NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: जहानाबाद दलित नरसंहार के दो दशक बाद भी परिजनों को न्याय का इंतज़ार
पटना हाईकोर्ट द्वारा उच्च जातियों के सभी आरोपियों को बरी करना इस लोकसभा चुनावों में बाथे-लक्ष्मणपुर गांव का सबसे अहम मुद्दा होगा।
मोहम्मद इमरान खान
06 Apr 2019
laxmanpur bathe

बाथे (अरवल/बिहार): लक्ष्मण राजवंशी, सुबेदार राम, विनोद पासवान, सिकंदर चौधरी, मनोज कुमार और परबतिया देवी के लिए केवल एक मुद्दा ही इस लोकसभा चुनाव में पार्टी या नेता को समर्थन करने या वोट देने के लिए उनकी प्राथमिकता को तय करेगा। वह मुद्दा ये होगा कि वर्ष 1997 में हुए लक्ष्मणपुर-बाथे नरंसहार के 26 आरोपियों को सजा दिलाने का वादा कौन करता है। इस नरसंहार में 58 दलितों की हत्या कर दी गई थी। पटना हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए इन आरोपियों को बरी कर दिया है।

ये छह लोग उन 58 दलितों के संबंधी हैं जिनका नरसंहार वर्ष 1997 में बिहार के तत्कालीन जहानाबाद ज़िले के लक्ष्मणपुर-बाथे गांव में उच्च जाति के रणवीर सेना द्वारा कथित तौर पर किया गया था। मारे गए दलितों में 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। अरवल बिहार के जहानाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।

बिहार में चुनावी माहौल गरमाने के साथ सोन नदी के किनारे बसे गांव लक्ष्मणपुर-बाथे के दलित और पिछड़ी जाति के ग्रामीण केवल आरोपियों को सजा दिलाना चाहते हैं। पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि सभी आरोपियों को बरी करने से उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया गया कि ग़रीबों को कभी न्याय नहीं मिलेगा।

सत्तर की उम्र को पार कर चुके लक्ष्मण राजवंशी अपने घर के पास एक पेड़ के नीचे बैठे हुए कहते हैं "सजा होना चाहिए"। इसी स्थान पर 22 साल पहले उनके परिवार के तीन सदस्य पत्नी, बहु और पोती की दिसंबर महीने में रात के समय हत्या कर दी गई थी।

lax_0.png

लक्ष्मण राजवंशी

लक्ष्मण इस घटना के मुख्य गवाहों में से एक हैं। उन्होंने न्यूज़़क्लिक को बताया कि सुप्रीम कोर्ट से अभियुक्तों को सख़्त सजा मिलनी चाहिए ताकि "हमें न्याय मिले और सिस्टम पर हमारा भरोसा बढ़े।"

उन्होंने कहा, “यदि आरोपियों को दंडित नहीं किया जाता है तो यह हमारे जैसे ग़रीब, वंचित और हाशिये पर मौजूद लोगों का न्याय पर गंभीर सवाल उठाना लाजमी है। यह अभियुक्तों की उन बातों को सही साबित करेगा कि इतने लोगों को मारने के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया जाएगा। अभियुक्तों का बरी होना एक अन्याय था।

लक्ष्मण ने बताया कि विकास या किसी अन्य मुद्दे से ज्यादा उनके लिए आरोपियों को सजा मिलना मायने रखता है। “हमें कहा गया कि बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) और उसके सहयोगी जेडी-यू (जनता दल-यूनाइटेड) ने आरोपियों की मदद की। हमें ऐसी पार्टी को वोट क्यों देना चाहिए जो रणवीर सेना से सहानुभूति रखती है।”

उन्होंने इस मुद्दे पर बीजेपी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आरोपियों को सज़ा दिलाने के लिए पिछले पांच वर्षों में कुछ भी नहीं किया क्योंकि वे भूमिहार जाति के हैं जो इसका समर्थन करते हैं।" वे कहते हैं कि वह मरना पसंद करेंगे लेकिन आरोपी को सजा दिलाने की अपनी लड़ाई से समझौता नहीं करेंगे।

लक्ष्मण ने कहा, “मैं लगातार बोलता रहूंगा, आवाज उठाता रहूंगा और आरोपियों के ख़िलाफ़ खड़ा रहूंगा…। मैं अपनी ज़िंदगी से नहीं डरता हूं। कुछ आरोपियों ने मुझसे संपर्क किया और मुझे गवाह से मुकरने के लिए 50 लाख रुपये देने की पेशकश की लेकिन मैंने मना कर दिया।”

