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भारत
राजनीति
छात्रों के बाद शिक्षकों ने मोदी से हिसाब मांगा
मंगलवार को हजारों हज़ार शिक्षकों ने संसद मार्च किया। इसमें शिक्षकों के साथ देश के सभी राज्यों से छात्र और गैर शिक्षक स्टाफ भी शामिल हुआ।
मुकुंद झा
19 Feb 2019
Teacher Against Modi

“मोदी जी ...

नौकरियाँ खा गए अच्छे दिन आ गए

शिक्षा को बेच दिया अच्छे दिन आ  गए  

पेंशन भी खा गए अच्छे दिन आ  गए  

अंबानी अदानी कि ये सरकार नहीं चलेगी अबकी बार

सबको शिक्षा दे न सके वो सरकार निकम्मी है…”

जैसे तंज भरे नारे लगते हुए आज मंगलवार, 19 फरवरी को हजारों हज़ार शिक्षकों ने संसद मार्च किया। इसमें शिक्षकों के साथ देश के सभी राज्यों से छात्र और गैर शिक्षक स्टाफ भी शामिल हुआ। इन लोगों ने दिल्ली की सड़कों पर अपने हक-हकूक को पाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में और देश की आम व्यवस्था में बढ़ती विकृति के खिलाफ मोदी सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला। कल सोमवार को भी इन्हीं सब मुद्दों खासकर शिक्षा की बदहाली को लेकर छात्रों ने रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक मार्च किय था।

इसे भी पढ़े ;- छात्रों ने मोदी सरकार के खिलाफ पेश की चार्जशीट52633859_426015074807986_3825173679990374400_n_0.jpg

 पूर्व DUTA अध्यक्ष और DTF नेता नंदिता नारायण ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि देश सरकारी शिक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व हमले के दौर से गुजर रही है। केंद्र लगातर फंड कट और सीट कट कर रहा है। ऐसी तमाम समस्या का सामना आज शिक्षा संस्थान कर रहे हैं। इसके साथ ही लगातर अकादमिक और वैज्ञानिक विचारों पर हमला किया जा रहा है। इसके साथ ही इनके लोकतांत्रिक और समावेशी चरित्र पर भी हमला किया जा रहा है।

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DUTA और FEDCUTA के अध्यक्ष राजीव रे ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि आज ये हजारों की भीड़ मोदी सरकार उस जैसी तमाम शिक्षा विरोधी सरकार को चेतावनी है कि शिक्षा विरोधी सरकार अब नहीं चलाने वाली है। 

इन सभी गंभीर चुनौती का प्रतिरोध करने के लिए,  AIFUCTO और FEDCUTA जैसे शिक्षक संगठनों, अखिल भारतीय सेवानिवृत्त शिक्षक संगठनों, स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय माध्यमिक टीचर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एलिमेंटरी टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन, ऑल-इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेज नॉन-टीचिंग इम्प्लॉइज, ऑल इंडिया फोरम फॉर राइट टू एजुकेशन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ,AISF, AISA और अन्य छात्र संगठनों ने ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के तत्वावधान में आंदोलन के लिए एक संयुक्त फोरम का गठन किया है। आज JFME ने राज्य-स्तरीय सम्मेलनों-रैली आयोजित करने के बाद राजधानी के बीचो–बीच एक विशाल रैली का आयोजन किया। ये विशाल रैली दिल्ली के मंडी हाउस से संसद मार्ग तक गई और वहाँ जाकर एक बड़ी सभा में बदल गई। इस रैली में कई राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए।

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सीपीआई के सचिव डी रजा, सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिलीप पांडे के साथ ही काँग्रेस के नेता भी शामिल हुए।

