NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019; दिल्ली : कौन सुनेगा रेहड़ी पटरी वालों की आवाज़?
रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण कानून 2014 में पारित हो गया लेकिन ज़मीन पर आज तक नहीं उतरा। लोगों का कहना है कि वे आज भी अपनी रेहड़ी-ठेला लगाने के लिए MCD से लेकर पुलिस तक को पैसा देते हैं, इसके बाद भी उन्हें कभी भी उजाड़ दिया जाता है।
मुकुंद झा
08 May 2019
रेहड़ी पटरी

उत्तर पूर्वी दिल्ली  के खजुरी चौक पर कई सारे लोग रेहड़ी पटरी लगाते हैं। ऐसे ही एक रेहड़ी वाले से हमने बात की जो पिछले 10  सालों से फल का ठेला लगाते  हैं। लगभग 50 वर्ष की आयु पार कर चुके  इस  व्यक्ति ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर बात की। उन्होंने कहा कि इतने साल हो जाने के बाद भी आजतक वो अपने आजीविका को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। वे कहते हैं कि हम आज भी यहाँ ठेला लगाने के लिए MCD से लेकर पुलिस तक को पैसा देते हैं,  इसके बाद भी कभी भी MCD  और दिल्ली पुलिस के लोग आकर उनके फल का ठेला पलट देते हैं।

उन्होंने बताया कि अधिकतर ऐसी घटनाएं तब होती हैं जब कोई नया अधिकारी इलाके में आता है, तो वो अपनी धौंस दिखाने और रिश्वत की दर बढ़ाने के लिए ऐसा करता है। 

ये किसी एक रेहड़ी वाले की समस्या नहीं हम अपने दिल्ली चुनाव कवरेज के दौरान कई रेहड़ी वालों से मिले, सभी ने यही बताया कि उन्हें किस तरह से प्रशासन द्वारा बार-बार परेशान किया जाता है। चांदनी चौक के एक पटरी वाले जो मोबाइल कवर और अन्य सामान बेचते हैं, उनमें पुलिस और MCD  को लेकर काफी गुस्सा था। वे कहते हैं कि हम कोई भीख तो नहीं मांगते, हम अपनी मेहनत से सामान बेचते हैं लेकिन ये लोग हमें ऐसा नहीं करने देते हैं। हर महीने एक बार कम से कम हमारा सामान प्रशासन के लोग उठा ले जाते हैं। 

इसे भी पढ़ें: दिल्ली : क्यों चुनावी मुद्दा नहीं बन रहा गरीबों को सस्ते-किफ़ायती घर का वादा?

देश की राजधानी  दिल्ली में एक बड़ी समस्या रेहड़ी पटरी वालों की भी है, लेकिन यह  कभी किसी भी दल के लिए मुख्य मुद्दा नहीं बनती। कभी-कभार कोई दल इनकी बात करता है। 2014  में  तत्कालीन UPA  की केंद्र सरकार ने रेहड़ी पटरी वालों के संरक्षण के लिए रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून बनाया था। इससे उम्मीद थी कि इनको काम करने में कुछ राहत मिलेगी लेकिन पिछले पांच साल में भाजपा  के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और आम आदमी पार्टी की दिल्ली राज्य की सरकार इसे लागू करने में पूरी तरह से विफल रही है। अभी भी अक्सर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ये देखा जाता है कि पुलिस से लेकर एमसीडी तक इन रेहड़ी पटरी वालों को अपनी जगह से हटा देती है। कभी भी इनके सामान को सड़क पर फैला देती है तो कभी गाड़ियों में भरकर अपने साथ ले जाती है। 

इसे भी पढ़ें: दिल्ली : राजधानी में भी अमानवीय स्थितियों में जीने को मजबूर हैं मज़दूर

निज़ामुद्दीन इलाके में रेहड़ी-पटरियों को उजाड़ने के खिलाफ निज़ामुद्दीन पुलिस स्टेशन पर 6 मई को सीआईटीयू के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। यूनियन नेताओ ने कहा कि दिल्ली में अब तक वेंडिंग ज़ोन्स को चिह्नित कर पाने में दिल्ली सरकार तथा संबंधित एजेंसियाँ विफल रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट सिटी के नाम पर रेहड़ी पटरी वालों से अवैध वसूली तथा उन्हें उजाड़ा जाना बदस्तूर जारी है। 

दिल्ली में 12 मई को सभी सातों लोकसभा सीटों पर मतदान है लेकिन  लगभग  5 लाख रेहड़ी पटरी वाले हैं, इनकी क्या समस्या है, इस पर कोई भी मुख्य राजनीतिक दल बात करता हुआ नहीं दिख रहा है। इसके उलट पिछले कुछ सालों में देखें तो इनकी  रोजी-रोटी छीनने पर  दिल्ली सरकार,भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम एवं नई दिल्ली नगर पालिका परिषद पूरी तरह आमादा  दिखाई पड़ती है।

इसे भी पढ़ें: चुनाव 2019; दिल्ली : बीजेपी को सेलिब्रिटी और कांग्रेस को पुराने चेहरों से आस

एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में 2.50 करोड़ रेहड़ी पटरी वाले हैं। इनकी समस्या को देखते हुए ही पूर्व यूपीए की सरकार में रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण बिल 2013 में तैयार हुआ जिसने 2014 में संसद से पास होकर कानूनी रूप ले लिया। इस कानून के द्वारा रेहड़ी पटरी वालों पर पुलिस व नगर निगमों द्वारा होने वाले अत्याचारों पर भी लगाम लगाने का प्रयास किया गया।

दिल्ली में रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण कानून 2014 को लागू करते हुए निम्न बिन्दुओं पर ज़ोर दिया गया-

1. क्षेत्र की कुल आबादी के 2½% रेहड़ी पटरी वालों को काम करने के सर्टीफिकेट दिए जाएंगे (अनुच्छेद 3(2) )। अर्थात दिल्ली में लगभग 5 लाख रेहड़ी पटरी वालों को कानूनी रूप से अपनी आजीविका कमाने की अनुमति मिलनी चाहिए।

2. टाउन वेंडिंग कमेटी में रेहड़ी पटरी वालों के नुमाइंदों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। (अनुच्छेद 22(2)(b) )

3. टाउन वेंडिंग कमेटी क्षेत्रों का सर्वे करेगी। (अनुच्छेद 3(2) ) अर्थात दिल्ली में जगह चिह्नित करके 5 लाख लोगों को आजीविका कमाने के लिए अनुमति देगी।

4. रेहड़ी पटरी वालों को जब तक चिह्नित जगह नहीं मिल जाती तब तक उनको हटाया नहीं जाएगा। (अनुच्छेद 3(3) )।

 दिल्ली सरकार को इस कानून को छह महीने के भीतर नियम बनाकर एक वर्ष की पॉलिसी बनानी थी लेकिन अभी  तक दिल्ली  सरकार ने रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून को दिल्ली में पूरी तरह से लागू नहीं किया है। जबकि रेहड़ी पटरी वाले गरीब व मजदूरों के वोटों के द्वारा ही दिल्ली में ऐतिहासिक जीत  दर्ज की थी |


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License