NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: अख़लाक़ के गांव से योगी ने सांप्रदायिक प्रचार की शुरुआत क्यों की?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिसाहड़ा गांव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी चुनावी रैली की शुरुआत की। अपने भाषण में साल 2015 में हुए अख़लाक़ की हत्या का मामला उठाया। इस दौरान अख़लाक़ की हत्या के मुख्य आरोपी आगे बैठे थे और ख़ुशी जाहिर कर रहे थे।
सुबोध वर्मा
02 Apr 2019
lynching

लोकसभा चुनावों के लिए अपने ज़हरीले बयानों से प्रचार की शुरुआत करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी दिल्ली के पास स्थित गौतम बौद्ध नगर (ग्रेटर नोएडा) के बिसाड़ा गांव में अपने उत्साही समर्थकों की एक छोटी रैली को संबोधित किया। इस गांव का चयन बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि यहीं मोहम्मद अख़लाक़ की बर्बर तरीक़े से गोरक्षा के नाम पर 28 सितंबर 2015 को भीड़ ने पीट- पीट कर हत्या कर दी थी।

सांप्रदायिक आरोपों और घृणा फैलाने वाले भाषणों के लिए जाने वाले योगी ने खुद इस घटना की यादों को फिर से ताज़ा कर दिया और ये कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं का दबाया गया।

उन्होंने कथित तौर पर रैली में कहा, "किसे याद नहीं कि बिसाड़ा में क्या हुआ था? हर कोई इसे जानता है। समाजवादी पार्टी की सरकार ने तब कितने शर्मनाक तरीक़े से भावनाओं को दबाने की कोशिश की। मैं कह सकता हूं कि जैसे ही हमारी सरकार बनी, हमने सभी अवैध बूचड़खानों को एक बार में बंद कर दिया और सख्ती से इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित किया।"

इस घटना को कवर करने गए मीडियाकर्मी सामने की पंक्ति में बैठे लिंचिंग मामले के चार आरोपियों और इन्हें योगी के भाषण पर खुशी का इजहार करते हुए देख कर चौंक गए। इसका वीडियो फुटेज भी सामने आया है। मुख्य आरोपी विशाल राणा को खुशी इज़हार करने वालों में देखा जा सकता है।

योगी जो कह रहे थे वह यह था: हिंदू भावनाएं सर्वोच्च हैं, भले ही वे लिंचिंग या हिंसा की ओर ले जाएं।55 साल के मोहम्मद अख़लाक़ के घर पर हुए हमले के बाद इस गांव की चर्चा देश भर में हुई। लगभग दो सौ लोगों की भीड़ ने अख़लाक़ के घर पर हमला किया। ये अफवाह फैलायी गई कि अख़लाक़ के परिवार ने गाय की हत्या की है और मांस को फ्रीज में रखा है। अख़लाक़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई जबकि उसकी मां और दो बच्चे घायल हो गए। परिवार ने भीड़ में शामिल लोगों से दया की गुहार लगाई और बार-बार हमलावरों से कहा कि ये मांस बीफ नहीं है लेकिन लोगों ने कुछ भी न सुना। बाद में जांच में पता चला कि अख़लाक़ के घर में रखा मांस बीफ नहीं बल्कि बकरे का था।

मोदी और योगी सरकार में लिंचिंग की घटना

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से गोरक्षों द्वारा गायों को ले जाने वाले लोगों या गोहत्या के ग़लत आरोपों के चलते लिंचिंग के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इंडियास्पेंड (न्यूज़क्लिक के सहयोग से) द्वारा तैयार किए गए एक डेटाबेस के अनुसार वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के बीच ऐसी 123 घटनाएं हुई हैं जिससे 21 राज्यों में 46 लोगों की मौत हुई है। 

योगी ने अपने भाषण में कहा कि जबसे (मार्च 2017) उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला है राज्य में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। हालांकि यह सौफ तौर पर ग़लत प्रतीत होता है क्योंकि राज्य में तथाकथित "गोरक्षकों" द्वारा हिंसा की कम से कम 13 घटनाएं उनके कार्यकाल में हुई हैं जिसमें छह व्यक्ति मारे गए और 30 लोग घायल हुए। ये आंकड़े इंडियास्पेंड डेटाबेस के अनुसार हैं जो मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं।

