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“बहुत दुखी हूं, पूरी रात सो नहीं पाया”
विपक्ष के आचरण से उप सभापति ‘दुखी’ होकर रात भर सो नहीं पाए और अब 24 घंटे के उपवास पर हैं। लेकिन इसका एक तीसरा पक्ष भी है, वो हैं देश के किसान। वे इन विधेयकों के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Sep 2020
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यह दिलचस्प है कि 20 तारीख़ को राज्यसभा में जो कुछ हुआ उसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है। इसके विरोध में विपक्षी और निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में धरना दिया तो उधर उप सभापति ‘दुखी’ होकर रात भर सो नहीं पाए और अब 24 घंटे के उपवास पर हैं।

लेकिन इसका एक तीसरा पक्ष भी है, वो हैं देश के किसान। वे इन विधेयकों के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा।

समाचार एजेंसी ‘भाषा’ की ख़बर के अनुसार राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने विपक्षी सदस्यों के आपत्तिजनक आचरण पर गहरी पीड़ा जताते हुए मंगलवार को घोषणा की कि वह 24 घंटे का उपवास करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि इससे आपत्तिजनक आचरण करने वाले सदस्यों में "आत्म-शुद्धि" का भाव जागृत होगा।

हरिवंश ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को लिखे पत्र में, कृषि संबंधी दो विधेयकों के पारित होने के दौरान रविवार को सदन में हुए हंगामे का जिक्र किया और कहा, ‘‘...सदस्यों द्वारा लोकतंत्र के नाम पर हिंसक व्यवहार किया गया। आसन पर बैठे व्यक्ति को भयभीत करने की कोशिश हुयी। उच्च सदन की हर मर्यादा और व्यवस्था की धज्जियां उड़ायी गयीं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘20 सितंबर को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, आत्मतनाव और मानसिक वेदना में हूं। पूरी रात सो नहीं पाया।’’

हरिवंश ने कहा कि 20 सितंबर को उच्च सदन में जो दृष्य उत्पन्न हुआ, उससे सदन और आसन की मर्यादा को अकल्पनीय क्षति हुयी है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, ‘‘मेरा यह उपवास इसी भावना से प्रेरित है। बिहार की धरती पर पैदा हुए राष्‍ट्रकवि दिनकर दो बार राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे। कल 23 सितंबर को उनकी जन्‍मतिथि है। आज यानी 22 सितंबर की सुबह से कल 23 सितंबर की सुबह तक मैं 24 घंटे का उपवास कर रहा हूं।’’

उन्‍होंने कहा है कि ‘कामकाज प्रभावित ना हो, इसलिए मैं उपवास के दौरान भी राज्‍यसभा के कामकाज में नियमित और सामान्‍य रूप से भाग लूंगा।’

उल्लेखनीय है कि रविवार को सदन में हुए हंगामे को लेकर विपक्ष के आठ सदस्यों को मौजूदा सत्र के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।

निलंबित किए गए सदस्यों में कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम व आप के संजय सिंह शामिल हैं।

इन सांसदों ने सदन की कार्यवाही और अपने निलंबन के खिलाफ संसद परिसर में गांधी मूर्ति के सामने धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन पर बैठे निलंबित सदस्यों के लिए उपसभापति हरिवंश आज सुबह अपने घर से चाय लेकर पहुंचे। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की और उनकी ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तथा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को लिखे गए पत्र को ‘‘प्रेरक’’ करार दिया।

कुल मिलाकर ये सारी कवायद उन कानूनों के लिए है जिनकी किसानों ने कभी मांग ही नहीं की थी। वे जो एक लाइन की मांग कर रहे हैं कि एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य को सबके लिए अनिवार्य बनाया जाए, इस मांग पर सरकार कान तक नहीं धर रही है।

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