NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019 : एक दिल्ली ऐसी भी जिसे सिर्फ़ वोट के समय याद किया जाता है
इसे विडंबना ही कहेंगे कि ऐसे इलाकों में वही लोग बसते हैं जिनके दम पर दिल्ली जैसे शहर की चकाचौंध दिखती है। ये दिल्ली के मेहनतकश मज़दूर हैं जो इन बस्तियों में रहते हैं।
मुकुंद झा
01 May 2019
एक दिल्ली ऐसी भी है जहाँ आज भी पीने का पानी, गंदे पानी की निकासी घोर आभाव

एक दिल्ली ऐसी भी है जहाँ आज भी पीने का पानी, गंदे पानी की निकासी और अन्य मूलभूत  सुविधाओं का घोर आभाव है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि ऐसे इलाकों में वही लोग बसते हैं जिनके दम पर दिल्ली जैसे शहर की चकाचौंध दिखती है। ये दिल्ली के मेहनतकश मज़दूर हैं जो इन बस्तियों में रहते हैं। जो शहर को तो रौशन करते है लेकिन उनकी खुद की जिंदगी अंधकारमय है।

दिल्ली सिर्फ कनॉट प्लेस और नार्थ एवन्यू जैसे इलाके नहीं है, जहाँ अधिकतर मीडिया वाले जाकर बहस करते हैं, बल्कि ये अनाधिकृत  और झुग्गी बस्ती हैं जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। इन बस्तियों में दिल्ली की बहुत बड़ी आबादी रहती है। सीपीआर के मुताबिक इन इलाकों में तकरीबन 50 लाख लोग रहते हैं। 

हर चुनाव  से पहले इनसे हर बार वादे किये जाते हैं और लोग भी इसी उम्मीद में वोट करते हैं कि अबकी बार कुछ बेहतर होगा  लेकिन उनकी हालत चुनाव के बाद जस की तस बनी रहती है। एक बार फिर दिल्ली में चुनाव है। यहां कुल सात लोकसभा सीटों के लिए 12  मई को छठे चरण में वोट डाले जाएंगे।न्यूज़क्लिक की टीम ने कई अनाधिकृत कालोनी का दौरा किया और जानने की कोशिश की कि उनके मुद्दे क्या हैं और चुनाव को लेकर वे किस प्रकार से सोच रहे हैं। सरकार की नीतियों से उनकी ज़िंदगी  किस तरह से प्रभावित हो रही है। 

GOVIND.jpg

पूर्वी दिल्ली के झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र के पास सोनिया कैंप के इलाके में  तक़रीबन 52 वर्षीय गोविंद हमें मिले। गोविंद आज से तकरीबन 7  साल पहले  ट्रक ड्राइवर थे लेकिन उनका साल 2012 में पेट का ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद से उनकी एक किडनी फेल हो गई और वो कोई भारी काम नहीं कर सकते थे। इसके साथ ही उनकी आँखों की रोशनी काम हो गई है| इसके बाद भी आज वो छोटी गाड़ी चलाते हैं,  हमने उनसे बात  की, पूछा कि वो अपना इलाज क्यों नहींकराते हैं, तो उनका जवाब था कि  “अगर मैं अपना इलाज कराउंगा तो  मेरा परिवार कैसे चलेगा।” क्योंकि सरकारी अस्पताल में जल्दी इलाज होता नहीं और प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की स्थिति नहीं है, क्योंकि चार लोगों का परिवार है और मैं  अकेला कमाने वाला हूँ। 

इसे भी देखे;- 'आप' की आतिशी को पूरा भरोसा है कि गंभीर का नामांकन रद्द होगा!

