NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अंतरराष्ट्रीय
एशिया के बाकी
चीन में सुधार के चालीस साल
18 दिसंबर को, चीन की सरकार ने चालीस वर्षों के सुधारों का जश्न मनाया।
विजय प्रसाद
19 Dec 2018
Translated by महेश कुमार
Great Hall, China
चीन के ग्रेट हॉल में लोगों को संबोधित करते शी जिनपिंग

18 दिसंबर को, चीन सरकार ने चालीस वर्षों के सुधारों का जश्न मनाया। ये सुधार 1978 में शुरू हुए थे, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डेंग ज़ियाओपिंग ने चीन को माओवादी विकास के रास्ते से एक दूसरे रास्ते का रुख अपनाया जिसमें समाजवादी संस्थानों और बाजार अर्थव्यवस्था की मिश्रण शामिल था, जिसे 'चीनी विशेषताओं का समाजवाद' के रूप में जाना जाता है।

उत्सव का केंद्र ताइनामेन स्क्वायर था। जिसके एक तरफ लोग वरिष्ठ कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भाषण सुनने के लिए इकट्ठे हुए थे। और दूसरी तरफ - चीन के राष्ट्रीय संग्रहालय में - हजारों लोग सुधार युग और 1978 के बाद की सरकारों द्वारा संचालित विचारों और नीतियों को समर्पित एक शानदार प्रदर्शनी देखने आए थे।

अपने भाषण में, शी ने कहा कि बड़ी तादाद में चीनी लोग अब भूख, भोजन और कपड़ों की कमी और हजारों सालों की पीड़ा जिससे हमारे लोग ग्रस्त थे आज़ मुक्त हो रहे हैं। शी ने इन परिवर्तनों के लिए केवल सुधार युग की भूमिका के महत्व पर जोर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चीन के आधुनिक इतिहास में तीन महत्वपूर्ण साइनपोस्ट/पड़ाव थे - 1919 का मई चौथा आंदोलन, 1949 की क्रांति और सुधार युग। शी ने कहा, पिछले 40 वर्षों में चीन ने गरीबी से 74 करोड़ लोगों को उभारा है, एक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाई है जिसमें 90 करोड़ से अधिक लोगों को सुविधा और उनका चिकित्सा बीमा शामिल हैं जिसमें 1.3 अरब लोग शामिल हैं। ये उपलब्धियां काफी हैं।

National Museum of China.jpg

(चीन का राष्ट्रीय संग्रहालय)

उनका कहना था कि ये उपलब्धियाँ चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व की वजह से मिली हैं, चीन ने अभूतपूर्व स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि सुधार एजेंडा, किसी भी बाहरी एजेंसी द्वारा संचालित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'हमें उसे सुधारना चाहिए जिसे सुधार की जरूरत है और हमें वहां सुधार नहीं करना चाहिए जहां इसकी जरूरत नही है। वहां कोई सुधार नहीं होना चाहिए, शी ने जोरदार ढंग से कहा, अगर इसमें 'लोगों का समर्थन, अनुमोदन या फिर समर्थन' नहीं है। शी ने कहा, 'कोई भी चीनी लोगों को निर्देश देने की स्थिति में नहीं है कि क्या किया जाना चाहिए या नहीं किया जाना चाहिए'।

National Museum of China.2.jpg

(चीन का राष्ट्रीय संग्रहालय)

शी ने कहा, चीन का विकास और स्थिरता इसे दुनिया में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, 'चीन अलगाव में रख खुद को विकसित नहीं कर सकता है', और दुनिया को वैश्विक समृद्धि के लिए चीन की जरूरत है। लेकिन चीन अन्य देशों के विकास मार्गों में हस्तक्षेप करने के लिए खुद उनके आड़े नहीं आएगा।

शी ने जो कुछ भी कहा वह कोई आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं थी। यह अनिवार्य रूप से उनके सामान्य सिद्धांत का सारांश था – जिसे शी जिनपिंग विचार भी कहा जाता है। चीन की धीमी वृद्धि दर या संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध को संबोधित करने के लिए शायद यह जगह ठीक नहीं थी। लेकिन सभी समस्याए वहीं अटकी हैं, जिस स्वर में जश्न मनाया गया और ट्विटर पर जिसे सारांशित नहीं किया गया था।

National Museum of China3.jpg

(चीन का राष्ट्रीय संग्रहालय)

सड़क के पार, राष्ट्रीय संग्रहालय में, भीड़ एक प्रदर्शनी से दूसरी प्रदर्शनी में जा रही थी, इनमे विज्ञान और प्रौद्योगिकी में चीन के विकास और भूख और बीमारी पर उसकी आश्चर्यजनक विजय की झांकी थी। चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम और शी के कलेक्टेड वर्क्स की छवियां भी थी। साधारण लोग, जीवन के सभी क्षेत्रों से, प्रदर्शनी के साथ खड़े होकर शी जिंगपिंग की तस्वीर के साथ स्वयं की फोटो ले रहे थे। चीन के भविष्य के शहरों की छवियां और चीन के महान इंजीनियरिंग कामों की छवियां साथ ही एक बेल्ट, एक रोड की पहल की तस्वीरें भी थी जो चीन से तुर्की तक जाती हैं।

