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राजनीति
चुनाव 2019 : दिल्ली की आबो-हवा की तरह राजनीति में भी कुछ साफ नहीं
दिल्ली में अभी कुछ भी साफ नहीं है। न बीजेपी के प्रत्याशी घोषित हो रहे हैं न आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन की स्थिति साफ हो रही है।

मुकुंद झा
02 Apr 2019
delhi elaction 2019

पूरे देश में आम चुनावों को लेकर तैयारी तेज़ है। पहले फेज़ का मतदान भी 11 अप्रैल को है, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में अभी तक कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने चुनाव अभियान को लेकर निश्चित नहीं है। हालांकि दिल्ली में छठे चरण 12 मई को चुनाव होने हैं लेकिनअभी किसी भी दल ने चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दिल्ली के दिल में क्या यह समझना बहुत मुश्किल दिख रहा है। 

आप-कांग्रेस में पेच, भाजपा भी भ्रमित!

सिर्फ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के ही  गठबन्धन में ही पेच नहीं फंसा है बल्कि पिछली बार सभी सात सीटें जीतने वाली भाजपा भी इसबार के चुनावो में अपने उम्मीदवार को लेकर बहुत ही भ्रमित लग रही है। 

उसके अंदर भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है वैसे भी दिल्ली भाजपा में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। भाजपा आलाकमान ने सात सीटों के लिए दिल्ली चुनाव समिति द्वारा भेजे गई उम्मीदवारों की सूची को अस्वीकार कर दिया है और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नई सूची भेजने के लिए कहा है। इसको लेकर कई अटकले लगाई जा रही हैं कि कई वर्तमान सांसदों के टिकट काटे जा सकते हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भाजपा हाईकमान दिल्ली भाजपा चुनाव समिति जिसमें 19 सदस्य हैं, उनके भेजे गए प्रस्ताव से नाराज़ है।इस कमेटी ने दिल्ली की सभी सीटों के लिए तीन-तीन नाम का प्रस्ताव भेजा है। कुल 21 नाम भेजे है, लेकिन उसमें ज़्यादातर सदस्य ऐसे हैं जो महासचिव और प्रभारी हैं। इसके आलावा 7 सांसद हैं। इसको लेकर  केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि यदि सभी बड़े नेता लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, तो पार्टी कैसे कार्य करेगी?

 

इसलिए ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि भाजपा का केंद्रीय संसदीय बोर्ड दिल्ली की गुटबाजी से इतना नाराज़ है कि उसने दिल्ली की जिम्मेदारी पूरी तरह से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर डाल दी और वही फैसला करेंगे कि किसे टिकट दिया जाए।

इस पूरे मामले में सबसे चौकाने वाली बात थी कि हाल ही में क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर का नाम दिल्ली चुनाव समिति द्वारा प्रस्तुत सूची में शामिल नहीं किया गया। यह एक ही चौंकाने वाला मामला था क्योंकि भाजपा हाईकमान ने नई दिल्ली सीट के लिए कुछ दिनों पहले गंभीर का पार्टी की ओर से स्वागत किया था और उम्मीद की जा रही थी की वो नयी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन इस मामले को लेकर राज्य नेतृत्व की राय केन्द्रीय नेतृत्व से पूरी तरह भिन्न दिख रही है। दिल्ली में सेलिब्रिटी उम्मीदवारों के नामों पर विचार करने पर भाजपा आलाकमान और दिल्ली पार्टी के नेताओं के बीच भारी असहमति दिख रही है।

दिल्ली भाजपा के कई नेताओं का मानना है कि दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं, ऐसे में अगर वे जीते तो सेलिब्रिटी उम्मीदवार स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अच्छे संबंध नहीं बना पाएंगे। दिल्ली भाजपा नेताओं ने दावा किया कि "लोकसभा टिकट के लिए भाजपा में शामिल होने वाली हस्तियों पर आपत्ति जताई गई थी और टिकट वितरण के दौरान समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए प्राथमिकता की मांग की गई है।