 

गोविंद की ये जो हालत है वो सिर्फ उनकी नहीं है ऐसी कई कहानियां इन बस्तियों में हैं और इस सबकी वजह  सरकार का इनके प्रति उदासीन रैवया है। 

पूर्वी दिल्ली के ही एक अन्य इलाके सीमापुरी का हाल भी कुछ बेहतर नहीं है। वहां रह रहे लोगों ने बताया कि आज से तकरीबन 40  साल पहले दिल्ली के कई इलाकों से लोगों को उजाड़कर इस  इलाके में बसाया गया था लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद आज भी यहाँ पीने के पानी से लेकर गंदे पानी की निकासी और सफाई का कोई इंतज़ाम नहीं है। बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याएं यहां बनी हुई हैं। इसके अलावा इस इलाके में कानून व्यवस्था एक गंभीर सवाल है।

सीमापुरी के आरडब्लूए (RWA) के सचिव ने न्यूज़क्लिक  से बात करते हुए बताया कि अबतक की सभी सरकारों ने हमारे साथ वादाखिलाफी की। यहां तक की पिछले चुनावों में हमने आम आदमी पार्टी को बड़ी उम्मीद से समर्थन किया था, लेकिन उन्होंने भी हमारे साथ वही किया जो पिछली सरकारों ने किया था।आज भी हम गंदा पानी पीने को मज़बूर हैं। 

EAST DELHI 1.jpg

भलस्वा डेयरी में एक व्यापारी दीपक, भारतीय जनता पार्टी के स्वच्छ भारत मिशन के बारे में बात करते हैं। उनका कहना है कि “क्या यह स्वच्छ भारत है?हम वर्षों से कर का भुगतान कर रहे हैं। अभी भी हम एमसीडी कर्मचारियों के बारे में सुनते हैं कि उन्हें उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है?" उनका आगे तर्क है कि इन क्षेत्रों में अंधाधुंध निर्माण एक गंभीर चुनौती है और इसीलिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए नियमितीकरण किया जाना चाहिए।

संसदीय क्षेत्र उत्तर पूर्वी दिल्ली की करावल नगर विधानसभा जो भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का संसदीय क्षेत्र है, इस क्षेत्र में भी जीवन जीने के लिए जो भी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए वो भी नहीं हैं। लोगों का कहना है कि चाहे  वो पीने का पानी हो या सीवर, लाखों लाख की आबादी पर स्कूल है, इस पूरे क्षेत्र में एक भी अस्पताल तो छोड़िए एक भी  ठीक सा स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। ऐसे में सांसद महोदय ने अपनी संसद निधि का धन भी खर्च नहीं किया। वो पांच साल तक अन्य काम करने से चर्चा में रहे लेकिन इलाके से गायब रहे।

इस पूरे इलाके में उनके खिलाफ भारी नारजगी दिखी। भाजपा केवल राष्ट्रवाद के नाम पर अपने नकामी छुपा रही है। राजकुमार जो एक शिक्षक हैं, उन्होंने कहा कि पिछली बार तो मोदी के नाम पर जीत गए लेकिन इस बार उनके काम पर सवाल होगा। उनसे जवाब लिए बिना लोग उन्हें छोड़ेंगे नहीं। 

                                                                            
इसे भी पढ़े:- दिल्ली : राजधानी में भी अमानवीय स्थितियों में जीने को मजबूर हैं मज़दूर

 

इन जितने भी  इलाकों हमने दौरा किया उनमें कुछ समस्याएं तो एक जैसी थी, जैसे पिछले कुछ समय में दिल्ली सरकार ने सार्वजानिक वितरण प्रणाली के सुधार के लिए कई नए सेंटर खोले जिससे लोगों को फायदा पहुंचना था लेकिन यही लोगों के लिए समस्या का कारण बन गए हैं क्योंकि लोगों की राशन दुकनों को बहुत दूर दूर भेज दिया गया है, जिससे उन्हें राशन लेने भारी दिक्क्त होती है। इसके अलावा ये राशन की दुकानें महीने के शुरुआती कुछ दिन ही खुलती हैं जिससे काफी लोगों इससे बाहर रह जाते हैं।