एक अन्य ग्रामीण सूबेदार राम जिनके पांच क़रीबी रिश्तेदार मां, भाई, भाभी और दो भतीजे मारे गए लोगों में शामिल थें। उन्होंने कहा कि वह अभियुक्तों के लिए मौत की सजा चाहते थे। उन्होंने कहा, "उन्हें मौत की सजा दी जानी चाहिए या कम से कम उम्रकैद होनी चाहिए।"

su_0.png

सुबेदार राम

सुबेदार (50 वर्ष) कहते हैं बरी होने के बाद अभियुक्त (इनमें से ज्यादातर का संबंध उच्च जाति भूमिहार समुदाय से है जो दबंग किस्म के हैं) हमें सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर धमकी दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे (आरोपी) खुले तौर पर कहते हैं कि दर्जनों लोगों को मारने के बाद भी उनका कुछ नहीं हुआ है।" सुबेदार कहते हैं, "हम उस पार्टी का समर्थन करेंगे और उनको वोट करेंगे जिसने आरोपियों को बरी करने के ख़िलाफ़ विरोध किया था।"

सुबेदार को विनोद पासवान और उनकी पत्नी सुनैना देवी का समर्थन था जिन्होंने इस नरसंहार में अपने परिवार के सात सदस्यों को गंवा दिया था। मृतकों की याद में एक लाल रंग का स्मारक पासवान के घर के सामने खड़ा है।

उन्होंने कहा, “अदालत ने हमें निराश किया है। हमने आरोपियों के लिए मौत की सजा की उम्मीद की थी लेकिन अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।

सिकंदर चौधरी के परिवार के नौ लोग भी मारे गए थे। वे कहते हैं, “मेरे परिवार ने सबसे अधिक लोगों को गंवाया। लेकिन अभी भी आरोपी आज़ाद हैं। यह हमारे गहरे घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

न सिर्फ प्रभावित परिवार बल्कि 1990 के दशक से इस गांव में एल्युमीनियम के बर्तन बेचने वाले ने भी कहा कि अभियुक्तों को सज़ा मिलना ज़रूरी था।

बगल के गांव के राम बाली प्रसाद ने कहा, "इन ग़रीबों को अपने क़रीबी रिश्तेदारों के खून के लिए न्याय मिलना चाहिए।"

विमलेश राजवंशी ने कहा कि जब यह नरसंहार हुआ था तब वह मुश्किल से 8-10 साल के थे। वे कहते हैं, “मेरे परिवार के पांच सदस्य पिता, दो भाई और दो भाभी इस नरसंहार में मारे गए। मैं परिवार का अकेला सदस्य था जो गोली लगने के बावजूद बच गया था।” वे अपने गाल पर लगे गोली का निशान दिखाते हुए घटना के बारे में बताते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं एक ग़रीब आदमी हूं जो आजीविका के लिए खेत में मज़दूरी का काम कर रहा है। मैं चाहता हूं आरोपी सलाखों के पीछे जाएं न कि सड़कों पर आज़ाद घूमे।”

इसी तरह मनोज कुमार 3 साल के थे जब उनकी मां, भाई और बहन की हत्या की गई थी। उन्होंने कहा कि उस अंधेरी रात में ज़ोर ज़ोर से चीखने और चिल्लाने की आवाज के अलावा उन्हें कुछ भी याद नहीं था। खेत में मज़दूरी करने वाले मनोज का कहना है, "मैं चाहता हूं कि उन्हें भारी सजा मिले।"

manoj_0.png

मनोज कुमार

परबतिया देवी ने भी इस घटना में अपने परिवार के तीन सदस्यों को गंवा दिया। वह कहती हैं, उनका पोता उस समय केवल छह महीने का था, अब वह युवा हो गया है लेकिन बेरोज़गार है। वह कभी कभी खेत में मज़दूरी का काम करता है जिससे रोज़ाना 250 रुपये मिलते हैं। वे कहती हैं, "नाबालिग बेटी के साथ मेरे बेटे और बहू को मार दिया गया, लेकिन मेरे पोते को वादे के मुताबिक़ अभी तक सरकारी नौकरी नहीं मिली है।"

इन सभी लोग का संबंध समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों में से था। इन सभी का कहना है कि आरोपियों के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा उचित धारा न लगाने के कारण उन्हें बरी कर दिया गया।

वे बताते हैं कि अप्रैल 2010 में ग्रामीणों में खुशी थी जब पटना सिविल कोर्ट के अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश द्वारा 16 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई थी और 10 आरोपियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी। हालांकि अदालत ने 19 लोगों को बरी कर दिया था।

पासवान ने कहा, "गांव में एक उत्सव का माहौल था क्योंकि इस फैसले से हमें न्याय की उम्मीद थी। अब उच्च न्यायालय द्वारा इन सभी को बरी किए जाने के बाद हमें अब न्याय पर संदेह हैं।"


