NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019; डेटा विश्लेषण : केरल में एलडीएफ को बढ़त
केरल में 2016 में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों का विश्लेषण से मिले अनुमानों से पता चलता है कि वाम और लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के कम से कम 14 सीटें जीतने की संभावना बन गयी है और यह संख्या 20 में से 17 सीटों तक जा सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Apr 2019
Translated by महेश कुमार
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर। फोटो साभार : News Minute

केरल, में आज, तीसरे चरण में वोट डाले जा रहे हैं। यहां 2016 में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की व्याख्या करने पर  अनुमान लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में लेफ्ट और डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को 20 सीटों में से बहुमत पर जीत हासिल होगी।

न्यूजक्लिक की डेटा विश्लेषक टीम ने 2016 में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों का विश्लेषण किया और पाया कि एलडीएफ को सीधे ही 15 सीटों का फायदा है और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को पांच सीटों के मिलने का संकेत देता है।

एलडीएफ की तरफ 2 प्रतिशत का झुकाव (स्विंग) होने से इसके पक्ष में 17-3 स्कोर जा सकता है जबकि यूडीएफ की ओर 2 प्रतिशत झुकाव (स्विंग) इसे 14-6 की गिनती तक नीचे ला सकता है। यह याद रखना चाहिए कि 2014 में, यूडीएफ ने 12 संसदीय सीटें जीती थीं, जबकि एलडीएफ को कुल छह सीटें मिली थी।

KERALA1.jpg

KERALA2.jpg

KERALA3.jpg

KERALA4.jpg

KERALA5.jpg

एलडीएफ सरकार का काम

केरल में एलडीएफ के संभावित अच्छे प्रदर्शन का प्रमुख कारण 2016 के चुनाव के बाद से एलडीएफ सरकार द्वारा किए बेहतर प्रदर्शन का नतीज़ा हो सकता है। शिक्षा में सार्वजनिक निवेश बढ़ाना, बीमार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को पुनर्जीवित करना और अन्य कल्याणकारी उपायों को लागू करने के अलावा, 2018 में अभूतपूर्व बाढ़ के बाद की गई त्वरित और निर्णायक कार्रवाई से राज्य सरकार की व्यापक रूप से प्रशंसा और सराहना की गई है। बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास कार्य सामान्य भ्रष्टाचार और अक्षमता से मुक्त रहा है, जैसा कि  अक्सर देश के अन्य जगहों पर देखा जाता है। तबाह हुए घरों और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के विशाल कार्य से एलडीएफ को अधिक समर्थन को आकर्षित करने की संभावना बनी हुई है।

सबरीमाला और भाजपा

2014 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को देश के अन्य हिस्सों में मोदी लहर के बावजूद, यहां लगभग 11 प्रतिशत वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा था, उन्हें कुछ खास वोट नहीं मिल पाए। तब से, भाजपा ने प्रतिगामी और जातिवादी रणनीति के आधार पर एक बुरी रणनीति अपनाते हुए एक चाल चली, ताकि किसी भी तरह इस दक्षिणी राज्य में सीट हासिल की जा सके। इसमें हाल ही में सबरीमाला मंदिर प्रवेश विवाद था जिसमें भाजपा और जातिवादी ताकतों के गठजोड़ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध करने के लिए हिंसक आंदोलन किया और सभी उम्र की महिलाओं को धर्मस्थल में प्रवेश करने की अनुमति के खिलाफ हिंसा की। अपने हालिया जारी घोषणापत्र में, भाजपा ने सबरीमाला मुद्दे को यह कहते हुए शामिल किया है कि वह धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के वर्चस्व को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश करेगी। इसका प्रभावी मतलब यह है कि भगवा ताकतों द्वारा संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की सर्वोच्चता को चुनौती दी जा रही है।