एक दूसरी सबसे बड़ी समस्या जो लोगों ने बताई कि पिछले दो तीन साल से पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि दिल्ली में लगतार भू-जल स्तर में गिरावट आई है जिससे हैंड पंप से पानी आना बंद हो गया। इन क्षेत्रों में पानी का प्राथमिक स्रोत हैंडपंप ही है क्योंकि अभी तक इन क्षेत्रों में जल बोर्ड का सप्लाई वाला पानी नहीं पहुंचा है। ऐसे अब लोग मज़बूरी में आकर सबमर्सिबल लगा रहे हैं जो क़ानूनी रूप से गलत है लेकिन इनके पास कोई और चारा भी नहीं है। मीना जो झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में रहती हैं उन्होंने कहा कि वो दो से चार लोग मिलाकर सबमर्सिबल लगवाते है क्योंकि इसकी लागत 20 हज़ार से अधिक है। इसके साथ ही ये लगवाने के लिए पुलिस भी हम से मोटी राशि वसूलती है। 

ज़मीन का मालिकाना हक़ 

अनाधिकृत कालोनियों में जमीन पर मालिकाना हक की अभी भी लड़ाई  है। कई रिपोर्टों से पता चलता है कि लोग यहाँ अपनी  संपत्ति के बदले  ऋण नहीं ले सकते हैं और इन इलाकों के नियमितीकरण को लेकर लंबी बहस होती रही है लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं हुआ है। 

अनाधिकृत कालोनियों में मुख्य रूप से कृषि भूमि पर स्थानीय ज़मीदारों और सरकारी भूमि का स्वामित्व है। इन इलाकों के नियमितीकरण में अंधाधुंध निर्माण एक बड़ी समस्या बन गया है। इस तरह की एक समस्या से निपटने के लिए सुझाव दिया गया था कि पचास प्रतिशत खुले क्षेत्र को आगे के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। परन्तु इसको लेकर  भूमि मालिकों को इस पर आपत्ति रही है। केंद्र सरकार ने अनाधिकृत कालोनियों को नियमितीकारण में अड़चन को हल करने के लिए 10  सदस्यी पैनल नियुक्त किया है लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि चुनाव से पहले एक बार फिर इन लोगों को लालीपॉप थमाने जैसा है।

इसे भी देखे;- चुनाव 2019: कहां है विकास?

Delhi
2019 आम चुनाव
General elections2019
lok sabha election
AAP
BJP
Congress
water crises
education
health care facilities
unauthorized colony in delhi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    ओये किसान, तू तो बड़ा चीटिंगबाज़ निकला!
    27 Nov 2021
    कटाक्ष: बेचारे मोदी जी को साल भर, जी हां पूरे साल भर, इसके सब्ज़बाग़ दिखाए कि बस, तीन कानूनों की वापसी की ही बात है। तीन कानून बस। इधर कानून वापस हुए और उधर बार्डर खाली, लेकिन...
  •  Prayagraj murder and rape case
    सोनिया यादव
    यूपी: प्रयागराज हत्या और बलात्कार कांड ने प्रदेश में दलितों-महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठाए सवाल!
    27 Nov 2021
    इस घटना के बाद एक बार विपक्ष खस्ता कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं सरकार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। हालांकि राज्य में एक के बाद एक घटित हो रही ऐसी घटनाएं सरकार के '…
  • ncrt
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए NCERT वेबसाइट पर डाली गई शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटाया गया, LGBTQ+ समूहों ने किया विरोध
    27 Nov 2021
    700 से ज़्यादा लोगों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजा गया।
  • farming
    डॉ. ज्ञान सिंह
    किसानों की बदहाली दूर करने के लिए ढेर सारे जायज कदम उठाने होंगे! 
    27 Nov 2021
    केवल 3 कृषि कानूनों को वापस ले लेने से ही छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों की दुर्दशा में सुधार नहीं होने जा रहा है। भारी कर्ज और बेहद गरीबी में जी रहे किसानों की भलाई के लिए ढेर सारे…
  • poverty
    भरत डोगरा
    डेटा: ग़रीबी कम करने में नाकाम उच्च विकास दर
    27 Nov 2021
    सरकार को असमानता को कम करना चाहिए और जीडीपी विकास दर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं करना चाहिए। ग़रीबों को कोने में धकेलते हुए उनकी क़ीमत पर, आय और पूंजी को चंद मुट्ठियों में जमा किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License