NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019; जम्मू-कश्मीर: मतदान को लेकर कश्मीर में निराशा रही, जम्मू में उत्साह
घाटी में अस्थिरता की स्थिति के प्रतिकूल संसदीय चुनाव कराए गए और अलगाववादियों तथा अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर कार्यवाही तेज़ किए गए।
सागरिका किस्सू
10 May 2019
चुनाव 2019; जम्मू-कश्मीर

हिंसा की छिटपुट घटनाओं, बड़े पैमाने पर सुरक्षा के इतंज़ाम और चुनाव के बहिष्कार के आह्वान के बीच जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव 6 मई को संपन्न हो गया। हालांकि जम्मू और लद्दाख में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखी गई जबकि कश्मीर घाटी में पिछले कुछ दशकों में सबसे ख़राब मतदान हुआ।

जम्मू-कश्मीर में चुनाव के संबंध में मामला तब सुर्खियों में आया जब चुनाव आयोग ने पाया कि घाटी में सुरक्षा कारणों के चलते संसदीय चुनाव कराने के लिए माहौल अनुकूल है जबकि विधानसभा चुनाव के लिए अनुकूल नहीं है। हालांकि क्षेत्रीय राजनीतिक दल जैसे पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ़्रेंस (एनसी), पीपल्स कॉन्फ़्रेंस (पीसी) और अन्य पार्टियों ने इस फ़ैसले की मुखर आलोचना की थी जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसका स्वागत किया था।

बीजेपी-पीडीपी सरकार गिर जाने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया था और बाद में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। फिर भी घाटी में विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर में अस्थिरता की स्थिति के प्रतिकूल संसदीय चुनाव कराए गए तथा अलगाववादियों और अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर कार्यवाही तेज़ हुई।

हालांकि राज्य में 2014 में 49.52% की तुलना में कुल 44.51% मतदान हुआ। इस बार सबसे ज़्यादा मतदान जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों में हुआ। जम्मू-कश्मीर में 22 ज़िले हैं जिनमें जम्मू डिवीज़न और कश्मीर डिवीज़न में 10-10 ज़िले हैं जबकि लद्दाख क्षेत्र में कारगिल और लेह में दो ज़िले हैं।

कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में मतदान कम हुए क्योंकि अधिकांश मतदान केंद्रों पर मतदाता नहीं पहुँचे। घाटी में 2002 के बाद इस वर्ष मतदान सबसे कम हुआ। मतदान प्रतिशत में आई गिरावट पर एक नज़र डालें:

jk 1.jpg

अनंतनाग संसदीय सीट में तीन चरणों में चुनाव में हुआ जिसमें चार अशांत ज़िले अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां और पुलवामा शामिल हैं। दक्षिण कश्मीर में चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों पर ग्रेनेड हमलों की दो घटनाएँ हुईं।

2jk.jpg

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलगाववादी समूहों और उग्रवादी समूहों द्वारा चुनावों के बहिष्कार का आह्वान करने और हालिया घटनाक्रम के चलते मतदान में कमी दर्ज की गई। हालांकि चुनावों को लेकर इस तरह के मामले कोई नए नहीं हैं।

पिछले चार वर्षों में स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ा है। राज्य के स्थायी निवासियों को अधिकार प्रदान करने वाले अनुच्छेद 35ए को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है। राजनीतिक विश्लेषक कम मतदान होने की वजह कश्मीर में स्थिति से निपटने के लिए बीजेपी द्वारा किए जाने वाले बलों के प्रयोग को मानते हैं।

जम्मू

जम्मू में स्थिति पूरी तरह से विपरीत थी। जम्मू संसदीय क्षेत्र में न केवल मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई बल्कि इस क्षेत्र में सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुक़ाबला देखा गया। नेशनल कॉन्फ़्रेंस और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों द्वारा जम्मू के इन दो संसदीय सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारने के फ़ैसले से आमने-सामने की लड़ाई का रास्ता खुला।

हालांकि बीजेपी का लक्ष्य इस चुनाव में दोनों सीटों को अपने हाथों में ही रखना है लेकिन मतदाता पिछले पाँच वर्षों में इसके काम से ख़ुश नहीं दिखाई देते हैं।

jk 3.jpg

हालांकि ऊधमपुर संसदीय सीट पर मतदान में थोड़ी गिरावट देखी गई। ये मामूली कमी दो ज़िलों किश्तवाड़ और चिनाब घाटी में देखी गई। हाल ही में किश्तवाड़ में हिंसा के एक मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एक कार्यकर्ता मारा गया था। वहीं दूसरी तरफ़ विशेषज्ञ डोडा और चिनाब घाटी ज़िले के मतदाताओं के मोहभंग होने की बात करते हैं।

jk 4.jpg

लद्दाख

लद्दाख संसदीय सीट के दो ज़िले लेह और कारगिल में 63.07% मतदान हुआ। कारगिल ज़िले में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदान किया। जैसा कि न्यूज़क्लिक ने पहले की रिपोर्ट में बताया था कि कारगिल के अधिकांश निवासियों ने क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का बहिष्कार किया था और स्वतंत्र उम्मीदवार को मतदान करना चाहते थे। लद्दाख संसदीय सीट के चुनाव विवादों में घिर गए थे क्योंकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए लेह के पत्रकारों को रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप था।


इस बार लद्दाख में निर्दलीय उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों मुख्य रूप से बीजेपी के बीच मुक़ाबला देखा गया। पीडीपी और एनसी ने पूर्व पत्रकार सज्जाद हुसैन का खुलकर समर्थन किया जो कारगिल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे।

jk 5.jpg

Jammu division
Kashmir division
ladakh
Jammu and Kashmir
BJP
PDP
NC
election 2019

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुस्लिम महिलाओं की 'नीलामी' का मामला, कोविड के तेज़ी से बढ़ते मामले और अन्य ख़बरें
    03 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन 'नीलामी', कोविड के बढ़ते मामले और अन्य ख़बरों पर।
  • Bulli bai
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुस्लिम महिलाओं के अपमान पर पीएम मोदी खामोश क्यों ?
    03 Jan 2022
    न्यूज़चक्र में आज वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा मुद्दा उठा रहे है एक वेबसाइट के ज़रिए एक खास अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को किस तरह निशाना बनाया जा रहा है और कैसे यह उसी सांप्रदायिक माहौल का हिस्सा है…
  • Jaipal Singh Munda
    डॉ. जितेन्द्र मीना
    जयपाल सिंह मुंडा: आदिवासी समाज की राजनीति और विचारधारा की प्राणवायु
    03 Jan 2022
    मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा भारतीय इतिहास के एकमात्र ऐसे जन-बुद्धिजीवी और राष्ट्रीय राजनेता हैं जिन्होंने भारतीय और आदिवासी अस्मिता, हक-हुकूक पर अंग्रेजों के साथ-साथ गैर-आदिवासियों के हमलों से बचाने…
  • covid
    भाषा
    कोविड-19: देश में 15 से 18 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों का टीकाकरण शुरू
    03 Jan 2022
    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने रविवार को कहा था कि 15 से 18 आयु समूह के किशोरों के टीकाकरण के दौरान कोविड-19 रोधी टीकों में घालमेल से बचने के लिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को…
  • Enough is Enough
    असद रिज़वी
    बुलीबाई ऐप मामला: स्वतंत्र आवाज़ों को बनाया जा रहा है निशाना
    03 Jan 2022
    संगठित तौर से उन मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया गया है जो राजनीति और पत्रकारिता आदि में सक्रिय हैं और समय-समय पर सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License