NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़ : क्या सीएफ़आर से मिलेगा आदिवासियों को उनका हक़?
जबर्रा ग्राम, जो कि अपने औषधीय पौधों के लिए विख्यात है, को 5,352 हेक्टेयर में, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) कि मान्यता दी गई। यह क्षेत्र वन विभाग के 17 कक्ष (कम्पार्टमेंट) तथा 3 परिसर (बीट) में फैला हुआ है।
तामेश्वर सिन्हा
25 Aug 2019
chhattisgarh tribals

प्रदेश में पहली बार वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 के अन्तर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) का प्रस्ताव पारित किया गया है। ये अधिकार ग्राम जबर्रा(विकासखंड नगरी, जिला धमतरी) को दिया गया है। 24 अगस्त को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की 75 जयंती के अवसर पर धमतरी के वनांचल दुगली में आयोजित ग्राम सुराज और वनाधिकार मड़ई में जबर्रा ग्राम सभा को वनाधिकार पत्र प्रदान किया।

जबर्रा में 5352 हेक्टेयर क्षेत्र जंगल मे आदिवासियों को जंगल में संसाधन का अधिकार के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही ग्राम सभा को अपनी पारंपरिक सीमा क्षेत्र के अंदर स्थित जंगल के सभी संसाधनों पर मालिकाना हक़ मिलेगा और जंगल, जंगल के जानवरो के साथ-साथ जैव विविधता की सुरक्षा संरक्षण, प्रबंधन और उनको पुर्नजीवित करने के लिए अधिकार मिलेगा।

IMG-20190821-WA0007_0.jpg

जबर्रा ग्राम, जो कि अपने औषधीय पौधों के लिए विख्यात है, को 5,352 हेक्टेयर में, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) कि मान्यता दी गई। यह क्षेत्र वन विभाग के 17 कक्ष(कम्पार्टमेंट) तथा 3 परिसर (बीट) में फैला हुआ है। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार देने में अब छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार केवल सात राज्यों में ही ये अधिकार लागू हो पाया है. आदिवासियों के लिए उपलब्ध किए जा सकने वाले वनक्षेत्र का 15 फ़ीसदी महाराष्ट्र, 14 फ़ीसदी केरल, 9 फ़ीसदी गुजरात, 5 फ़ीसदी ओडीशा, 2 फ़ीसदी झारखंड, 1 फ़ीसदी कर्नाटक में दिया जा सका है। देश भर में कुल तीन फ़ीसदी वनक्षेत्र पर ही ये अधिकार मंज़ूर किए गये हैं।

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) क्या है?

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मतलब ग्राम सभा को अपनी पारंपरिक सीमा के अंदर स्थित जंगल के सभी संसाधनों पर मालिकाना हक़। इस अधिकार का दावा करने के लिए ग्राम की पारंपरिक सीमा का राजस्व, पंचायत अथवा वन विभाग द्वारा निर्धारित सीमा के अनुरूप होना ज़रूरी नहीं है।

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) का दावा शुरू करने की प्रक्रिया:

दावा करने हेतु ग्राम सभा द्वारा अपने वन अधिकार समिति को इस हेतु अधिकृत किया जाता है। वन अधिकार समिति इसके बाद अपने ग्राम की सीमा से लगे सभी ग्रामों के वन अधिकार समितियों के अध्यक्ष तथा सचिवों की बैठक बुलाती है। इस बैठक में ग्राम के बुज़ुर्ग व्यक्ति तथा पारंपरिक मुखिया जैसे पटेल, गायता, ठाकुर, बैगा, इत्यादि को भी बुलाया जाता है जो पारम्परिक सीमाओं का विशेष रूप से ज्ञान रखते हों।

नज़री नक़्शा तैयार करना तथा स्थल सत्यापन:

इसी बैठक में दावा करने वाले ग्राम का नज़री नक़्शा तैयार किया जाता है जिसमें उस गांव की पारंपरिक सीमा का निर्धारण सभी ग्रामों की वन अधिकार समितियों की सहमति से किया जाता है। इस नज़री नक़्शे के अनुसार गांव की पारंपरिक सीमा का सत्यापन करने तथा उसके भीतर का क्षेत्रफल निकालने हेतु एक तिथि तय की जाती है जिसकी सूचना संबंधित ग्राम की वन अधिकार समिति द्वारा सीमावर्ती सभी ग्रामों के वन अधिकार समितियों को तथा उपखंड स्तरीय समिति को लिखित में दी जाती है। साथ ही वन विभाग, राजस्व विभाग तथा पंचायत विभाग के मैदानी कर्मचारियों जैसे वनरक्षक, पटवारी तथा पंचायत सचिव को भी इसकी लिखित सूचना दी जाती है जिससे वह स्थल सत्यापन के समय उपस्थित रह सकें।

IMG-20190821-WA0006.jpg

निर्धारित तिथि को वनरक्षक, पटवारी एवं पंचायत सचिव की मौजूदगी में जीपीएस मशीन द्वारा गांव की परंपरागत सीमा का सीमांकन किया जाता है तथा कुल क्षेत्रफल नापा जाता है। सीमांकन के दौरान सीमा से लगने वाले ग्रामों के वन अधिकार समितियों के सदस्य उपस्थित रहते हैं जिससे भविष्य में सीमा को लेकर कोई भी विवाद की आशंका नहीं रह जाती है। इस प्रक्रिया से प्राप्त जीपीएस नक़्शा तथा नज़री नक़्शा को समीपवर्ती ग्राम की वन अधिकार समितियों द्वारा हस्ताक्षर कर पुनः सत्यापित किया जाता है।

CFR हेतु साक्ष्य तथा ग्राम सभा में दावा पारित करना:

दावा करने वाले ग्राम की वन अधिकार समिति द्वारा इसके उपरांत वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत बनाए गए नियम 13 मैं दर्शाए गए कम से कम 2 साक्ष्य को लगाते हुए अपना दावा तैयार किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से वन विभाग के पुराने दस्तावेज़ जैसे कार्य योजना, प्रबंध योजना, वन ग्राम से राजस्व ग्राम परिवर्तन कि अधिसूचना, संयुक्त वन प्रबंधन समिति के गठन के दस्तावेज़, जमाबंदी रिकॉर्ड, बुज़ुर्गो का कथन, आदि लगाया जा सकता है। यह दावा वन अधिकार समिति द्वारा अपनी ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। ग्राम सभा यह दावा को 50% कोरम में पारित करती है जिसमें एक तिहाई महिला सदस्यों की उपस्तिथि अनिवार्य है।

IMG-20190821-WA0012.jpg

CFR प्रस्ताव का उपखंड स्तरीय समिति तथा ज़िला स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदन

ग्राम सभा के अनुमोदन के उपरांत दावा उपखंड स्तरीय समिति को भेज दिया जाता है जो की जांच के उपरांत दावे को अपनी अनुशंसा सहित ज़िला स्तरीय समिति को अग्रेषित कर देती है। दावा सही पाए जाने पर ज़िला स्तरीय समिति दावे का अनुमोदन करते हुए इसे स्वीकृत करती है एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का प्रमाण पत्र जारी करती है। साथ ही इसे संबंधित विभागों द्वारा अपने अपने रिकॉर्ड में भी अद्यतन किया जाता है।

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) मिलने पर ग्राम सभा के अधिकार:

ग्राम सभा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मिलने पर जंगल, जंगली जानवर तथा जैव विविधता की सुरक्षा एवं संरक्षा तथा उसको पुनर्जीवित एवम् प्रबंधन करने के लिए अधिकृत हो जाती है। ग्राम सभा इस हेतु वन अधिकार नियम 2007 की नियम 4 (1) (डी) के अंतर्गत ग्राम वन प्रबंधन समिति भी बना सकती है।

