NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019 : छठा चरण : गठबंधन के बीजेपी से काफी आगे निकलने की संभावना
छठे चरण में पूर्वी यूपी की 14 सीटों पर मतदान हो रहा है। वर्ष 2014 में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने इन 14 सीटों में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी लेकिन 2019 के अनुमानों से पता चलता है कि इस बार पार्टी ये सभी सीटें हार सकती है। छठे चरण तक यूपी में उसे 44 सीटों के नुकसान की संभावना है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 May 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: Countercurrents

पूर्वी यूपी की 14 सीटों पर मतदान आज यानी 12 मई को है। इनमें से एक सीट आजमगढ़ को छोड़कर वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी और इसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। आजमगढ़ सीट समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने जीती थी। लेकिन बीजेपी से खिसकते मतदाताओं के साथ 2017 के विधानसभा चुनावों के आंकड़े ये संकेत देते हैं कि गठबंधन लहर के चलते ये आंकड़े इनके पक्ष में हो जाएंगे।

अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए इन गठबंधन पार्टियों (समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल) को 2017 के विधानसभा चुनावों में लगभग 51% वोट मिले। इन गठबंधन पार्टियों ने बीजेपी और इसकी सहयोगियों को 37% मतों के साथ काफी पीछे छोड़ दिया था। इसके अनुसार 12 मई को 14 सीटों पर होने वाले मतदान में से 12 सीट गठबंधन के खाते में जा सकती है। केंद्र और राज्य में सरकार चला रही बीजेपी से खिसकते 2.5% मतों को जोड़ दिया जाए तो रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है क्योंकि बीजेपी के आंकड़े शून्य पर पहुंच जाते हैं।

12 मई को संपन्न होने वाले मतदान के छठे चरण में यूपी की 80 सीटों में से 67 सीटों पर मतदान पूरा हो जाएगा। 2014 में बीजेपी ने इनमें से 60 सीटें जीती थीं। लेकिन न्यूज़क्लिक के अनुमानों से संकेत मिलता है कि इस बार इसे केवल 16 सीटों पर ही संतोष करना होगा जबकि गठबंधन को 49 सीटों पर जीत हासिल होने की संभावना है। कांग्रेस अपनी पिछली दो सीटों पर ही काबिज रहेगी।

up 6phases_0.jpg

न्यूज़क्लिक की डेटा एनालिटिक्स टीम द्वारा ये आंकड़े इकट्ठे किए गये हैं। ये आंकड़े 2017 के विधानसभा चुनावों में सभी दलों को सीट के अनुसार मिले मतों पर आधारित हैं। बीजेपी (2.5%) के पक्ष से वोट खिसकने के कई कारण हैं। इन कारणों में उपज की कम कीमतों को लेकर किसानों का संकट, आवारा पशु की समस्या, बड़ी संख्या में बेरोज़गारी, अल्पसंख्यकों तथा दलितों पर बढ़ते हमले और बढ़ती दूरियां और कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की राज्य सरकार से भारी असंतोष शामिल हैं।

इसे याद किया जा सकता है कि दो प्रतिद्वंदी विपक्षी दल सपा और बसपा सामाजिक वर्गों और जातियों के शक्तिशाली समूह का निर्माण करते हुए एक साथ आए जिन्हें चुनौती देना बीजेपी के लिए मुश्किल हो रहा है। गठबंधन में आरएलडी भी शामिल है जिसकी मौजूदगी मुख्य रूप से पश्चिमी यूपी में ही है।

बीजेपी का भी छोटे दलों के साथ गठबंधन है जो मुख्य रूप से विशिष्ट जाति समुदायों पर आधारित हैं। इस गठबंधन में अपना दल, निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी आदि शामिल हैं। हालांकि यह गठबंधन टूट रहा है फिर भी इसका नाम बाकी है। बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ व्यापक असंतोष के चलते इन छोटे सहयोगी दलों को बार-बार हटने के लिए मजबूर होने पड़ा लेकिन बीजेपी के आकर्षक प्रस्तावों से फिर वापस हो गए। इस प्रक्रिया में उनका अपना सामाजिक आधार समाप्त हो गया है और ऐसे में फिर से दूरियां बन सकती हैं।

यूपी में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की लगातार हार का मतलब है कि छठे चरण तक इस पार्टी ने 44 सीटें खो दी हैं जो इसने पिछली बार जीती थीं। यह नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर एक तगड़ा झटका हो सकता है क्योंकि देश के बाकी हिस्सों में भी उनकी पार्टी को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

(इन आंकड़ों का विश्लेषण पीयूष शर्मा ने किया।)

General elections2019
2019 आम चुनाव
2019 Lok Sabha elections
Uttar pradesh
BJP
Narendra modi
Gathbandhan
MAYAWATI
AKHILESH YADAV

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License