इस नरसंहार के बाद लक्ष्मणपुर-बाथे के इस इलाक़े में पिछले दो दशकों में निःसंदेह बदलाव हुआ है। मिट्टी और फूस के घरों को ईंट-कंक्रीट (पक्का) घरों से बदल दिया गया है। इस चौंकाने वाले नरसंहार के तुरंत बाद गांव को जोड़ने के लिए सड़कों का निर्माण किया गया था लेकिन इस इलाक़े की संकीर्ण गलियों में अभी भी सड़कें नहीं हैं। सूबेदार ने कहा "महज छह-सात महीने पहले गांव में बिजली आई है।"

ग्रामीणों के अनुसार इस नरसंहार पीड़ितों के परिजनों में से लगभग एक दर्जन लोगों को ही सरकारी नौकरी और क्षतिपूर्ति मिली जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई।

लक्ष्मण ने कहा, "हमने कृषि भूमि ख़रीदी और अपने पैसे से घर का निर्माण किया।" गांव में इसी तरह के बदलाव दिखाई दे रहे थे। जैसे कुछ युवा नए मॉडल के दोपहिया वाहन चला रहे हैं और कुछ घरों से टीवी की आवाज़ आ रही है।

1 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना से संबंधित उच्च जाति के लोगों ने कथित रूप से 58 दलितों की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था जो जातिगत दुश्मनी से पैदा हुए थे। इस नरसंहार के लगभग 11 साल बाद 23 दिसंबर 2008 को 44 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए।

राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली तत्कालीन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सरकार ने रणवीर सेना की राजनीतिक कड़ियों की जांच के लिए अमीर दास आयोग का गठन किया था। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ गठबंधन में वर्ष 2006 में सत्ता में आने के बाद आयोग को भंग कर दिया था।

राजद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्स-लेनिन) सहित विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि नीतीश सरकार रणवीर सेना के हितों की रक्षा कर रही थी और ग़रीबों की आवाज़ को दबा रही थी।

यह एकमात्र मामला नहीं है जिसमें बिहार में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले ने इस नरसंहार के पीड़ितों के परिवारों को झटका दिया है। वर्ष 2012 में पटना उच्च न्यायालय ने 1996 के बथानी टोला नरसंहार में शामिल 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस नरसंहरा में 21 लोग मारे गए थें जिसमें ज़्यादातर दलित और मुस्लिम थें। भोजपुर जिले में रणवीर सेना ने इस घटना को अंजाम दिया था।

बाद में पटना उच्च न्यायालय ने नागरी बाज़ार नरसंहार के 11 आरोपी को बरी कर दिया। इस घटना में 10 सीपीआई (एमएल) समर्थक जिसमें ज्यादातर दलित थें मारे गए। ये नरसंहार वर्ष 1998 में भोजपुर जिले में हुआ था।  

  
 

laxmanpur bathe massacre
dalit massacre
2019 general election
losbha chunav
jehanabad in bihar
bihar massacre

Related Stories

यूपी में भीड़ हिंसा के शिकार क़ासिम को नहीं मिला इंसाफ़


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: RSS और PFI की दुश्मनी के चलते पिछले 6 महीने में 5 लोगों ने गंवाई जान
    23 Apr 2022
    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हत्याओं और राज्य में सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने की कोशिशों की निंदा की है। उन्होंने जनता से उन ताकतों को "अलग-थलग करने की अपील की है, जिन्होंने सांप्रदायिक…
  • राजेंद्र शर्मा
    फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!
    23 Apr 2022
    कटाक्ष: इन विरोधियों को तो मोदी राज बुलडोज़र चलाए, तो आपत्ति है। कोर्स से कवियों को हटाए तब भी आपत्ति। तेल का दाम बढ़ाए, तब भी आपत्ति। पुराने भारत के उद्योगों को बेच-बेचकर खाए तो भी आपत्ति है…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लापरवाही की खुराकः बिहार में अलग-अलग जगह पर सैकड़ों बच्चे हुए बीमार
    23 Apr 2022
    बच्चों को दवा की खुराक देने में लापरवाही के चलते बीमार होने की खबरें बिहार के भागलपुर समेत अन्य जगहों से आई हैं जिसमें मुंगेर, बेगूसराय और सीवन शामिल हैं।
  • डेविड वोरहोल्ट
    विंबलडन: रूसी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध ग़लत व्यक्तियों को युद्ध की सज़ा देने जैसा है! 
    23 Apr 2022
    विंबलडन ने घोषणा की है कि रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को इस साल खेल से बाहर रखा जाएगा। 
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रशांत किशोर को लेकर मच रहा शोर और उसकी हक़ीक़त
    23 Apr 2022
    एक ऐसे वक्त जबकि देश संवैधानिक मूल्यों, बहुलवाद और अपने सेकुलर चरित्र की रक्षा के लिए जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी को अपनी विरासत का स्मरण करते हुए देश की मूल तासीर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License