इस बीच, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि पार्टी दिल्ली इकाई को और अधिक सक्रिय रूप से आम लोगों से संपर्क करना चाहिए और नए नामों की पेशकश करनी चाहिए।

दिल्ली में सिख नेताओं और कार्यकर्ताओं में गुस्सा

वही दूसरी तरफ ऐसी भी ख़बरे आ रही है कि भाजपा की दिल्ली इकाई में सिख नेताओं और कार्यकर्ताओं में गुस्सा है क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टी के कामकाज में उनके समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। इस बात को बल तब और मिला जब रविवार को दिल्ली के सात स्थानों पर आयोजित 'मैं भी चौकीदार' कार्यक्रम में शहर के किसी भी प्रमुख सिख नेता की मौजूदगी नहीं दिखी।

दिल्ली भाजपा के लिए सिखों की नाराजगी भारी पड़ सकती है। राजौरी गार्डन, तिलक नगर, जंगपुरा, शाहदरा, जनकपुरी, कालकाजी, हरि नगर और गांधी नगर के लगभग आठ विधानसभा क्षेत्रों में सिखों का महत्वपूर्ण प्रभाव है। 

अकेले चुनाव में उतरने के मूड में दिख रही है कांग्रेस

लोकसभा चुनावों के लिए AAP के साथ अपने संभावित गठबंधन पर अभी भी अटकलों के साथ ही दिल्ली कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी में सभी सात निर्वाचन क्षेत्रों के संभावित उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया में लग गई है।

ऐसी खबरे है की दिल्ली कांग्रेस प्रमुख शीला दीक्षित ने शनिवार रात अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की, जहां 70 से अधिक आवेदकों के एक समूह से राष्ट्रीय राजधानी के सात निर्वाचन क्षेत्रों में से प्रत्येक के लिए दो से तीन उम्मीदवारों को चुना है। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के सदस्य पीसी चाको और केसी वेणुगोपाल भी शामिल थे।

 

“संभावित उम्मीदवारों के तीन नामों को प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया था। स्क्रीनिंग कमेटी की सूची देखने के लिए सोमवार को एक बैठक होनी थी।

हमने दिल्ली में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष देवन्द्र यादव से बात करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने इस पर बात नहीं की इसके आलावा हमने दिल्ली कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओ से भी संपर्क किया। दिल्ली कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दिल्ली के पूर्व सांसद जे.पी. अग्रवाल ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा की वो इस पूरे मामले पर कमेंट नहीं कर सकते है और कहा कि हाईकमान जो भी फैसला करेगा उन्हें वो मंजूर होगा। क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस उन्हें उत्तर पूर्व लोकसभा क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव में उतार सकती है।

लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार,  पूर्व सांसद अजय माकन नई दिल्ली,  पूर्व सांसद कपिल सिब्बल और हारुन यूसुफ (चांदनी चौक के लिए), और जेपी अग्रवाल और पूर्व विधायक मतीन अहमद का नाम शामिल किया गया है। वहीं पूर्वी दिल्ली के लिए संदीप दीक्षित का नाम है।

AAP ने भी अपना चुनाव अभियान शुरू किया

AAP ने काफी कोशिश की दिल्ली में गठबंधन हो जाए लेकिन जब उन्होंने देखा की कांग्रेस इसको लेकर उत्सुक नहीं है तो उन्होंने समय न गंवाते हुए सभी सीटों पर अपने उम्मीद्वार घोषित कर दिए। सभी ने आक्रमक तरीके से चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। दिल्ली में अभी एकमात्र AAP  ही है जिसने अपने उम्मीदिवारों का ऐलान किया है। आतिशी मार्लेना को पूर्वी दिल्ली से चुनाव मैदान में उतारा गया है, जबकि गुग्गन सिंह उत्तर पश्चिमी दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, AAP की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य राघव चड्ढा दक्षिण दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पंकज गुप्ता चांदनी चौक सीट से चुनाव लड़ेंगे। दिलीप पांडे उत्तर-पूर्वी दिल्ली और बृजेश गोयल नई दिल्ली सीटों से चुनाव लड़ेंगे। इसके आलावा वेस्ट दिल्ली से सुनील जाख़ड मैदान में हैं।

गठबंधन पर क्या है पेच?

