लिए उनकी सरकार से काफी मदद मिलती हैI दूसरी तरफ कपड़े या रत्न और गहनों के आलावा भारत में बनी अन्य वस्तुएँ बाज़ारों में सीमित जगह ही बना पाता हैI

तो, भारत के कुल निर्यात में से सिर्फ 9% ही चीन को जाता है, जबकि मूल्य के आधार पर भारत का 19% आयात चीन से होता हैI

दुनियाभर में अमूमन संरक्षणवादी रवैया फैल रहा है जिसकी शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने आयात शुल्क बढ़ाने और स्वतंत्र वैश्विक व्यापार में ख़लल डालने से की, और इस स्थिति से चीन और भारत दोनों ही चिंतित हैंI चीन शायद भारत से ज़्यादा क्योंकि वह अब भी काफी हद तक अपनी निर्यात से होने वाली आय पर निर्भर हैI हालांकि यह स्थिति तेज़ी से क्योंकि पिछले कुछ सालों में वहाँ के घरेलू उपभोक्ता अब ज़्यादा खर्च करने लगे हैंI फिर भी दूसरे बाज़ारों में फिसलना चीन बर्दाश्त नहीं कर सकताI इसीलिए भारतीय बाज़ार (इसके सीमित रूप में ही सही) में प्रसार की उनकी कवायत लगातार जारी हैI    

दूसरी ओर, भारत अपना आयात को जैसे-तैसे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि उसे यही एकलौता रास्ता लग रहा है गिरती घरेलू माँग से उबरने काI जीडीपी के आँकड़ों को छोड़ दें तो, भारत का औद्योगिक निर्माण पिछले कुछ सालों में लगभग रूक सा गया है, इसका प्रमाण IIP के आँकड़ों से मिलते हैंI ऐसे ही रोज़गार भी रूका हुआ है- इसी वजह से माँग में कमी हैI भारत की मामूली सी निर्यात आय भी काफी हद तक सेवाओं के निर्यात पर निर्भर हैI भारत को निर्यात में कुछ उछाल चाहिए ताकि वो अपनी अर्थव्यवस्था को उबार सके, खासतौर से तब जबकि इस साल कई महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हैं और अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैंI  

इसीलिए मोदी चीन जाने के लिए काफी उत्सुक दिखे और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों तथा मानवता की भलाई के लिए एक प्राचीन सभ्यता का दूसरी प्राचीन सभ्यता के साथ इस संवाद की आड़ में वो भारतीय वस्तुओं के लिए खरीदार ढूँढ रहे हैंI लेकिन अगर इशारों को सही सही समझा जाए तो जानेंगे कि यह सब इतना आसान भी नहींI तो, आप चकित न हों अगर इस सब से कुछ न निकलेI

नरेंद्र मोदी
Xi Jinping
भारत और चीन
भारतीय अर्थव्यवस्था
चीनी अर्थव्यवस्था

Related Stories

मजबूत गठजोड़ की ओर अग्रसर होते चीन और रूस

COP 26: भारत आख़िर बलि का बकरा बन ही गया

भारत के लिए चीन के साथ टकराव से बाहर निकलना अभी भी संभव

क्या भारत का सच में एससीओ से कोई नाता है?

जब भारत सोता रहा

भारत और चीन का संपर्क टूटा? ऐप प्रतिबंध और उससे परे बात

भारत का कल्याणकारी राज्य : गोल क़ैदख़ाने में नागरिकों की रेटिंग

अमेरिका-चीन व्यापार समझौता तो सुलझ गया; अब आगे क्या?

आरआईसी के छिपे आकर्षण को लेकर भारत जाग रहा है

भारत-चीन में 1962 की जंग जैसी स्थितियाँ दोबारा बन रही हैं?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2 हज़ार नए मामले, 71 मरीज़ों की मौत
    19 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,075 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.06 फ़ीसदी यानी 27 हज़ार 802 हो गयी है।
  • Nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    पैगाम-ए-आज़ादी। जवाहरलाल नेहरु पर लेक्चर अदित्या मुख़र्जी द्वारा। लोकतंत्रशाला
    18 Mar 2022
    पैगाम-ए-आजादी श्रंखला लोकतंत्रशाला और न्यूजक्लिक की एक संयुक्त पहल है, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर केंद्रित है। श्रृंखला का यह व्याख्यान जवाहरलाल नेहरू पर केंद्रित होगा और आदित्य…
  • असद शेख़
    ओवैसी की AIMIM, मुसलमानों के लिए राजनीतिक विकल्प या मुसीबत? 
    18 Mar 2022
    यूपी चुनाव के परिणाम आ चुके हैं, भाजपा सरकार बनाने जा रही है, इस परिप्रेक्ष्य में हम ओवैसी की पार्टी से जुड़े तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा करेंगें– पहला ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल…
  • neo librelism
    प्रभात पटनायक
    नवउदारवादी व्यवस्था में पाबंदियों का खेल
    18 Mar 2022
    रूस के ख़िलाफ़ अब तक जो पाबंदियां लगायी गयी हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूसी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं को, पश्चिमी दुनिया के वित्तीय ताने-बाने से काटे जाने का ही है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  
    18 Mar 2022
    रिपोर्ट्स में पता चला है कि 2019-2020 में हुए दस चुनावों में से नौ में बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में विज्ञापनों के लिए फ़ेसबुक पर 29 फ़ीसदी कम कीमत चुकानी पड़ी थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License