NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
चीन विरोध की हक़ीक़त : सीमा शुल्क में छूट का सबसे ज़्यादा फायदा चीन को
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और बीजेपी से संबंधित संगठन चीन या अन्य देशों की वस्तुओं का बहिष्कार करने की मुद्दा भले ही उठाते रहे हो परन्तु वास्तव में बीजेपी सरकार की व्यापार नीतियाँ कही भी इन मुद्दों के पक्ष में खड़ी हुई नहीं दिखाई देती है।
पुलकित कुमार शर्मा
23 Aug 2019
reality of china

सीमा शुल्क एक विशेष प्रकार का कर हैं जो वस्तुओं को एक सीमा से दूसरी सीमा वाले क्षेत्र  आने-जाने पर लगाया जाता हैं। यह एक अप्रत्यक्ष कर (इंडिरेक्ट टैक्स) हैं जो केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता हैं, इस कर की दरें सीमा शुल्क एक्ट 1962 के अधीन होती हैं।   

सीमा शुल्क द्वारा देश की सरकार आयात और निर्यात को नियंत्रित करती है।  अगर देश में हो रहे आयात व् निर्यात को कम करना है तो सरकार सीमा शुल्क बढ़ा देती हैं। इसी प्रकार देश के आयात व् निर्यात को बढ़ाना हैं तो सरकार सीमा शुल्क घटा देती हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि आयात और निर्यात सरकार की सीमा शुल्क से जुड़े नीतियों पर भी निर्भर करती है।  

सीमा शुल्क छूट में वृद्धि 

बीते कुछ सालों में बीजेपी सरकार की नीतियाँ इस प्रकार की रही हैं जिसके कारण  विदेशी व्यापार में खासकर आयात बहुत बड़ी मात्रा में बढ़ा हैं क्योंकि सरकार द्वारा सीमा शुल्क में बहुत बड़ी मात्रा में छूट दी गयी है। लेकिन सीमा शुल्क में छूट देने के बावजूद निर्यात में आयात  की तरह बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्ष 2017-18 में सीमा शुल्क में छूट 53704 करोड़ रूपये की थी तथा वर्ष 2018-19 में सीमा शुल्क में छूट 74356 करोड़ रूपये की है| अगर पिछले कुछ वर्षो में सीमा शुल्क में दी गयी छूट का अध्ययन करते हैं तो पाते है कि दी गयी छूट में लगातार वृद्धि हुई है| जिससे आयात तो बढ़ा है लेकिन निर्यात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।  

graph.PNG

अब बात करते हैं हाल ही में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा छेड़ी गयी बहस पर। कैट  ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं का बहिष्कार करने तथा आयात पर सीमा शुल्क बढ़ने की मांग की है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का सपोर्ट कर रहा है। चीन से आयात होने वाली वस्तुओं का बहिष्कार होना चाहिए। 

इस समय चीन से  कुल आयात का तकरीबन  14 फीसदी हिस्सा आयात होता है। इस आयात की मात्रा  में कमी और बढ़ोतरी भी आयात के सीमा शुल्क पर ही निर्भर करेगी।  लेकिन उपरोक्त आंकड़ें को देखकर नहीं लगता कि बीजेपी सरकार चीन से या बाकी देशों से होने वाले आयात को कम करने या उस पर रोक लगाने के पक्ष में हैं या आयात शुल्क बढ़ाने के पक्ष में है क्योंकि सरकार द्वारा दी गयी सीमा शुल्क में भारी छूट सरकार की नीति को साफ कर देती हैं। 

कैट पहले भी चीन के पाकिस्तान को सपोर्ट करने को लेकर चीन की वस्तुओं का बहिष्कार करने का मुद्दा उठाता  रहा है। साथ ही अपने समर्थन में सभी व्यापारिक संगठनों को भी जोड़ता रहा है और बीजेपी से संबंधित संगठन भी चीन की वस्तुओं के बहिष्कार का मुद्दा जोर-शोर से उठाते रहे है लेकिन चीन को अलग भी हटा दे तो भारत और पाकिस्तान में  इतनी तनातनी के बीच क्या पाकिस्तान के साथ व्यापार हमेशा के लिए बंद किया जा सका है 

वस्तुओं के बहिष्कार का मुद्दा एक विवादित मुद्दा है जिसके पीछे कुछ संगठनों का हमेशा अपना स्वार्थ भी रहा है लेकिन इस स्वार्थ के कारण चीन की वस्तुओं को बेचने वाले छोटे-छोटे दुकानदार, व्यापारी और  सड़कों पर रेड़ी लगाने वाले लोगो को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस संदर्भ में तो सरकार की व्यापारिक नीतियां भी स्पष्ट कर रही हैं, कैट की चीन से आयात को लेकर की जाने वाली बयानबाज़ी का कोई मतलब नहीं है।   

China protests
Customs exemption
Confederation of India Traders
BJP
Business policies
Increase in customs exemption

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • hunger crisis
    डॉ. राजू पाण्डेय
    चिंता: ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर भी असहिष्णु सरकार
    29 Oct 2021
    पिछले कुछ समय से सरकार ऐसे हर आकलन को खारिज करती रही है जो उसकी असफलताओं को उजागर करता है।
  • climate
    टिकेंदर सिंह पंवार
    जलवायु परिवर्तन का संकट बहुत वास्तविक है
    29 Oct 2021
    भविष्य में आने वाली अधिक आपदाओं का मुक़ाबला करने के लिए आपदा जोखिम को कमतर करने वाले सिद्धांतों को मज़बूत करने की ज़रूरत है।
  • Supreme Court on Pegasus
    अजय कुमार
    पेगासस जासूसी कांड पर सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी: 46 पन्नों के आदेश का निचोड़
    29 Oct 2021
    केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र कर सरकार को निजता के अधिकार के उल्लंघन से जुड़े सवालों के जवाब देने से छूट नहीं मिल सकती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 14,348 नए मामले, 805 मरीज़ों की मौत
    29 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.47 फ़ीसदी यानी 1 लाख 61 हज़ार 334 हो गयी है।
  • exxon
    इलियट नेगिन
    प्रतिबंधित होने के बावजूद एक्सॉनमोबिल का जलवायु विज्ञान को ख़ारिज करने वालों को फंड देना जारी
    29 Oct 2021
    अमेरिकी तेल और गैस की प्रमुख कंपनी एक्सॉनमोबिल ने जलवायु विज्ञान को लेकर संदेह पैदा करने के लिए 39 मिलियन डॉलर से ज़्यादा ख़र्च किए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License