Mao’s mausoleum.jpg

(माओ का मकबरा)

वहां जो उपस्थित नहीं था वह 1949 की क्रांति की गाथा और उसकी यादें। संग्रहालय के स्याह गलियारे में क्रांतिकारी काल के उन चित्रों को लटका दिया गया था, जिनमें चीनी कम्युनिस्ट चीनी राष्ट्रवादियों और जापानी साम्राज्यवादियों के खिलाफ अपनी लड़ाई में पहाड़ियों और नदियों में संघर्ष कर रहे थे। वह पृष्ठभूमि थी। माओ की कोई छवि नहीं थी। उनका मकबरा कुछ मीटर दूर है। लेकिन उनकी उपस्थिति नगण्य थी। चीन के नए परिवर्तन के लेखक डेंग ज़ियाओपिंग, जियांग जेमिन, हू जिंताओ और उनके उपर शी की तस्वीरें थी।

चीन में मार्क्सवाद को पुनर्जीवित करने के लिए शी जिनपिंग ने कुछ संस्थानों को स्थापित किया है। यह परिभाषित करना आसान नहीं है कि इनके मार्क्सवाद में क्या शामिल होगा। चीनी चरित्र के समाजवाद की अपनी संवेदनशीलता है - स्थिरता के बल के रूप में राज्य में मार्क्सवाद है। चीन के बाहर इस मार्क्सवाद का कुछ भी उपलब्ध नहीं है। चीनी सरकार ने इस सोच को साझा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। अनुवाद की कोई प्रमुख परियोजना नहीं है। चीन में चल रहे हालत का हास्यपद तरीके से मूल्यांकन करने से बेहतर उसका सर्वांगीण मूल्यांकन करना ज़रूरी है। निश्चित रूप से तनाव हैं, और निराशाएं और कठोरता के तत्व भी हैं जिन्हें निवारण की आवश्यकता है, लेकिन यह भी एक एहसास है कि सरकार ने बड़ा काम किया है और लोगों को विषम पीड़ा से उपर उठाया है।

China
China celebrated of reforms
socialism with Chinese characteristics
Tiananmen Square
Xi Jingping

Related Stories

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ

चीन और लैटिन अमेरिका के गहरे होते संबंधों पर बनी है अमेरिका की नज़र

बुका हमले के बावजूद रशिया-यूक्रेन के बीच समझौते जारी

काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति

जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद

सऊदी अरब और चीन: अब सबसे अच्छे नए दोस्त?

हादसा: चीन में यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त, 133 लोग थे सवार


बाकी खबरें

  • कोविड की तीसरी लहर क़रीब, आईएमए ने ढिलाई पर जताई चिंता
    भाषा
    कोविड की तीसरी लहर क़रीब, आईएमए ने ढिलाई पर जताई चिंता
    12 Jul 2021
    आईएमए ने एक बयान में कहा कि पर्यटकों का आगमन, तीर्थयात्राएं, धार्मिक उत्साह जरूरी हैं लेकिन कुछ और महीने इंतजार किया जा सकता है।
  • महामारी के दौरान बुज़ुर्गों से बदसलूकी के मामले बढ़े
    दिव्या श्री
    महामारी के दौरान बुज़ुर्गों से बदसलूकी के मामले बढ़े
    12 Jul 2021
    कोविड-19 की रिपोर्टें वरिष्ठ जनों में मुख्यत: संक्रमण और उनकी मृत्यु दर पर ही केंद्रित हैं। 
  • यूरो 2020: जीत को लेकर इटली में खुशी, लेकिन हार से ज़्यादा नस्लीय टिप्पणियों से शर्मसार हुआ इंग्लैंड
    एपी
    यूरो 2020: जीत को लेकर इटली में खुशी, लेकिन हार से ज़्यादा नस्लीय टिप्पणियों से शर्मसार हुआ इंग्लैंड
    12 Jul 2021
    हार के बाद इंग्लैंड ग़म में डूब गया है। बुरी बात यह हुई कि इस हार को लेकर इंग्लैंड के तीन ब्लैक खिलाड़ियों को नस्ली टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बिट्रेन के फुटबॉल संघ और प्रधानमंत्री ने इस व्यवहार…
  • कोरोना से दुनिया भर में आर्थिक संकट की मार, ग़रीब भुखमरी के कगार पर
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना से दुनिया भर में आर्थिक संकट की मार, ग़रीब भुखमरी के कगार पर
    12 Jul 2021
    2017 तक, दुनिया की लगभग 40% आबादी खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों और कम आय के कारण खराब गुणवत्ता वाले आहार का सेवन करने के लिए मजबूर थी। जब स्वास्थ्यवर्द्धक वस्तुएं पहुंच से दूर होती हैं, तो लोगों के…
  • उत्तर प्रदेश में रागदरबारीः इटावा, उन्नाव और लखीमपुर मॉडल
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    उत्तर प्रदेश में रागदरबारीः इटावा, उन्नाव और लखीमपुर मॉडल
    12 Jul 2021
    आज इटावा के मॉडल में पुलिस अधिकारी पर सत्तारूढ़ दल के नेता द्वारा हमला होता है, उन्नाव के मॉडल में पत्रकार को आईएएस स्तर का अधिकारी पीटता है और लखीमपुर में महिला का चीरहरण होता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License