वामपंथियों ने इस चुनौती को चौतरफा स्वीकार किया और साहसपूर्वक एलडीएफ सरकार ने पी. विजयन के नेतृत्व में अदालत के आदेश को लागू करने का फैसला लिया। वामपंथी दलों ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने और संविधान की रक्षा करने के लिए राज्य भर में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। पूरे राज्य में घूम 620 किलोमीटर लंबी महिला दीवार बनायी जिसे इस साल 1 जनवरी को आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग पचास लाख महिलाओं ने भाग लिया था, और भाजपा के नेतृत्व में सबरीमाला प्रवेश का विरोध करने के खिलाफ मोर्चा संभाला था। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील विचार और कार्य अतीत की भेदभावपूर्ण प्रथाओं से बेहतर हैं।

मतदान के दिन वोटिंग पैटर्न में सबरीमाला मुद्दे की भूमिका होने की संभावना है और एलडीएफ समर्थकों को भरोसा है कि बीजेपी की चाल को शिकस्त मिलेगी। कांग्रेस ने भी सबरीमाला संबंधित आंदोलन में एक विचित्र भूमिका निभाई, पहले आदेश का स्वागत किया और फिर उन्होंने अवसरवादी रूप से इसका विरोध किया।

कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट मानी जाने वाली वायनाड सीट से राहुल गांधी को मैदान में उतारा गया है। इसने देश भर में प्रगतिशील ताकतो को चौंका दिया है क्योंकि गांधी को एलडीएफ उम्मीदवार के खिलाफ खड़ा किया गया है, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार कहीं भी तस्वीर में नहीं है, इस तरह देश भर में कांग्रेस के सांप्रदायिक भाजपा से लड़ने के रुख पर दाग लग गया है। यह संभावना है कि वायनाड में मतदाता अपने बीच में एक उच्च प्रोफ़ाइल उम्मीदवार होने के बावजूद बह जाए, हालांकि एलडीएफ अपने सामान्य तरीके से जोरदार अभियान चलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

[पीयूष शर्मा द्वारा डेटा विश्लेषण और मैपिंग ग्लेनिसा परेरा द्वारा की गई है]

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
Kerala
LDF
UDF
Left unity
Congress

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 11,499 नए मामले, 255 मरीज़ों की मौत
    26 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.28 फ़ीसदी यानी 1 लाख 21 हज़ार 881 हो गयी है।
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, पांचवां चरण: अयोध्या से लेकर अमेठी तक, राम मंदिर पर हावी होगा बेरोज़गारी का मुद्दा?
    26 Feb 2022
    पांचवें चरण के चुनावों में अयोध्या, प्रयागराज और चित्रकूट.... तीन-तीन धर्म नगरी शामिल हैं, जो हमेशा से चुनावों में भाजपा का बड़ा हथियार रही हैं, इसके बावजूद इस बार बेरोज़गारी और महंगाई भाजपा के लिए…
  • pak
    श्रिया सिंह
    पाकिस्तानी छात्रों का छात्र संगठन पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष को सिंह प्रांत में मिली बड़ी जीत
    26 Feb 2022
    क़रीब 38 साल पहले जनरल ज़िया उल हक़ की सैन्य तानाशाही सरकार के दौरान छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया था। अब अगर सिंध के गवर्नर इमरान इस्माइल सिंध स्टूडेंट यूनियंस बिल 2019 पर हस्ताक्षर कर देते हैं…
  • human
    संदीपन तालुकदार
    सबसे बड़ा फ़ैमिली ट्री बनने से आसान हुई पलायन और वंशावली की खोज
    26 Feb 2022
    शोधकर्ताओं ने जेनेटिक्स का इस्तेमाल कर अब तक का सबसे बड़ा फ़ैमिली ट्री तैयार किया है। इसके बनने से पूर्वजों की जानकारी और अभी जो ज़िंदा हैं उनसे उनके संबंधों के बारे में जानकारी मिलना आसान हो गया है।
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: उत्तर प्रदेश का आधे से ज़्यादा रास्ता तय, मणिपुर में भी वोट की जंग
    25 Feb 2022
    इस बार उत्तर ही नहीं पूर्वोत्तर में भी वोट की जंग है। उत्तर प्रदेश अपने चार चरण पूरे कर चुका है और 27 फरवरी को पांचवें चरण का वोट करेगा, जबकि पूर्वोत्तर का अहम राज्य मणिपुर पहले चरण के मतदान के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License