NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: किसान संसद का 'किसान-विरोधी दलों' को सत्ता से बाहर करने का आह्वान
किसानों की समस्या पर एआईकेएस के अशोक धावले ने कहा, “कांग्रेस की कृषि सुधारों और आर्थिक नीति ने किसानों को प्रभावित किया है। बीजेपी भी कांग्रेस की नीति को ही अपना रही है।”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Apr 2019
kisan

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को वायनाड संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से ये क्षेत्र राजनीतिक लड़ाई का गढ़ बन गया है। गुरुवार को वायनाड के विभिन्न हिस्सों से हज़ारों किसान पलपल्ली पहुंचे, यहां बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्याएं की थी। बड़ी संख्या में आए किसान यहां 'किसान संसद' में शामिल हुए। इसका आयोजन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) उम्मीदवार पीपी सुनीर के चुनाव प्रचार के साथ किया गया।

कॉर्पोरेट को सहायता करने वाली किसान विरोधी नवउदारवादी नीतियों के बजाय किसान समर्थित नीतियों की मांग के साथ 'किसान संसद' के बाद एक विशाल रैली निकाली गई। ये किसान रैली वर्ष 1991 की आर्थिक उदारीकरण के बाद से किसानों की समस्या को उजागर करने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ द्वारा निकाली गई।

इस 'किसान संसद' का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष अशोक धावले, एआईकेएस के संयुक्त सचिव विजू कृष्णन, प्रख्यात पत्रकार पी साईनाथ,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्य सचिव कनम राजेंद्रन, एआईकेएस के वित्त सचिव पी कृष्ण प्रसाद ने की और अन्य वामपंथी नेताओं ने पाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए और बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार दोनों ने भारतीय किसानों के संकट को बढ़ाया है।

धावले ने कहा, “कांग्रेस की कृषि सुधारों और आर्थिक नीतियों ने किसानों को प्रभावित किया है। बीजेपी कांग्रेस की नीति को अपना रही है।"

किसान संसद द्वारा पारित किए गए संकल्प में कहा गया, “केवल वाम लोकतांत्रिक शक्तियां ही वैकल्पिक नीति लागू कर सकती हैं जो नव-उदारवादी नीतियों का विरोध करती है। ये गहराते कृषि संकट का समाधान ढूंढती हैं। ऐसे उद्योग होने चाहिए जो किसानों और श्रमिकों के नियंत्रण में हों और यह कॉर्पोरेट्स और बिचौलियों के शोषण के बिना किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में सहायक हों।”

धावले ने कहा, किसानों के राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट पिछले 16 वर्षों से संसद में अटका था और इस दौरान की सरकारों को किसानों की दुर्दशा पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका।

जब एनडीए और यूपीए दोनों उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित एमएस स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने में विफल रही हैं तो ऐसे में वामपंथी दलों ने अपने घोषणा पत्र में इसको शामिल किया है। इसलिए इस संसद ने किसानों से ऐसी सरकार का चुनाव करने का आग्रह किया जो किसानों की आत्महत्याओं और कृषि संकट को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हो।

आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र (एआईएफटीए) के तहत टैरिफ में कटौती और इसके निष्कासन ने किसानों के घरेलू बाजारों को बाधित करने के साथ-साथ उनके सौदे करने की शक्ति को कम कर दिया जिससे घरेलू क़ीमतों में कमी आई क्योंकि कृषि और इससे संबंधित अर्ध-प्रसंस्कृत (और प्रसंस्कृत) उत्पादों की आपूर्ति बढ़ा दी गई है।

उदाहरण के लिए यद्यपि वियतनाम के बाद भारत काली मिर्च का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। वियतनाम और श्रीलंका से सस्ते और कम गुणवत्ता वाले काली मिर्च के आयात से घरेलू बाज़ार में काली मिर्च की कीमतों में गिरावट आई है।

वायनाड के काली मिर्च की उपज करने वाले किसान ने कहा, "एक समय था जब हमें 750 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक काली मिर्च की क़ीमत मिलती थी और बाद में कीमतें गिरनी शुरू हुईं।" धावले ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में क़ीमतों में काफी गिरावट आई है।

केरल में वायनाड के बड़े क्षेत्र में काली मिर्च उत्पादन होता है। एक बार काली मिर्च की कीमतों में भारी गिरावट शुरू हो गई थी तो विशेष रूप से पलपल्ली ज़िला किसानों के कब्रिस्तान में बदल गया था। वायनाड की 80% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है और कृषि संकट ने इनमें से ज़्यादातर लोगों की आजीविका को भी प्रभावित किया है।

framer parliament in pulpally
farmer suicide in india
election 2019
wayanand farmer parliament
agrarian crises in delhi
agrarian crises

Related Stories

किसान आंदोलन: ट्रेड यूनियनों ने किया 26 जून के ‘कृषि बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ आह्वान का समर्थन

सरकार की यह कैसी एमएसपी? केवल धान में ही किसान को प्रति क्विंटल 651 रुपये का नुक़सान!

कृषि क़ानून और खाद्य सुरक्षा 

“सबसे ख़तरनाक यह मान लेना है कि रोटी बाज़ार से मिलती है”

किसान आंदोलन : …तुमने हमारे पांव के छाले नहीं देखे

कृषि व्यापार में अनियंत्रित कॉरपोरेट प्रवेश के निहितार्थ

आंदोलन : खरबपतियों के राज के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं किसान

किसान आंदोलन के परिणाम से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसका स्वरूप

बात बोलेगी: विपक्ष बुलाए शीत सत्र, दिल्ली बॉर्डर पर लगाई जाए जन संसद

मंडी पावर बनाम कॉरपोरेट पावर : दो महाशक्तियों की टक्कर


बाकी खबरें

  • neet pg
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग की मांग को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को देश भर से मिल रहा समर्थन
    07 Dec 2021
    इस हड़ताल की वजह से अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों की हड़ताल को मिलता हुआ देशव्यापी समर्थन भी सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें…
  • tank
    मथिइयस वन हाइन
    सिपरी : कोविड के बावजूद फल-फूल रहा वैश्विक हथियार उद्योग 
    07 Dec 2021
    दुनिया में हथियारों का व्यवसाय $531 बिलियन का है: सिपरी (SIPRI) की नई रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया की शीर्ष 100 हथियार निर्माता कंपनियों की बिक्री में वृद्धि जारी है- यहां तक कि 2020 के महामारी…
  • Nagaland
    सत्यम श्रीवास्तव
    नागालैंड: विपक्षहीन राजनीति के सबक़
    07 Dec 2021
    नागालैंड में एक ऐसी साझा सरकार है जिसमें सदन के भीतर कोई विपक्ष नहीं है। हालांकि इस राज्य के बारे में यह भी सच है कि इसकी समस्याएं भले ही स्थानीय हों लेकिन उनका समाधान हमेशा केंद्रीय सरकार के पास…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कम हो रहा कोरोना लेकिन नए वैरिएंट का ख़तरा लगातार बढ़ता जा रहा है 
    07 Dec 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 6,822 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.27 फ़ीसदी यानी 95 हज़ार 14 हो गयी है।
  • Indian Economy
    वी श्रीधर
    आर्थिक रिकवरी का पाखण्ड
    07 Dec 2021
    आंकड़ों के भ्रम से दूर, नए जीडीपी अनुमानों से ज़ाहिर होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था आज भी एक गहरे संकट से गुज़र रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License