NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भीमा कोरेगांव मामला : केंद्र सरकार ने अपनी ग़लती छुपाने के लिए एनआईए को जांच सौंपी?
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपने के केंद्र के फ़ैसले की निंदा करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि अचानक उठाया गया यह क़दम भाजपा की ‘‘साज़िश’’ की पुष्टि करता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Jan 2020
Bhima Koregaon Case

मुंबई: नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र सरकार के साथ महाराष्ट्र में राज्य सरकार का टकराव शुरू हो गया है। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपने के केंद्र के फ़ैसले की निंदा करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि अचानक उठाया गया यह क़दम भाजपा की ‘‘साज़िश’’ की पुष्टि करता है।

एनसीपी ने भी आरोप लगाया कि केंद्र के क़दम का मक़सद महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के ग़लत कारनामों पर पर्दा डालना है।

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिव सावंत ने ट्वीट किया, ‘‘महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार द्वारा पुणे पुलिस की जांच की पुन: जांच कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद भीमा कोरेगांव दंगा मामले को अचानक एनआईए द्वारा अपने हाथ में लेना भाजपा की साज़िश की पुष्टि करता है। एनआईए को इस मामले की जांच हाथ में लेने के लिए दो साल का वक़्त क्यों लगा? इस फ़ैसले की कड़ी निंदा करता हूं।’’

राकांपा प्रवक्ता एवं राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि यह राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के गलत कारनामों को छिपाने के लिए केंद्र का प्रयास है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने जैसे ही गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भीमा कोरेगांव दंगों के मामलों में अदालत में प्रस्तुत सबूत दिखाने के लिए कहा, उसके तुरंत बाद केंद्र ने फ़ैसला किया कि यह केस एनआईए को भेज दिया जाए। उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख और गृह राज्य मंत्री सतेज पाटिल के साथ मामलों की विस्तार से जाँच की, जाँच की स्थिति और मामले में गिरफ़्तार आरोपियों के बारे में जानकारी मांगी थी। 

लेकिन, 36 घंटे के भीतर यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है। इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो एनआईए का यह क़दम न सिर्फ़ देर से लिया गया है बल्कि यह कई चीज़ों को छिपाने की कोशिश लग रही है।

भीमा कोरेगांव में एनआईए द्वारा जांच के संबंध में राज्य सरकार से केंद्र सरकार को कोई पत्र नहीं मिला था। महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, "मैं केंद्र सरकार के व्यवहार की निंदा करता हूं क्योंकि उसने राज्य सरकार के अधिकारों का अतिक्रमण किया है और यह संघवाद के ख़िलाफ़ है।

शुक्रवार शाम को, एनआईए ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सूचित किया कि यह भीमा कोरेगांव के मामलों की जांच करेगा। इससे पहले, पूरे दिन महाराष्ट्र ने इस मुद्दे पर महराष्ट्र विकास अगड़ी और भाजपा के बीच राजनीतिक द्वंद्व देखा गया।

सरकार बनाने के दौरान एमवीए नेताओं के फ़ोन टैपिंग को लेकर आरोप फिर सामने आए थे।

क्या था पूरा मामला?

भीमा कोरेगांव दंगे 1 जनवरी, 2018 को हुए थे। महाराष्ट्र पुलिस ने जून और अगस्त 2018 में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया था।

पुणे पुलिस ने आरोप लगाया था कि 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गर परिषद के सम्मेलन में "भड़काऊ" भाषणों ने भीमा कोरेगाँव में हिंसा का नेतृत्व किया था, और आरोप लगाया कि इन सब के पीछे  माओवादी थे।

दलितों ने बड़ी संख्या में स्मारक का दौरा किया क्योंकि यह ब्रिटिश बलों की जीत की याद दिलाता है, जिसमें 1818 में पुणे के ब्राह्मण पेशवा शासकों की सेना पर दलित सैनिक ने जीत दर्ज की थी।

यह याद किया जा सकता है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने हाल ही में आरोप लगाए थे कि इन दंगों के असली साज़िशकर्ता से ध्यान हटाने के लिए, देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने जांच एजेंसियों की मदद से सामाजिक कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले बनाए थे। उन्होंने मामले की दोबारा जांच की मांग की। गुरुवार की बैठक पवार द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए पत्र पर आधारित थी।

