NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: धर्मांतरण के आरोपों के बीच जौनपुर में डर के माहौल में जी रहा ईसाई समाज
स्थानीय पादरियों के अनुसार पिछले साल सितंबर महीने में जौनपुर में ईसाई समुदाय को निशाना बनाते हुए 12 हमले हुए।
सौरभ शर्मा
09 May 2019
चुनाव 2019: धर्मांतरण के आरोपों के बीच जौनपुर में डर के माहौल में जी रहा ईसाई समाज
सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य: tourmyindia

जौनपुर ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह वाराणसी के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। जौनपुर उन शहरों में से एक है जहां पिछले तीन सालों में धर्म परिवर्तन के आरोपों के चलते अल्पसंख्यकों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है।

हिंदू जागरण मंच की शिकायत के आधार पर सितंबर 2018 में चंदवाक पुलिस स्टेशन में 271 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इनमें से कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में अब भी कई लोग सलाखों के पीछे हैं और अदालत में अपना मुकदमा लड़ रहे हैं।

स्थानीय पादरियों के अनुसार सितंबर महीने में इस शहर में ईसाई समुदाय पर 12 हमले हुए थे। उधर हाल ही में यानी 11 अप्रैल को जमदाहा गांव में इसी तरह के एक हमले की खबर है।

एक पादरी विजय दुर्ग (बदला हुआ नाम) ने कहा, 'हम अपनी प्रार्थना के लिए इस गांव में ही इकट्ठा हुए थे। मऊ, वाराणसी और आपपास के विभिन्न इलाके से ईसाई धर्म को मानने वाले लोग इस प्रार्थना सभा में आए थे। लेकिन, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े लोगों ने हम पर धर्मांतरण करने का आरोप लगाया और हंगामा खड़ा कर दिया।'

उन्होंने कहा कि तुरंत पुलिस को बुलाया गया और ईसाई धर्म के कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जॉन ने कहा कि शाहगंज रेंज के उप-जिला मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा के कार्यालय ने जिला प्रशासन से अनुमति लिए बिना प्रार्थना के आयोजन को लेकर सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी।

पादरी ने आगे कहा, 'क्योंकि हम अल्पसंख्यक हैं। ऐसे में सत्ता की ताकत रखने वाले लोगों के लिए बहुत सॉफ्ट टार्गेट हैं। उनके लिए धर्म परिवर्तन के आरोप लगाना और हमारे धर्म के बारे में झूठ फैलाना बहुत आसान हो जाता है। हमारा धर्म हमें अन्य धर्मों का भी सम्मान करने के लिए कहता है, चाहे वह हिंदू धर्म हो, इस्लाम हो या जो भी धर्म हो। दक्षिणपंथी समूहों ने भी हमारे खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है जिसमें दावा किया गया है कि हम लोगों को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने के लिए जादू करते हैं। लेकिन मुझे बताएं कि क्या किसी को इस सिद्धांत पर वर्तमान समय में विश्वास करना चाहिए।'

दुर्ग विभिन्न अदालतों में धर्मांतरण के कई मामलों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बुलंडीह गांव के एक अन्य पादरी भूपेन राज (बदला हुआ नाम) को भी पुलिस ने इसी तरह के आरोपों में हिरासत में लिया था और बाद में रिहा कर दिया। उन्होंने न्यूज़़क्लिक को बताया, 'दक्षिणपंथी समूह सिर्फ इसलिए हमारे खिलाफ आवाज उठा रहे हैं क्योंकि निम्न जातियों के लोग यीशु में विश्वास करने लगे हैं। इससे उनके लिए हमें निशाना बनाना आसान हो जाता है। वे धर्मांतरण का आरोप लगाते हैं लेकिन यह सच नहीं है। हम धर्मांतरण या अन्य चीजें नहीं करते हैं जो भारतीय कानून के अनुसार गैरकानूनी है।'