ग्राम सभा वन के प्रबंधन के लिए अपनी कार्ययोजना, प्रबंध योजना, तथा सूक्ष्म योजना स्वयं से, स्थानीय लोगों द्वारा समझ सकने वाली भाषा में, तैयार कर सकती है। साथ ही ग्राम सभा वन विभाग द्वारा तैयार किए जाने वाले कार्य योजना, प्रबंधन योजना तथा सूक्ष्म योजना में संशोधन प्रस्तावित कर सकती है जिसे वन विभाग द्वारा नियमानुसार प्रक्रिया में लिया जायेगा तथा संशोधन किया जायेगा।

ग्राम सभा सामुदायिक वन अधिकार अधिनियम की धारा 5 के अनुसार वन संसाधनों तक पहुंच को भी विनयमित कर सकती है तथा ऐसे क्रियाकलापों को रोक सकती है जो वन्य जीव,वन और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। साथ ही ग्राम सभा वन निवासियों के निवास को किसी भी विनाशकारी व्यवहार से संरक्षित करने हेतु क़दम उठा सकती है जो उनकी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को प्रभावित करते हैं।

CFR
community forest rights
tribal communities
tribals right
Chhattisgarh
Community Forest Resource Rights
Cultural and Natural Heritage

Related Stories

विचार-विश्लेषण: विपक्ष शासित राज्यों में समानांतर सरकार चला रहे हैं राज्यपाल

छत्तीसगढ़ : सिर्फ़ सरकार का नाम ही बदला है काम नहीं!

ललित मुर्मू : व्यापक दृष्टि के देशज व्यक्तित्व का असमय जाना

हाशिये से आदिम जनजाति समाज की हुंकार : सुविधा नहीं तो वोट नहीं!


बाकी खबरें

  • Bulli Bai', 'Sully Deals
    न्यूज़क्लिक टीम
    बुल्ली बाई और सुल्ली डील जैसे ऐप्स क्या दर्शाते हैं?
    16 Jan 2022
    बुल्ली बाई और सुल्ली डील जैसे ऐप्स के आने के बाद कई नयी चीज़ें सामने आयीं. क्या ऐसा पहली बार हुआ? 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन बताते हैं कि दक्षिणपंथी विचार ने…
  • पीपल्स डिस्पैच
    ऑस्ट्रेलिया : बढ़ते मामलों के बीच ट्रेड यूनियनों ने मुफ़्त कोविड टेस्टिंग की मांग की
    16 Jan 2022
    ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ़ 2 हफ़्तों में कोविड के क़रीब 10 लाख मामले सामने आए हैं, जो दुनिया भर में ओमिक्रोन के मामलों के सबसे बड़े आंकड़ों में से एक है। इस बीच, स्कॉट मॉरिसन सरकार क्लोज़ कांटैक्ट श्रमिकों के…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे
    16 Jan 2022
    हमारे दौर के बेहतरीन शायर अशोक रावत हमारे समय की सच्चाइयों को बहुत ही बेबाकी से अपनी ग़ज़लों के ज़रिये पेश कर रहे हैं। इतवार की कविता में पढ़ते हैं उनकी ऐसी ही एक नई ग़ज़ल।  
  • education
    अजय कुमार
    यूपी चुनाव: बदहाल शिक्षा क्षेत्र की वे ख़ामियां जिन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए लेकिन नहीं होती!
    16 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश के सभी दलों के राजनीतिक कार्यकर्ता शिक्षा के महत्व पर बात करते हैं। प्रचार प्रसार करते समय बच्चों को स्कूल भेजने की बात करते हैं। लेकिन राजनीति अंतिम तौर पर केवल चुनाव से जुड़ी हुई…
  • bjp punjab
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...
    16 Jan 2022
    यह एक बहुत ही सुखद समाचार रहा। सरकार जी पर हमला किसने किया, कब किया, कैसे किया, किसी को भी नहीं पता। परन्तु सरकार जी सकुशल लौट आए, यह सबको पता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License