NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़ में एससी और ओबीसी को तोहफ़ा, आरक्षण में इज़ाफ़ा
छत्तीसगढ़ में अब कुल आरक्षण 72% हो गया है, जो सभी राज्यों से अधिक है। जबकि यहां एसटी-एससी-ओबीसी की आबादी लगभग 95% के आसपास बताई जाती है।
तामेश्वर सिन्हा
16 Aug 2019
minorities in chhattisgarh
फोटो साभार : जनसत्ता

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर27 फीसदी और अनुसूचित जाति(एससी) के लिए 13 फीसदी कर दी गई है। अनुसूचित जनजाति (एसटी) को पहले की तरह 32 फीसदी आरक्षण मिलेगा।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारे प्रदेश में एसटी, एससी और ओबीसी अपनी मांगें काफी शांतिपूर्ण तरीके से उठाते रहे हैं.इस दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए आरक्षण का ऐलान किया जा रहा है।'

इससे पहले ओबीसी और एससी के लिए क्रमशः 14 और 12 फीसदी कोटा निर्धारित था, हालांकि एसटी को 32 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलता था।

15 अगस्त 2019 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की कि प्रदेश निवासी अनुसूचित जनजाति को 32प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसी के साथ अब छत्तीसगढ़ राज्य मे टोटल आरक्षण 72% हो गया।

दक्षिण एशिया के सुकरात कहे जानेवाले ई.वी. रामासामी पेरियार के आंदोलनों के कारण देश के वंचितों-पिछड़ों के लिए संविधान में राज्यों के लिए यह व्यवस्था की गई।

भारतीय संसद ने 1950 में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध) में संशोधन किया। अनुच्छेद 15 (1) कहता है कि "राज्य, किसी नागरिक के विरूद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग,जन्म-स्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।’’ अनुच्छेद 29 (2) के अनुसार, "राज्य द्वारा पोषित या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।’’ अनुच्छेद 15 में खण्ड (4) जोड़ा गया जो कहता है, "इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात, राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़ेे हुए नागरिको के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।’’

केंद्रीय सरकार अगर देश के वंचितों-पिछड़ों के सामाजिक न्याय और भागीदारी को बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार के नौकरियों में 50% से अधिक आरक्षण देना चाहे तो उसे अध्यादेश लाना पड़ेगा, लेकिन राज्य सरकारें वंचितों-पिछड़ों के समाजिक न्याय और भागीदारी के लिए 50% की सीमा को आसानी से आगे ले जा सकते हैं।

विदित हो कि राज्यों को एसटी-एससी-ओबीसी जनसंख्या के अनुपात में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, आरक्षण की 50% सीमा से आगे बढ़नी चाहिए। तभी वंचितों-पिछड़ों की सामाजिक न्याय और भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

छत्तीसगढ़ आरक्षण की 50% सीमा से आगे बढ़ने वाला 7वां राज्य है। इसके अलावा हरियाणा (70%), तमिलनाडु (69%),महाराष्ट्र (68%), मध्यप्रदेश (63%), झारखंड (60%), राजस्थान (54%) आरक्षण की 50% की सीमा को पार कर चुके हैं।

आंध्रप्रदेश में एसटी-एससी-ओबीसी के लिए 48% आरक्षण है, जबकि महिलाओं के लिए संसद और विधानसभा में 33%आरक्षण का भी प्रावधान है।

आरक्षण का ऐलान करने के बाद भूपेश बघेल ने कहा, 'यह सरकार का कर्तव्य था कि वह एससी, एसटी और ओबीसी केसंवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।'

छत्तीसगढ़ में अब कुल आरक्षण 72% हो गया है, जो सभी राज्यों से अधिक है। जबकि यहां एसटी-एससी-ओबीसी की आबादी लगभग 95% के आसपास बताई जाती है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

तत्कालीन भाजपा सरकार ने करीब सात वर्ष पहले आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा चार में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार अनुसूचित जनजाति को 32, अनुसूचित जाति को 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 फीसद आरक्षण देना तय किया गया था। कुल आरक्षण 58 फीसद होता है।

Scheduled Caste
OBC
Reservation
Chhattisgarh
SC/ST
article 15
Andhra pradesh
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2 लाख से ज़्यादा नए मामले, 959 मरीज़ों की मौत
    31 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,09,918 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 13 लाख 2 हज़ार 440 हो गयी है।
  • Environment
    टिकेंदर सिंह पंवार
    कॉर्पोरेट के फ़ायदे के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर रही है सरकार
    31 Jan 2022
    कई परियोजनाओं को बहुत तेज़ी से पर्यावरण मंज़ूरी दी जा रही है।
  • Gandhi ji
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो
    30 Jan 2022
    लोककवि रसूल मियां (1872-1952), गांव- जिगना मजार टोला, जिला- गोपालगंज, बिहार। कविता कोश के परिचय के अनुसार भोजपुरी के शेक्सपियर नाम से चर्चित भिखारी ठाकुर, नाच या नौटंकी की जिस परम्परा के लोक कलाकार…
  • Gandhi ji
    न्यूज़क्लिक टीम
    महात्मा गाँधी, सावरकर और गोडसे
    30 Jan 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन बात करते हैं इतिहासकार अशोक पांडे से। 30 जनवरी को गाँधी जी की हत्या कर दी गयी थी। ये दोनों गाँधी, सावरकर और गोडसे के बारे में चर्चा करते हैं और…
  • Buddhadev
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: बुद्धदेब बाबू को पद्मभूषण क्यों? पेगासस पर फंस गई सरकार और अन्य
    30 Jan 2022
    'ख़बरों के आगे-पीछे' के इस अंश में बीते हफ़्ते ख़बरों की दुनिया में क्या कुछ हुआ, इस पर राय रख रहे हैं अनिल जैन।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License