NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
चॉम्स्कीः वैश्विक निराशा के दौर में उम्मीद की एक किरण
प्रसिद्ध विद्वान तथा शिक्षक प्रोफेसर नोआम चॉम्स्की ने कहा है कि 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद से विश्व की स्थिति काफी बदली है और ये दुनिया अधिक ख़तरनाक और तर्कहीन जगह बन गई है।

बैनी कुरूविला
13 Feb 2018
noam chomsky

कोझीकोड में प्रसिद्ध विद्वान तथा शिक्षक प्रोफेसर नोआम चॉम्स्की ने कहा है कि 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद से विश्व की स्थिति काफी बदली है और ये दुनिया अधिक ख़तरनाक और तर्कहीन जगह बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमरीका दुनिया को परमाणु युद्ध के कगार पर धकेल रहा है तथा तथाकथित 'क़यामत का दिन' (doomsday clock) अब मध्यरात्रि से दो मिनट पहले स्थापित कर दिया गया है। 'डूम्स डे क्लॉक' की देखरेख बुलेटिन ऑफ एटोमिक साइंटिस्ट द्वारा किया जाता है। ये क्लॉक एक प्रतीक है जो मानव निर्मित वैश्विक आपदा की संभावना को प्रस्तुत करता है।

प्रोफेसर चॉम्स्की केरल के कोझीकोड में केरल साहित्य फेस्टिवल के मौके पर केरल स्टेट प्लानिंग बोर्ड के प्रोफेसर वीके रामचंद्रन के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए बोल रहे थें।

विज्ञान-विरोधी तथा तर्कहीनता का उदय

प्रोफेसर रामचंद्रन ने चॉम्स्की से चर्चा करने को कहा कि भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह अमेरिका में भी वैज्ञानिक विरोधी मत तथा धार्मिक कट्टरपंथियों के उदय को क्यों देखा जा रहा है। 'अमेरिका में 2016 के चुनावों के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के सभी उम्मीदवारों को हमने बेतुका बयान देते देखा था कि वे या तो जलवायु परिवर्तन की घटना को नकार रहे थे या कह रहे थे कि कुछ करने की जरूरत नहीं है'। चॉम्स्की ने रेखांकित किया किहालांकि अमेरिका को धार्मिक कट्टरपंथ के उच्च स्तर के साथ एक देश के रूप में स्थापित किया गया था लेकिन यह 1950 और 1960 के दशक की मध्यम सामाजिक लोकतांत्रिक राज्य पूंजीवाद की अवधि के दौरान अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध बन गया। हालांकि ट्रम्प के अधीन यह एक बार फिर इस तरह की राजनीति और नीति का प्रमुख स्थान बन रहा है। उन्होंने वहां की रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा दक्षिण पंथ की ओर तेज़ी से बढ़ने को इसका कारण बताया। 1980के दशक में अमेरिका में नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों की शुरुआत के साथ ही अमेरिकी श्रमिकों की वास्तविक मज़़दूरी निरंतर कम हो गई। इसके चलतेमज़दूर वर्ग में क्रोध, भय और असंतोष बढ़ गया। उग्र दक्षिण पंथी (radical right) ने रिपब्लिकन पार्टी पर प्रभावी ढंग से क़ब्जा जमा लिया। इसने सफलतापूर्वक डर के इस माहौल का लाभ उठाने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया है। चॉम्स्की ने कहा कि फ्रांस और जर्मनी में भी प्रगतिविरोधी नव-फासीवाद असंतुष्ट औरमताधिकारहीन मज़दूर वर्ग से समर्थन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई राजनीतिक आंदोलनों को 'लोकलुभावन' कहा जा रहा है, लेकिन इस शब्द का इस्तेमाल ग़लत है और उसे फासीवाद के पूर्वगामी के रूप में देखा जाना चाहिए।