वास्तव में वर्ष 2017 में योगी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई हैं। पूर्ववर्ती दो वर्षों (2015 और 2016) में यूपी में गाय से संबंधित हिंसा के पांच मामले हुए थे जिसमें पांच लोग मारे गए और 18 लोग घायल हो गए।

ऐसा लगता है कि योगी बड़ी आसानी से भूल गए हैं कि पास के खेत में गाय के अवशेष मिलने के बाद महज कुछ किलोमीटर दूर बुलंदशहर ज़िले के चिंगरावठी में हिंसक भीड़ द्वारा एक पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की 3 दिसंबर 2018 को गोली मारकर हत्या कर दी गई और पुलिस पोस्ट में आग लगा दी गई। उस समय भी योगी ने भीड़ का पक्ष लिया था और कथित तौर पर पुलिस को पहले गायों का वध करने वाले का पता लगाने के लिए कहा था।

2019 चुनाव के लिए यह बीजेपी का प्रचार है?

बीजेपी ने चुनाव प्रचार के लिए कथित तौर पर योजना तैयार किया है। इसने हिंदुओं के वोटों को हासिल करने के लिए सांप्रदायिक नफरत फैलाना शुरु कर दिया। यह रणनीति उन पर जबरन थोपी जा रही है क्योंकि भ्रष्टाचार मुक्त भारत और मोदी की योजनाओं के लाभार्थियों वाले बयानों से ज्यादा फायदा नहीं हो रहा है। न ही किसानों को मिलने वाले मामूली सहायता और न ही बालाकोट हवाई हमले से फायदा हो रहा है।

Yogi Adityanath
Yogi Adityanath communal speech
yogi aditynatah and lynching
yogi aditynath election campaign start from lynching village
india spend study on lynching

Related Stories

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

पीएम को काले झंडे दिखाने वाली महिला पर फ़ायरिंग- किसने भेजे थे बदमाश?

यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर में स्कूली छात्राओं के यौन शोषण के लिए कौन ज़िम्मेदार है?


बाकी खबरें

  • fark saaf hai
    सत्यम श्रीवास्तव
    फ़र्क़ साफ़ है- अब पुलिस सत्तासीन दल के भ्रामक विज्ञापन में इस्तेमाल हो रही है
    04 Jan 2022
    पिछले कुछ सालों से देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने ही देश के नागरिकों को ‘कपड़ों से पहचानने’ की जो युक्ति ईज़ाद की है उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पूरी मंशा से भाजपा ने इस विज्ञापन में दंगाई व्यक्ति…
  • Constitution of India and Privatization
    प्रभात पटनायक
    भारतीय संविधान की मूल भावना को खंडित करता निजीकरण का एजेंडा
    04 Jan 2022
    भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का निर्माण कई कारणों से किया गया था। मसलन, देश के कच्चे माल संसाधनों का नियंत्रण विदेशी पूंजी से छुड़ाकर, देश के हाथों में लाने के लिए, जैसे तेल क्षेत्र में। 
  • mental health
    शिरीष खरे
    महामारी में किशोरों का बिगड़ा मानसिक स्वास्थ्य; कैसे निपटेगी दुनिया!
    04 Jan 2022
    पिछले सप्ताह यूनिसेफ ने अपनी एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक की। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 के कारण बड़ी संख्या में बच्चों और किशोरों की एक बड़ी आबादी का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया…
  • Vasudhaiva Kutumbakam
    राम पुनियानी
    वसुधैव कुटुम्बकम: भारत को फिर से एक कैसे करें? 
    04 Jan 2022
    2022 में, याद रखें कि भारतीय राष्ट्रवाद ने हमें सांस्कृतिक समृद्धि और समन्वित धारणाओं की ताकत दी है।
  • namaj
    सतीश भारतीय
    खुले में नमाज़ के विरोध को लेकर गुरुग्राम निवासियों की प्रतिक्रिया
    04 Jan 2022
    खुले में नमाज के विरोध को लेकर गुरुग्राम निवासियों की प्रतिक्रिया में मुस्लिमों के प्रति गढ़ी गई कई तरह की धारणाएं साफ तौर पर सामने आती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License