केजीरवाल और उनकी पार्टी दावा कर रहे हैं वो अपने किये हुए काम के आधार पर दिल्ली में सभी 7 सीट जीत जाएंगे परन्तु हकीकत उन्हें भी पता है ऐसा कर पाना आसान नहीं है, क्योंकि विधानसभा के चुनावों में आप और केजरिवाल की एक आंधी थी जिसमें उन्हें सफलता मिली थी लेकिन अब ऐसा कर पाना संभव नहीं दिख रहा है।

आप और कांग्रेस दोनों पार्टियों का वोट बैंक एक जैसा है। दलितों, अल्पसंख्यकों, झुग्गी बस्तियों और पुनर्वास कालोनियों वाले इलाको में दोनों पार्टी का समर्थन है और इसमें कोई भी विभाजन का मतलब भारतीय जनता पार्टी को सीधी मदद होगी, जो कि बालाकोट हवाई हमलों के बाद अपने राष्ट्रवाद कार्ड से मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है। इसलिए AAP  चाहती थी कि कांग्रेस से गठबंधन हो जाए जिससे चुनाव में किसी भी तरह का रिस्क न हो।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी। कांग्रेस को मालूम है कि AAP  ने उसका वोट बैंक छीना है और अब उसे लग रहा है कि वो धीरे धीरे उसके पास वापस आ रहा है। निगम चुनावो में कांग्रेस के वोट शेयर में वृद्धि हुई भी थी। उसको लगता है कि अगर गठबंधन किया तो ऐसा नहीं हो पाएगा और वो अपना वोट बैंक हमेशा के लिए खो देगी।

ऐसा नहीं है कि पूरी कांग्रेस गठबंधन नहीं चाहती है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस में दो फाड़ हैं।  एक धड़ा गठबंधन के पक्ष में है तो दूसरा इसके खिलाफ।

दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पी सी चाको और अजय माकन कई मौके पर खुलकर गठबंधन के पक्ष में बोल चुके हैं, परन्तु शीला दीक्षित सहित कई नेताओ का मानना है की AAP  से गठबंधन से कांग्रेस को भविष्य में भारी नुकसान होगा। एक कारण यह भी है कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष और केजरीवाल के संबंध कभी भी मधुर नहीं रहे।

कांग्रेस आधिकारिक तौर पर न तो गठबंधन के लिए मना कर रही है न हां। अभी भी गठबंधन की उम्मीद बाकी है “कुछ समय में, चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। आपको कुछ दिनों में इसके बारे में पता चल जाएगा। एक आधिकारिक घोषणा होगी।” ये कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति है।

AICC के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको ने कहा कि AAP के साथ साझेदारी करने पर फैसला लिया जाना बाकी है। “गठबंधन पर निर्णय अभी भी लंबित है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, हम सकारात्मक हैं लेकिन अंतिम निर्णय राहुल जी को करना है।

गठबंधन हुआ तो दिल्ली में भाजपा के लिए मुश्किल

कई जानकारों का मनाना है और पिछले पिछले लोकसभा चुनावों के आंकड़ों से भी पता चलता है कि AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन का परिणाम दिल्ली में भाजपा के लिए एक मुश्किल स्थिति बन सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 46% वोट मिले थे, जबकि AAP को 33% वोट और कांग्रेस को 15% वोट मिले थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन होगा तो वो अपनी और और भी वोटो को खींचेगा, जिसका सीधा नुकसान भाजपा को ही होगा | 

दूसरी और भाजपा  भी यह बात जानती है। इसको लेकर वो भी चिंतित है और वो नहीं चाहती है कि उसके खिलाफ किसी भी तरह का गठबंधन हो, क्योंकि उसकी खुद की भी हालत ठीक नहीं है। वो भी अपने अंतर क्लेश से जूझ रही है। ऐसे में दिल्ली में ये लोकसभा चुनाव बहुत ही रोचक होने की उम्मीद है।

 

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