कृत्रिम बुद्धि, रोबोटिक्स तथा कार्य के भविष्य विषय पर प्रतिक्रिया

कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) के उदय और पूंजीवाद के अधीन इसके द्वारा भविष्य के कार्य को कर सकने को लेकर एक सवाल के जवाब में चॉम्स्की ने कहा कि हालांकि नई चुनौती की ज़रूरत है और नीति परिधियों, रोबोटिक्स तथा कृत्रिम बुद्धि के विषय में गंभीर चर्चा की ज़रूरत है। यदि आप अमेरिका के इर्द गिर्द देखेंगे तो पाएंगे कि वहां के बुनियादी ढांचे ख़राबहै जिसे अपग्रेड करने की ज़रूरत है, बेहतर सार्वजनिक अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों और सस्ते घरों की जरूरत' है। बड़ी संख्या में नौकरियों की आवश्यकता है। न सिर्फ अमेरिका में बल्कि दुनिया भर में एक सभ्य जीवन के लिए मानव संसाधन और श्रमिकों के बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की बेहद ज़रूरत है। चॉम्स्की ने कहा कि चुनौतियां सिर्फ कृत्रिम बुद्धि और रोबोटिक्स के साथ ही इतनी ज्यादा नहीं है बल्कि यह कि आर्थिक व्यवस्था इस मामले में बेकार है कि काम करने को इच्छुक लोगों का प्रबंधन करने में असमर्थ है।

नव प्रगतिशील राजनीति के लिए उम्मीद के संकेत

अमेरिका में आशावान रुझानों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 'तथ्य यह है कि बर्नी सैंडर्स अमेरिका में वर्तमान समय में सबसे लोकप्रिय राजनीतिज्ञ हैंजो ख़ौफनाक विकास है'। जेरेमी कोर्बिन के उदय से कुछ नैतिक उम्मीदें मिलती हैं कि यूके में गंभीर स्थिति को पलटा जा सकता है। इसी प्रकार स्पेन में 15मई के आंदोलन (इंडिग्नेडस) के परिणामस्वरूप नए प्रगतिशील राजनीति का जन्म हुआ जो नव-उदारवादी यूरोपीय संघ मॉडल को चुनौती दे रहा है। पॉडेमोस और बार्सिलोना एन कॉमू जैसी राजनीतिक संरचनाएं इस प्रक्रिया के परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि 'ये सभी घटनाएं मुझे मानवता के लिए नए सिरे से नयी उम्मीदें देती हैं।'

नौम चोम्स्य
केरल लिटरेचर फेस्टिवल
सोवियत यूनियन
USA

Related Stories


बाकी खबरें

  • Modi in Kedarnath
    शंभूनाथ शुक्ल
    केदारनाथ में भक्तिभाव कम दिखावा अधिक!
    06 Nov 2021
    यह एक डेमोक्रेटिक देश के प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता कि वह अपनी निजी धार्मिक आस्थाओं का यूँ प्रदर्शन करे। मगर वे जाते हैं और ख़ासकर तब जब चुनाव होने वाला हो।
  • THANK YOU MODI
    राजेंद्र शर्मा
    फिर-फिर थैंक्यू मोदी जी!
    06 Nov 2021
    कटाक्ष: अगला कृपा पर कृपा बरसाकर नहीं थक रहा है और हम थैंक्यू में भी सुस्ती दिखाएं, यह तो बड़ा अन्याय है भाई।
  • GST
    वी श्रीधर
    अक्टूबर में आये जीएसटी में उछाल को अर्थव्यवस्था में सुधार के तौर पर देखना अभी जल्दबाज़ी होगी
    06 Nov 2021
    1.30 लाख करोड़ रूपये की कर वसूली को सरकार द्वारा दिवाली से पहले उपभोक्ता मनोदशा को प्रोत्साहित करने के लिए एक नैरेटिव गढ़ने के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: लो जी, अब ‘ग़रीब कल्याण’ का ‘दिखावा’ भी बंद!
    06 Nov 2021
    केंद्र सरकार प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर से आगे नहीं बढ़ाएगी। हालांकि यूपी में यह होली तक जारी रहेगी। वैसे उम्मीद है कि इसी तरह जिन राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं उसमें यह…
  • Tripura Violence
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    त्रिपुरा हिंसा: फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम के वकीलों पर भी UAPA, छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का त्रिपुरा भवन पर प्रदर्शन
    06 Nov 2021
    प्रदर्शनकारियों ने असम भवन से त्रिपुरा भवन तक मार्च निकाला। त्रिपुरा और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह प्रदर्शन त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के बाद गई एक फ़ैक्ट…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License