वृंदा करात ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि इस सरकार ने ऐसा रोस्टर तैयार किया है जिससे एससी-एसटी कालेजों में प्रोफेसर नहीं बन सकेंगे। ये सरकार पूरे देश के शिक्षा का व्यापारीकरण, निजीकरण और सांप्रदायिक करण कर रही है। आज तमाम टेक्स्ट बुक को दुबारा लिखा जा रहा है और हमारे बच्चों के दिमाग में ज़हर भरा जा रहा है। इसके खिलाफ शिक्षक और छात्र जो संघर्ष कर रहे हैं उसको सीपीएम बधाई देती है। शिक्षक, छात्रों और गैर शिक्षक स्टाफ का यह गठबन्धन है। ये शिक्षा को बचाने का महागठबंधन है, जो इस सरकार को उखाड़ फेंकेगा।

 

इसे भी पढ़े ;-दिल्ली चलो : शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ 18 को छात्रों का दिल्ली कूच

आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडे ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक देश के रूप हमारे लिए बहुत ही शर्म की बात है जिन्हें हमारे देश का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी है, आज वो शिक्षक सड़कों पर हैं। ये सरकार उनके साथ खिलवाड़ कर रही है। इनके इस संघर्ष में हम इनके साथ हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रमोद ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा ये सरकार और भाजपा आतंकवाद जैसी घटना भी अपने स्वयं के राजनीतिक विस्तार के लिए प्रयोग कर रही है और पूरे देश में सांप्रदायिकता का ज़हर घोल रही है। जिसमें उत्तेजक हिंदुत्व के नारों से ये बहुसंख्यक हिंदुओं के शोषण की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं। 

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दिल्ली विश्वविद्यालय और कालेज कर्मचारी यूनियन का कहना है कि उन्हें 7वें वेतन आयोग के मुताबिक भत्ते नहीं मिलते हैं। पिछले कई सालो में जहाँ छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है और हमारा काम बढ़ा है लेकिन हमारे कर्मचारियों की संख्या लगातर घट रही है। आज एक कर्मचारी ढाई कर्मचारी के बराबर कार्य कर रहा है।

बंगाल से आए शिक्षक रवि राय ने बताया कि बंगाल में दीदी और देश में मोदी के आने के बाद से शिक्षा पूरी तरह से तबाह हो गई है। ये दोनों ही शिक्षा विरोधी हैं। पिछले कई सालों से स्थायी शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। TMC सरकार ने एक  नई खोज की है। इंटर्न शिक्षक जो 2 हज़ार रुपये महीने में स्कूल में पढ़ाएंगे।

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उन्होंने आगे कहा आज जहाँ देश में 7वां वेतन आयोग लागू हो गया है लेकिन हमें आज भी 5वें वेतन आयोग के हिसाब से वेतन मिलाता है।

इस तरह से तेलंगाना से आये शिक्षकों ने कहा कि आज राज्य में दो तरह कि शिक्षा व्यवस्था चल रही है, एक मंत्री और अफसरों के बच्चों के लिए, दूसरी आम जनता के लिए। सरकार बजट में तो 6% खर्च करने कि घोषणा करती लेकिन वास्तव में वो 1 से 2% ही खर्च करती है।

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इसके आलावा देश के सभी क्षेत्र से आये शिक्षकों ने एक स्वर में पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग की।

आज के मार्च की मुख्य मांगें

  • 13 Point रोस्टर प्रणाली को रद्द करने तथा 200 Point रोस्टर के लिए तुरन्त अध्यादेश लाओ।
  • जी०डी०पी० का न्यूनतम 6% उच्च शिक्षा पर खर्च के लिए सुनिश्चित हो।
  • शिक्षा के साम्प्रदायीकरण पर रोक लगाओ।
  • सभी शिक्षण संस्थनो में खाली पदों को भरा जाए।
  • सभी गेस्ट और एडहॉक शिक्षकों को पक्का किया जाए।
  • सभी को पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
  • सभी शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के लिए पर्याप्त मात्रा में साफ स्वच्छ शौचालय एवं सैनिट्री नैपकिन वेंडिंग मशीन की व्यवस्था करो।

 

 

 

 

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