NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: बनारस के चाँदपुर में कालीन बुनकर दिहाड़ी मज़दूर बने
वाराणसी में मोदी द्वारा गोद लिए गए जयापुर के पास के गाँव चाँदपुर की जनता ने आरोप लगाया है कि यहाँ कालीन बुनकरों के लिए या किसी अन्य विकास कार्य के लिए किसी भी क़िस्म की योजना नहीं है।
सौरभ शर्मा
17 May 2019
Translated by महेश कुमार
चुनाव 2019: बनारस के चाँदपुर में कालीन बुनकर दिहाड़ी मज़दूर बने

जब मीडिया वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोद लिए गए दो गाँव - नागेपुर और जयापुर में उनके द्वारा दर्ज स्पष्ट सफ़लताओं को उजागर करता है तो वे पास के चाँदपुर गाँव में कालीन बुनकरों की ख़राब स्थिति के बारे में बताना भूल जाता है। पीढ़ियों से कालीन बुनकरों की तरह काम करने वाले लोग अब दिहाड़ी मज़दूर बन रहे हैं।

कालीन बुनकर अभय कुमार ने न्यूज़क्लिक को बताया कि चाँदपुर के बुनकरों की लगभग 90 प्रतिशत (उनके अनुमान के अनुसार) आबादी अपने पेशे को कम आमदनी के कारण छोड़ रही है और अब वे रोज़गार या कृषि श्रमिकों के रूप में वाराणसी शहर के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं। 

कुमार, जिनके पिता भी कालीन बुनकर थे, ने बताया कि गाँव में बुनकरों और भूतपूर्व बुनकरों को बड़ी संख्या में कालीन बुनाई करने की वजह से उनके फेफड़ों और आँखों पर बिमारी ने क़ब्ज़ा कर लिया हैं, लेकिन इन वर्षों में सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया है। “साड़ी बुनकरों के लिए तो योजनाएँ हैं लेकिन कालीन बुनकरों के लिए कोई योजना नहीं है। सरकार को अपने लोगों को नहीं छोड़ना चाहिए, यहाँ तो सरकार बुनकरों को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया है।" उन्होंने कहा।

जब न्यूज़क्लिक टीम ने गोद लिए हुए जयापुर गाँव का दौरा किया जो कि चाँदपुर से थोड़ी सी दूरी पर है, तो पाया कि गाँव की मुखिया कुसुम लता अपने पति को अन्य ग्रामीणों के साथ भांग पीने और जुआ खेलने के लिए डांट रही थीं - जबकि गाँव का हर वयस्क पुरुष या तो लगभग नशे में था या चिलम के साथ ताश खेल रहा था। 

40 फ़ीसदी से भी कम घरों में शौचालय का निर्माण हुआ है, और गाँव में खुले में शौच करने की समस्या बनी हुई है। बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन स्कूल के खेल के मैदान पर ताश खेलने वालों और गालियाँ देने वाले शराबी लोगों का क़ब्ज़ा है।

पूर्व कालीन बुनकर, 58 वर्षीय राधेश्याम ने कहा कि गाँव में केवल तीन कालीन बुनकर रह गए हैं।

उन्होंने बताया, “बुनकर धीरे-धीरे इस काम को छोड़ रहे हैं। अपनी इस कला या शिल्प को संरक्षित करने के बारे में सोचने से पहले, हमें अपने बच्चों के लिए खाने और स्वस्थ जीवन जीने के बारे में सोचना होगा। सरकार ने कालीन बुनाई के इस सूक्ष्म उद्योग को जीवित रखने के लिए कुछ भी नहीं किया है और इस बारे में कोई भी योजना अभी तक हमारे गाँव नहीं पहुँची है। अगर इस गाँव को भी किसी के द्वारा गोद लिया जाता, तो हमारी स्थिति भी शायद बेहतर हो सकती थी। योजनाएँ हमारे गाँव तक नहीं पहुँचती हैं, हमें इसका नुक़सान उठाना पड़ रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, “हथकरघा बुनकरों को बैंक खाते और अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं क्योंकि बनारसी साड़ी शहर को प्रसिद्धि दिलाती है, लेकिन कालीन बुनकरों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। कालीन बुनकरों को कुछ भी नहीं मिलने के पीछे का संभावित कारण उनकी जाति भी हो सकती है, क्योंकि इस गाँव में कालीन बुनने वाला हर कोई चमार है।"

यहाँ इसका उल्लेख किया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश की सरकार ज़िला विशिष्ट उत्पाद उद्योग को बढ़ावा दे रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र को इसके विश्व प्रसिद्ध बनारसी सिल्क साड़ी के लिए तय किया गया है। प्रशासन के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ओडीओपी योजना के तहत जो सहायता दी गई वह ज़िले के 100 से अधिक गाँवों मैं केवल 713 साड़ी बुनकरों को प्रदान की गई है जबकि कालीन उद्योग उसी योजना के तहत भदोही ज़िले में चला गया है।

चाँदपुर की ग्राम प्रधान कुसुम लता कहती हैं, "गाँव में जयापुर और नागेपुर की तुलना में बेहतर साक्षरता दर है, लेकिन फिर भी यहाँ किसी भी तरह के विकास की कमी है क्योंकि कोई भी इस गाँव पर ध्यान नहीं देता है। विकास कार्यों के लिए एक ग्राम प्रधान को जो धनराशि आवंटित की जाती है, वह भी हमें बहुत देर से मिलती है। विकास कार्य को कई बार बीच में रोकना पड़ता है और इसे पूरा करने में अधिक प्रयास करना पड़ता है। गाँव में कुल 873 शौचालय हैं, जो गोद लिए गए गाँवों से भी अधिक हैं, लेकिन लोग इनका उपयोग नहीं कर सकते क्योंकि पानी की कोई सुविधा नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे गाँव की प्रधानमंत्री या उनकी पार्टी के साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, फिर भी हमें सौतेला व्यवहार ही मिलता है। मुझे नहीं पता कि जनता वोट कैसे करेगी, लेकिन मुझे इतना पता है कि दलितों की मसीहा तो केवल बहन कुमारी मायावती हैं।"
 
वाराणसी शहर के लंका क्षेत्र के एक छोटे सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी गाँव विकास से अछूता नहीं रहे।
“ज़िले में 1,289 गाँव हैं, लेकिन आप केवल चार गाँवों के बारे में बात करते हैं जिन्हें प्रधानमंत्री ने गोद लिया है। ज़िले के अन्य 1,285 गाँवों के बारे में कौन सोचेगा? इन ग्रामीणों का क्या दोष है, क्या वे किसी भी तरह के विकास के लायक नहीं हैं?” उन्होंने सवाल उठाया।

चौंकाने वाली बात यह है कि नेशनल हेराल्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला कि प्रधानमंत्री ने अपने संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडी) निधि से उन गाँवों के विकास पर एक भी पैसा ख़र्च नहीं किया है।

varanasi
villages adopted by Modi
adopted villages
Members of Parliament Local Area Development Scheme
MPLAD fund
Uttar pradesh

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License