दिल्ली में पवार की सुरक्षा घटा दी गई है। इसे  महाराष्ट्र के घटनाक्रम से भी जोड़ा जा रहा है। पवार को 2013 में वाई स्तर की सुरक्षा दी गई थी जब वह केंद्रीय कृषि मंत्री थे।

एनसीपी नेता और मंत्री जितेंद्र आवड़ा ने कहा, "क्या यह मोदी और (गृह मंत्री) शाह की दबाव की रणनीति है क्योंकि पवार साहब भीमा कोरेगांव में फिर से जांच करने की मांग कर रहे हैं?

जैसा कि एनआईए ने अब जांच को संभाल लिया है और महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने इसकी निंदा की है। इसने महारष्ट्र में राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।

ख़ासतौर से भाजपा और एमवीए, विशेष रूप से एनसीपी और बीजेपी के बीच बयानबाज़ी और भी तल्ख़ दिखाई दे रही है।

(भाषा से इनपुट के साथ)

Bhima Koregaon Case
elgar parishad
NIA
MVA Government
SHARAD PAWAR
Centre-State Tussle
Pune Police

Related Stories

एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

भड़काऊ बयान देने का मामला : पुणे पुलिस ने कालीचरण को हिरासत में लिया

क़रीब दिख रही किसानों को अपनी जीत, जारी है 28 नवंबर को महाराष्ट्र महापंचायत की तैयारी

मैंने बम नहीं बाँटा था : वरवरा राव

एल्गार परिषद मामला : कोर्ट ने कहा वरवरा राव को 18 नवंबर तक सरेंडर करने की ज़रूरत नहीं

'नये भारत' को नफ़रती भीड़तंत्र क्यों बना रहे हैं, मोदी जी!

एल्गार परिषद: नवलखा को तलोजा जेल के 'अंडा सेल' में भेजा गया, सहबा हुसैन बोलीं- बिगड़ गई है तबीयत

भीमा कोरेगांव मामलें में आरोपी रोना विल्सन के पिता की मौत

स्टेन स्वामी: जब उन्होंने फादर ऑफ द नेशन को नहीं छोड़ा तो ‘फादर’ को क्या छोड़ते


बाकी खबरें

  • रवि कौशल
    डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी
    24 May 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फैसले की शिक्षक समूहों ने तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इससे विश्वविद्यालय में भर्ती का संकट और गहरा जाएगा।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल
    24 May 2022
    उत्तर बंगाल के ब्रू बेल्ट में लगभग 10,000 स्टाफ और सब-स्टाफ हैं। हड़ताल के निर्णय से बागान मालिकों में अफरा तफरी मच गयी है। मांग न मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का संकेत दिया है।
  • कलिका मेहता
    खेल जगत की गंभीर समस्या है 'सेक्सटॉर्शन'
    24 May 2022
    एक भ्रष्टाचार रोधी अंतरराष्ट्रीय संस्थान के मुताबिक़, "संगठित खेल की प्रवृत्ति सेक्सटॉर्शन की समस्या को बढ़ावा दे सकती है।" खेल जगत में यौन दुर्व्यवहार के चर्चित मामलों ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़…
  • आज का कार्टून
    राम मंदिर के बाद, मथुरा-काशी पहुँचा राष्ट्रवादी सिलेबस 
    24 May 2022
    2019 में सुप्रीम कोर्ट ने जब राम मंदिर पर फ़ैसला दिया तो लगा कि देश में अब हिंदू मुस्लिम मामलों में कुछ कमी आएगी। लेकिन राम मंदिर बहस की रेलगाड़ी अब मथुरा और काशी के टूर पर पहुँच गई है।
  • ज़ाहिद खान
    "रक़्स करना है तो फिर पांव की ज़ंजीर न देख..." : मजरूह सुल्तानपुरी पुण्यतिथि विशेष
    24 May 2022
    मजरूह सुल्तानपुरी की शायरी का शुरूआती दौर, आज़ादी के आंदोलन का दौर था। उनकी पुण्यतिथि पर पढ़िये उनके जीवन से जुड़े और शायरी से जुड़ी कुछ अहम बातें।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License