जब खोतसराय के सर्किल ऑफिसर अजय कुमार श्रीवास्तव से धर्मांतरण के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'इन आरोपों की जांच चल रही है। यहां आने वाली कुछ महिलाओं ने हमें बताया था कि वे आईं थी क्योंकि उनकी इसमें आस्था है और इसलिए भी आईं क्योंकि वे उन विभिन्न प्रकार की बीमारियों से छुटकारा पाना चाहती थीं जिनसे वे पीड़ित थीं।'

पुलिस अधिकारी ने कहा, 'यह बहुत ही जटिल और एक संवेदनशील मामला है। पिछले कुछ महीनों में मीडिया में असंवेदनशील रिपोर्टिंग के कारण इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। हम पुलिस हैं और हम अभी भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। फिर भी कुछ पत्रकार जो कुछ भी चाहते हैं उसे लिखते हैं।'

आरोपी पादरियों में से एक पादरी की बेटी जूही नरेश (बदला हुआ नाम) ने कहा, 'जियो और हमें जीने दो। हम जानते हैं कि हमारे अधिकार क्या हैं लेकिन कट्टर हिंदू समूहों के ये लोग हमें आजादी से जीने नहीं दे रहे हैं। हम यहां घुटन महसूस करते हैं क्योंकि हम इस डर में हैं कि कभी भी हमारी धार्मिक पहचान को लेकर हम पर हमला किया जा सकता है।'

नरेश अपने पिता और कई अन्य लोगों के मामले को लड़ रही हैं जिन्हें धर्मांतरण के आरोपों में अभियुक्त बनाया गया है। वे कहती हैं, 'मेरे पिता और कई अन्य लोगों को आधी रात के समय जगाया गया और उन्हें पुलिस ने फर्जी आरोप में गिरफ्तार कर लिया। यह हमारे साथ अन्याय है और हम न्याय के लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ेंगे। यह एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और हम जानते हैं कि हमारे अधिकार क्या हैं।'

इस बीच कई फोन कॉल और अनुरोधों के बावजूद दक्षिणपंथी समूहों के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया क्योंकि वे चुनाव प्रचार में व्यस्त थे।

आपको बता दें कि जौनपुर में 12 मई को मतदान होना है।

Jaunpur
Uttar pradesh
elections 2019
Lok Sabha Polls
Conversion row
Christianity
Right-wing organisations
BJP
Yogi Adityanath

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • किताबः ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ के बारे में
    अजय सिंह
    किताबः ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ के बारे में
    10 Sep 2021
    ‘यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा’ की कविताएं राजनीतिक परिपक्वता, गहन संवेदनशीलता, सघन बिंबात्मकता और प्रकृति के साथ लयात्मक व दोस्ताना रिश्ते की वजह से हमारा ध्यान खींचती हैं।
  • Rakesh Tikait
    बादल सरोज
    अल्ला हू अकबर और हर-हर महादेव के युग्म से इतना क्यों डर गए हुक्मरान ?
    10 Sep 2021
    हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई समुदायों की यह साझेदारी तो दिल्ली के सभी तरफ से लगी किसानो की मोर्चेबन्दियों में दिखती है फिर ऐसी क्या ख़ास बात थी कि इसे विशेष रूप से दर्ज किया जाए ?
  • नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    विक्रम शर्मा
    नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    10 Sep 2021
    वर्ष 2000 में तालिबान लड़ाकों ने एक किशोर का अपहरण किया था। जब यूनाइटेड किंगडम में डॉक्टरों की एक टीम ने उसका मानसिक मूल्यांकन किया, तो तालिबान शासन के तहत जीवन की एक परेशान करने वाली तस्वीर उभर कर…
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 34,973 नए मामले, 260 मरीज़ों की मौत
    10 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 3 लाख 90 हज़ार 646 हो गयी है।
  • हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    रौनक छाबड़ा
    हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    10 Sep 2021
    एक अन्य कदम के बतौर 13 से 18 सितंबर के बीच एक जनमत-संग्रह आयोजित किया जाना है, जिसमें देश भर के आयुध कारखानों में मौजूद 76,000 रक्षा कर्मचारियों से केंद्र के कदम के बारे में अपना फैसला व्यक्त करने के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License